इकाई 6: पौधों में पोषण
|| UP Board Class 7 Science — Complete Solution ||
📖 पाठ का संक्षिप्त परिचय:
इस पाठ में हम जानेंगे कि पौधे अपना भोजन कैसे और कहाँ बनाते हैं। हरे पौधे प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) की क्रिया द्वारा स्वयं भोजन बनाते हैं और स्वपोषी कहलाते हैं। जो पौधे भोजन स्वयं नहीं बनाते वे परपोषी कहलाते हैं — जो चार प्रकार के होते हैं: मृतोपजीवी, परजीवी, सहजीवी और कीटभक्षी। इस पाठ के सभी अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत उत्तर नीचे दिए गए हैं।
UP Board Class 7 Science Chapter 6 “पौधों में पोषण” में यह बताया गया है कि पौधे अपना भोजन किस प्रकार बनाते हैं। इस अध्याय में प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया, पर्णहरित की भूमिका, तथा स्वपोषी और परपोषी जीवों के बारे में अध्ययन कराया जाता है।
यहाँ Class 7 Science Chapter 6 Question Answer सरल भाषा में दिए गए हैं ताकि विद्यार्थी इस अध्याय को आसानी से समझ सकें और परीक्षा की तैयारी अच्छी तरह कर सकें।
Quick Answer – पौधों में पोषण
हरे पौधे प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं और स्वपोषी कहलाते हैं। जो जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते और अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं उन्हें परपोषी कहते हैं। परपोषी पौधों के मुख्य प्रकार मृतोपजीवी, परजीवी, सहजीवी और कीटभक्षी हैं।
इस अध्याय में क्या पढ़ेंगे?
- पौधों में पोषण का अर्थ
- प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया
- पर्णहरित और उसका कार्य
- स्वपोषी और परपोषी जीव
- मृतोपजीवी, परजीवी और सहजीवी पौधे
- कीटभक्षी पौधे
- प्रयोग द्वारा प्रकाश-संश्लेषण का प्रमाण
- अभ्यास प्रश्न उत्तर
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Basic Shiksha Solution ● बहुविकल्पीय प्रश्न
(क) परपोषी पौधा है —
(i) अमरबेल
(ii) नीम
(iii) गुलाब
(iv) सहजन
✅ उत्तर: (i) अमरबेल
💡 व्याख्या: परपोषी पौधे वे होते हैं जो अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते और दूसरे पौधों पर निर्भर रहते हैं। अमरबेल एक पूर्ण परजीवी पौधा है — इसमें जड़ें नहीं होतीं और यह अपने भोजन, जल तथा खनिज लवण के लिए पूरी तरह से पोषी (आश्रय देने वाले) पौधे पर निर्भर रहती है। इसमें चूषकांग (Haustoria) पाये जाते हैं जिनसे यह पोषी से भोजन चूसती है। नीम, गुलाब, सहजन — ये सभी हरे स्वपोषी पौधे हैं।
(ख) कीटभक्षी पौधे सामान्यतः उन स्थानों पर मिलते हैं जहाँ की भूमि में कमी होती है —
(i) ऑक्सीजन की
(ii) जल की
(iii) नाइट्रोजन की
(iv) कार्बन की
✅ उत्तर: (iii) नाइट्रोजन की
💡 व्याख्या: कीटभक्षी पौधे उन स्थानों पर पाये जाते हैं जहाँ की भूमि में नाइट्रोजन की कमी होती है। नाइट्रोजन पौधों की वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक तत्व है। इसकी कमी पूरी करने के लिए ये पौधे कीटों का भक्षण करते हैं क्योंकि कीटों के शरीर में नाइट्रोजनयुक्त प्रोटीन पाई जाती है। इनमें पर्णहरित होता है इसलिए ये प्रकाश-संश्लेषण द्वारा अपना भोजन तो बना लेते हैं, केवल नाइट्रोजन के लिए कीटों पर निर्भर रहते हैं।
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Basic Shiksha Solution ● रिक्त स्थान पूर्ति
(क) हरे पौधे अपना भोजन स्वयं बनाने के कारण .............. कहलाते हैं।
✅ उत्तर: स्वपोषी
