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UP Board Class 7 Science Chapter 11 Question Answer | पौधों में जनन

UP Board Class 7 Science | इकाई 11 — पौधों में जनन
इकाई 11 — पौधों में जनन
UP Board Class 7 | विज्ञान | सम्पूर्ण समाधान
BASIC SHIKSHA SOLUTION ● UP BOARD CLASS 7 SCIENCE SOLUTION
📖 पाठ परिचय: इस इकाई में हम पौधों में होने वाले दो प्रकार के जननअलैंगिक जनन (मुकुलन, खण्डन, बीजाणु निर्माण, वर्धी जनन) तथा लैंगिक जनन (पुष्प की संरचना, परागण, निषेचन, बीज निर्माण) के बारे में पढ़ेंगे। साथ ही बीजों के प्रकीर्णन की विभिन्न विधियों को भी समझेंगे। यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

UP Board Class 7 Science की इकाई 11 — पौधों में जनन में पौधों के प्रजनन की विभिन्न विधियों का अध्ययन कराया जाता है। इस अध्याय में पौधों में होने वाले अलैंगिक जनन, लैंगिक जनन, परागण, निषेचन तथा बीज प्रकीर्णन की प्रक्रियाओं को विस्तार से समझाया गया है।

यहाँ Class 7 Science Chapter 11 Question Answer सरल और स्पष्ट भाषा में दिए गए हैं ताकि विद्यार्थी इस अध्याय की अवधारणाओं को आसानी से समझ सकें और परीक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकें।

Quick Answer – पौधों में जनन

पौधों में नए पौधों के बनने की प्रक्रिया को जनन कहा जाता है। पौधों में मुख्य रूप से दो प्रकार के जनन पाए जाते हैं — अलैंगिक जनन और लैंगिक जनन। अलैंगिक जनन में एक ही पौधे से नया पौधा बनता है जबकि लैंगिक जनन में पुष्प के नर और मादा अंगों की सहायता से बीज का निर्माण होता है।

इस अध्याय में क्या पढ़ेंगे?

