UP Board Class 8 Science Chapter 5 सूक्ष्मजीवों का सामान्य परिचय एवं वर्गीकरण Solution
BASIC SHIKSHA SOLUTION ● UPBOARD CLASS 8 SCIENCE SOLUTION
📖 पाठ का संक्षिप्त परिचय:
UP Board Class 8 Science Chapter 5 सूक्ष्मजीवों का सामान्य परिचय एवं वर्गीकरण
एक महत्वपूर्ण अध्याय है जिसमें सूक्ष्मजीवों के प्रकार, उपयोग, हानियाँ, संक्रामक रोग, प्रतिजैविक दवाएँ तथा टीकाकरण के विषय में विस्तार से बताया गया है।
इस पोस्ट में आपको UP Board Class 8 Science Chapter 5 Solution के अंतर्गत
बहुविकल्पीय प्रश्न, रिक्त स्थान, सही-गलत, मिलान तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में मिलेंगे।
UP Board Class 8 Science Chapter 5 Solution:
यहाँ “सूक्ष्मजीवों का सामान्य परिचय एवं वर्गीकरण” पाठ के सभी प्रश्न-उत्तर, सारांश, प्रतिजैविक दवाएँ, टीकाकरण तथा रोगों से बचाव के तरीके सरल एवं परीक्षा उपयोगी रूप में दिए गए हैं।
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Basic Shiksha Solution ● बहुविकल्पीय प्रश्न
(क) सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं —
(अ) हवा
(ब) पानी
(स) मिट्टी
(द) सर्वत्र
✅ उत्तर: (द) सर्वत्र
💡 व्याख्या: सूक्ष्मजीव सर्वव्यापी (Ubiquitous) होते हैं — अर्थात् ये हवा, पानी, मिट्टी, पौधों एवं जन्तुओं के शरीर के अन्दर एवं बाहर — सभी जगह पाए जाते हैं। ये बर्फ जैसे अत्यंत ठंडे स्थानों से लेकर गर्म पानी के झरनों, समुद्र की तली और दलदल तक — हर प्रतिकूल परिस्थिति में भी जीवित रहते हैं। इसीलिए विकल्प (द) सर्वत्र सही उत्तर है।
📌 याद रखें: सूक्ष्मजीव = सर्वव्यापी। इन्हें देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी यंत्र (Microscope) की आवश्यकता होती है।
(ख) टी.बी. (तपेदिक) रोग होता है —
(अ) प्रोटोजोआ द्वारा
(ब) कवक द्वारा
(स) जीवाणु द्वारा
(द) वायरस द्वारा
✅ उत्तर: (स) जीवाणु द्वारा
💡 व्याख्या: टी.बी. (तपेदिक / क्षय रोग — Tuberculosis) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु द्वारा होता है। यह एक संक्रामक रोग है जो वायु द्वारा फैलता है — जब कोई रोगी खाँसता या छींकता है तो जीवाणु हवा में फैल जाते हैं। इसका उपचार प्रतिजैविक दवाओं (Antibiotics) से होता है और इसे BCG टीके से रोका जा सकता है।
📌 रोग और कारक याद करें: टी.बी. → जीवाणु | मलेरिया → प्रोटोजोआ (प्लाज्मोडियम) | दाद → कवक | चेचक, पोलियो, डेंगू → विषाणु।
(ग) चना/मटर की जड़ों की गाँठों में पाया जाने वाला जीवाणु है —
(अ) राइजोबियम
(ब) क्लॉस्ट्रीडियम
(स) एशेरिया कोलाई
(द) एजोटोबैक्टर
✅ उत्तर: (अ) राइजोबियम
💡 व्याख्या: राइजोबियम (Rhizobium) नामक जीवाणु दलहनी पौधों (चना, मटर, अरहर, सोयाबीन आदि) की जड़ों में गाँठों (Root Nodules) के रूप में रहता है। यह जीवाणु वायुमण्डल की मुक्त नाइट्रोजन को नाइट्रेट व नाइट्राइट में बदलता है — इसे नाइट्रोजन स्थिरीकरण कहते हैं। इससे भूमि की उर्वरता बढ़ती है। एजोटोबैक्टर भी नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है, परन्तु वह मिट्टी में स्वतंत्र रूप से रहता है, जड़ों में नहीं।
(घ) कुकुरमुत्ता है —
(अ) कवक
(ब) शैवाल
(स) जीवाणु
(द) प्रोटोजोआ
✅ उत्तर: (अ) कवक
