UP BOARD CLASS 9 SCIENCE CHAPTER 1 SOLUTION
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📘 अध्याय 1 — हमारे आस-पास के पदार्थ
पदार्थ : वह सब कुछ जिसमें द्रव्यमान होता है और जो स्थान (आयतन) घेरता है, पदार्थ कहलाता है।
- कुर्सी — ठोस पदार्थ है, द्रव्यमान और आयतन दोनों हैं।
- वायु — गैसीय पदार्थ है, द्रव्यमान है और स्थान घेरती है।
- बादाम — ठोस पदार्थ है।
- शीतल पेय — द्रव पदार्थ है।
- इत्र की सुगंध — सुगंध के कण वायु में मिले गैसीय पदार्थ हैं।
इसके विपरीत, ठोस (जैसे लोहे की दीवार) में अन्तर-आणविक आकर्षण बल अत्यधिक होता है — अणु अपनी नियत स्थिति से हट नहीं सकते, इसलिए ठोस नहीं "कटता"।
ठोस → अत्यधिक आकर्षण बल → अणु नहीं फिसलते → दृढ़, काटा नहीं जा सकता
द्रव → मध्यम आकर्षण बल → अणु फिसल सकते हैं → तरल, काटा जा सकता है
गैस → नगण्य आकर्षण बल → अणु स्वतंत्र रूप से विचरण → सबसे आसानी से काटा जा सकता है
पदार्थ के कणों की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएँ हैं —
- 1कण अत्यन्त सूक्ष्म होते हैं: इतने छोटे कि हम कल्पना भी नहीं कर सकते। पोटैशियम परमैंगनेट के केवल एक क्रिस्टल से 1000 L पानी रंगीन हो जाता है।
- 2कणों के बीच रिक्त स्थान होता है: इसी कारण एक पदार्थ के कण दूसरे पदार्थ के कणों के रिक्त स्थानों में समाविष्ट हो जाते हैं।
- 3कण निरंतर गतिशील होते हैं: कणों में हमेशा गतिज ऊर्जा होती है। ताप बढ़ने पर यह ऊर्जा और बढ़ जाती है।
- 4कण एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं: कणों के बीच एक आकर्षण बल कार्य करता है। यह बल प्रत्येक पदार्थ में अलग-अलग होता है।
| गुण | ठोस (Solid) | द्रव (Liquid) | गैस (Gas) |
|---|---|---|---|
| दृढ़ता | अत्यधिक दृढ़ — बाह्य बल से आकार नहीं बदलता | दृढ़ नहीं — बर्तन का आकार लेता है | बिल्कुल दृढ़ नहीं |
| संपीड्यता | नगण्य (नहीं) | बहुत कम | अत्यधिक (LPG, CNG) |
| तरलता | नहीं बह सकता | बह सकता है | अत्यंत आसानी से बहता है |
| बर्तन में गैस भरना | लागू नहीं | लागू नहीं | पूरे बर्तन को भर देती है |
| आकार | निश्चित | अनिश्चित (बर्तन का आकार) | अनिश्चित |
| आयतन | निश्चित | निश्चित | अनिश्चित |
| गतिज ऊर्जा | न्यूनतम | मध्यम | अधिकतम |
| घनत्व | अधिकतम | मध्यम | न्यूनतम |
| अन्तर-आणविक बल | सबसे अधिक | मध्यम | नगण्य |
| अन्तरावकाश | न्यूनतम | मध्यम | अधिकतम |
| उदाहरण | बर्फ, लोहा, लकड़ी | पानी, दूध, तेल | ऑक्सीजन, भाप, CO₂ |
(1) ठोस → कण नियत स्थान पर, अधिकतम बल, न्यूनतम गति
(2) द्रव → कण फिसल सकते हैं, मध्यम बल, मध्यम गति
(3) गैस → कण अनियमित रूप से विचरण, नगण्य बल, अधिकतम गति
- a(a) गैस पूरे बर्तन को भर लेती है: गैस के कणों के बीच अन्तर-आणविक आकर्षण बल नगण्य होता है और उनमें अत्यधिक गतिज ऊर्जा होती है। इस कारण कण अनियमित रूप से सभी दिशाओं में स्वतंत्र रूप से गति करते हैं और बर्तन के हर कोने तक फैल जाते हैं।
- b(b) गैस दीवारों पर दबाव डालती है: गैस के कण अनियमित और अत्यंत तीव्र गति से चलते हैं। ये कण बर्तन की दीवारों से टकराते हैं। प्रति इकाई क्षेत्रफल पर ये टक्करें मिलकर गैस का दबाव बनाती हैं।