  • पौधों में जनन का अर्थ
  • अलैंगिक जनन के प्रकार
  • वर्धी जनन (Vegetative Propagation)
  • बीजाणु द्वारा जनन
  • पुष्प की संरचना
  • परागण (Pollination)
  • निषेचन (Fertilization)
  • बीज और फल का निर्माण
  • बीज प्रकीर्णन
  • अभ्यास प्रश्न उत्तर
📝 प्रश्न 1 — सही विकल्प पर (✓) निशान लगाइए
प्रश्न 1 (क): नर और मादा युग्मक के युग्मन का क्रम कहलाता है —
(1) निषेचन
(2) परागण
(3) जनन
(4) बीज निर्माण
✅ सही उत्तर: (1) निषेचन
व्याख्या: जब नर युग्मक (परागकण के भीतर) और मादा युग्मक (बीजाण्ड में उपस्थित अण्डा) आपस में मिलते हैं तो इस क्रिया को निषेचन (Fertilization) कहते हैं। निषेचन से युग्मनज (Zygote) बनता है जिससे आगे भ्रूण का विकास होता है। परागण और निषेचन दो अलग-अलग क्रियाएँ हैं — परागण पहले होता है, फिर निषेचन।
प्रश्न 1 (ख): परिपक्व होने पर अण्डाशय विकसित हो जाता है —
(1) बीज में
(2) पुंकेसर में
(3) स्त्रीकेसर में
(4) फल में
✅ सही उत्तर: (4) फल में
व्याख्या: निषेचन के पश्चात् पुष्प के अण्डाशय की दीवार मोटी और रसीली होकर फल बन जाती है। अण्डाशय के भीतर स्थित बीजाण्ड विकसित होकर बीज बनते हैं। अर्थात् — बीजाण्ड → बीज और अण्डाशय → फल। पुष्प के अन्य भाग (बाह्यदल, दल, पुंकेसर) मुरझाकर गिर जाते हैं।
प्रश्न 1 (ग): अजूबा अपने जिस भाग द्वारा जनन करता है, वह है —
(1) तना
(2) पत्ती
(3) जड़
(4) पुष्प
✅ सही उत्तर: (2) पत्ती
व्याख्या: अजूबा (Bryophyllum) और विगोनिया में पत्तियों द्वारा वर्धी जनन होता है। अजूबा की पत्तियों के किनारों पर कलिकाएँ (Buds) होती हैं जो मिट्टी के सम्पर्क में आने पर अंकुरित होकर नये पौधे को जन्म देती हैं। यही कारण है कि अजूबा को "चमत्कारी पत्ती" या "Miracle Leaf" भी कहते हैं।
प्रश्न 1 (घ): पौधे के जनन अंग हैं —
(1) जड़
(2) तना
(3) पत्ती
(4) फूल
✅ सही उत्तर: (4) फूल
व्याख्या: पौधे में जड़, तना और पत्ती — ये तीनों कायिक अंग (Vegetative Organs) हैं जो पोषण और वृद्धि का कार्य करते हैं। इसके विपरीत फूल (पुष्प) पौधे का जनन अंग (Reproductive Organ) है क्योंकि इसमें पुंकेसर (नर जननांग) और स्त्रीकेसर (मादा जननांग) पाये जाते हैं।
प्रश्न 1 (ड़): परागकण का वर्तिकाग्र पर स्थानान्तरण कहलाता है —
(1) निषेचन
(2) परागण
(3) जनन
(4) फल का बनना
✅ सही उत्तर: (2) परागण
व्याख्या: परागकोश (Anther) से परागकण (Pollen Grains) का निकलकर वर्तिकाग्र (Stigma) पर पहुँचने की क्रिया को परागण (Pollination) कहते हैं। यह क्रिया वायु, जल, कीट, पतंग, मधुमक्खी आदि के द्वारा होती है। परागण के बाद ही निषेचन की क्रिया होती है।
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📝 प्रश्न 2 — रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(क) जनक पौधे के कायिक भाग से नए पौधे का उत्पन्न होना ................. जनन कहलाता है।
✅ उत्तर: वर्धी (Vegetative)
व्याख्या: जब पौधे के कायिक भागों जैसे जड़, तना या पत्ती से नये पौधे उत्पन्न होते हैं, तो उसे वर्धी जनन या कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) कहते हैं। इसमें बीज की आवश्यकता नहीं होती। जैसे — आलू (तना), शकरकन्द (जड़), अजूबा (पत्ती)।
(ख) जिन फूलों में केवल नर या केवल मादा जनन अंग होते हैं वे ................. पुष्प कहे जाते हैं।
✅ उत्तर: एकलिंगी
व्याख्या: एकलिंगी पुष्प (Unisexual Flower) वे होते हैं जिनमें केवल पुंकेसर (नर) या केवल स्त्रीकेसर (मादा) में से एक ही अंग होता है। जैसे — पपीता, मक्का, ककड़ी, लौकी, खीरा। इसके विपरीत द्विलिंगी पुष्प में दोनों अंग एक साथ होते हैं — जैसे गुड़हल, सरसों।
(ग) परागकोश से परागकण का वर्तिकाग्र पर स्थानान्तरण की क्रिया ................. कहलाती है।
✅ उत्तर: परागण (Pollination)
व्याख्या: परागण लैंगिक जनन की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। परागकण वायु, जल, कीटों (तितली, मधुमक्खी) तथा अन्य जन्तुओं के माध्यम से वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं। परागण के बिना निषेचन सम्भव नहीं है।
(घ) नर और मादा युग्मक का युग्मन ............... कहलाता है।
✅ उत्तर: निषेचन (Fertilization)
