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UP Board Class 8 Science Chapter 2 मानव निर्मित वस्तुएँ Solution | प्रश्न उत्तर

Class 8 Science Chapter 2 Solution

पाठ 2: मानव निर्मित वस्तुएँ

|| UP Board Class 8 Science — Complete Solution ||
BASIC SHIKSHA SOLUTION ● UPBOARD CLASS 8 SCIENCE SOLUTION
📖 अध्याय परिचय — Class 8 Science Chapter 2

UP Board Class 8 Science Chapter 2 “मानव निर्मित वस्तुएँ” में हम उन वस्तुओं का अध्ययन करते हैं जिन्हें मनुष्य ने अपनी बुद्धि, कौशल और वैज्ञानिक तकनीक से बनाया है। इस अध्याय में संश्लेषित रेशे, प्लास्टिक के प्रकार, काँच, मृत्तिका, साबुन तथा अपमार्जक जैसे महत्वपूर्ण विषयों को समझाया गया है। यहाँ आपको पाठ 2 के सभी प्रश्नों के उत्तर क्रमबद्ध एवं सरल भाषा में मिलेंगे, जो परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं।

📌 Quick Answer — Class 8 Science Chapter 2 मानव निर्मित वस्तुएँ

मानव निर्मित वस्तुएँ वे वस्तुएँ हैं जिन्हें मनुष्य ने कच्चे माल और रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा बनाया है। उदाहरण — प्लास्टिक, काँच, साबुन, उर्वरक, सीमेंट, संश्लेषित रेशे आदि।
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🎯 प्रश्न 1 — सही विकल्प के सामने सही (✓) का चिह्न लगाइए
(क) थर्माकोल का दूसरा नाम है —
(i) टेफ्लॉन
(ii) नायलॉन
(iii) स्टाइरोन ✓
(iv) डेक्रान
उत्तर: (iii) स्टाइरोन
💡 व्याख्या: थर्माकोल का रासायनिक नाम स्टाइरोन (Styron) है। यह पॉलीस्टाइरीन से बना एक हल्का, झागदार प्लास्टिक पदार्थ है जिसका उपयोग पैकेजिंग, इन्सुलेशन और सजावट में होता है। यह ऊष्मा का कुचालक है इसलिए ठंडी और गर्म चीजों को रखने में काम आता है।
📌 याद रखें: टेफ्लॉन का उपयोग नॉन-स्टिक बर्तनों में, नायलॉन का कपड़ों में और डेक्रान/टेरीलीन का वस्त्र निर्माण में होता है — ये सभी अलग-अलग प्लास्टिक/संश्लेषित रेशे हैं।
(ख) पौधों का मुख्य पोषक तत्व है —
(i) गन्धक
(ii) नाइट्रोजन ✓
(iii) ऑक्सीजन
(iv) कार्बन
उत्तर: (ii) नाइट्रोजन
💡 व्याख्या: नाइट्रोजन (N) पौधों का सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। यह पौधों की वृद्धि, पत्तियों की हरियाली (क्लोरोफिल निर्माण) और प्रोटीन बनाने में सहायक होता है। इसीलिए नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों जैसे यूरिया का उपयोग खेतों में किया जाता है।
(ग) फेरिक ऑक्साइड मिलाने से निर्मित काँच होता है —
(i) हरा
(ii) पीला
(iii) गहरा नीला
(iv) बैंगनी ✓
उत्तर: (iv) बैंगनी (हल्का नीला/बैंगनी)
💡 व्याख्या: काँच को विभिन्न रंग देने के लिए उसमें धात्विक ऑक्साइड मिलाए जाते हैं। फेरिक ऑक्साइड मिलाने से हल्का नीला/बैंगनी रंग, कोबाल्ट ऑक्साइड से गहरा नीला, क्रोमियम ऑक्साइड से हल्का हरा और सीरियम ऑक्साइड से पीला रंग का काँच बनाया जाता है।
📌 याद रखने की Trick: Feरिक = बैंगनी (F-B), Cobalt = नीला, Cromium = रा — इन्हें याद रखें!
