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UP Board Class 7 Science Chapter 2 Question Answer | रेशों से वस्त्र तक

UP Board Class 7 Science | पाठ 2 — रेशों से वस्त्र तक
📗 इकाई 2 — रेशों से वस्त्र तक
UP Board | कक्षा 7 | विज्ञान | अभ्यास प्रश्नोत्तर
✦ Basic Shiksha Solution ✦ सम्पूर्ण हल ✦
📌 पाठ परिचय: इस इकाई में हम जन्तुओं से प्राप्त होने वाले रेशों — ऊन तथा रेशम — के बारे में पढ़ेंगे। ऊन मुख्यतः भेड़ की त्वचा के बालों से तथा रेशम, रेशम कीट के कोकून से प्राप्त किया जाता है।
Quick Answer – रेशों से वस्त्र तक

भेड़, याक, ऊँट और बकरी जैसे जन्तुओं से ऊन प्राप्त किया जाता है, जबकि रेशम रेशम कीट के कोकून से प्राप्त होता है। रेशम कीट का जीवन चक्र चार अवस्थाओं — अण्डा, लार्वा, प्यूपा और वयस्क — से मिलकर बनता है।

इस अध्याय में क्या पढ़ेंगे?

  • ऊन के स्रोत और भेड़ों की नस्लें
  • ऊन संसाधन के चरण
  • रेशम कीट का जीवन चक्र
  • रेशम के प्रकार
  • अभ्यास प्रश्न उत्तर
📝 प्रश्न 1 — सही विकल्प छाँटकर लिखिए (बहुविकल्पीय प्रश्न)
🔹 (क) ऊन धारण करने वाले जन्तु हैं —

ऊन प्राप्त करने वाले जन्तुओं में ऊँट, याक, भेड़, बकरी, लामा, ऐल्पेका आदि सभी शामिल हैं। उपरोक्त सभी विकल्पों में से प्रत्येक सही है, अतः —

✅ सही उत्तर: (द) उपरोक्त सभी
💡 याद रखें: ऊँट व याक, ऐल्पेका व लामा, अंगोरा बकरी व कश्मीरी बकरी — ये सभी ऊन देने वाले जन्तु हैं।
🔹 (ख) भेड़ तथा रेशम कीट होते हैं —

भेड़ घास और पत्तियाँ खाती है जबकि रेशम कीट का लार्वा शहतूत की पत्तियाँ खाता है। अतः दोनों ही पौधों पर निर्भर हैं —

✅ सही उत्तर: (अ) शाकाहारी
🔹 (ग) भेड़ के रेशों की चिकनाई, धूल और गंदगी निकालने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया कहलाती है —

कटाई के बाद भेड़ के रेशों को पानी की टंकियों में डालकर अच्छी तरह धोया जाता है जिससे उनकी चिकनाई, धूल और गंदगी निकल जाए —

✅ सही उत्तर: (अ) अभिमार्जन
🔹 (घ) रेशम है —

रेशम, रेशम कीट के कोकून से प्राप्त किया जाता है। यह एक जन्तु (कीट) से प्राप्त होने वाला प्राकृतिक रेशा है —