व्याख्या: निषेचन में परागनलिका अण्डाशय के बीजाण्ड में प्रवेश करती है और नर युग्मक, मादा युग्मक (अण्डा) से संयोग करता है। इस संयोग से बनी कोशिका युग्मनज (Zygote) कहलाती है जिससे भ्रूण विकसित होता है।
(ङ) बीज का प्रकीर्णन ......, ............. और ................. के द्वारा होता है।
✅ उत्तर: वायु, जल और जन्तुओं
व्याख्या: बीजों का प्रकीर्णन तीन माध्यमों द्वारा होता है — (1) वायु द्वारा — पंखयुक्त या रोमयुक्त बीज जैसे मदार, सूरजमुखी; (2) जल द्वारा — नारियल जैसे रेशेदार आवरण वाले फल; (3) जन्तुओं द्वारा — काँटेदार बीज जो जानवरों के शरीर से चिपक जाते हैं।
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📝 प्रश्न 3 — सही (✓) तथा गलत (✗) का चिह्न लगाइये
(अ) स्पाइरोगाइरा तथा यूलोथ्रिक्स खण्डन विधि से जनन करते हैं।
✓ सही
व्याख्या: स्पाइरोगाइरा और यूलोथ्रिक्स दोनों शैवाल (Algae) हैं जो तालाबों में पाये जाते हैं। इनके तन्तु कई खण्डों में टूट जाते हैं और प्रत्येक खण्ड से नया पौधा बनता है। इस क्रिया को खण्डन (Fragmentation) कहते हैं।
(ब) कलम लगाना कृत्रिम वर्धी जनन है।
✓ सही
व्याख्या: कलम लगाना (Cutting), दाब कलम और आरोपण (Grafting) — ये सभी कृत्रिम वर्धी जनन की विधियाँ हैं। इनमें मनुष्य कृत्रिम तरीके से पौधों का प्रवर्धन करता है। गन्ना, गुलाब आदि में कलम लगाकर नये पौधे तैयार किये जाते हैं।
(स) यीस्ट में जनन खण्डन विधि द्वारा होता है।
✗ गलत
व्याख्या: यह कथन गलत है। यीस्ट (Yeast) में जनन मुकुलन विधि (Budding) द्वारा होता है — खण्डन द्वारा नहीं। यीस्ट कोशिका से एक छोटी उभार (मुकुल) निकलती है जो बढ़कर अलग हो जाती है। खण्डन विधि स्पाइरोगाइरा जैसे शैवालों में होती है।
(द) स्त्रीकेसर पुष्प का नर भाग है।
✗ गलत
व्याख्या: यह कथन गलत है। स्त्रीकेसर (Pistil/Carpel) पुष्प का मादा भाग है जिसमें अण्डाशय, वर्तिका और वर्तिकाग्र होते हैं। पुष्प का नर भाग पुंकेसर (Stamen) होता है जिसमें परागकोश और तन्तु होते हैं।
(य) पुष्प के सभी भाग पुष्पासन पर टिके होते हैं।
✓ सही
व्याख्या: यह कथन सही है। पुष्पासन (Thalamus/Receptacle) पुष्प का वह आधार है जिस पर बाह्यदल, दल, पुंकेसर और स्त्रीकेसर — सभी चारों भाग टिके रहते हैं। यह पुष्प के डण्ठल (पुष्पवृन्त) का ऊपरी फूला हुआ हिस्सा होता है।
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📝 प्रश्न 4 — स्तम्भ (क) का स्तम्भ (ख) से मिलान कीजिए
स्तम्भ (क)स्तम्भ (ख)
क. कली/मुकुलस. यीस्ट
ख. आँखय. आलू
ग. खण्डनब. स्पाइरोगाइरा
घ. पंखअ. मेपल
ङ. बीजाणुद. डबलरोटी की फफूँद
📘 विस्तार से समझें: यीस्ट में मुकुलन (कली बनना) से जनन होता है। आलू में आँख (Eye/पर्व सन्धि) से अंकुरण होता है। स्पाइरोगाइरा में खण्डन होता है। मेपल के बीज पंखयुक्त होते हैं जो हवा से उड़ते हैं। और डबलरोटी की फफूँद (राइजोपस) में बीजाणु द्वारा जनन होता है।
📝 प्रश्न 5 — निषेचन किसे कहते हैं?
प्रश्न 5: निषेचन किसे कहते हैं? उत्तर:
निषेचन (Fertilization) की परिभाषा: नर युग्मक और मादा युग्मक के आपसी संयोग (युग्मन) की क्रिया को निषेचन कहते हैं। निषेचन के फलस्वरूप बनी कोशिका युग्मनज (Zygote) कहलाती है जिससे भ्रूण का विकास होता है।
🌸 निषेचन की सम्पूर्ण प्रक्रिया
  • 1
    परागकण वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं (परागण)। वर्तिकाग्र नम और चिपचिपा होता है।
  • 2
    वर्तिकाग्र पर परागकण अंकुरित होकर परागनलिका बनाते हैं। इस नलिका में नर युग्मक होते हैं।
  • 3
    परागनलिका वर्तिका से होती हुई अण्डाशय के बीजाण्ड (अण्डकोश) में प्रवेश करती है।
  • 4
    नर युग्मक, बीजाण्ड में उपस्थित मादा युग्मक (अण्डा) से संयोग करता है — यही निषेचन है।
  • 5
    निषेचन के बाद बीजाण्ड → बीज और अण्डाशय → फल बनता है।
📌 याद रखें: परागण और निषेचन दो अलग-अलग क्रियाएँ हैं। परागण में परागकण वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं जबकि निषेचन में नर और मादा युग्मक आपस में मिलते हैं।
📝 प्रश्न 6 — पौधों में अलैंगिक जनन की विभिन्न विधियाँ
प्रश्न 6: पौधों में अलैंगिक जनन की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए। प्रत्येक का उदाहरण दीजिए। उत्तर:

अलैंगिक जनन वह जनन विधि है जिसमें जनन अंगों की भागीदारी नहीं होती और केवल एक जनक से नया पौधा उत्पन्न होता है। इसमें बीज की आवश्यकता नहीं होती। अलैंगिक जनन निम्नलिखित चार विधियों से होता है:

🌱 (1) मुकुलन (Budding)
परिभाषा: जब जनक कोशिका पर एक छोटा सा उभार (मुकुल या कली) निकलता है, धीरे-धीरे बड़ा होकर अलग हो जाता है और नया जीव बन जाता है, तो इस क्रिया को मुकुलन कहते हैं।

उदाहरण: यीस्ट (Yeast) — यह एककोशिक जीव है जिसे सूक्ष्मदर्शी से देखा जाता है। पर्याप्त पोषण मिलने पर यीस्ट कोशिका से मुकुल निकलता है जो बढ़कर अलग हो जाता है। मुकुलन इतनी तेज़ गति से होता है कि कई मुकुल जनक कोशिका से अलग हुए बिना ही एक श्रृंखला में पाये जाते हैं।

उपयोग: ब्रेड फुलाने में यीस्ट का उपयोग होता है।
🌿 (2) खण्डन (Fragmentation)
परिभाषा: जब किसी जीव का शरीर कई टुकड़ों (खण्डों) में टूट जाता है और प्रत्येक खण्ड से नये जीव का निर्माण होता है, तो इसे खण्डन कहते हैं।

उदाहरण: स्पाइरोगाइरा और यूलोथ्रिक्स (शैवाल) — ये तालाबों और जलाशयों में हरे तन्तुओं के गुच्छे के रूप में दिखते हैं। इनके तन्तु अनेक खण्डों में टूट जाते हैं और प्रत्येक खण्ड से नया पौधा बनता है।
🍄 (3) बीजाणु निर्माण (Spore Formation)
परिभाषा: जब किसी जीव में अत्यन्त सूक्ष्म रचनाएँ बीजाणु (Spores) बनती हैं जो उड़कर नम स्थानों पर अंकुरित होकर नये पौधे उत्पन्न करती हैं, तो इसे बीजाणु निर्माण कहते हैं।