(घ) खिड़कियों में प्रयोग किया जाता है —
(i) कठोर काँच
(ii) फ्लिंट काँच
(iii) फोटोक्रोमेटिक काँच
(iv) साधारण या मृदु काँच ✓
उत्तर: (iv) साधारण या मृदु काँच
💡 व्याख्या: साधारण काँच (मृदु काँच) सोडियम कार्बोनेट, चूना पत्थर और रेत से बनाया जाता है। यह सस्ता और सरलता से बनने वाला काँच है जिसका उपयोग खिड़की के शीशे, बोतल और परखनली बनाने में होता है। कठोर काँच प्रयोगशाला उपकरणों और फ्लिंट काँच लेंस बनाने में काम आता है।
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✅ प्रश्न 2 — सही कथन के सामने (✓) तथा गलत के सामने (✗) लगाइए
(क) फोटोक्रोमिक काँच प्राप्त करने के लिए उसमें कुछ सिल्वर आयोडाइड मिलाया जाता है।
उत्तर: सही (✓)
💡 व्याख्या: फोटोक्रोमिक काँच में सिल्वर आयोडाइड मिलाया जाता है। धूप में यह विघटित होकर चाँदी की परत बनाता है जिससे काँच गहरे रंग का हो जाता है और छाया में पुनः मिलकर हल्का हो जाता है। यही कारण है कि आजकल के स्मार्ट चश्मे धूप में काले और छाया में हल्के हो जाते हैं।
(ख) रेयान प्राकृतिक रेशा है।
उत्तर: गलत (✗)
💡 व्याख्या: रेयान एक संश्लेषित (कृत्रिम) रेशा है, न कि प्राकृतिक। इसे सेल्यूलोज से रासायनिक प्रक्रिया द्वारा बनाया जाता है। इसीलिए रेयान रेशों को कृत्रिम रेशा भी कहा जाता है। प्राकृतिक रेशों में सूत, ऊन और रेशम आते हैं।
📌 सुधार: सही कथन होगा — "रेयान एक संश्लेषित (कृत्रिम) रेशा है।"
(ग) सीमेंट, साबुन, उर्वरक, प्लास्टिक आदि मानव-निर्मित वस्तुएँ हैं।
उत्तर: सही (✓)
💡 व्याख्या: सीमेंट, साबुन, उर्वरक और प्लास्टिक — ये सभी मनुष्य द्वारा कच्चे माल और रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से बनाई गई वस्तुएँ हैं। ये प्रकृति में स्वाभाविक रूप से नहीं पाई जातीं, इसलिए ये मानव निर्मित वस्तुएँ हैं।
(घ) एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग कीटाणुनाशक के रूप में किया जाता है।
उत्तर: सही (✓)
💡 व्याख्या: एंटीबायोटिक (जैव प्रतिरोधी) दवाएँ हानिकारक जीवाणुओं और कीटाणुओं को नष्ट करने का काम करती हैं। टी.बी., हैजा, निमोनिया जैसी असाध्य बीमारियों का इलाज इन्हीं एंटीबायोटिक दवाओं से होता है। परंतु इन्हें हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए।
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✍️ प्रश्न 3 — रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) मेलामाइन का उपयोग प्लास्टिक के बर्तन बनाने में किया जाता है।
💡 व्याख्या: मेलामाइन एक थर्मोसेटिंग प्लास्टिक है जो उच्च ताप सहन कर सकता है। इसीलिए इससे बने बर्तन गर्म खाद्य पदार्थ रखने पर भी नहीं टूटते और न ही पिघलते हैं। मेलामाइन के बर्तन हल्के, टिकाऊ और आकर्षक होते हैं।

(ख) सूत, रेशम, ऊन प्राकृतिक रेशे हैं।
💡 व्याख्या: सूत कपास के पौधे से, रेशम रेशम के कीड़े से और ऊन भेड़ के बालों से प्राप्त होता है — इसलिए ये प्राकृतिक रेशे कहलाते हैं। इनके विपरीत नायलॉन, पॉलीस्टर, टेरीलीन आदि संश्लेषित (कृत्रिम) रेशे हैं।