💡 व्याख्या: कुकुरमुत्ता (Mushroom) एक कवक (Fungi) है। यह बरसात के दिनों में कूड़े-कचरे पर छातेनुमा संरचना के रूप में उगता है। इसका वैज्ञानिक नाम एगैरिकस है। कवकों में प्रकाश-संश्लेषण नहीं होता और ये मृत-कार्बनिक पदार्थों पर पलते हैं। मशरूम (कुकुरमुत्ता) का उपयोग सब्जी के रूप में भी किया जाता है।
(ङ) पेचिस रोग होता है —
(अ) अमीबा द्वारा
(ब) पैरामीशियम द्वारा
(स) एण्टअमीबा द्वारा
(द) प्लाज्मोडियम द्वारा
✅ उत्तर: (स) एण्टअमीबा द्वारा
💡 व्याख्या: एण्टअमीबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba histolytica) — यह एक प्रोटोजोआ है जो मनुष्य की आँत में परजीवी के रूप में रहता है और पेचिस (Dysentery/Amoebiasis) नामक रोग उत्पन्न करता है। यह दूषित जल और भोजन से फैलता है। ध्यान रखें — साधारण अमीबा (Amoeba proteus) पेचिस नहीं करता; एण्टअमीबा करता है। प्लाज्मोडियम से मलेरिया होता है।
📌 प्रोटोजोआ रोग: एण्टअमीबा → पेचिस | प्लाज्मोडियम → मलेरिया। दोनों याद रखें।
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Basic Shiksha Solution ● रिक्त स्थान पूर्ति
(क) सूक्ष्मजीवों को देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी यंत्र (Microscope) की आवश्यकता होती है।
💡 व्याख्या: सूक्ष्मजीव आकार में अत्यंत छोटे होते हैं — इन्हें नंगी आँखों से नहीं देखा जा सकता। इन्हें देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी (Microscope) की आवश्यकता होती है। साधारण रोटी पर उगी फफूँद को देखने के लिए हैण्डलेंस पर्याप्त है, किन्तु जीवाणु और विषाणु देखने के लिए क्रमशः प्रकाश सूक्ष्मदर्शी और इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की जरूरत होती है।
(ख) जीवाणु द्वारा नींबू के पौधे में कैंकर (Canker) नामक रोग होता है।
💡 व्याख्या: जैन्थोमोनास साइट्री (Xanthomonas citri) नामक जीवाणु नींबू के पौधों पर कैंकर रोग उत्पन्न करता है। इस रोग में पत्तियों और फलों पर धब्बे पड़ जाते हैं और फसल नष्ट हो जाती है। यह एक पौधों का जीवाणुजनित रोग है।
(ग) प्रथम प्रतिजैविक दवा पेनीसिलिन (Penicillin) थी।
💡 व्याख्या: सन् 1929 में अलेक्जेण्डर फ्लेमिंग ने पेनीसिलियम नामक फफूँद से दुनिया की पहली प्रतिजैविक दवा पेनीसिलिन की खोज की। उन्होंने देखा कि फफूँद जीवाणुओं की वृद्धि को रोकती है। यह खोज चिकित्सा विज्ञान में क्रांतिकारी मानी जाती है।
(घ) डेंगू रोग टाइगर मच्छर (एडीज एजिप्टी) मच्छर के काटने से होता है।
💡 व्याख्या: डेंगू एक विषाणुजनित रोग है। इसके विषाणु टाइगर मच्छर (Aedes aegypti) के काटने से एक व्यक्ति से दूसरे में पहुँचते हैं। यह मच्छर दिन में काटता है — यही इसकी विशेषता है। चिकनगुनिया भी इसी मच्छर से फैलता है।
(ङ) हैजा रोग दूषित जल से फैलता है।
💡 व्याख्या: हैजा (Cholera) विब्रियो कॉलेरी नामक जीवाणु से होता है और यह मुख्यतः दूषित जल पीने से फैलता है। रोगी के मल-मूत्र से जीवाणु जल में मिल जाते हैं और स्वस्थ व्यक्ति उसे पी लेता है। इसीलिए बाढ़ के बाद हैजा का प्रकोप अधिक होता है।
(च) राइजोबियम जीवाणु नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं।