उदाहरण: राइजोपस (फफूँद) — अचार या भीगी डबलरोटी पर सफेद फफूँद में धागे जैसी संरचनाएँ (कवक तन्तु) होती हैं। इनके ऊपरी सिरे फूल जाते हैं जिनमें बीजाणु बनते हैं। बीजाणु हवा द्वारा नम स्थानों पर पहुँचकर नई फफूँद उत्पन्न करते हैं।

अन्य उदाहरण: शैवाल, मॉस, फर्न।
🌺 (4) वर्धी जनन / कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation)
परिभाषा: जब पौधे के वर्धी भागों — जड़, तना या पत्ती — से नये पौधे का जन्म होता है, तो उसे वर्धी जनन कहते हैं।

जड़ द्वारा: शकरकन्द, डहेलिया, सतावर।
तने द्वारा: आलू, अदरक, गन्ना, हल्दी।
पत्ती द्वारा: अजूबा (Bryophyllum), विगोनिया।

कृत्रिम विधियाँ: आरोपण (Grafting), दाब कलम (Layering), कलम लगाना (Cutting) — ये सभी कृत्रिम वर्धी जनन की विधियाँ हैं।
📘 वर्धी जनन का महत्व: वर्धी जनन से उत्पन्न पौधे जनक पौधे के समान होते हैं और उनके गुणों को बनाये रखते हैं। अधिक पैदावार और उपयोगी गुण बनाये रखने के लिए किसान वर्धी जनन का उपयोग करते हैं।
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📝 प्रश्न 7 — स्व-परागण तथा पर-परागण में अंतर
प्रश्न 7: स्व-परागण तथा पर-परागण में अंतर लिखिए। उत्तर:
आधार🌼 स्व-परागण (Self-Pollination)🌸 पर-परागण (Cross-Pollination)
परिभाषा परागकण अपने ही पुष्प के वर्तिकाग्र पर या उसी पौधे के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं। किसी पुष्प के परागकण उसी जाति के अन्य पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं।
जनकों की संख्या केवल एक पौधा भाग लेता है। दो अलग-अलग पौधे भाग लेते हैं।
माध्यम बाहरी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। वायु, जल, कीट, मधुमक्खी आदि माध्यम आवश्यक होते हैं।
संतति के गुण संतति जनक के समान होती है — नई विविधता नहीं आती। संतति में नई विविधता आती है — जो कभी-कभी अधिक लाभदायक होती है।
उदाहरण मटर, गेहूँ, धान। सूरजमुखी, सेब, सरसों।
📌 महत्वपूर्ण: तितलियाँ और मधुमक्खियाँ मकरंद (Nectar) के लिए फूलों पर बैठती हैं और उनके पंखों व पैरों में परागकण चिपक जाते हैं। इस प्रकार ये पर-परागण में सहायक होती हैं।
📝 प्रश्न 8 — पुष्प का चित्र और जनन अंगों का नामांकन
प्रश्न 8: किसी पुष्प का चित्र खींचकर उनके जनन अंगों को नामांकित कीजिए। उत्तर:
वर्तिकाग्र (Stigma) वर्तिका (Style) अण्डाशय (Ovary) पुंकेसर (Stamen) दल (Petal) बाह्यदल (Sepal) पुष्पासन चित्र — एक प्रारूपी पुष्प की संरचना
🌸 पुष्प के जनन अंगों का विवरण
पुष्प के चार मुख्य भाग होते हैं — बाह्यदल, दल, पुंकेसर और स्त्रीकेसर। इनमें से पुंकेसर और स्त्रीकेसर जनन अंग हैं।

पुंकेसर (Stamen) — नर जनन अंग: यह पुष्प का नर भाग है। इसके दो भाग होते हैं — तन्तु (Filament) और ऊपर फूला हुआ परागकोश (Anther)। परागकोश में चूर्ण के समान परागकण भरे होते हैं।