(ग) धूप के चश्मे सूर्य की पराबैंगनी किरणों से आँखों को बचाते हैं।
💡 व्याख्या: सूर्य के प्रकाश में पराबैंगनी (Ultraviolet/UV) किरणें होती हैं जो आँखों को हानि पहुँचा सकती हैं और मोतियाबिंद जैसी बीमारियाँ उत्पन्न कर सकती हैं। धूप के चश्मों के काँच में सीरियम ऑक्साइड मिला होता है जो UV किरणों को रोकता है।

(घ) सोडियम हाइड्रॉक्साइड और वनस्पति तेल की क्रिया से साबुन प्राप्त किया जाता है।
💡 व्याख्या: साबुन बनाने की इस प्रक्रिया को साबुनीकरण (Saponification) कहते हैं। सोडियम हाइड्रॉक्साइड (कास्टिक सोडा) और वनस्पति तेल या वसा की परस्पर क्रिया से उच्च वसीय अम्लों के सोडियम लवण बनते हैं — यही साबुन है।

(ड़) संश्लेषित रेशों से बने कपड़े अधिक टिकाऊ और सस्ते होते हैं।
💡 व्याख्या: नायलॉन, पॉलीस्टर, टेरीलीन जैसे संश्लेषित रेशे पेट्रोलियम पदार्थों से बनाए जाते हैं। ये सूती कपड़े की तुलना में अधिक मजबूत, टिकाऊ, जल्दी सूखने वाले और कम महंगे होते हैं। इसीलिए आजकल इनका उपयोग अत्यधिक बढ़ गया है।
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📝 प्रश्न 4 — संक्षेप में उत्तर दीजिए
(क) प्राकृतिक एवं मानव-निर्मित वस्तुओं से क्या समझते हैं? उत्तर:

हमारे चारों ओर दिखाई देने वाली वस्तुओं को दो भागों में बाँटा जा सकता है। जीव-जंतु, पेड़-पौधे, मिट्टी, खनिज, नदियाँ आदि प्रकृति प्रदत्त (प्राकृतिक) वस्तुएँ हैं — इन्हें किसी ने नहीं बनाया, ये स्वाभाविक रूप से प्रकृति में उपलब्ध हैं।

दूसरी ओर, मकान, गाड़ी, साइकिल, खिलौना, साबुन, कपड़ा, उर्वरक, काँच आदि वे वस्तुएँ हैं जिन्हें मनुष्य ने अपनी बुद्धि और कौशल से कच्चे माल द्वारा कारखानों में बनाया है — ये मानव निर्मित वस्तुएँ कहलाती हैं।

💡 सरल उदाहरण: आम का पेड़ — प्राकृतिक | आम के रस से बना जूस — मानव निर्मित।
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(ख) किन्हीं चार प्रकार के काँच का नाम लिखिए। उत्तर:

काँच के चार प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं — साधारण या मृदु काँच जो बोतल और खिड़की के शीशे बनाने में काम आता है, कठोर काँच जो प्रयोगशाला के उपकरण जैसे बीकर और फ्लास्क बनाने में उपयोगी है, फ्लिंट या प्रकाशीय काँच जिससे लेंस और प्रिज्म बनाए जाते हैं, तथा फोटोक्रोमिक काँच जिसमें सिल्वर आयोडाइड होता है और जो धूप में गहरे रंग का हो जाता है।

📌 याद रखें: काँच कोई यौगिक नहीं है — यह धातुओं के सिलिकेटों का विलयन (मिश्रण) है जिसका कोई निश्चित गलनांक नहीं होता।
(ग) पॉलीथीन, टेफ्लॉन, एक्रिलिक तथा बेकेलाइट के एक-एक उपयोग लिखिए। उत्तर:

पॉलीथीन का उपयोग थैलियाँ (पॉलीथीन बैग) बनाने में किया जाता है। टेफ्लॉन का उपयोग नॉन-स्टिक बर्तनों पर परत चढ़ाने में किया जाता है क्योंकि इस पर तेल और जल नहीं चिपकता। एक्रिलिक का उपयोग ऊनी वस्त्रों की तरह दिखने वाले कृत्रिम कपड़े और पेंट बनाने में होता है। बेकेलाइट (थर्मोसेटिंग प्लास्टिक) का उपयोग बिजली के स्विच, सॉकेट और कुकर के हैंडल बनाने में किया जाता है।