💡 व्याख्या: वे पौधे जो प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, स्वपोषी (Autotrophs) कहलाते हैं। पृथ्वी पर पाये जाने वाले समस्त हरे पौधे स्वपोषी होते हैं। इनमें पर्णहरित (Chlorophyll) होता है जो सौर ऊर्जा को ग्रहण करके भोजन-निर्माण में सहायता करता है।
(ख) ............... पृथ्वी पर ऊर्जा का एकमात्र स्रोत है।
✅ उत्तर: सूर्य
💡 व्याख्या: सूर्य पृथ्वी पर ऊर्जा का एकमात्र भण्डार है। पौधों की पत्तियों में उपस्थित पर्णहरित इस सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलता है। जिससे ग्लूकोज (भोजन) का निर्माण होता है। यह भोजन पृथ्वी के समस्त प्राणियों के लिए ऊर्जा का स्रोत है।
(ग) हरे पौधों द्वारा भोजन बनाने की क्रिया ............................. कहलाती है।
✅ उत्तर: प्रकाश-संश्लेषण
💡 व्याख्या: पौधों द्वारा पर्णहरित, सूर्य के प्रकाश, जल और CO₂ का उपयोग करके ग्लूकोज (भोजन) बनाने की क्रिया को प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) कहते हैं। इस क्रिया में ऑक्सीजन गैस भी उत्पन्न होती है जो पर्णरन्ध्रों द्वारा वायुमण्डल में मुक्त कर दी जाती है।
(घ) ऐसे पौधे जो सड़े गले पदार्थ से भोजन प्राप्त करते हैं, ............ कहलाते हैं।
✅ उत्तर: मृतोपजीवी
💡 व्याख्या: जिन पौधों में पर्णहरित नहीं होता और वे मृत कार्बनिक पदार्थों से भोजन प्राप्त करते हैं, उन्हें मृतोपजीवी (Saprophytes) कहते हैं। इनमें प्रकाश-संश्लेषण नहीं होता। उदाहरण — कुकुरमुत्ता (मशरूम), ब्रेड मोल्ड (राइजोपस) आदि।
(ङ) ड्रोसेरा एक ...................... पौधा है।
✅ उत्तर: कीटभक्षी
💡 व्याख्या: ड्रोसेरा (Drosera) एक कीटभक्षी पौधा है। इसे सनड्यू (Sundew) भी कहते हैं। इसकी पत्तियों पर चिपचिपे रोम पाये जाते हैं जिन पर कीट बैठते ही चिपक जाते हैं। तत्पश्चात् पत्तियाँ मुड़कर कीट को घेर लेती हैं और पाचक रसों द्वारा उसे पचा लेती हैं। घटपर्णी (Pitcher Plant), वीनसफ्लाई ट्रैप भी कीटभक्षी पौधे हैं।
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Basic Shiksha Solution ● कॉलम मिलान
| कॉलम (क) | सही मिलान — कॉलम (ख) |
| क. पत्ती | ✅ (य) प्रकाश-संश्लेषण |
| ख. कुकुरमुत्ता | ✅ (अ) मृतजीवी |
| ग. लाइकेन | ✅ (ब) सहजीवी |
| घ. ड्रोसेरा | ✅ (स) कीटभक्षी |
| ङ. जन्तु | ✅ (द) विषमपोषी |
💡 स्मरण बिंदु: पत्ती → प्रकाश-संश्लेषण का स्थान है। कुकुरमुत्ता → मृत पदार्थों से भोजन पाने वाला मृतजीवी है। लाइकेन → कवक और शैवाल का सहजीवन है। ड्रोसेरा → कीट खाने वाला कीटभक्षी पौधा है। जन्तु → अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते, इसलिए विषमपोषी हैं।
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Basic Shiksha Solution ● लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 4(क): पत्तियों में पाये जाने वाले हरे वर्णक को क्या कहते हैं?
उत्तर:
पत्तियों में पाये जाने वाले हरे वर्णक को पर्णहरित (Chlorophyll) कहते हैं।
💡 विशेष जानकारी: पर्णहरित की उपस्थिति के कारण ही पत्तियाँ हरी दिखती हैं। यह सौर ऊर्जा (सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा) को ग्रहण करने का कार्य करता है। पर्णहरित इस सौर ऊर्जा का उपयोग करके जल और CO₂ से ग्लूकोज का निर्माण करता है। यह प्रकाश-संश्लेषण की सबसे महत्वपूर्ण सामग्री है। इसके बिना प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया सम्भव नहीं है।
प्रश्न 4(ख): अपना भोजन स्वयं न बनाने वाले जीव क्या कहलाते हैं?
