UP Board Class 8 Science Chapter 8 किशोरावस्था Solution | प्रश्न उत्तर | Adolescent Age
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पाठ 8: किशोरावस्था
UP Board Class 8 Science Chapter 8 “किशोरावस्था” में विद्यार्थियों को किशोरावस्था के दौरान होने वाले शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तनों, द्वितीयक लैंगिक लक्षणों, लिंग निर्धारण, संतुलित पोषण, परिवार नियोजन तथा जनसंख्या वृद्धि के विषय में जानकारी दी गई है। इस पोस्ट में UP Board Class 8 Science Chapter 8 किशोरावस्था Solution के अंतर्गत MCQ, रिक्त स्थान, सही-गलत, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के सरल और परीक्षा उपयोगी उत्तर दिए गए हैं।
यहाँ आपको “किशोरावस्था” पाठ के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर, लिंग निर्धारण की प्रक्रिया, द्वितीयक लैंगिक लक्षण, पोषण तथा जनसंख्या वृद्धि से संबंधित सभी प्रश्नों के स्पष्ट और परीक्षा-उपयोगी समाधान एक ही स्थान पर मिलेंगे।
| स्तम्भ (क) | स्तम्भ (ख) |
|---|---|
| क. शुक्राणु | ब. वृषण |
| ख. अण्डाणु | द. अण्डाशय |
| ग. हार्मोन | अ. अन्तःस्रावी ग्रन्थि |
| घ. स्वर-परिवर्तन | य. स्वर यंत्र |
| ङ. दाढ़ी मूँछ निकलना | स. द्वितीयक लैंगिक लक्षण |
-
1
लम्बाई में वृद्धि — किशोरावस्था में हड्डियों में तेजी से वृद्धि होती है जिससे बच्चा लम्बा हो जाता है। प्रारम्भ में लड़कियाँ लड़कों की अपेक्षा तेजी से बढ़ती हैं। 18 वर्ष की आयु तक दोनों अपनी अधिकतम लम्बाई प्राप्त कर लेते हैं।
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2
शारीरिक बनावट में परिवर्तन — लड़कों का सीना चौड़ा हो जाता है। लड़कियों में कमर के निचले भाग की चौड़ाई बढ़ जाती है। लड़कों में पेशियाँ लड़कियों की अपेक्षा अधिक गठी दिखाई देती हैं।
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3
स्वर में बदलाव — किशोरावस्था में स्वर यंत्र (Larynx) विकसित होकर बड़ा हो जाता है। लड़कों की आवाज गहरी व भारी हो जाती है तथा गले में कण्ठमणि (एडम्स ऐपल) दिखाई देने लगता है।
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4
स्वेद एवं तैल ग्रन्थियों में सक्रियता — स्वेद-ग्रन्थियों एवं तैल ग्रन्थियों की सक्रियता बढ़ जाती है जिससे चेहरे पर फुँसियाँ, कील और मुँहासे निकलने लगते हैं।
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5
जननांगों की परिपक्वता — किशोरावस्था के अन्त तक मानव जननांग पूर्ण रूप से विकसित हो जाते हैं। लड़कों में शुक्राणु बनने लगते हैं तथा लड़कियों में अण्डाशय परिपक्व होकर अण्डाणु का निर्मोचन करने लगते हैं।
- ➤किशोर-किशोरियाँ पहले की अपेक्षा अधिक सचेत, चिन्तनशील एवं संवेदनशील हो जाते हैं।
- ➤किसी भी बात को सहजता से स्वीकार नहीं करते — तर्क-वितर्क करके निर्णय लेने लगते हैं।
- ➤वे सामाजिक कार्यों में रुचि लेने लगते हैं तथा स्वतन्त्रता चाहते हैं।
- ➤कभी-कभी उनमें असुरक्षा की भावना भी पैदा होने लगती है।
- ➤ये सभी बदलाव शारीरिक वृद्धि एवं ग्रन्थियों की क्रियाशीलता के कारण उत्पन्न होते हैं।
वे लक्षण जो किशोरावस्था के समय विकसित होते हैं और पुरुष तथा स्त्री में अन्तर को स्पष्ट करते हैं, द्वितीयक लैंगिक लक्षण (Secondary Sexual Characters) कहलाते हैं।