💡 व्याख्या: राइजोबियम जीवाणु वायुमण्डल की मुक्त नाइट्रोजन (N₂) को नाइट्रेट (NO₃⁻) व नाइट्राइट में बदलकर मिट्टी में स्थिर कर देते हैं। यह क्रिया नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) कहलाती है। इससे दलहनी फसलें उगाने से मिट्टी की उर्वरता स्वतः बढ़ जाती है।
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Basic Shiksha Solution ● सही / गलत
(क) सभी सूक्ष्मजीव हानिकारक होते हैं।
❌ उत्तर: गलत (✗)
💡 व्याख्या: यह धारणा बिल्कुल गलत है। सूक्ष्मजीव हमारे लिए उपयोगी और हानिकारक दोनों होते हैं। राइजोबियम जीवाणु नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है, लैक्टोबैसिलस जीवाणु दही बनाता है, पेनीसिलियम कवक से पेनीसिलिन दवा बनती है और यीस्ट से ब्रेड बनती है — ये सब उपयोगी सूक्ष्मजीव हैं।
📌 सुधार: सही कथन — "सूक्ष्मजीव हमारे लिए उपयोगी एवं हानिकारक दोनों होते हैं।"
(ख) विषाणुजनित रोगों के उपचार में प्रतिजैविक दवाओं का प्रयोग किया जाता है।
❌ उत्तर: गलत (✗)
💡 व्याख्या: प्रतिजैविक (Antibiotic) दवाएँ केवल जीवाणुजनित रोगों में कार्य करती हैं — जैसे टी.बी., हैजा, टाइफाइड, निमोनिया। विषाणुजनित रोगों जैसे चेचक, पोलियो, डेंगू, चिकनगुनिया में प्रतिजैविक दवाएँ बेकार होती हैं। इनके लिए एंटीवायरल दवाएँ या टीकाकरण किया जाता है।
📌 सुधार: सही कथन — "विषाणुजनित रोगों में एंटीवायरल दवाओं का प्रयोग किया जाता है।"
(ग) मॉर्केला (गुच्छी) नामक कवक का उपयोग भोजन के रूप में होता है।
✅ उत्तर: सही (√)
💡 व्याख्या: मॉर्केला (गुच्छी) एक खाने योग्य कवक है जिसे सब्जी के रूप में खाया जाता है। यह हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाती है और बहुत महँगी होती है। इसी प्रकार एगैरिकस (मशरूम/कुकुरमुत्ता) भी एक कवक है जिसे सब्जी के रूप में प्रयोग किया जाता है।
(घ) पोलियो का टीका ड्रॉप के रूप में पिलाया जाता है।
✅ उत्तर: सही (√)
💡 व्याख्या: पोलियो का टीका OPV (Oral Polio Vaccine) मुँह के द्वारा बूँदों (ड्रॉप्स) के रूप में पिलाया जाता है। यह बच्चों को जन्म के समय तथा 6, 10 और 14 सप्ताह की आयु में दिया जाता है। पल्स पोलियो अभियान में यही टीका प्रयोग होता है।
(ङ) चेचक एक संक्रामक रोग है।
✅ उत्तर: सही (√)
💡 व्याख्या: चेचक (Smallpox) एक विषाणुजनित संक्रामक रोग है जो वायु, सम्पर्क और छींक-खाँसी के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है। WHO ने 1980 में घोषणा की कि चेचक को टीकाकरण द्वारा विश्व से समाप्त कर दिया गया है — यह इतिहास का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान था।
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Basic Shiksha Solution ● स्तम्भ मिलान
| स्तम्भ (क) — रोग | सही मिलान (स्तम्भ ख) — कारक |
| क. मलेरिया | ✅ (द) प्रोटोजोआ (प्लाज्मोडियम) |
| ख. एड्स | ✅ (स) विषाणु (HIV) |
| ग. टाइफाइड | ✅ (ब) जीवाणु (साल्मोनेला) |
| घ. दाद | ✅ (अ) कवक (ट्राइकोफाइटन) |
💡 स्मरण बिंदु: मलेरिया — प्लाज्मोडियम (प्रोटोजोआ), वाहक मादा एनाफिलीज मच्छर। एड्स — HIV विषाणु। टाइफाइड — साल्मोनेला टाइफी जीवाणु, दूषित जल से। दाद — ट्राइकोफाइटन कवक, त्वचा पर होता है।