उत्तर:
अपना भोजन स्वयं न बनाने वाले जीव परपोषी (Heterotrophs) या विषमपोषी कहलाते हैं।
💡 विशेष जानकारी: परपोषी जीव चार प्रकार के होते हैं — मृतोपजीवी (सड़े-गले पदार्थों से भोजन पाने वाले, जैसे कुकुरमुत्ता), परजीवी (दूसरे जीवों पर निर्भर, जैसे अमरबेल), सहजीवी (दोनों को लाभ, जैसे लाइकेन) और कीटभक्षी (कीटों से नाइट्रोजन प्राप्त करने वाले, जैसे घटपर्णी)। समस्त जन्तु भी विषमपोषी हैं क्योंकि वे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पौधों पर निर्भर हैं।
प्रश्न 4(ग): उस सम्बन्ध को क्या कहते हैं जिसमें दो जीव आपस में एक दूसरे को सहयोग करते हैं और दोनों लाभान्वित होते हैं?
उत्तर:
ऐसे सम्बन्ध को सहजीवन (Symbiosis) कहते हैं और ऐसे पौधे सहजीवी पौधे कहलाते हैं।
💡 विशेष जानकारी: सहजीवन के प्रमुख उदाहरण हैं — लाइकेन (Lichen) जिसमें कवक और शैवाल एक साथ रहते हैं। कवक शैवाल को जल और खनिज लवण देता है, जबकि शैवाल प्रकाश-संश्लेषण द्वारा कवक को भोजन देता है। दूसरा उदाहरण है — दलहन पौधों (मटर, मूँगफली, अरहर) की जड़ों में राइजोबियम जीवाणु — जीवाणु नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं और बदले में उन्हें जड़ में रहने का स्थान मिलता है।
प्रश्न 4(घ): पूर्ण परजीवी पौधे अपने किस अंग द्वारा पोषक से जल तथा खनिज लवण प्राप्त करते हैं?
उत्तर:
पूर्ण परजीवी पौधे चूषकांग (Haustoria) नामक विशेष अंग द्वारा पोषक से जल तथा खनिज लवण प्राप्त करते हैं।
💡 विशेष जानकारी: अमरबेल (Cuscuta) सबसे प्रचलित पूर्ण परजीवी पौधा है। इसमें जड़ें नहीं होती हैं और पर्णहरित भी नहीं होता। यह पीले रंग की तार जैसी संरचना के रूप में दूसरे पौधे पर लिपटी रहती है। इसके चूषकांग (Haustoria) पोषी (आश्रय देने वाले) पौधे के तने में घुसकर उससे भोजन, जल और खनिज लवण चूस लेते हैं।
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Basic Shiksha Solution ● दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 5: हरे पौधों में प्रकाश-संश्लेषण क्रिया का वर्णन करो।
उत्तर:
प्रकाश-संश्लेषण — परिभाषा
हरे पौधों द्वारा पर्णहरित की उपस्थिति में सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा का उपयोग करके कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल से ग्लूकोज (भोजन) एवं ऑक्सीजन बनाने की क्रिया को प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) कहते हैं।
प्रकाश-संश्लेषण हेतु आवश्यक सामग्री
-
1
पर्णहरित (Chlorophyll) — पत्तियों में उपस्थित हरा वर्णक जो सौर ऊर्जा को ग्रहण करता है।
-
2
सूर्य का प्रकाश — ऊर्जा का स्रोत जो प्रकाश-संश्लेषण को चलाता है।
-
3
कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) — वायुमण्डल से सूक्ष्म पर्णरन्ध्रों द्वारा पत्तियों के अन्दर पहुँचती है।
-
4
जल (H₂O) — मिट्टी से जड़ों द्वारा अवशोषित होकर तने के रास्ते पत्तियों तक पहुँचता है।
प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया-विधि
जब सूर्य का प्रकाश पत्तियों पर पड़ता है तो पत्तियों में उपस्थित पर्णहरित इन प्रकाश रश्मियों को अवशोषित करके जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड गैस से मिलकर ग्लूकोज (भोजन) का निर्माण करता है, और साथ ही प्राणदायनी ऑक्सीजन गैस बनती है जो पर्णरन्ध्रों द्वारा वायुमण्डल में निकाल दी जाती है।