लड़कों में द्वितीयक लैंगिक लक्षण- ➤चेहरे पर दाढ़ी-मूँछ निकलना।
- ➤आवाज का भारी एवं गहरी होना, कण्ठमणि (एडम्स ऐपल) का दिखना।
- ➤सीना चौड़ा होना आना।
- ➤वृषण में शुक्राणु निर्माण प्रारम्भ होना।
- ➤कमर के निचले भाग की चौड़ाई बढ़ना।
- ➤अण्डाशय में अण्डाणु निर्माण और माहवारी का प्रारम्भ।
द्वितीयक लैंगिक लक्षण अन्तःस्रावी ग्रन्थियों (Endocrine Glands) द्वारा स्रावित हार्मोनों द्वारा नियंत्रित होते हैं। ये ग्रन्थियाँ नलिकाविहीन होती हैं और हार्मोन सीधे रक्त में मिलकर विशिष्ट अंगों तक पहुँचते हैं।
किशोरावस्था में शरीर में तेज परिवर्तन होते हैं। स्वेद ग्रन्थियाँ एवं तैल ग्रन्थियाँ अधिक सक्रिय हो जाती हैं। ऐसे में व्यक्तिगत सफाई (Personal Hygiene) बहुत आवश्यक हो जाती है।
व्यक्तिगत सफाई के उपाय एवं महत्व-
1
नियमित स्नान — प्रतिदिन स्नान करने से शरीर की गन्दगी व पसीना दूर होता है, त्वचा रोगों से बचाव होता है और शरीर में ताजगी बनी रहती है।
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2
त्वचा की सफाई — चेहरे पर होने वाले मुँहासे, कील-फुँसी से बचाव के लिए चेहरा नियमित साफ पानी से धोना चाहिए। इससे तैल ग्रन्थियों की अशुद्धियाँ निकल जाती हैं।
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3
दाँतों की सफाई — प्रतिदिन दो बार दाँत साफ करने से दाँत मजबूत रहते हैं और मुँह से दुर्गन्ध नहीं आती।
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4
हाथ-पैरों की स्वच्छता — खाने से पहले और शौच के बाद हाथों को साबुन से धोना आवश्यक है। इससे संक्रामक रोगों से बचाव होता है।
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5
लड़कियों में माहवारी की स्वच्छता — माहवारी के समय स्वच्छ कपड़े या सैनिटरी नैपकिन का प्रयोग करना चाहिए। इससे संक्रमण से बचाव होता है।
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6
वस्त्रों की स्वच्छता — प्रतिदिन साफ और धुले हुए वस्त्र पहनने चाहिए।
मनुष्य की प्रत्येक कोशिका के केन्द्रक में 23 जोड़े (अर्थात् 46) गुणसूत्र होते हैं। इनमें से 22 जोड़े पुरुष तथा स्त्रियों में समान होते हैं। 23वाँ जोड़ा लिंग गुणसूत्र होता है जो लिंग निर्धारण के लिए उत्तरदायी है।
| शुक्राणु का प्रकार | अण्डाणु | युग्मनज | सन्तान |
|---|---|---|---|
| Y गुणसूत्र वाला शुक्राणु | X गुणसूत्र | XY | लड़का (पुत्र) |
| X गुणसूत्र वाला शुक्राणु | X गुणसूत्र | XX | लड़की (पुत्री) |
इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि पुत्र के लिंग निर्धारण के लिए उत्तरदायी Y गुणसूत्र केवल पुरुषों में ही पाया जाता है। इसलिए पुत्र पैदा न होने पर स्त्रियों को दोष ठहराना अवैज्ञानिक है। समाज में संतान के लिंग निर्धारण के लिए स्त्रियों को प्रताड़ित करना पूर्णतः गलत तथा निराधार है।
किशोरावस्था में तीव्र गति से शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है। उपापचयी क्रियाएँ (Metabolic activities) बढ़ जाती हैं जिससे शरीर को अधिक पोषण की आवश्यकता होती है। ऐसे में पौष्टिक एवं संतुलित आहार अत्यन्त आवश्यक है।
आवश्यक पोषक तत्व एवं उनके स्रोत| पोषक तत्व | स्रोत | महत्व |
|---|---|---|
| प्रोटीन | दाल, दूध, अण्डा, माँस, चना, राजमा | शारीरिक वृद्धि, पेशी निर्माण |
| आयरन (लौह) | हरी सब्जियाँ, गुड़, फल | रक्त में हीमोग्लोबिन बनाना |