✅ सही उत्तर: (स) जन्तु रेशे
📝 प्रश्न 2 — रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
  • ऊन सामान्यतः पालतू भेड़ के त्वचीय मुलायम बालों से प्राप्त किए जाते हैं।
    💡 व्याख्या: भेड़ की त्वचा पर दो प्रकार के बाल होते हैं — दाढ़ी के रूखे बाल और त्वचा पर स्थित तंतुरूपी मुलायम बाल। ऊन बनाने के लिए मुलायम बालों का उपयोग होता है।
  • ऊन के रेशों के बीच वायु रुककर ऊष्मा की कुचालक का कार्य करती है।
    💡 व्याख्या: ऊनी वस्त्रों में वायु भरी रहती है जो ऊष्मा की कुचालक (bad conductor) होती है। इसलिए सर्दियों में ऊनी वस्त्र पहनने पर शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकलती।
  • रेशम प्राप्त करने के लिए रेशम कीट पालन विज्ञान सेरीकल्चर कहलाता है।
    💡 व्याख्या: Sericulture = Seri (रेशम) + Culture (पालन)। भारत के प्रमुख सेरीकल्चर केन्द्र — कर्नाटक का मैसूर और बंगलूरू।
  • प्यूपा के चारों ओर रेशम ग्रन्थि से स्रावित पदार्थ से लिपटी संरचना कोकून (कोया) कहलाती है।
    💡 व्याख्या: रेशम कीट का लार्वा अपने चारों ओर लसदार प्रोटीन युक्त पदार्थ लपेटता है जो सूखकर रेशम के रेशे बन जाता है — इस संरचना को कोकून कहते हैं।
  • रेशम उद्योग के कारीगर ऐन्थ्रेक्स नामक जीवाणु द्वारा संक्रमित हो जाते हैं।
    ⚠️ व्यावसायिक संकट: जन्तु रेशों की छँटाई करने वाले कारीगर कभी-कभी ऐन्थ्रेक्स जीवाणु से संक्रमित हो जाते हैं जो आगे चलकर एक घातक रक्त रोग "सोर्टर्स रोग" के रूप में प्रकट होता है।
📝 प्रश्न 3 — सही (√) व गलत (✗) का चिह्न लगाइए
(क) कश्मीरी बकरी के बालों से पश्मीना ऊन की शालें बनायी जाती हैं।
✅ सही — जम्मू-कश्मीर की कश्मीरी बकरी से विश्वप्रसिद्ध पश्मीना ऊन की शालें बनाई जाती हैं।
(ख) ऊन प्राप्त करने के लिए भेड़ के बालों को जाड़े के मौसम में काटा जाता है।
❌ गलत — भेड़ के बाल गर्मी के मौसम में काटे जाते हैं, ताकि बाल उतरने के बाद गर्म मौसम में उन्हें कोई कठिनाई न हो।
(ग) अच्छी नस्ल की भेड़ों को जन्म देने के लिए मुलायम बाल वाली विशेष भेड़ के चयन की प्रक्रिया वर्णात्मक प्रजनन कहलाती है।
✅ सही — नस्ली भेड़ों को जन्म देने के लिए जनक के रूप में गुणवत्तापूर्ण भेड़ के चयन को वर्णात्मक प्रजनन कहते हैं।
(घ) रेशम का धागा प्राप्त करने के लिए प्यूपा से वयस्क कीट बनने से पूर्व ही कोकून को उबलते पानी में डाला जाता है।
✅ सही — यदि वयस्क कीट बन जाए तो वह कोकून के रेशों को काटते हुए बाहर निकल आता है, जिससे रेशम की गुणवत्ता घट जाती है।
(ङ) रेशम कीट के अण्डों से प्यूपा निकलते हैं।
❌ गलत — रेशम कीट के अण्डों से लार्वा (कैटरपिलर/इल्ली) निकलते हैं, न कि प्यूपा। लार्वा आगे प्यूपा में परिवर्तित होता है।
📝 प्रश्न 4 — स्तम्भ (क) का स्तम्भ (ख) से मिलान कीजिए
स्तम्भ (क)स्तम्भ (ख) — सही उत्तर
क. अभिमार्जन य. काटी गई ऊन की सफाई
कटाई के बाद रेशों को धोकर चिकनाई, धूल और गंदगी हटाने की प्रक्रिया।
ख. कोकून स. रेशम के रेशे उत्पन्न करता है।
रेशम कीट का प्यूपा कोकून के रूप में रेशम के रेशों से ढका होता है।
ग. याक द. ऊन देने वाला जन्तु
याक का ऊन तिब्बत और लद्दाख में प्रचलित है।
घ. शहतूत की पत्तियाँ अ. रेशम कीट का भोजन
रेशम कीट का लार्वा शहतूत की कोमल पत्तियाँ खाता है।
ङ. रीलिंग ब. रेशम के रेशों का संसाधन
कोकून से रेशम के रेशे निकालने की प्रक्रिया को रेशम की रीलिंग कहते हैं।
Basic Shiksha Solution ● प्रश्न 5 — लघु उत्तरीय प्रश्न
📝 प्रश्न 5(क) — ऊन किसे कहते हैं? ऊन प्राप्त होने वाले जन्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तर: ऊन की परिभाषा

सामान्यतः भेड़ की त्वचा के बालों से प्राप्त किए जाने वाले मुलायम, घने रेशों को ऊन कहा जाता है। भेड़ की त्वचा पर दो प्रकार के बाल होते हैं — दाढ़ी के रूखे बाल और त्वचा पर स्थित तंतुरूपी मुलायम बाल। ऊन बनाने के लिए इन्हीं मुलायम बालों का उपयोग किया जाता है।