- c(c) लकड़ी की मेज ठोस है: लकड़ी का आकार और आयतन निश्चित होता है। बाह्य बल लगाने पर भी इसका आकार नहीं बदलता (टूट सकती है पर आकार नहीं बदलता)। इसके कणों के बीच आकर्षण बल अत्यधिक और अन्तरावकाश न्यूनतम होता है।
- d(d) हवा में हाथ आसानी से चलता है: हवा (गैस) के कणों के बीच अन्तरावकाश बहुत अधिक होता है और बल नगण्य होता है, इसलिए हाथ आसानी से घुस जाता है। लकड़ी (ठोस) में कण अत्यंत पास-पास और दृढ़ता से बंधे होते हैं — उन्हें तोड़ने के लिए अत्यधिक बल चाहिए।
- a(a) 300 K → °C
= 300 − 273 = 27 °C - b(b) 573 K → °C
= 573 − 273 = 300 °C
अर्थात्: K = °C + 273 तथा °C = K − 273
- a(a) 250 °C पर: जल का क्वथनांक 100 °C है। 250 °C इससे बहुत अधिक है। अतः इस तापमान पर जल गैस (भाप/जलवाष्प) अवस्था में होगा।
- b(b) 100 °C पर: यह जल का सामान्य दाब (1 atm) पर क्वथनांक है। इस बिंदु पर जल द्रव तथा गैस दोनों अवस्थाओं में एक साथ पाया जाता है (उबलता हुआ जल)।
0 °C से नीचे → बर्फ (ठोस) | 0 °C से 100 °C के बीच → जल (द्रव) | 100 °C से ऊपर → भाप (गैस)
वायुमंडलीय गैसों को द्रव में बदलने के लिए दो विधियाँ उपयोग की जाती हैं —
- 1दाब बढ़ाकर: गैस पर उच्च दाब डालने से कणों के बीच की दूरी कम हो जाती है और आकर्षण बल बढ़ जाता है, जिससे गैस द्रव में परिवर्तित हो जाती है। इसी विधि से LPG सिलिंडर में गैस को द्रव रूप में रखते हैं।
- 2तापमान घटाकर: तापमान कम करने पर कणों की गतिज ऊर्जा घट जाती है। जब कण पर्याप्त धीमे हो जाते हैं, तो आकर्षण बल उन्हें पास ला सकता है और गैस द्रव में बदल जाती है।
- a(a) 300 K = ?
°C = 300 − 273 = 27 °C - b(b) 573 K = ?
°C = 573 − 273 = 300 °C
- a(a) 25 °C = ?
K = 25 + 273 = 298 K - b(b) 373 °C = ?
K = 373 + 273 = 646 K
(b) इत्र की गंध बहुत दूर बैठे हुए भी पहुँच जाती है —
- ऑक्सीजन (O₂) — गैस है। गैस के कणों के बीच आकर्षण बल सबसे कम (नगण्य) होता है।
- जल (H₂O) — द्रव है। द्रव के कणों के बीच आकर्षण बल मध्यम होता है।
- चीनी (C₁₂H₂₂O₁₁) — ठोस है। ठोस के कणों के बीच आकर्षण बल सबसे अधिक होता है।
| तापमान | जल की अवस्था | स्पष्टीकरण |
|---|---|---|
| 25 °C | द्रव (Liquid) | यह तापमान 0 °C और 100 °C के बीच है। जल सामान्य कमरे के तापमान पर द्रव होता है। |
| 0 °C | ठोस + द्रव दोनों (गलनांक) | 0 °C जल का गलनांक है। इस बिंदु पर बर्फ (ठोस) और जल (द्रव) दोनों अवस्थाएँ एक साथ उपस्थित होती हैं। |
| 100 °C | द्रव + गैस दोनों (क्वथनांक) | 100 °C जल का क्वथनांक है। इस बिंदु पर जल (द्रव) और भाप (गैस) दोनों अवस्थाएँ एक साथ होती हैं। |
(b) लोहे की अलमारी कमरे के ताप पर ठोस है —
- बर्फ (0 °C): जब बर्फ पिघलती है, तो वह आसपास से संगलन की गुप्त ऊष्मा (Latent heat of fusion = 334 J/g) अवशोषित करती है। यह ऊष्मा वातावरण या पेय से ली जाती है — जिससे अत्यधिक शीतलता उत्पन्न होती है।
- जल (0 °C): 0 °C का ठंडा पानी केवल तापमान के अंतर के कारण शीतलता देता है — इसमें गुप्त ऊष्मा का अतिरिक्त प्रभाव नहीं होता।
- 100 °C के जल: त्वचा को केवल 100 °C के तापमान पर जल की ऊष्मा मिलती है।