| कैल्शियम | दूध, दही, पनीर | हड्डियों एवं दाँतों की मजबूती |
| विटामिन | फल, सब्जियाँ | रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना |
| कार्बोहाइड्रेट | अनाज, चावल, रोटी | ऊर्जा प्रदान करना |
- ➤स्लिम दिखने के उद्देश्य से आवश्यकता से कम भोजन लेना।
- ➤घर के ताजे भोजन के स्थान पर जंक फूड एवं डिब्बाबन्द खाद्य को प्राथमिकता देना।
- ➤शरीर की बढ़ती आवश्यकता के अनुपात में पर्याप्त भोजन न लेना।
-
1
ताजी हवा में टहलना, व्यायाम एवं खेलकूद — शरीर को स्वस्थ रखता है।
-
2
योगासन एवं ध्यान (Meditation) — मानसिक शक्ति एवं शान्ति के लिए आवश्यक है।
-
3
जंक फूड से बचकर घर का ताजा पका भोजन प्राथमिकता से खाना।
-
4
ICDS (समेकित बाल विकास कार्यक्रम) के तहत पोषण, स्वास्थ्य जाँच एवं पोषण परामर्श की सुविधा लेना।
- ➤धूम्रपान से श्वसन तंत्र को क्षति पहुँचती है — दमा (Asthma), ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों का कैंसर हो सकता है।
- ➤तम्बाकू में मौजूद निकोटिन (Nicotine) हृदय की गति को प्रभावित करता है।
- ➤धूम्रपान से तंत्रिका तंत्र पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
- ➤यह व्यक्ति को कमजोर एवं संवेदन-शून्य कर देता है।
- ➤मादक द्रव्यों (तम्बाकू, गुटका, बीड़ी, सिगरेट, शराब आदि) का सेवन यकृत (Liver) को प्रभावित करता है और उसकी कार्यक्षमता घट जाती है।
- ➤आन्तरिक अंगों को क्षति पहुँचती है जिसके दूरगामी परिणाम होते हैं — ये जीवन के लिए घातक भी हो सकते हैं।
- ➤व्यक्ति धीरे-धीरे इनका आदी (Addicted) हो जाता है।
- ➤इनका सेवन व्यक्ति की स्मरण शक्ति एवं निर्णय लेने की क्षमता को नष्ट कर देता है।
- ➤परिवार एवं समाज में आर्थिक एवं सामाजिक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
जनसंख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या लगभग 1 अरब 21 करोड़ थी जो निरन्तर बढ़ रही है।
जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारण- 1देश की गर्म जलवायु — उच्च जन्म दर के लिए अनुकूल।
- 2विवाह की अनिवार्यता एवं कम उम्र में विवाह।
- 3यौन शिक्षा का अभाव और परिवार नियोजन की सीमित जानकारी।
- 4चिकित्सा सुविधाओं में बढ़ोत्तरी — मृत्यु दर घटी, जन्म दर अधिक बनी रही।
- 5पुत्र की लालसा एवं बेटी को बोझ समझने की सामाजिक सोच।
- ➤निर्धनता — प्रति व्यक्ति आय में कमी।
- ➤खाद्य समस्या — खाद्य सामग्री की कमी, महँगाई।
- ➤आवास की कमी — झुग्गी-झोपड़ी में रहने की मजबूरी।
- ➤कुपोषण — पर्याप्त आहार न मिल पाना।
- ➤शिक्षा, चिकित्सा एवं परिवहन सम्बन्धी सुविधाओं की कमी।
- ➤रोजगार में कमी एवं अपराध में वृद्धि।
- ➤प्राकृतिक संसाधनों पर अत्यधिक दबाव — पर्यावरण प्रदूषण।
जन्म दर को कम करके जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण रखा जा सकता है। इसके लिए परिवार नियोजन सर्वोत्तम उपाय है। परिवार-निरोध विधियों के प्रसार के निम्नलिखित तरीके हैं —
-
1
जन-संचार माध्यमों द्वारा — आकाशवाणी, समाचार पत्र एवं दूरदर्शन पर विस्तृत रूप से प्रचार-प्रसार।
-
2
पोस्टर एवं बैनर — दीवारों पर पोस्टर व बैनर लगाकर लोगों को प्रेरित करना।
-
3
जनसम्पर्क — गाँव-गाँव जाकर जनसम्पर्क द्वारा लोगों को जानकारी देना।
-
4
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र — शिविर लगाकर निःशुल्क जानकारी एवं सुविधाएँ प्रदान करना।