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Basic Shiksha Solution ● लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 5: सूक्ष्मजीवों का आर्थिक महत्व बताइए।
उत्तर:
सूक्ष्मजीव हमारे जीवन और अर्थव्यवस्था को गहरे स्तर पर प्रभावित करते हैं — ये हमारे लिए उपयोगी भी हैं और हानिकारक भी। इनके आर्थिक महत्व को दो भागों में समझा जा सकता है —
उपयोगी सूक्ष्मजीव — लाभकारी आर्थिक प्रभाव
-
1
प्रतिजैविक दवाएँ (Antibiotics) — सूक्ष्मजीवों से अनेक जीवनरक्षक दवाएँ बनाई जाती हैं। पेनीसिलिन (पेनीसिलियम फफूँद से), स्ट्रेप्टोमाइसिन (जीवाणु से) और क्लोरेलिन (शैवाल से) — ये दवाएँ टी.बी., हैजा, टाइफाइड जैसे रोगों का उपचार करती हैं।
-
2
खाद्य उद्योग — दूध से दही बनाने में लैक्टोबैसिलस जीवाणु, ब्रेड व पनीर बनाने में यीस्ट (कवक), सिरका बनाने में जीवाणु — इन सभी में सूक्ष्मजीवों का महत्वपूर्ण योगदान है।
-
3
नाइट्रोजन स्थिरीकरण — राइजोबियम, एजोटोबैक्टर और साइनोबैक्टीरिया मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं जिससे फसल उत्पादन और किसानों की आय बढ़ती है।
-
4
कार्बनिक पदार्थों का अपघटन — सूक्ष्मजीव मृत जीवों के शरीर को अपघटित करके पोषक तत्व मिट्टी में वापस करते हैं, जिससे मिट्टी उपजाऊ बनती है।
-
5
उद्योग-धन्धे — दूध उद्योग, चमड़ा उद्योग, तम्बाकू उद्योग, चाय उद्योग — सभी में जीवाणु का उपयोग होता है।
हानिकारक सूक्ष्मजीव — हानिकारक आर्थिक प्रभाव
-
1
सूक्ष्मजीव मनुष्यों में टी.बी., हैजा, मलेरिया, डेंगू जैसे रोग उत्पन्न करते हैं — इससे श्रम-शक्ति और उत्पादकता घटती है।
-
2
पक्सीनिया कवक से गेहूँ में काला किट्ट रोग होता है जिससे हर वर्ष अरबों रुपये की फसल नष्ट हो जाती है।
-
3
राइजोपस, म्यूकर जैसे कवक रोटी, अचार, मुरब्बा आदि खाद्य पदार्थों को नष्ट करते हैं — इससे भोजन की बर्बादी होती है।
-
4
पॉलीपोरस कवक इमारती लकड़ी को सड़ा देता है जिससे फर्नीचर और भवन निर्माण उद्योग को नुकसान होता है।
📌 संक्षेप: सूक्ष्मजीव चिकित्सा, कृषि और उद्योग — तीनों क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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प्रश्न 6: प्रतिजैविक दवाएँ किसे कहते हैं? इनका क्या उपयोग है?
उत्तर:
प्रतिजैविक दवाएँ (Antibiotics) — परिभाषा
वे दवाएँ जो रोग फैलाने वाले जीवाणुओं के प्रतिरोध में प्रयुक्त होती हैं और शरीर में पहुँचते ही रोगाणुओं को नष्ट कर देती हैं, प्रतिजैविक दवाएँ (Antibiotics) कहलाती हैं। ये दवाएँ स्वयं सूक्ष्मजीवों (फफूँद, जीवाणु, शैवाल) द्वारा बनाई जाती हैं।
प्रतिजैविक = सूक्ष्मजीवों द्वारा बनी दवा जो जीवाणुओं को नष्ट करे
प्रमुख प्रतिजैविक दवाएँ और उनके स्रोत
| दवा का नाम | स्रोत (सूक्ष्मजीव) | खोजकर्ता |
| पेनीसिलिन | पेनीसिलियम (फफूँद) | अलेक्जेण्डर फ्लेमिंग (1929) |
| स्ट्रेप्टोमाइसिन | स्ट्रेप्टोमाइसेस (जीवाणु) | वाक्समैन |
| क्लोरेलिन | क्लोरेला (शैवाल) | — |
प्रतिजैविक दवाओं का उपयोग
- ➤
टी.बी. (तपेदिक), हैजा, टाइफाइड, निमोनिया जैसे जीवाणुजनित रोगों के उपचार में।
- ➤
घावों में जीवाणु संक्रमण रोकने के लिए।
- ➤
शल्य-चिकित्सा (Operation) के बाद संक्रमण से बचाव के लिए।