स्त्रीकेसर (Pistil/Carpel) — मादा जनन अंग: यह पुष्प का मादा भाग है जो मध्य में स्थित होता है। इसके तीन भाग होते हैं — नीचे का फूला हुआ अण्डाशय (Ovary), उससे जुड़ी वर्तिका (Style) और ऊपर वर्तिकाग्र (Stigma)। अण्डाशय में बीजाण्ड होते हैं।
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📝 प्रश्न 9 — अलैंगिक तथा लैंगिक जनन में अंतर
प्रश्न 9: अलैंगिक तथा लैंगिक जनन में अंतर लिखिए। उत्तर:
आधार🌿 अलैंगिक जनन🌸 लैंगिक जनन
जनकों की संख्या केवल एक जनक (Single Parent) की आवश्यकता होती है। दो जनकों (नर और मादा) की भागीदारी होती है।
युग्मकों की भूमिका जनन अंगों और युग्मकों की कोई भूमिका नहीं। नर और मादा युग्मकों का युग्मन (निषेचन) होता है।
बीज की आवश्यकता बीज की आवश्यकता नहीं होती। बीज के द्वारा ही नये पौधे उगते हैं।
संतति के गुण संतान, जनक के बिल्कुल समान होती है। संतान में माता-पिता दोनों के गुण आते हैं — भिन्नता सम्भव।
गति तीव्र गति से होता है। अपेक्षाकृत धीमी प्रक्रिया है।
विधियाँ मुकुलन, खण्डन, बीजाणु निर्माण, वर्धी जनन। परागण → निषेचन → बीज निर्माण।
उदाहरण यीस्ट, स्पाइरोगाइरा, फफूँद, आलू, अदरक। गुड़हल, सरसों, मटर, पपीता, मक्का।
📝 प्रश्न 10 — बीज के प्रकीर्णन की विभिन्न विधियाँ
प्रश्न 10: बीज के प्रकीर्णन की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए। उत्तर:

प्रकृति में बीजों और फलों का एक स्थान से दूसरे स्थान तक फैलना प्रकीर्णन (Dispersal) कहलाता है। यह इसलिए आवश्यक है ताकि एक ही स्थान पर बहुत अधिक पौधे न उगें और उनके बीच भोजन, जल, खनिज लवण तथा प्रकाश के लिए संघर्ष न हो। बीज का प्रकीर्णन निम्नलिखित तीन विधियों से होता है:

💨 (1) वायु द्वारा प्रकीर्णन
विशेषता: ऐसे बीज या फल जो हल्के, पंखयुक्त या रोमयुक्त होते हैं, वायु द्वारा उड़कर दूर-दूर तक पहुँच जाते हैं।

उदाहरण:
  • मदार (आक) — रोमयुक्त बीज हवा में उड़ते हैं।
  • सूरजमुखी — रोमयुक्त फल।
  • मेपल और विल्वक — पंखयुक्त बीज।
  • घास — अत्यन्त हल्के बीज।
💧 (2) जल द्वारा प्रकीर्णन
विशेषता: ऐसे फल जिनका आवरण रेशेदार (तन्तुमय) होता है, वे जल में तैरकर दूर-दूर तक पहुँच जाते हैं।

उदाहरण: नारियल — इसका आवरण रेशेदार होता है जिससे यह जल में तैरता रहता है और समुद्र की लहरों के साथ दूर-दूर तक पहुँचता है। कमल के बीज भी जल द्वारा फैलते हैं।
🐾 (3) जन्तुओं द्वारा प्रकीर्णन
विशेषता: कुछ बीज जन्तुओं के शरीर से चिपककर या उनके पाचन तंत्र से होकर दूर-दूर तक पहुँचते हैं।

