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UP Board Class 7 Science Chapter 12 Question Answer | लाभदायक एवं हानिकारक पौधे तथा जन्तु

UP Board Class 7 Science | इकाई 12 — लाभदायक एवं हानिकारक पौधे तथा जन्तु
इकाई 12 — लाभदायक एवं हानिकारक पौधे तथा जन्तु
UP Board Class 7 | विज्ञान | सम्पूर्ण समाधान
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UP Board Class 7 Science Chapter 12 “लाभदायक एवं हानिकारक पौधे तथा जन्तु” में पौधों और जन्तुओं के मानव जीवन पर प्रभाव का अध्ययन कराया जाता है। इस अध्याय में पौधों के उपयोग, औषधीय पौधे, रेशम कीट पालन, मधुमक्खी पालन, तथा हानिकारक पौधों और जन्तुओं के बारे में जानकारी दी जाती है।

यहाँ Class 7 Science Chapter 12 Question Answer सरल भाषा में दिए गए हैं ताकि विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी आसानी से कर सकें।

📖 पाठ परिचय: इस इकाई में हम पौधों और जन्तुओं के मानव जीवन पर प्रभाव का अध्ययन करते हैं। पौधे हमें भोजन, रेशे, दवा, इमारती लकड़ी और ईंधन देते हैं, लेकिन कुछ पौधे जहरीले और हानिकारक भी होते हैं। इसी तरह जन्तु हमें खाद्य पदार्थ, उत्पाद और सहायता देते हैं, पर कुछ जन्तु रोगवाहक और हानिकारक भी हैं। यह इकाई हमारे दैनिक जीवन से सीधे जुड़ी है और परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Quick Answer – लाभदायक एवं हानिकारक पौधे तथा जन्तु

पौधे और जन्तु मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। पौधे हमें भोजन, औषधि, रेशे और लकड़ी प्रदान करते हैं जबकि जन्तु दूध, ऊन, रेशम, शहद और अन्य उपयोगी वस्तुएँ देते हैं। कुछ पौधे और जन्तु हानिकारक भी होते हैं जो रोग फैलाते हैं या फसलों को नुकसान पहुँचाते हैं।

इस अध्याय में क्या पढ़ेंगे?