📘 महत्वपूर्ण सावधानी: प्रतिजैविक दवाएँ केवल जीवाणुजनित रोगों में ही काम करती हैं। विषाणुजनित रोगों (जैसे सर्दी-जुकाम, डेंगू, एड्स) में ये बेकार होती हैं। इन्हें चिकित्सक की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए — अन्यथा जीवाणु इनके प्रति प्रतिरोधी (Resistant) हो जाते हैं।
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प्रश्न 7: टीकाकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
टीकाकरण (Vaccination) — परिभाषा
जब मृत अथवा निष्क्रिय सूक्ष्मजीवों को किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रविष्ट कराया जाता है, तो शरीर की कोशिकाएँ उनसे लड़ने के लिए प्रतिरक्षी (Antibodies) बनाती हैं और उन्हें नष्ट कर देती हैं। यह प्रतिरक्षा शरीर में स्थायी रूप से बनी रहती है और भविष्य में उसी रोगाणु के हमले से शरीर की रक्षा करती है। इस प्रक्रिया को टीकाकरण (Vaccination) कहते हैं और जो पदार्थ दिया जाता है उसे टीका / वैक्सीन (Vaccine) कहते हैं।
मृत/निष्क्रिय रोगाणु → शरीर में प्रविष्ट → प्रतिरक्षी बनते हैं → रोग से स्थायी सुरक्षा
टीकाकरण से रोके जाने वाले प्रमुख रोग
- ➤
चेचक — चेचक के टीके से विश्व से यह रोग पूर्णतः समाप्त हो चुका है।
- ➤
पोलियो — OPV ड्रॉप द्वारा जन्म के समय व बाद में।
- ➤
क्षय रोग (टी.बी.) — BCG टीका।
- ➤
हेपेटाइटिस, डिप्थीरिया, टेटनस, काली खाँसी — DPT टीका।
📌 खोजकर्ता: टीकाकरण की विधि का सर्वप्रथम प्रयोग एडवर्ड जेनर ने 1796 में चेचक के विरुद्ध किया था। आधुनिक टीकाकरण सिद्धांत लुई पाश्चर ने विकसित किया।
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प्रश्न 8: सूक्ष्मजीवों से होने वाली बीमारियाँ तथा उनसे बचाव के तरीके बताइए।
उत्तर:
मनुष्यों में सूक्ष्मजीवों द्वारा होने वाले प्रमुख रोग
| रोग का नाम | कारक सूक्ष्मजीव | संचरण का तरीका |
| टी.बी. (तपेदिक) | जीवाणु | वायु (खाँसी/छींक) |
| हैजा | जीवाणु | दूषित जल/भोजन |
| टाइफाइड | जीवाणु | दूषित जल/भोजन |
| मलेरिया | प्रोटोजोआ (प्लाज्मोडियम) | मादा एनाफिलीज मच्छर |
| डेंगू / चिकनगुनिया | विषाणु | टाइगर मच्छर (एडीज) |
| चेचक / पोलियो | विषाणु | वायु / सम्पर्क |
| दाद | कवक | संक्रमित व्यक्ति का सम्पर्क |
| पेचिस | प्रोटोजोआ (एण्टअमीबा) | दूषित जल/भोजन/मिट्टी |
| एड्स | विषाणु (HIV) | रक्त, असुरक्षित सम्पर्क |
बचाव के उपाय
-
1
शुद्ध जल का प्रयोग — पीने के पानी को उबालकर या फ़िल्टर करके पिएँ। हैजा, टाइफाइड, पेचिस से बचाव होगा।
-
2
मच्छरों से बचाव — घर के आस-पास पानी न जमा होने दें, मच्छरदानी का प्रयोग करें, मच्छर-रोधी दवाओं का छिड़काव करें — मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया से बचाव।
-
3
टीकाकरण — चेचक, पोलियो, टी.बी., हेपेटाइटिस आदि के टीके समय पर लगवाएँ।
-
4
व्यक्तिगत स्वच्छता — नियमित स्नान, साबुन से हाथ धोना, खाँसते-छींकते समय मुँह पर रूमाल रखना।
-
5
भोजन का संरक्षण — खाद्य पदार्थों को ढककर रखें, रेफ्रिजरेटर में रखें, बासी भोजन न खाएँ।
-
6
वातावरणीय स्वच्छता — खुले में शौच न करें, कूड़े का उचित निपटान करें, नालियाँ साफ रखें।
-
7
प्रतिजैविक दवाओं का उचित प्रयोग — चिकित्सक की सलाह से प्रतिजैविक दवाएँ लें। जीवाणुजनित रोगों में ये अत्यंत प्रभावी हैं।