दो तरीके:
  • चिपककर: यूरेना और जैग्जियम जैसे काँटेदार बीज जानवरों के शरीर से चिपक जाते हैं और दूर जाकर गिरते हैं।
  • मल द्वारा: पीपल, बरगद जैसे वृक्षों के बीज पक्षी फल खाते हैं — बीज पचते नहीं और मल के साथ बाहर आकर उग जाते हैं। इसीलिए पीपल का पेड़ दीवारों पर उगता दिखता है।
💥 (4) स्वयं फटने द्वारा प्रकीर्णन (विशेष विधि)
उदाहरण: मटर, अरण्ड (Castor) जैसे पौधों के फल पकने पर झटके के साथ फट जाते हैं। इससे बीज जनक पौधे से दूर जाकर गिरते हैं।
📘 प्रकीर्णन का महत्व: यदि सभी बीज एक ही स्थान पर गिरकर उग जाएँगे तो नये पौधों के बीच स्थान, जल, खनिज लवण और प्रकाश के लिए भारी संघर्ष होगा और कोई भी पौधा स्वस्थ रूप से विकसित नहीं हो पाएगा। इसलिए प्रकीर्णन पौधों के स्वस्थ विकास के लिए आवश्यक है।
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❓ FAQs — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: परागण और निषेचन में क्या अंतर है?
उत्तर: परागण में परागकण परागकोश से वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं जबकि निषेचन में नर और मादा युग्मक बीजाण्ड में आपस में मिलते हैं। परागण पहले होता है, निषेचन बाद में।

प्रश्न: अजूबा किस भाग से जनन करता है?
उत्तर: अजूबा (Bryophyllum) पत्ती द्वारा वर्धी जनन करता है। इसकी पत्तियों के किनारों पर कलिकाएँ होती हैं जो नये पौधे को जन्म देती हैं।

प्रश्न: द्विलिंगी और एकलिंगी पुष्प के उदाहरण क्या हैं?
उत्तर: द्विलिंगी पुष्प (दोनों अंग एक साथ): गुड़हल, सरसों, मटर, सेम। एकलिंगी पुष्प (एक ही अंग): पपीता, मक्का, ककड़ी, लौकी, खीरा।

प्रश्न: UP Board Class 7 Science Chapter 11 Solution कहाँ मिलेगा?
उत्तर: Basic Shiksha Solution वेबसाइट पर इस अध्याय का सम्पूर्ण समाधान उपलब्ध है।
🔎 निष्कर्ष
निष्कर्ष: इस प्रकार UP Board Class 7 Science इकाई 11 — पौधों में जनन Solution में हमने अलैंगिक जनन की चारों विधियाँ (मुकुलन, खण्डन, बीजाणु निर्माण, वर्धी जनन), पुष्प की संरचना, परागण की प्रक्रिया, स्व-परागण व पर-परागण में अंतर, निषेचन की पूरी प्रक्रिया तथा बीज प्रकीर्णन की विधियों को विस्तार से समझा। यह इकाई परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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📚 UP Board Class 7 Science – सभी अध्यायों के समाधान

यदि आप UP Board Class 7 Science Question Answer की पूरी तैयारी करना चाहते हैं तो नीचे दिए गए सभी अध्यायों के समाधान पढ़ सकते हैं।

अध्याय अध्याय का नाम
1 मानव, विज्ञान और प्रौद्योगिकी
2 रेशों से वस्त्र तक
3 पदार्थ की संरचना एवं प्रकृति
4 भौतिक और रासायनिक परिवर्तन
5 ऊष्मा एवं ताप
6 पौधों में पोषण
7 जन्तुओं में पोषण
8 जीवों में श्वसन (Coming Soon)
9 जन्तुओं एवं पौधों में परिवहन (Coming Soon)
10 जीवों में उत्सर्जन (Coming Soon)
11 पौधों में जनन
12 लाभदायक एवं हानिकारक पौधे तथा जन्तु
13 भोजन, स्वास्थ्य एवं रोग

📌 Note: सभी अध्यायों के विस्तृत प्रश्न-उत्तर और नोट्स इस वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि छात्र परीक्षा की तैयारी आसानी से कर सकें।

📚 अन्य अध्याय देखें — Class 7 Science
  • 👉 UP Board Class 7 Science All Chapters Solution
  • 👉 UP Board Class 7 Science Chapter 10 Solution
  • 👉 UP Board Class 7 Science Chapter 12 Solution
  • 👉 UP Board Class 7 Hindi Solution
  • 👉 UP Board Class 7 Sanskrit Solution

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