Class 6 Hindi Chapter 2 Solution | अपना स्थान स्वयं बनाइए
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पाठ 2: अपना स्थान स्वयं बनाइए
एक बार एक राजा ने अपने मंत्री से कहा कि उसे अपने निजी कार्य के लिए एक ऐसे आदमी की जरूरत है जो ईमानदार और अच्छा हो। मंत्री ने काफी जाँच-पड़ताल के बाद एक युवक को चुना। मंत्री ने उस युवक की पुरानी नौकरी छुड़वा दी और उसे उन्नति का भरोसा दिलाकर राजा के सामने पेश किया।
राजा पहले तो भूल गए, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि इस समय कोई बड़ा पद खाली नहीं है, केवल 'चपरासी' की नौकरी मिल सकती है। मंत्री को यह सुनकर बुरा लगा, लेकिन युवक ने बड़ी विनम्रता से कहा, "मेरे लिए सबसे बड़ा वेतन यह है कि मुझे अपने राजा की सेवा करने का मौका मिल रहा है।" वह खुशी-खुशी चपरासी बनने को तैयार हो गया।
जिस दफ्तर में उसे काम मिला, वह धूल से भरा था क्योंकि राजा वहाँ कभी नहीं जाते थे। युवक ने अपनी मेहनत से उस दफ्तर को साफ-सुथरा कर शाही रूप दे दिया। सफाई के दौरान उसे एक कोठरी में पुराने लिफाफों का ढेर मिला, जिन पर सोने की पच्चीकारी थी और रत्न जड़े थे। [cite_start]ये लिफाफे विवाह आदि अवसरों पर आए थे। [cite: 45-47]
युवक ने उन लिफाफों से सोना और रत्न उतरवाकर बाजार में बेचा। उससे मिले पैसों से दफ्तर के लिए बढ़िया फर्नीचर लगवाया और बचे हुए हजारों रुपये सरकारी खजाने में जमा कर दिए। जब राजा ने यह देखा, तो वे उसकी ईमानदारी और बुद्धिमानी से बहुत प्रसन्न हुए और उसे अपने राज्य का 'वित्तमंत्री' बना दिया।
युवक की तरक्की देखकर अन्य मंत्री जलने लगे क्योंकि वह न खुद बेईमानी करता था, न किसी को करने देता था। वे राजा से उसकी शिकायत करते रहते। राजा ने एक रात 2 बजे सभी मंत्रियों की परीक्षा ली। उन्होंने सेनापति को भेजकर सभी मंत्रियों को उसी हालत में बुलवाया जिस हालत में वे थे।
राजा ने देखा कि आठ में से सात मंत्री नशे में थे या जुआ खेल रहे थे। लेकिन वह युवक (वित्तमंत्री) उस समय भी दीये की रोशनी में बैठकर राज-काज के कागज जाँच रहा था। उसने बताया कि हिसाब में एक पैसे की कमी आ रही है, जिसे वह ठीक कर रहा है। राजा ने कहा कि एक पैसे के लिए इतना कष्ट क्यों? युवक ने कहा, "यदि हिसाब में भूल रही तो अफसरों में बेईमानी और लापरवाही पैदा होगी।" उसकी कर्तव्यनिष्ठा देखकर राजा ने उसे राज्य का 'प्रधानमंत्री' बना दिया।
सीख (Moral): हमें यह सीख मिलती है कि 'अपना स्थान स्वयं बनाना पड़ता है'। ईमानदारी, मेहनत और वफादारी से एक साधारण व्यक्ति भी प्रधानमंत्री के पद तक पहुँच सकता है।
लेखक परिचय : कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'
• जन्म: 29 मई 1906 ई० (देवबन्द, सहारनपुर, उ.प्र.)