💡 विशेष: टेफ्लॉन का गलनांक बहुत ऊँचा होता है और यह अज्वलनशील है, इसीलिए यह उच्च तापमान पर भी सुरक्षित रहता है।
(घ) साबुन और अपमार्जक में क्या अंतर है? उत्तर:

साबुन रासायनिक रूप से उच्च वसीय अम्लों के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं जो सोडियम हाइड्रॉक्साइड और वनस्पति तेल की परस्पर क्रिया से बनते हैं। साबुन केवल मृदु जल में झाग देता है — कठोर जल में यह अवक्षेप बनाता है जिससे कपड़े ठीक से साफ नहीं होते।

अपमार्जक (Detergent) एक ऐसा रासायनिक पदार्थ है जो कठोर जल के साथ भी झाग देता है और कपड़ों को भली-भाँति साफ करता है। यह रासायनिक दृष्टि से साबुन से भिन्न होता है। बाज़ार में मिलने वाली धोने की अधिकांश टिकियाँ और पाउडर अपमार्जक ही होते हैं।

📌 मुख्य अंतर: साबुन कठोर जल में अच्छा काम नहीं करता, जबकि अपमार्जक कठोर और मृदु दोनों प्रकार के जल में समान रूप से प्रभावी रहता है।
(ड़) मृत्तिका क्या है? उत्तर:

कुम्हार एक विशेष प्रकार की चिकनी मिट्टी (क्ले) का उपयोग करते हैं। इस गुँथी हुई चिकनी मिट्टी से चाक द्वारा पहले कच्चे बर्तन बनाए जाते हैं, फिर उन्हें उच्च ताप पर भट्टी में पकाया जाता है। इस प्रकार पकाए गए बर्तनों को ही मृत्तिका (Pottery) कहते हैं।

चीनी मिट्टी भी एक प्रकार की सफेद मृत्तिका है जिससे कप-प्लेट, बिजली के फ्यूज होल्डर और स्पार्क प्लग के होल्डर बनाए जाते हैं। मृत्तिका की वस्तुओं पर लेड ऑक्साइड या टिन ऑक्साइड का लेप चढ़ाकर गर्म करने पर ये जलरोधक (Waterproof) और चमकीली हो जाती हैं।

💡 विशेष: आग्नेय चट्टानों में फेलस्पार खनिज के क्षरण से प्राप्त विशेष मिट्टी को बारीक छानकर और गूँधकर प्लास्टिक जैसी लचीली अवस्था में लाया जाता है, तब इससे खिलौने, मूर्तियाँ और टाइल्स बनाए जाते हैं।
(च) संश्लेषित रेशे क्या हैं? उत्तर:

नायलॉन, पॉलीस्टर, डेक्रान, रेयान आदि मानव निर्मित रेशे हैं जिन्हें संश्लेषित रेशे कहते हैं। इनमें से बहुत से रेशे पेट्रोलियम पदार्थों से प्राप्त किए जाते हैं। रासायनिक दृष्टि से ये उच्च अणुभार वाले बहुलक यौगिक होते हैं।

संश्लेषित रेशों से बने वस्त्र सूती वस्त्रों की तुलना में अधिक आकर्षक, मजबूत और टिकाऊ होते हैं। इन्हें हाथ से फाड़ना कठिन होता है और ये जल्दी सूख जाते हैं। इसीलिए नायलॉन, टेरीलीन और पॉलीस्टर के वस्त्र आजकल अत्यंत लोकप्रिय हैं।