कार्बन डाइऑक्साइड + जल ——(सूर्य का प्रकाश / पर्णहरित)——→ ग्लूकोज + ऑक्सीजन
6CO₂ + 6H₂O ——→ C₆H₁₂O₆ + 6O₂
प्रकाश-संश्लेषण के उत्पाद एवं उनका उपयोग
- ➤
ग्लूकोज (C₆H₁₂O₆) — पत्तियों में बना ग्लूकोज पौधे अपनी वृद्धि एवं अन्य जैव क्रियाओं के लिए उपयोग करते हैं। बचा हुआ भोजन पौधे के विभिन्न भागों में मण्ड (Starch) के रूप में संचित होता है।
- ➤
ऑक्सीजन (O₂) — यह वायुमण्डल में मुक्त होकर समस्त जीवों के लिए श्वसन की सुविधा प्रदान करती है।
भोजन संचय के उदाहरण
| पौधे का नाम | भोजन संचय का स्थान |
| आलू | तने में (भूमिगत तना) |
| मूली, गाजर | जड़ में |
| गोभी | फूल में |
| पालक | पत्तियों में |
| टमाटर, भिण्डी, मिर्च | फलों में |
📌 महत्वपूर्ण तथ्य: सूर्य पृथ्वी पर ऊर्जा का एकमात्र भण्डार है। हरे पौधे इस सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं। हरे पौधे इस पृथ्वी पर एकमात्र उत्पादक हैं, जबकि अन्य सभी जीव उपभोक्ता की श्रेणी में आते हैं। इन्हीं में से एक की भी अनुपस्थिति — CO₂, H₂O, प्रकाश या पर्णहरित — प्रकाश-संश्लेषण को बाधित कर देती है।
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प्रश्न 6: किस प्रयोग द्वारा दिखायेंगे कि प्रकाश-संश्लेषण क्रिया में सूर्य का प्रकाश आवश्यक है?
उत्तर:
प्रयोग — हाइड्रिला के पौधे द्वारा
यह प्रयोग हाइड्रिला (Hydrilla) — एक जलीय पौधे — पर किया जाता है क्योंकि इसके प्रकाश-संश्लेषण से उत्पन्न ऑक्सीजन के बुलबुले सरलता से देखे जा सकते हैं।
आवश्यक सामग्री
प्रयोग विधि
-
1
गिलास (क) में — हाइड्रिला की एक शाखा को जल में डुबोकर रखें और इस पर पर्याप्त सूर्य का प्रकाश पड़ने दें।
-
2
गिलास (ख) में — हाइड्रिला की दूसरी शाखा को जल में डुबोकर रखें और इसे काले कागज से ढक दें जिससे प्रकाश न पहुँचे।
-
3
दोनों गिलासों को लगभग एक घंटे तक खुले स्थान पर रखें और फिर निरीक्षण करें।
प्रयोग का परिणाम एवं निष्कर्ष
गिलास (क) का परिणाम: इस गिलास में हाइड्रिला की शाखा से ऑक्सीजन गैस के बुलबुले निकलते दिखाई देते हैं। यह प्रकाश-संश्लेषण होने का प्रमाण है। सूर्य का प्रकाश, जल में घुली CO₂ और पर्णहरित उपलब्ध होने के कारण प्रकाश-संश्लेषण क्रिया सामान्य रूप से सम्पन्न हो रही है।
गिलास (ख) का परिणाम: इस गिलास में काले कागज के कारण सूर्य का प्रकाश नहीं मिल रहा। फलस्वरूप कोई भी ऑक्सीजन के बुलबुले नहीं बन रहे — अर्थात् प्रकाश-संश्लेषण क्रिया नहीं हो रही।
निष्कर्ष: प्रकाश-संश्लेषण क्रिया के लिए सूर्य का प्रकाश अनिवार्य रूप से आवश्यक है।
प्रकाश की अनुपस्थिति में प्रकाश-संश्लेषण क्रिया पूर्णतः बाधित हो जाती है।
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प्रश्न 7: किसी कीटभक्षी पौधे का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
घटपर्णी (Pitcher Plant) — कीटभक्षी पौधा
घटपर्णी (Nepenthes / Pitcher Plant) एक प्रसिद्ध कीटभक्षी पौधा है। यह उन स्थानों पर पाया जाता है जहाँ की भूमि में नाइट्रोजन की कमी होती है। भारत में यह गारो और खासी की पहाड़ियों पर पाया जाता है।