ऊन प्रदान करने वाले प्रमुख जन्तु
  • 1
    भेड़ — सर्वाधिक ऊन प्रदान करने वाला जन्तु। न्यूजीलैंड की मेरीनो भेड़ से सबसे अच्छी गुणवत्ता का ऊन प्राप्त होता है।
  • 2
    याक — तिब्बत और लद्दाख में पाया जाता है। इसके ऊन का उपयोग ठण्डे क्षेत्रों में होता है।
  • 3
    ऊँट — मरुस्थलीय क्षेत्रों में पाया जाता है। इसके बालों से भी ऊन प्राप्त की जाती है।
  • 4
    बकरी — जम्मू-कश्मीर की अंगोरा बकरी से अंगोरा ऊन तथा कश्मीरी बकरी से पश्मीना ऊन की शालें बनाई जाती हैं।
  • 5
    लामा और ऐल्पेका — दक्षिण अमेरिका में पाए जाते हैं। इनसे भी ऊन प्राप्त किया जाता है।
📝 प्रश्न 5(ख) — ऊन प्रदान करने वाली भेड़ की कुछ भारतीय नस्लों के नाम लिखिए।
उत्तर:

भारत में भेड़ों की अनेक नस्लें पाई जाती हैं जो गुणवत्तापूर्ण ऊन प्रदान करती हैं। भारत में भेड़ों की संख्या की दृष्टि से चीन और ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत का विश्व में तीसरा स्थान है।

नस्ल का नाममुख्य क्षेत्रउपयोग
नालीराजस्थान, हरियाणाकालीन बनाने के लिए
रामपुर बुशेयरहिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्डऊनी वस्त्र बनाने के लिए
नाली (राजस्थानी)राजस्थानउच्च गुणवत्ता का ऊन
मारवाड़ीराजस्थान, गुजरातमोटा ऊन
कश्मीरी / पश्मीनाजम्मू-कश्मीरपश्मीना शाल
📌 याद रखें: भेड़ के रेशों की गुणवत्ता उनके पोषण, जलवायु तथा उचित देखभाल पर निर्भर करती है।
📝 प्रश्न 5(ग) — वर्णात्मक प्रजनन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:

भेड़ की कुछ नस्लों के शरीर पर घने बाल होते हैं जिनसे बड़ी मात्रा में अच्छी गुणवत्ता वाली ऊन प्राप्त होती है। ऐसी भेड़ों का उपयोग अच्छी नस्ल की भेड़ों को जन्म देने के लिए भी किया जाता है।

नस्ली भेड़ों को जन्म देने हेतु → विशेष जनक (माता-पिता) भेड़ का चयन = वर्णात्मक प्रजनन
📘 परिभाषा: नस्ली भेड़ों को जन्म देने के लिए जनक के रूप में गुणवत्तापूर्ण ऊन देने वाली भेड़ों के चयन की प्रक्रिया को "वर्णात्मक प्रजनन" कहते हैं।
📝 प्रश्न 5(घ) — जाड़े में ऊनी वस्त्र पहनना क्यों आरामदायक होता है?
उत्तर:

जाड़े में ऊनी वस्त्र पहनना आरामदायक होता है क्योंकि —

  • 1
    वायु का फँसना: ऊनी रेशों के बीच में बड़ी मात्रा में वायु भर जाती है।
  • 2
    कुचालक की भूमिका: यह वायु ऊष्मा की कुचालक (bad conductor) की भाँति कार्य करती है।
  • 3
    शरीर की ऊष्मा का संरक्षण: इस प्रकार सर्दियों में ऊनी वस्त्र पहनने से शरीर का तापमान स्थिर रहता है और ठंड नहीं लगती।
💡 सरल भाषा में: ऊनी कपड़ा एक "थर्मस" की तरह काम करता है — जैसे थर्मस गर्मी को अंदर रखता है, वैसे ही ऊनी वस्त्र शरीर की गर्मी को बाहर नहीं जाने देता।
📝 प्रश्न 5(ङ) — रेशम प्राप्त करने के लिए कोकून को उबलते पानी में डालना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:

रेशम प्राप्त करने के लिए कोकून को उबलते पानी (95°–97° तापमान) में 10–15 मिनट के लिए डाला जाता है, क्योंकि —