📌 याद रखें: रेयान रेशों को कृत्रिम रेशा भी कहा जाता है। यह संश्लेषित रेशा है, प्राकृतिक नहीं।
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🔗 प्रश्न 5 — खंड 'क' के अधूरे वाक्यों को खंड 'ख' की सहायता से पूरा कीजिए
स्तम्भ (क)सही मिलान (स्तम्भ ख)
क. मनुष्य अथवा मशीनों द्वारा तैयार की गयी वस्तुएँ (ब) मानव-निर्मित वस्तुएँ कहलाती हैं।
ख. मकान बनाने में (द) ईंट, सीमेंट, सरिया आदि का उपयोग किया जाता है।
ग. सीमेंट के नये प्लास्टर पर (अ) पानी का छिड़काव आवश्यक होता है।
घ. रेयान रेशों को (स) कृत्रिम रेशा भी कहा जाता है।
💡 स्मरण बिंदु: सीमेंट के नये प्लास्टर पर पानी का छिड़काव इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे सुई के समान रवे (क्रिस्टल) बनते हैं जो आपस में गुँथकर सीमेंट को कठोर और मजबूत बनाते हैं। यह रासायनिक प्रक्रिया पूरी होने में लगभग एक सप्ताह लगता है।
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📖 प्रश्न 6 — निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(क) भूमि में पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए कौन-कौन से उपाय किए जा सकते हैं? उत्तर:

खेतों में बार-बार फसल उगाने से भूमि में उपस्थित पोषक तत्व धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। इनकी पूर्ति के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं —

  • 1
    रासायनिक उर्वरकों का उपयोग: नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश युक्त रासायनिक उर्वरक जैसे यूरिया, DAP आदि मिट्टी में डालने से पोषक तत्वों की तेजी से पूर्ति होती है।
  • 2
    जैविक खाद (कम्पोस्ट): पशुओं के गोबर, फसल अवशेष और जैविक पदार्थों से बनी कम्पोस्ट खाद मिट्टी को उपजाऊ बनाती है और लंबे समय तक पोषक तत्व प्रदान करती है।
  • 3
    हरी खाद: कुछ विशेष पौधे जैसे सनई और ढैंचा को मिट्टी में मिला देने से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है।
  • 4
    फसल चक्र (Crop Rotation): अलग-अलग वर्षों में अलग-अलग प्रकार की फसलें उगाने से मिट्टी का संतुलन बना रहता है। दलहनी फसलें (मटर, चना) मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करती हैं।
📘 निष्कर्ष: भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए रासायनिक और जैविक उपायों का संतुलित मिश्रण सबसे उत्तम माना जाता है।
(ख) धूप में बाहर निकलने पर हम धूप के चश्मों का प्रयोग क्यों करते हैं? उत्तर:

सूर्य के प्रकाश में पराबैंगनी (Ultraviolet/UV) किरणें होती हैं जो हमारी आँखों के लिए हानिकारक होती हैं। इन किरणों के अत्यधिक संपर्क से आँखों में जलन, मोतियाबिंद और दृष्टि दोष जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

धूप के चश्मों के काँच में सीरियम ऑक्साइड मिला होता है जिससे वह स्थायी रूप से रंगीन हो जाता है और UV किरणों को रोकता है। आजकल फोटोक्रोमिक काँच के चश्मे भी प्रयोग में हैं जिनमें सिल्वर आयोडाइड होता है — धूप में ये गहरे रंग के हो जाते हैं और छाया में आने पर हल्के हो जाते हैं।

💡 विशेष बात: साधारण रंगीन धूप के चश्मे छाया में आने पर साफ नहीं दिखाई देते क्योंकि उनका रंग बदलता नहीं है, परंतु फोटोक्रोमिक चश्मे इस समस्या को दूर करते हैं।
(ग) संश्लेषित रेशों से बने वस्त्र जल्दी क्यों सूख जाते हैं? उत्तर:

संश्लेषित रेशों जैसे नायलॉन, पॉलीस्टर, टेरीलीन की आणविक संरचना इस प्रकार की होती है कि इनके रेशों के बीच बहुत कम रिक्त स्थान (छिद्र) होते हैं। इसके कारण ये रेशे जल का अवशोषण बहुत कम मात्रा में करते हैं।