- 100 °C की भाप: भाप में 100 °C की ऊष्मा के साथ-साथ वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा (2260 J/g) भी होती है। जब भाप त्वचा पर संघनित होती है (वापस पानी बनती है), तो यह अतिरिक्त 2260 J/g ऊष्मा भी त्वचा पर मुक्त होती है।
चित्र में ठोस → द्रव → गैस तथा वापस आने के विभिन्न मार्ग दिखाए गए हैं। ऊष्मा बढ़ने/दाब घटने पर ऊपरी मार्ग, ऊष्मा घटने/दाब बढ़ने पर निचला मार्ग।
| चिह्न | अवस्था परिवर्तन का नाम | दिशा | विवरण |
|---|---|---|---|
| A | संगलन / गलना (Fusion / Melting) | ठोस → द्रव | ऊष्मा देने पर ठोस द्रव में बदलता है। जैसे — बर्फ का पानी बनना। |
| B | वाष्पीकरण (Vaporisation) | द्रव → गैस | ऊष्मा देने पर द्रव गैस में बदलता है। जैसे — पानी का भाप बनना। |
| C | संघनन (Condensation) | गैस → द्रव | ठंडा करने / दाब बढ़ाने पर गैस द्रव में बदलती है। |
| D | जमना / हिमीभवन (Solidification / Freezing) | द्रव → ठोस | ठंडा करने पर द्रव ठोस बनता है। जैसे — पानी का बर्फ बनना। |
| E | ऊर्ध्वपातन (Sublimation) | ठोस → गैस (सीधे) | ठोस बिना द्रव बने सीधे गैस में बदलता है। जैसे — कपूर, नैफ्थलीन। |
| F | ऊर्ध्वपातन / निक्षेपण (Deposition) | गैस → ठोस (सीधे) | गैस बिना द्रव बने सीधे ठोस में बदलती है। जैसे — बर्फ का सीधे जलवाष्प से बनना। |
ऊष्मा में वृद्धि / दाब में कमी → ठोस (A)→ द्रव (B)→ गैस
ऊष्मा में कमी / दाब में वृद्धि → गैस (C)→ द्रव (D)→ ठोस
सीधे: ठोस (E)→ गैस (ऊर्ध्वपातन) | गैस (F)→ ठोस (निक्षेपण)
📚 अध्याय की मुख्य बातें — एक नज़र में
| आधार | विसरण (Diffusion) | ऊर्ध्वपातन (Sublimation) |
|---|---|---|
| परिभाषा | दो पदार्थों के कणों का स्वतः मिलना | ठोस का सीधे गैस में बदलना |
| अवस्था | गैस, द्रव, ठोस — सभी में संभव | केवल ठोस → गैस |
| उदाहरण | इत्र की सुगंध फैलना, चाय रंगीन होना | कपूर, नैफ्थलीन, आयोडीन |
| आधार | वाष्पीकरण | क्वथन |
|---|---|---|
| तापमान | किसी भी तापमान पर (क्वथनांक से कम पर भी) | केवल क्वथनांक पर |
| स्थान | केवल सतह से | पूरे द्रव से (बुलबुले बनते हैं) |
| दर | धीमी | तेज |
| उदाहरण | गीले कपड़े सूखना | चाय उबलना |
📌 निष्कर्ष (Conclusion)
पदार्थ हमारे चारों ओर हर रूप में विद्यमान है। पदार्थ के कण अत्यन्त सूक्ष्म होते हैं, उनके बीच रिक्त स्थान होता है, वे निरंतर गतिशील रहते हैं और एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। तापमान और दाब बदलकर हम पदार्थ की अवस्था बदल सकते हैं। वाष्पीकरण एक सतही प्रक्रिया है जो शीतलता उत्पन्न करती है — यही कारण है कि पसीना आने पर हमें ठंडक मिलती है, कूलर ठंडी हवा देता है और घड़े का पानी ठंडा रहता है। ये सभी परिघटनाएँ हमारे दैनिक जीवन में विज्ञान की उपस्थिति का प्रमाण हैं।
अध्याय 3 — परमाणु एवं अणु
अध्याय 4 — परमाणु की संरचना
अध्याय 5 — जीवन की मौलिक इकाई
अध्याय 6 — ऊतक
अध्याय 8 — गति
अध्याय 9 — बल तथा गति के नियम
अध्याय 10 — गुरुत्वाकर्षण
अध्याय 11 — कार्य तथा ऊर्जा
अध्याय 12 — ध्वनि
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