• व्यक्तित्व: प्रसिद्ध कथाकार, निबंधकार, पत्रकार एवं स्वतंत्रता सेनानी।
• प्रमुख रचनाएँ: 'बाजे पायलिया के घुँघरू', 'दीप जले शंख बजे', 'माटी हो गई सोना', 'तपती पगडंडियों पर पदयात्रा'।
• निधन: 9 मई 1995 ई०।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| कृतज्ञता | उपकार मानना |
| आश्वासन | भरोसा / आशा दिलाना |
| पच्चीकारी | नक्काशी / जड़ना |
| चुगलखोर | शिकायत करने वाला |
| खजाँची | खजाने का अधिकारी |
| निगाह | दृष्टि / नज़र |
| हुजूर | श्रीमान / मालिक |
- ईमानदारी का अर्थ है अपने काम के प्रति पूरी तरह वफादार रहना।
- बिना किसी लालच या डर के अपने कर्तव्य का पालन करना।
- जहाँ कोई देख न रहा हो, वहाँ भी सही कार्य करना (जैसे युवक ने अकेले में सोने के लिफाफे नहीं चुराए)।
- जब कार्य करने के बाद मन में आत्म-संतुष्टि (Self-satisfaction) हो।
- जब मन में किसी प्रकार का डर या चोर न छिपा हो।
- जब हमारे कार्य से किसी का अहित न हो और परिणाम सकारात्मक हो।
- सम्मान: समाज और कार्यस्थल पर व्यक्ति का सम्मान बढ़ता है।
- विश्वास: लोग ईमानदार व्यक्ति पर आँख मूंदकर भरोसा करते हैं।
- सफलता: देर से ही सही, लेकिन बड़ी सफलता मिलती है (जैसे युवक प्रधानमंत्री बना)।
- मानसिक शांति: मन हमेशा शांत और खुश रहता है।
- स्वास्थ्य हानि: शरीर रोगों का घर बन जाता है।
- धन की बर्बादी: नशे की लत में व्यक्ति अपनी जमा-पूंजी लुटा देता है।
- कर्तव्य में चूक: व्यक्ति अपने काम और जिम्मेदारी को भूल जाता है (जैसे मंत्रियों ने किया)।
- अपमान: समाज में मान-प्रतिष्ठा गिर जाती है।
| कथन (Statement) | किसने कहा | किससे कहा |
|---|---|---|
| (क) मुझे अपने लिए एक आदमी की जरूरत है। | राजा ने | मंत्री से |
| (ख) मैंने इसे हजारों में से छाँटा है... | मंत्री ने | राजा से |
| (ग) मुझे अपने राजा की सेवा करने का मौका मिलेगा। | युवक ने | मंत्री से |
| (घ) इससे अफसरों में ढील और बेईमानी पैदा होगी। | वित्तमंत्री ने | राजा से |
| 🤴 राजा | नृप, भूपति, नरेश |
| 🌙 रात | रात्रि, निशा, रजनी |
| 🥇 सोना | स्वर्ण, कंचन, हेम |
| ☀️ दिन | दिवस, वासर, वार |
| 😊 खुश | प्रसन्न, आनंदित, हर्षित |
| 👁️ निगाह | नज़र, दृष्टि |
| शब्द (Word) | विलोम (Antonym) |
|---|---|
| 📈 उन्नति | अवनति 📉 |
| 🙏 कृतज्ञ | कृतघ्न |
| 👺 बेईमान | ईमानदार 😇 |
| 💰 अमीर | गरीब 🏚️ |
| 👍 अच्छा | बुरा 👎 |
| अशुद्ध वाक्य (बिना विराम चिह्न) | शुद्ध वाक्य (विराम चिह्न सहित) |
|---|---|
| (क) पेन पेन्सिल और रबर लिखने के साधन हैं | पेन, पेन्सिल और रबर लिखने के साधन हैं। |
| (ख) क्या आपके विद्यालय में कम्प्यूटर है | क्या आपके विद्यालय में कम्प्यूटर है? |
| (ग) वाह कितने सुन्दर फूल खिले हैं | वाह! कितने सुन्दर फूल खिले हैं। |
| (घ) गुरु शिष्य विद्यालय की शोभा हैं | गुरु-शिष्य विद्यालय की शोभा हैं। |
जिन शब्दों के एक से अधिक अर्थ होते हैं, उन्हें अनेकार्थी शब्द कहते हैं।
| शब्द | अर्थ 1 (वाक्य) | अर्थ 2 (वाक्य) |
|---|---|---|
| कर | हाथ: हमें अपने 'कर' कमलों से दान करना चाहिए। | टैक्स: हमें समय पर 'कर' जमा करना चाहिए। |
| मन | हृदय: आज मेरा 'मन' बहुत खुश है। | तौल (मात्रा): मुझे दो 'मन' गेहूँ चाहिए। |
| सोना | धातु: 'सोना' की कीमत बढ़ गई है। | नींद: रात में जल्दी 'सोना' चाहिए। |
| पत्र | चिट्ठी: डाकिया 'पत्र' लाया है। | पत्ता: पेड़ से 'पत्र' गिर रहे हैं। |
जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं।
(क) बढ़िया नौकरी से छुड़ाकर लाया हूँ।
विशेषण: बढ़िया (नौकरी कैसी है? बढ़िया)
(ख) दफ़्तर सचमुच शाही दफ़्तर हो गया है।
विशेषण: शाही (दफ्तर कैसा है? शाही)
(ग) उन्होंने तेज आवाज में पूछा।
विशेषण: तेज (आवाज कैसी है? तेज)
(घ) उसने राजा को रद्दी लिफ़ाफ़ों की कहानी सुनाई।
विशेषण: रद्दी (लिफाफे कैसे थे? रद्दी)
(ङ) सभी मंत्री महल के एक बड़े से कमरे में आ गये।
विशेषण: बड़े से (कमरा कैसा था? बड़ा)
(च) सभी मंत्री बहुत लज्जित हुए।
विशेषण: लज्जित (मंत्री कैसे हुए? लज्जित)
🗿 रॉक गार्डन (Rock Garden) - चंडीगढ़
- स्थान: यह भारत के चंडीगढ़ राज्य में स्थित है।
- निर्माता: इसे नेकचन्द सैनी ने बनवाया था, इसलिए इसे 'नेकचन्द सैनी गार्डन' भी कहते हैं।
- विशेषता: यह लगभग 40 एकड़ में फैला है। यह पूरी तरह से कूड़े-करकट और बेकार वस्तुओं (जैसे- टूटी चूड़ियाँ, प्लास्टिक की बोतलें, फ्यूज बल्ब, टाइल्स आदि) से बनाया गया है।
- सीख: यह 'कबाड़ से जुगाड़' (Best out of waste) का बेहतरीन उदाहरण है।
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