इसके विपरीत, सूती कपड़े के रेशों में अधिक छिद्र होते हैं जो अधिक पानी सोख लेते हैं। इसीलिए जब संश्लेषित वस्त्रों को भिगोया जाता है तो उनमें पानी कम रहता है और वे जल्दी सूख जाते हैं, जबकि सूती कपड़े अधिक पानी सोखने के कारण देर से सूखते हैं।

📌 यही कारण है कि खेलकूद और व्यायाम में पहने जाने वाले कपड़े संश्लेषित रेशों के बनाए जाते हैं — ये पसीना शीघ्र वाष्पित करते हैं।
(घ) जैव निम्नीकरणीय एवं जैव अनिम्नीकरणीय में अंतर लिखिए। उत्तर:

वे पदार्थ जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं जैसे जीवाणुओं की क्रिया द्वारा सरलता से अपघटित हो जाते हैं, जैव निम्नीकरणीय (Biodegradable) कहलाते हैं। जैसे — फल-सब्जियों के छिलके, गोबर, कागज, सूती कपड़ा, लकड़ी आदि। ये पदार्थ मिट्टी में मिलकर उसे उपजाऊ बनाते हैं।

दूसरी ओर वे पदार्थ जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा सरलता से विघटित नहीं होते, जैव अनिम्नीकरणीय (Non-biodegradable) कहलाते हैं। जैसे — प्लास्टिक, पॉलीथीन, काँच, धातुएँ आदि। ये पर्यावरण में लंबे समय तक बने रहकर प्रदूषण का कारण बनते हैं।

📘 निष्कर्ष: पॉलीथीन और प्लास्टिक के जैव अनिम्नीकरणीय होने के कारण ही इनका निस्तारण एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या है। इसीलिए हमें प्लास्टिक का उपयोग कम करना चाहिए और उसका सही तरीके से निस्तारण करना चाहिए।
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❓ FAQs — मानव निर्मित वस्तुएँ (Class 8 Science)
प्रश्न: मानव निर्मित वस्तुएँ क्या हैं?
उत्तर: वे वस्तुएँ जिन्हें मनुष्य अपनी बुद्धि और तकनीक से कच्चे माल द्वारा तैयार करता है, मानव निर्मित वस्तुएँ कहलाती हैं।
प्रश्न: संश्लेषित रेशे क्या होते हैं?
उत्तर: नायलॉन, पॉलीस्टर, रेयान आदि मानव द्वारा रासायनिक प्रक्रिया से बनाए गए रेशे संश्लेषित रेशे कहलाते हैं।
प्रश्न: साबुन और अपमार्जक में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर: साबुन कठोर जल में प्रभावी नहीं होता जबकि अपमार्जक कठोर और मृदु दोनों प्रकार के जल में कार्य करता है।
प्रश्न: जैव निम्नीकरणीय पदार्थ क्या हैं?
उत्तर: जो पदार्थ प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा आसानी से अपघटित हो जाते हैं, वे जैव निम्नीकरणीय कहलाते हैं।
प्रश्न: UP Board Class 8 Science Chapter 2 Solution कहाँ मिलेगा?
उत्तर: Basic Shiksha Solution पर इस अध्याय का सम्पूर्ण समाधान उपलब्ध है।
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इकाई पाठ का नाम (प्रकरण)
1 विज्ञान एवं तकनीकी के क्षेत्र में नवीनतम प्रगति
2 मानव निर्मित वस्तुएँ
3 परमाणु की संरचना
4 खनिज एवं धातु
5 सूक्ष्मजीवों का सामान्य परिचय एवं वर्गीकरण
6 कोशिका से अंग तन्त्र तक
7 जन्तुओं में जनन
8 किशोरावस्था
9 दिव्यांगता
10 फसल उत्पादन
11 बल तथा दाब
12 प्रकाश एवं प्रकाश यंत्र
13 विद्युतधारा
14 चुम्बकत्व
15 कार्बन एवं उसके यौगिक
16 ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत
17 कंप्यूटर: नेटवर्किंग और साइबर सुरक्षा
18 एम. एस. वर्ड (MS Word)
19 माइक्रो सॉफ्ट एक्सेल (MS Excel)
20 स्क्रैच द्वारा कोडिंग
21 पाइथन में यूजर इनपुट
22 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

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