  • लाभदायक पौधे और उनके उपयोग
  • औषधीय पौधों का महत्व
  • हानिकारक पौधे और उनका प्रभाव
  • लाभदायक जन्तु और उनसे मिलने वाले उत्पाद
  • मधुमक्खी पालन (Apiculture)
  • रेशम कीट पालन (Sericulture)
  • रोग फैलाने वाले जन्तु
  • अभ्यास प्रश्न उत्तर
📝 प्रश्न 1 — सही विकल्प छाँटकर लिखिए
प्रश्न 1 (क): साइट्रस (नींबू जाति) फल में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है —
(i) विटामिन A
(ii) विटामिन B
(iii) विटामिन C
(iv) विटामिन D
✅ सही उत्तर: (iii) विटामिन C
व्याख्या: नींबू जाति (Citrus Family) के सभी फल — जैसे नींबू, संतरा, अमरूद, मुसम्बी — विटामिन C (एस्कॉर्बिक एसिड) के सबसे अच्छे प्राकृतिक स्रोत हैं। विटामिन C हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को मजबूत बनाता है, मसूड़ों को स्वस्थ रखता है और स्कर्वी रोग से बचाता है। विटामिन A गाजर-पपीते में, विटामिन D सूर्य के प्रकाश से और मछली के तेल में, तथा विटामिन B अनाज और दालों में पाया जाता है।
प्रश्न 1 (ख): मलेरिया की दवा किस पौधे से प्राप्त होती है?
(i) नीम
(ii) सिनकोना
(iii) कपास
(iv) सर्पगंधा
✅ सही उत्तर: (ii) सिनकोना
व्याख्या: सिनकोना (Cinchona) के पेड़ की छाल से कुनैन (Quinine) नामक औषधि प्राप्त होती है जो मलेरिया बुखार की प्रमुख दवा है। यह पेड़ मूलतः दक्षिण अमेरिका का है। नीम से त्वचा रोगों की दवाएँ मिलती हैं, सर्पगंधा से उच्च रक्तचाप की दवा रिसर्पिन बनती है, और कपास रेशे के लिए उपयोगी है।
प्रश्न 1 (ग): रेशा प्रदान करने वाला पौधा नहीं है —
(i) नीम
(ii) कपास
(iii) जूट
(iv) नारियल
✅ सही उत्तर: (i) नीम
व्याख्या: नीम एक औषधीय वृक्ष है जो रेशा प्रदान नहीं करता। इसके विपरीत — कपास के फल से रुई (रेशा) मिलती है जिससे वस्त्र बनते हैं; जूट के तने से जूट के रेशे मिलते हैं जिनसे बोरे, रस्सी, चटाई बनती है; और नारियल से जटा (रेशे) मिलते हैं। इसलिए नीम रेशा प्रदान करने वाला पौधा नहीं है।
प्रश्न 1 (घ): सबसे अधिक प्रोटीन पाया जाता है —
(i) अनाज में
(ii) दाल में
(iii) फल में
(iv) सब्जी में
✅ सही उत्तर: (ii) दाल में
व्याख्या: दालें (अरहर, चना, मटर, मूँग, उरद, मसूर, राजमा आदि) मानव के लिए प्रोटीन का प्रमुख स्रोत हैं — विशेषकर शाकाहारी मनुष्यों के लिए। प्रोटीन शरीर की माँसपेशियों के निर्माण, मरम्मत और वृद्धि के लिए आवश्यक है। अनाज से मुख्यतः कार्बोहाइड्रेट मिलता है, फलों और सब्जियों से विटामिन व खनिज लवण प्राप्त होते हैं।
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📝 प्रश्न 2 — रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(क) हरी सब्जियों से ............... तथा ................ प्राप्त होते हैं।
✅ उत्तर: विटामिन तथा खनिज लवण
व्याख्या: हरी सब्जियाँ जैसे पालक, चौलाई, मेथी, बथुआ आदि विटामिन (A, B, C, K) और खनिज लवणों (Iron, Calcium, Magnesium) के उत्तम स्रोत हैं। ये हमारी आँखों, हड्डियों, रक्त और रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इसीलिए भोजन में हरी सब्जियों को अवश्य शामिल करना चाहिए।
(ख) मच्छर से ............... तथा ............... रोग फैलते हैं।
✅ उत्तर: मलेरिया तथा डेंगू (साथ ही चिकनगुनिया, फाइलेरिया)