📘 संक्रमण के मुख्य माध्यम याद रखें: वायु द्वारा (सर्दी, टी.बी.) → दूषित जल/भोजन द्वारा (हैजा, टाइफाइड) → मिट्टी द्वारा (पेट के कीड़े) → संक्रमित व्यक्ति/वाहक (मलेरिया, डेंगू, एड्स)।
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Basic Shiksha Solution ● विशेष — एड्स
एड्स क्या है? इसके कारण, लक्षण और बचाव बताइए।
उत्तर:
एड्स — परिचय
AIDS का पूरा नाम Acquired Immuno Deficiency Syndrome है। यह रोग HIV (Human Immunodeficiency Virus) नामक विषाणु द्वारा होता है। इस रोग में व्यक्ति की रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) धीरे-धीरे नष्ट हो जाती है — शरीर सामान्य रोगों से भी नहीं लड़ पाता और अंत में रोगी की मृत्यु हो जाती है।
AIDS = Acquired Immuno Deficiency Syndrome
कारक — HIV (Human Immunodeficiency Virus)
एड्स के लक्षण
- ➤
भूख न लगना और वजन में लगातार कमी।
- ➤
बार-बार बुखार आना, थकावट और त्वचा पर दद्दोरे होना।
- ➤
रोगों से लड़ने की क्षमता में भारी कमी — साधारण बुखार-सर्दी से भी शरीर नहीं उठ पाता।
- ➤
निमोनिया तथा त्वचा कैंसर होने की अधिक सम्भावना।
एड्स कैसे फैलता है?
- ➤
असुरक्षित यौन सम्बन्ध से।
- ➤
संक्रमित व्यक्ति का रक्त चढ़ाने (Blood Transfusion) से।
- ➤
संक्रमित सूई/सीरिंज/रेजर/ब्लेड के उपयोग से।
- ➤
संक्रमित माता से बच्चे में (गर्भावस्था के दौरान या स्तनपान से)।
एड्स से बचाव के उपाय
- ➤
इंजेक्शन में नई, विसंक्रमित सूई एवं सीरिंज का प्रयोग करें।
- ➤
रक्त आधान से पहले रक्त की जाँच अनिवार्य रूप से कराएँ।
- ➤
नशीली दवाओं के इंजेक्शन न लें।
- ➤
रेजर/ब्लेड का उपयोग सावधानीपूर्वक करें — दूसरे का उपयोग न करें।
📌 एड्स इनसे नहीं फैलता: हाथ मिलाने, साथ बैठने-उठने, साथ खाने-पीने, खाँसने-छींकने, एक ही कार्यालय में काम करने, या मच्छर के काटने से एड्स नहीं होता। 01 दिसम्बर = विश्व एड्स दिवस। एड्स का परीक्षण ELISA Test से किया जाता है।
BASIC SHIKSHA SOLUTION ● UPBOARD CLASS 8 SCIENCE SOLUTION
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प्रश्न: सूक्ष्मजीव कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: सूक्ष्मजीव पाँच प्रकार के होते हैं — जीवाणु, विषाणु, प्रोटोजोआ, कवक और शैवाल।
प्रश्न: प्रतिजैविक दवाएँ किस रोग में काम करती हैं?
उत्तर: प्रतिजैविक दवाएँ केवल जीवाणुजनित रोगों में प्रभावी होती हैं।
प्रश्न: टीकाकरण क्यों आवश्यक है?
उत्तर: टीकाकरण शरीर में प्रतिरक्षा विकसित करता है और भविष्य में रोग से सुरक्षा देता है।
प्रश्न: UP Board Class 8 Science Chapter 5 Solution कहाँ मिलेगा?
उत्तर: Basic Shiksha Solution वेबसाइट पर इस अध्याय का सम्पूर्ण समाधान उपलब्ध है।
उत्तर:
इस प्रकार UP Board Class 8 Science Chapter 5 सूक्ष्मजीवों का सामान्य परिचय एवं वर्गीकरण Solution
में हमने सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर, प्रतिजैविक दवाओं का महत्व, टीकाकरण तथा रोगों से बचाव के उपाय विस्तार से समझे।
यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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