  • 1
    चिपचिपा पदार्थ घुल जाता है: कोकून के रेशों के बीच का लसदार (सेरीसिन) पदार्थ गर्म पानी में घुल जाता है, जिससे रेशे अलग-अलग हो जाते हैं।
  • 2
    लम्बे और उत्कृष्ट रेशे: इस प्रकार प्राप्त रेशम अधिक लम्बे तथा उच्च कोटि के होते हैं।
  • 3
    प्यूपा के वयस्क बनने से पहले: यदि प्यूपा वयस्क रेशम कीट बन जाए तो वह कोकून के रेशों को काटते हुए बाहर निकल आता है, जिससे रेशम के रेशे टूट जाते हैं और उनकी गुणवत्ता निम्न स्तर की हो जाती है।
📌 महत्वपूर्ण: इसीलिए प्यूपा के वयस्क बनने से पहले ही कोकून को गर्म पानी में डाला जाता है — ताकि लम्बे और अखण्डित रेशम के धागे प्राप्त हो सकें।
📝 प्रश्न 6 — रेशम कीट के विभिन्न कुलों से प्राप्त रेशम के नाम लिखिए।
उत्तर:

रेशम कीट के विभिन्न कुलों से अलग-अलग प्रकार के रेशम प्राप्त किए जाते हैं। ये धागे चिकनाहट, चमक, मजबूती आदि में एक-दूसरे से भिन्न होते हैं —

रेशम का नामरेशम कीट / पेड़विशेषता
शहतूत रेशमशहतूत के पेड़ पर पाला गया कीटसबसे चिकना, चमकीला व प्रचलित रेशम
टसर रेशमओक के पेड़ पर पाया जाने वाला कीटमोटा व मजबूत रेशम
मूंगा रेशमअसम में पाया जाने वाला विशेष कीटसुनहरे रंग का रेशम
कोसा रेशमओक/अरडी के पेड़ पर कीटछत्तीसगढ़ में प्रचलित
एरी रेशमअरडी के पेड़ पर पाला जाने वाला कीटटिकाऊ व सफेद रंग
💡 एक कोकून से कितना रेशम? एक कोकून (कोया) से 300 से 900 मीटर तक लम्बा रेशमी धागा निकलता है। एक किलोग्राम रेशम के लिए लगभग 5500 कोकून की आवश्यकता होती है।
📝 प्रश्न 7 — ऊन तथा रेशम के दो-दो उपयोग लिखिए।
उत्तर:
🧶 ऊन के दो प्रमुख उपयोग:
  • स्वेटर, शॉल, कम्बल, टोपी, जैकेट आदि ठण्डे वस्त्र बनाने में।
  • कालीन, गलीचे, पावदान तथा अन्य घरेलू सामग्री बनाने में।
🧵 रेशम के दो प्रमुख उपयोग:
  • रेशमी बनारसी साड़ियाँ, घाघरा-चोली, चूड़ीदार-शेरवानी जैसे विशेष अवसर के वस्त्र बनाने में।
  • पैराशूट, बुलेटप्रूफ कपड़े, ऑपरेशन में उपयोग होने वाले टाँके आदि बनाने में।
📝 प्रश्न 8 — भेड़ के रेशों को ऊन में संसाधित करने के विभिन्न चरण क्रमानुसार वर्णित कीजिए।
उत्तर:

भेड़ के बालों को ऊन के धागे में परिवर्तित करने की एक लम्बी प्रक्रिया होती है जो निम्नलिखित 6 चरणों में सम्पन्न की जाती है —

कटाई → अभिमार्जन → छँटाई → कताई → रंगाई → ऊनी धागा बनाना
1
चरण 1 — कटाई (Shearing): जब भेड़ के शरीर पर बाल की घनी वृद्धि हो जाती है तो उनके बालों को मशीन द्वारा शरीर से उतार लिया जाता है। यह प्रक्रिया गर्मी के मौसम में की जाती है। चूँकि त्वचा की सबसे ऊपरी परत मृत कोशिकाओं से बनी होती है, इसलिए बाल काटने में दर्द नहीं होता।
2
चरण 2 — अभिमार्जन (Scouring): कटाई के बाद रेशों को पानी की टंकियों में डालकर अच्छी तरह धोया जाता है जिससे उनकी चिकनाई, धूल और गंदगी निकल जाए। आजकल यह कार्य मशीन द्वारा किया जाता है।
3
चरण 3 — छँटाई (Sorting): अभिमार्जन के बाद अच्छे रोएँदार रेशों को उनकी लम्बाई, चिकनाई तथा हल्केपन के आधार पर अलग-अलग कर लिया जाता है। यह कार्य हाथ से या मशीन से होता है।
4
चरण 4 — कताई (Spinning): अभिमार्जन से प्राप्त रेशों को सुखाकर छोटे-छोटे कोमल व फूले हुए रेशों की ऊन के धागों के रूप में कताई की जाती है।
5
चरण 5 — रंगाई (Dyeing): भेड़ से प्राप्त रेशे प्रायः काले, भूरे अथवा सफेद रंग के होते हैं। विविधता पैदा करने के लिए इन रेशों की विभिन्न रंगों में रंगाई की जाती है।
6
चरण 6 — ऊनी धागा बनाना (Making Yarn): रंगाई के पश्चात् इन रेशों को सुलझाकर सीधा करके लपेटकर धागा बनाया जाता है। लम्बे रेशों को कातकर स्वेटर के लिए तथा छोटे रेशों को कातकर ऊनी वस्त्र बुनाई में उपयोग किया जाता है।
📝 प्रश्न 9 — रेशम कीट के जीवन-चक्र का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:

रेशम कीट अपने जीवन में 4 अवस्थाओं से गुजरता है। रेशम कीट को शहतूत, अरडी, ओक आदि के पेड़ों पर पाला जाता है।

🥚
अण्डा
🐛
लार्वा (इल्ली/
कैटरपिलर)
🫘
प्यूपा (कोकून)
🦋
वयस्क
रेशम कीट
अवस्था 1 — अण्डा

मादा रेशम कीट सैकड़ों की संख्या में अण्डे देती है जो शहतूत की पत्तियों की निचली सतह पर चिपके होते हैं।

अवस्था 2 — लार्वा (कैटरपिलर / इल्ली)

अण्डों से सफेद रंग के लार्वा निकलते हैं जिन्हें कैटरपिलर या इल्ली कहते हैं। ये पेड़ की कोमल पत्तियाँ खाते हैं और 4 से 6 सप्ताह में वृद्धि करते हैं। लार्वा में एक विशेष रेशम ग्रन्थि होती है जिससे अत्यन्त महीन लसदार प्रोटीनयुक्त पदार्थ स्रावित होता है।

अवस्था 3 — प्यूपा (कोकून)

लार्वा अंग्रेजी की संख्या आठ (8) के आकार में गति करते हुए अपने चारों ओर इस लसदार पदार्थ को लपेटता जाता है जो हवा के सम्पर्क में आने पर सूखकर रेशम के रेशों में बदल जाता है। इस प्रकार बनी सफेद गोलाकार संरचना को कोकून (कोया) कहते हैं। कोकून के भीतर लार्वा प्यूपा में परिवर्तित हो जाता है।

अवस्था 4 — वयस्क रेशम कीट

कोकून के भीतर प्यूपा विकसित होकर वयस्क रेशम कीट (तितली/पतंगे) में बदल जाता है। अन्त में रेशम कीट कोकून के रेशों को काटते हुए बाहर निकल आता है और अपना नया जीवन चक्र प्रारम्भ करता है।

📌 रेशम प्राप्ति की कुंजी: इसीलिए प्यूपा के वयस्क बनने से पहले कोकून को गर्म पानी में डाल दिया जाता है — ताकि लम्बे और उत्कृष्ट रेशम के रेशे प्राप्त हो सकें और कोकून के रेशे कटने न पाएँ।

Class 7 Science के अन्य अध्याय

📚 UP Board Class 7 Science – सभी अध्यायों के समाधान

यदि आप UP Board Class 7 Science Question Answer की पूरी तैयारी करना चाहते हैं तो नीचे दिए गए सभी अध्यायों के समाधान पढ़ सकते हैं।

अध्याय अध्याय का नाम
1 मानव, विज्ञान और प्रौद्योगिकी
2 रेशों से वस्त्र तक
3 पदार्थ की संरचना एवं प्रकृति
4 भौतिक और रासायनिक परिवर्तन
5 ऊष्मा एवं ताप
6 पौधों में पोषण
7 जन्तुओं में पोषण
8 जीवों में श्वसन (Coming Soon)
9 जन्तुओं एवं पौधों में परिवहन (Coming Soon)
10 जीवों में उत्सर्जन (Coming Soon)
11 पौधों में जनन
12 लाभदायक एवं हानिकारक पौधे तथा जन्तु
13 भोजन, स्वास्थ्य एवं रोग

📌 Note: सभी अध्यायों के विस्तृत प्रश्न-उत्तर और नोट्स इस वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि छात्र परीक्षा की तैयारी आसानी से कर सकें।

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