व्याख्या: मच्छर एक प्रमुख रोगवाहक जन्तु है। एनोफेलीज मच्छर — मलेरिया फैलाता है; एडीज मच्छर — डेंगू और चिकनगुनिया फैलाता है; क्यूलेक्स मच्छर — फाइलेरिया (हाथी-पाँव) रोग फैलाता है। इन रोगों से बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग, जल संचय न होने देना और मच्छर भगाने वाले उपाय करने चाहिए।
(ग) ................. तथा ................ मछली के यकृत से तेल निकाला जाता है।
✅ उत्तर: कॉड (Cod) तथा शार्क (Shark)
व्याख्या: कॉड मछली और शार्क के यकृत (Liver) से बहुमूल्य तेल निकाला जाता है। इस तेल में विटामिन A और D प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। कॉड लिवर ऑयल बच्चों की हड्डियों और दाँतों के विकास के लिए तथा रात्रि अंधत्व (Night Blindness) में लाभदायक होता है।
(घ) मधुमक्खियों से ................. तथा ................... मिलता है।
✅ उत्तर: शहद तथा मोम
व्याख्या: मधुमक्खी के छत्ते से हमें दो मूल्यवान पदार्थ मिलते हैं — शहद (Honey) जो पौष्टिक, सुपाच्य और रोगाणुरोधक होता है और दवा के रूप में उपयोग होता है; तथा मोम (Wax) जो पॉलिश, मोमबत्ती और सौन्दर्य प्रसाधन बनाने में काम आता है। बड़े पैमाने पर शहद उत्पादन के लिए मधुमक्खी पालन को एपीकल्चर कहते हैं।
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📝 प्रश्न 3 — सही (✓) तथा गलत (✗) का चिह्न लगाइये
(क) मादक पदार्थ स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं।
✗ गलत
व्याख्या: यह कथन पूर्णतः गलत है। मादक पदार्थ — गाँजा, चरस, अफीम, हेरोइन, कोकेन आदि — स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं। इनसे हृदय रोग, कैंसर, क्षय रोग (TB), लीवर सिरोसिस, मानसिक उत्तेजना और स्मरण शक्ति में कमी जैसी घातक बीमारियाँ होती हैं। नशीले पदार्थों की लत (Addiction) व्यक्ति के जीवन और परिवार दोनों को बर्बाद कर देती है।
(ख) रेशम के कीड़े शहतूत के पेड़ पर पाले जाते हैं।
✓ सही
व्याख्या: यह कथन सही है। रेशम के कीड़े (Bombyx mori) शहतूत (Mulberry) के पेड़ की पत्तियाँ खाते हैं और कोकून (Cocoon/कोया) बनाते हैं। एक कोकून से 700 से 1000 मीटर लम्बा रेशमी धागा निकलता है। रेशम कीट पालन की प्रक्रिया को सेरीकल्चर कहते हैं।
(ग) लाख, पौधे से प्राप्त होती है।
✗ गलत
व्याख्या: यह कथन गलत है। लाख पौधे से नहीं बल्कि लाख कीट (Lac Insect) से प्राप्त होती है। लाख कीट अपने शरीर की रक्षा के लिए शरीर के चारों ओर मोटी पपड़ी के रूप में लाख का खोल बनाते हैं। इस खोल को खरोंचकर शुद्ध लाख तैयार की जाती है। लाख से पॉलिश, वार्निश, चूड़ियाँ, बटन आदि बनाये जाते हैं।
(घ) कुत्ता घर की चौकीदारी करता है।
✓ सही
व्याख्या: यह कथन सही है। कुत्ता सबसे वफादार पालतू जन्तु है। इसकी सुँघने की शक्ति अत्यंत तीव्र होती है। यह घरेलू सुरक्षा के अलावा देश की सुरक्षा (सेना और पुलिस में) और बर्फीले क्षेत्रों में स्लेज गाड़ियाँ खींचने में भी उपयोगी है।
(ङ) सभी जन्तु तथा पौधे लाभदायक होते हैं।
✗ गलत
व्याख्या: यह कथन गलत है। सभी जन्तु और पौधे लाभदायक नहीं होते। कुछ पौधे जहरीले होते हैं जैसे पीली कनेर, मदार। कुछ पौधे मादक पदार्थ देते हैं जैसे भाँग, पोस्ता। कुछ जन्तु रोगवाहक हैं जैसे मक्खी, मच्छर। कुछ जन्तु फसलों को नष्ट करते हैं जैसे टिड्डी, चूहा, तोता।
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📝 प्रश्न 4 — हल्दी के विभिन्न उपयोग
प्रश्न 4: हल्दी का उपयोग खाने में करते हैं। इसका उपयोग और कहाँ किया जाता है? उत्तर:

हल्दी (Turmeric / Curcuma longa) एक बहुपयोगी औषधीय पौधा है जिसका तना (प्रकन्द/Rhizome) उपयोग में आता है। खाने में मसाले के रूप में उपयोग तो होता ही है, इसके अनेक अन्य उपयोग भी हैं जो निम्नलिखित हैं:

🌿 हल्दी के विविध उपयोग
  • 1
    औषधि के रूप में: हल्दी में कर्क्यूमिन (Curcumin) नामक तत्व होता है जो एंटीसेप्टिक, एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर है। चोट लगने पर दूध में हल्दी मिलाकर पीने से दर्द और सूजन कम होती है।
  • 2
    त्वचा की देखभाल में: हल्दी का लेप त्वचा को चमकदार और निरोगी बनाता है। शादी-विवाह में हल्दी लगाने की परम्परा इसी गुण के कारण है। दाद, खाज और त्वचा संक्रमण में भी हल्दी उपयोगी है।
  • 3
    प्राकृतिक रंग के रूप में: हल्दी का पीला रंग कपड़ों और खाद्य पदार्थों को रंगने में उपयोग होता है। धार्मिक अनुष्ठानों में पीला रंग बनाने के लिए भी हल्दी का उपयोग होता है।
  • 4
    भोजन को संरक्षित रखने में: हल्दी में प्राकृतिक परिरक्षक (Preservative) गुण होते हैं। इसीलिए मसालेदार व्यंजनों में इसका उपयोग होता है ताकि भोजन जल्दी खराब न हो।
  • 5
    धार्मिक और सांस्कृतिक उपयोग: पूजा-पाठ, हवन तथा मांगलिक कार्यों में हल्दी का विशेष महत्व है।
📌 रोचक तथ्य: हल्दी को "प्राकृतिक एंटीबायोटिक" कहा जाता है। आधुनिक शोध में पाया गया है कि कर्क्यूमिन कैंसर रोधी गुण भी रखता है।
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📝 प्रश्न 5 — दो हानिकारक पौधे तथा जन्तु
प्रश्न 5: कोई दो हानिकारक पौधे तथा जन्तु के नाम लिखिए। वे हमें किस प्रकार हानि पहुँचाते हैं? उत्तर: 🌿 दो हानिकारक पौधे
(1) गाजर घास (Parthenium / Congress Grass): यह एक खरपतवार है जो खेतों और बंजर भूमि पर उगती है। इसे छूने मात्र से त्वचा में खुजली, जलन और एलर्जी हो जाती है। यह खेतों में उगकर फसलों की पैदावार कम कर देती है। गाजर घास के पराग से दमा और साँस की बीमारियाँ भी होती हैं।
(2) भाँग / पोस्ता / धतूरा: ये पौधे मादक पदार्थ (नारकोटिक्स) युक्त होते हैं। इनसे गाँजा, अफीम, हेरोइन जैसे नशीले पदार्थ बनते हैं। इनका सेवन हृदय रोग, कैंसर, क्षय रोग, लीवर सिरोसिस और मानसिक विकार उत्पन्न करता है। धतूरे का दूध और बीज अत्यंत जहरीले होते हैं जो मृत्यु का कारण बन सकते हैं।
🐛 दो हानिकारक जन्तु
(1) मक्खी (Housefly): घरेलू मक्खी एक अत्यंत हानिकारक रोगवाहक जन्तु है। यह हैजा, अतिसार (डायरिया), आमातिसार (पेचिश), टायफाइड और तपेदिक जैसी बीमारियाँ फैलाती है। मक्खी गंदगी और मल पर बैठकर रोगाणु अपने पैरों में लेती है और फिर हमारे खाने पर बैठकर उन्हें फैलाती है।
(2) टिड्डी (Locust): टिड्डी पौधों की पत्तियाँ और कोपलें खाती है। इनके एक-एक दल में करोड़ों टिड्डियाँ होती हैं। एक बार खेतों में आने पर ये पूरी की पूरी फसल चट कर जाती हैं। अनुमान है कि ये प्रतिवर्ष लगभग एक तिहाई फसल नष्ट कर देती हैं। इन्हें हेलीकॉप्टर से रसायन छिड़काव करके नष्ट किया जाता है।
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📝 प्रश्न 6 — नीम के विभिन्न भागों के उपयोग
प्रश्न 6: नीम अत्यधिक लाभदायक वृक्ष है। उसके विभिन्न भागों के क्या उपयोग हैं? लिखिए। उत्तर:

नीम (Azadirachta indica) को "प्राकृतिक औषधालय" कहा जाता है क्योंकि इसके प्रत्येक भाग का उपयोग मानव कल्याण में होता है। यह एंटीसेप्टिक, एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों से भरपूर है। आइये नीम के विभिन्न भागों के उपयोग समझते हैं:

नीम का भागउपयोग
🌿 पत्तियाँ दाद, खाज, खुजली और चर्म रोगों में नीम की पत्तियाँ उबालकर नहाने से लाभ होता है। अनाज भण्डारण में पत्तियाँ रखने से कीड़े नहीं लगते। पत्तियों का काढ़ा मलेरिया और बुखार में उपयोगी है।
🪵 छाल (Bark) नीम की छाल का काढ़ा बुखार, मधुमेह (Diabetes) और रक्त शोधन में उपयोगी होता है। यह पेट के कीड़ों को भी नष्ट करती है।
🌱 टहनियाँ (दातून) नीम की टहनियों से दातून करने पर दाँत और मसूड़े मजबूत होते हैं। मुँह के रोगाणु नष्ट होते हैं और दाँतों में कीड़े नहीं लगते। यही कारण है कि नीम आधारित टूथपेस्ट बहुत प्रचलित है।
🌸 फूल नीम के फूलों का उपयोग पेट के विकारों और नेत्र रोगों में किया जाता है।
🫙 फल और बीज (निम्बोली) नीम के फलों (निम्बोली) से नीम का तेल निकाला जाता है जो साबुन, क्रीम, शैम्पू बनाने में काम आता है। यह बालों के लिए भी लाभकारी है।
🌾 खली (Oil Cake) तेल निकालने के बाद बची खली उत्कृष्ट जैविक खाद के रूप में खेतों में डाली जाती है और मिट्टी के कीड़ों को नष्ट करती है।
🪵 लकड़ी नीम की लकड़ी मजबूत होती है। इससे फर्नीचर बनाया जाता है। इसमें दीमक नहीं लगती।
📘 विशेष महत्व: नीम पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है। यह वायु को शुद्ध करता है और कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करता है। इसी कारण नीम के पेड़ों को घरों के आसपास लगाने की परम्परा भारत में पुरातन काल से चली आ रही है।
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📝 प्रश्न 7 — रेशम के कीड़े से रेशम कैसे प्राप्त किया जाता है?
प्रश्न 7: रेशम के कीड़े से रेशम कैसे प्राप्त किया जाता है? उत्तर:

रेशम कीट पालन को सेरीकल्चर (Sericulture) कहते हैं। रेशम के कीड़े (Bombyx mori) को शहतूत (Mulberry) के पेड़ पर पाला जाता है क्योंकि ये शहतूत की पत्तियाँ खाते हैं। रेशम प्राप्त करने की सम्पूर्ण प्रक्रिया निम्नानुसार है:

🐛 रेशम प्राप्ति की चरण-दर-चरण प्रक्रिया
  • 1
    रेशम-ग्रंथि: रेशम के कीड़ों में एक विशेष रेशम-ग्रंथि (Silk Gland) होती है। इस ग्रंथि से अत्यन्त महीन लसदार पदार्थ निकलता है।
  • 2
    कोकून बनाना: रेशम कीट का लारवा (इल्ली) इस लसदार पदार्थ को अपने शरीर के चारों ओर लपेटकर गेंद जैसी संरचना बना लेता है। अब तक लारवा, प्यूपा (Pupa) में बदल चुका होता है। इस प्यूपा के चारों ओर लिपटी गेंद जैसी संरचना को कोया या कोकून कहते हैं।
  • 3
    रेशम का निर्माण: हवा के सम्पर्क में यही लसदार पदार्थ सूखकर रेशम बन जाता है। रेशम के कीड़े के एक कोकून (कोया) से 700 से 1000 मीटर लम्बा रेशमी धागा निकलता है।
  • 4
    धागा निकालना: कोकून को गर्म पानी में उबाला जाता है जिससे धागे के सिरे अलग होते हैं। फिर इन धागों को लपेटकर रेशमी धागा तैयार किया जाता है।
  • 5
    वस्त्र निर्माण: इन धागों से चिकने और सुन्दर रेशमी वस्त्र बनाये जाते हैं जो बनारसी साड़ी, पटोला आदि के रूप में प्रसिद्ध हैं।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य: एक किलोग्राम रेशम उत्पादन के लिए लगभग 5000 रेशम कीट और बड़ी मात्रा में शहतूत की पत्तियाँ आवश्यक होती हैं। भारत में कर्नाटक, असम, बंगाल और जम्मू-कश्मीर रेशम उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र हैं।
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📝 प्रश्न 8 — पाँच लाभदायक पौधे तथा जन्तु
प्रश्न 8: कोई पाँच लाभदायक पौधे तथा जन्तु के नाम लिखिए तथा बताइए कि वे हमारे लिए किस प्रकार उपयोगी हैं। उत्तर: 🌿 पाँच लाभदायक पौधे
पौधे का नामउपयोग
1. नीम औषधीय गुणों से भरपूर — दाद, खाज, चर्म रोग, दाँत-मसूड़ों के लिए लाभकारी। पत्तियाँ अनाज में कीड़े रोकने के काम आती हैं।
2. तुलसी सर्दी, खाँसी, बुखार और श्वास रोगों में उपयोगी। इसकी पत्तियाँ एंटीसेप्टिक होती हैं। धार्मिक महत्व भी है।
3. कपास इसके फल से रुई (रेशा) मिलती है जिससे वस्त्र बनाये जाते हैं। कपास का तेल खाने में उपयोगी होता है।
4. गेहूँ / धान हमारा मुख्य खाद्यान्न (अनाज) है जिससे रोटी, चावल बनते हैं। इनसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और विटामिन मिलते हैं।
5. सागौन / शीशम इनकी लकड़ी मजबूत और टिकाऊ होती है। फर्नीचर, दरवाजे, आलमारी, पलंग बनाने में उपयोग होता है।
🐄 पाँच लाभदायक जन्तु
जन्तु का नामउपयोग
1. गाय / भैंस दूध प्रदान करते हैं जो संतुलित आहार है। दूध से दही, मक्खन, घी, पनीर बनते हैं। बैल खेती में जुताई करते हैं।
2. मधुमक्खी शहद और मोम प्रदान करती है। परागण में सहायक होने से कृषि उत्पादन बढ़ाती है।
3. रेशम कीट रेशम के धागे देता है जिनसे सुन्दर वस्त्र बनाये जाते हैं। रेशम कीट पालन से किसानों को आय होती है।
4. भेड़ ऊन देती है जिससे ऊनी वस्त्र, कम्बल, शॉल बनाये जाते हैं। ऊन हमें सर्दी से बचाती है।
5. कुत्ता घर, देश की सुरक्षा करता है। पुलिस और सेना में अपराध जाँच में सहायक। बर्फीले क्षेत्रों में स्लेज गाड़ी खींचता है।
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📝 प्रश्न 9 — जन्तु हमारे लिए लाभदायक हैं — पुष्टि कीजिए
प्रश्न 9: जन्तु हमारे लिए लाभदायक हैं। इस कथन की पुष्टि कीजिए। उत्तर:

यह कथन पूर्णतः सत्य है कि जन्तु हमारे जीवन के अभिन्न अंग हैं और हमारे लिए अनेक प्रकार से लाभदायक हैं। जन्तु हमें खाद्य पदार्थ, वस्त्र, कृषि में सहायता, परिवहन और सुरक्षा — इन सभी आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक हैं। आइये विस्तार से समझते हैं:

🥛 (1) खाद्य पदार्थ प्रदान करने में
गाय, भैंस और बकरी से दूध मिलता है जो सर्वोत्तम संतुलित आहार है। दूध से दही, मक्खन, घी, पनीर, मट्ठा बनाया जाता है। भेड़, बकरी और मुर्गी से माँस (गोश्त) मिलता है जो प्रोटीन का समृद्ध स्रोत है। मुर्गी और बत्तख के अण्डे भी पोषक भोजन हैं। मधुमक्खी के छत्ते से शहद मिलता है जो पौष्टिक और रोगाणुरोधक है। तालाब, नदी और समुद्र की मछलियाँ भी प्रोटीन और ओमेगा-3 का उत्तम स्रोत हैं।
🧵 (2) उत्पाद प्रदान करने में
रेशम कीट से रेशम प्राप्त होता है जिससे सुन्दर वस्त्र बनते हैं। भेड़ से ऊन मिलती है जो सर्दियों में हमें गर्माहट देती है। लाख कीट से लाख मिलती है जिससे पॉलिश, वार्निश, चूड़ियाँ और बटन बनते हैं। मधुमक्खी से मोम मिलता है जो मोमबत्ती और सौन्दर्य प्रसाधन में उपयोगी है। जानवरों की खाल (चमड़ा) से जूते, बेल्ट, पर्स, थैले बनाये जाते हैं।
🌾 (3) कृषि कार्य में
बैल खेत जोतने और सिंचाई में अमूल्य भूमिका निभाते हैं। पशुओं का गोबर उत्तम जैविक खाद बनाता है जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है। केंचुए मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं। मधुमक्खियाँ फूलों का परागण करके कृषि उत्पादन बढ़ाने में सहायक होती हैं।
🚌 (4) परिवहन और सहायता में
घोड़ा, ऊँट, हाथी, बैल, गधा, खच्चर — ये सभी सामान ढोने, यात्रा करने और कृषि कार्यों में सदियों से मानव के सहायक रहे हैं। ऊँट को "रेगिस्तान का जहाज" कहते हैं। बर्फीले क्षेत्रों में कुत्ते स्लेज गाड़ियाँ खींचते हैं।
💊 (5) औषधि निर्माण में
साँप और बिच्छू के विष से एंटीवेनम (जहर की दवाएँ) बनाई जाती हैं। कस्तूरी मृग से कस्तूरी प्राप्त होती है जो औषधि निर्माण में उपयोगी है। शंख (Conch) से भस्म बनाई जाती है। मछली के यकृत के तेल से विटामिन A और D की दवाएँ बनती हैं।
📘 निष्कर्ष: इस प्रकार स्पष्ट है कि जन्तु हमारे जीवन के प्रत्येक पहलू — भोजन, वस्त्र, कृषि, परिवहन, सुरक्षा और औषधि — में हमारे लिए लाभदायक हैं। इसीलिए वन्य जीवों की सुरक्षा करना और पालतू जानवरों की देखभाल करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।
📌 याद रखें: वन्य जन्तुओं को पालना, शिकार करना एवं किसी भी प्रकार से उन्हें नुकसान पहुँचाना वर्जित एवं दण्डनीय अपराध है। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत ऐसा करने पर कठोर दण्ड का प्रावधान है।
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❓ FAQs — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: मधुमक्खी पालन को क्या कहते हैं?
उत्तर: मधुमक्खी पालन को एपीकल्चर (Apiculture) कहते हैं। एक पूर्ण विकसित छत्ते से एक वर्ष में लगभग 20 किलोग्राम शहद निकलता है।