-
5
शिक्षा द्वारा — स्कूलों में यौन शिक्षा एवं परिवार नियोजन की जानकारी देना।
परिवार कल्याण कार्यक्रम एक केन्द्र सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम है। इसके अन्तर्गत निम्नलिखित प्रमुख योजनाएँ संचालित हैं —
-
1
मिशन इन्द्रधनुष — इसका उद्देश्य सन् 2020 तक भारत के सभी बच्चों का टीकाकरण करना है। यह मुख्य रूप से 7 बीमारियों — डिफ्थीरिया, काली खाँसी, टिटनेस, पोलियो, तपेदिक, खसरा और हेपेटाइटिस-B से बच्चों को सुरक्षित रखती है।
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2
जननी सुरक्षा योजना — इसका उद्देश्य गरीब गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसूति कराने के लिए एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करना है।
-
3
राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा — इसका उद्देश्य दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं तथा नवजात शिशुओं को चौबीसों घण्टे निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। एम्बुलेंस के लिए 108 (प्रादेशिक) या 102 (नेशनल) पर फोन करना होता है।
📚 पाठ 8 की मुख्य बातें — एक नज़र में
प्रश्न 1: किशोरावस्था क्या है?
उत्तर: 11 से 19 वर्ष की आयु के बीच की वह अवस्था जिसमें शरीर में जनन परिपक्वता आती है और शारीरिक तथा मानसिक परिवर्तन होते हैं, किशोरावस्था कहलाती है।
प्रश्न 2: द्वितीयक लैंगिक लक्षण क्या होते हैं?
उत्तर: किशोरावस्था में विकसित होने वाले वे लक्षण जो स्त्री और पुरुष में अंतर स्पष्ट करते हैं, जैसे दाढ़ी-मूँछ, स्वर परिवर्तन आदि, द्वितीयक लैंगिक लक्षण कहलाते हैं।
प्रश्न 3: लिंग निर्धारण किसके द्वारा होता है?
उत्तर: लिंग निर्धारण पुरुष के Y गुणसूत्र द्वारा होता है। यदि शुक्राणु में Y गुणसूत्र होगा तो पुत्र (XY) और यदि X गुणसूत्र होगा तो पुत्री (XX) का जन्म होगा।
प्रश्न 4: किशोरावस्था में पोषण क्यों आवश्यक है?
उत्तर: इस अवस्था में शरीर की तीव्र वृद्धि होती है, इसलिए प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और विटामिन युक्त संतुलित आहार अत्यंत आवश्यक होता है।
प्रश्न 5: विश्व जनसंख्या दिवस कब मनाया जाता है?
उत्तर: विश्व जनसंख्या दिवस प्रतिवर्ष 11 जुलाई को मनाया जाता है।
📚 UP Board Class 8 Science – सभी अध्यायों के समाधान
| इकाई | पाठ का नाम (प्रकरण) |
|---|---|
| 1 | विज्ञान एवं तकनीकी के क्षेत्र में नवीनतम प्रगति |
| 2 | मानव निर्मित वस्तुएँ |
| 3 | परमाणु की संरचना |
| 4 | खनिज एवं धातु |
| 5 | सूक्ष्मजीवों का सामान्य परिचय एवं वर्गीकरण |
| 6 | कोशिका से अंग तन्त्र तक |
| 7 | जन्तुओं में जनन |
| 8 | किशोरावस्था |
| 9 | दिव्यांगता |
| 10 | फसल उत्पादन |
| 11 | बल तथा दाब |
| 12 | प्रकाश एवं प्रकाश यंत्र |
| 13 | विद्युतधारा |
| 14 | चुम्बकत्व |
| 15 | कार्बन एवं उसके यौगिक |
| 16 | ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत |
| 17 | कंप्यूटर: नेटवर्किंग और साइबर सुरक्षा |
| 18 | एम. एस. वर्ड (MS Word) |
| 19 | माइक्रो सॉफ्ट एक्सेल (MS Excel) |
| 20 | स्क्रैच द्वारा कोडिंग |
| 21 | पाइथन में यूजर इनपुट |
| 22 | आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस |
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