घटपर्णी की विशेष संरचना
-
1
इस पौधे की पत्तियाँ घड़े (Pitcher) के आकार में बदली हुई होती हैं।
-
2
पत्ती का शीर्ष भाग एक ढक्कन (पत्तीनुमा) बनाता है जो खुला और बंद होता है।
-
3
घड़े के अन्दर रोम सुदृश संरचनाएँ (बाल जैसी रचनाएँ) होती हैं।
-
4
घड़े के अन्दर पाचक रस (Digestive Juice) भरा रहता है।
कीट को पकड़ने एवं पचाने की विधि
- ➤
जब कोई कीट उड़ते हुए घट में चला जाता है तो उसमें उपस्थित रोमों में फँस जाता है।
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घट के ऊपर स्थित पत्तीनुमा ढक्कन बन्द हो जाता है।
- ➤
अन्दर पाये जाने वाले पाचक रसों द्वारा कीट पचा लिया जाता है।
- ➤
कीट से प्राप्त नाइट्रोजनयुक्त पदार्थ पौधे की कमी पूरी करते हैं।
पर्णहरित की उपस्थिति
घटपर्णी में पर्णहरित होता है इसलिए यह प्रकाश-संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाता है। कीट का भक्षण केवल नाइट्रोजन की कमी पूरी करने के लिए करता है।
📘 अन्य कीटभक्षी पौधे: ड्रोसेरा (Drosera/Sundew) — चिपचिपे रोमों से कीट पकड़ता है। वीनसफ्लाई ट्रैप (Venus Flytrap) — पत्तियाँ जबड़े की तरह बंद होकर कीट पकड़ती हैं। ये सभी कीटभक्षी पौधे नाइट्रोजन की कमी वाली भूमि में पाये जाते हैं।
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Basic Shiksha Solution ● विशेष — परपोषी पौधों का तुलनात्मक अध्ययन
परपोषी पौधों के चारों प्रकारों की तुलना:
| प्रकार | भोजन का स्रोत | पर्णहरित | उदाहरण |
| मृतोपजीवी | सड़े-गले मृत पदार्थ | अनुपस्थित | कुकुरमुत्ता, राइजोपस |
| पूर्ण परजीवी | पोषी पौधे से भोजन + जल दोनों | अनुपस्थित | अमरबेल |
| आंशिक परजीवी | भोजन स्वयं, जल+लवण पोषी से | उपस्थित | चन्दन |
| सहजीवी | परस्पर सहयोग से | कभी-कभी | लाइकेन, राइजोबियम |
| कीटभक्षी | भोजन स्वयं, नाइट्रोजन कीटों से | उपस्थित | घटपर्णी, ड्रोसेरा |
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FAQs – Class 7 Science Chapter 6
प्रश्न: प्रकाश-संश्लेषण क्या है?
उत्तर: पत्तियों में पर्णहरित की सहायता से सूर्य के प्रकाश, जल और कार्बन डाइऑक्साइड से भोजन बनाने की प्रक्रिया प्रकाश-संश्लेषण कहलाती है।
प्रश्न: स्वपोषी जीव किसे कहते हैं?
उत्तर: जो जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं उन्हें स्वपोषी जीव कहते हैं।
प्रश्न: परपोषी जीव क्या होते हैं?
उत्तर: जो जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते और अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं, उन्हें परपोषी या विषमपोषी कहते हैं।
प्रश्न: कीटभक्षी पौधे क्यों कीट खाते हैं?
उत्तर: क्योंकि जिन स्थानों पर ये पौधे उगते हैं वहाँ मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी होती है, इसलिए ये कीटों से नाइट्रोजन प्राप्त करते हैं।
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📌 Note: सभी अध्यायों के विस्तृत प्रश्न-उत्तर और नोट्स इस वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि छात्र परीक्षा की तैयारी आसानी से कर सकें।
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