प्रश्न: रेशम कीट पालन को क्या कहते हैं?
उत्तर: रेशम कीट पालन को सेरीकल्चर (Sericulture) कहते हैं। रेशम के कीड़े शहतूत के पेड़ पर पाले जाते हैं।

प्रश्न: कुनैन (मलेरिया की दवा) किस पौधे से मिलती है?
उत्तर: मलेरिया की दवा कुनैन (Quinine) सिनकोना (Cinchona) पौधे की छाल से प्राप्त होती है।

प्रश्न: UP Board Class 7 Science Chapter 12 Solution कहाँ मिलेगा?
उत्तर: Basic Shiksha Solution वेबसाइट पर इस अध्याय का सम्पूर्ण समाधान उपलब्ध है।
🔎 निष्कर्ष
निष्कर्ष: इस प्रकार UP Board Class 7 Science इकाई 12 — लाभदायक एवं हानिकारक पौधे तथा जन्तु Solution में हमने पौधों और जन्तुओं के मानव जीवन पर लाभदायक और हानिकारक प्रभावों को विस्तार से समझा। नीम, तुलसी, हल्दी जैसे औषधीय पौधों के महत्व को जाना। रेशम कीट पालन (सेरीकल्चर), मधुमक्खी पालन (एपीकल्चर) तथा विभिन्न रोगवाहक जन्तुओं से होने वाली बीमारियों के बारे में समझ विकसित की। यह इकाई हमारे दैनिक जीवन से सीधे जुड़ी है।
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📚 UP Board Class 7 Science – सभी अध्यायों के समाधान

यदि आप UP Board Class 7 Science Question Answer की पूरी तैयारी करना चाहते हैं तो नीचे दिए गए सभी अध्यायों के समाधान पढ़ सकते हैं।

अध्याय अध्याय का नाम
1 मानव, विज्ञान और प्रौद्योगिकी
2 रेशों से वस्त्र तक
3 पदार्थ की संरचना एवं प्रकृति
4 भौतिक और रासायनिक परिवर्तन
5 ऊष्मा एवं ताप
6 पौधों में पोषण
7 जन्तुओं में पोषण
8 जीवों में श्वसन (Coming Soon)
9 जन्तुओं एवं पौधों में परिवहन (Coming Soon)
10 जीवों में उत्सर्जन (Coming Soon)
11 पौधों में जनन
12 लाभदायक एवं हानिकारक पौधे तथा जन्तु
13 भोजन, स्वास्थ्य एवं रोग

📌 Note: सभी अध्यायों के विस्तृत प्रश्न-उत्तर और नोट्स इस वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि छात्र परीक्षा की तैयारी आसानी से कर सकें।

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