BASIC SHIKSHA SOLUTION में आपका स्वागत है

नमस्ते प्यारे बच्चों और सम्मानित शिक्षकों! 'बेसिक शिक्षा सॉल्यूशन' परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।  यह वेबसाइट विशेष रूप से  कक्षा 1 से 8तक के सभी छात्रों और शिक्षकों के लिए तैयार की  है। यहाँ आपको क्या मिलेगा: व्यापक कवरेज: कक्षा 1 से 8 तक के सभी मुख्य विषयों (जैसे गणित, विज्ञान, हिंदी, सामाजिक विज्ञान, आदि) के सरल नोट्स और शिक्षण सामग्री मिलेगी। विषयों को आसान बनाना: जटिल विषयों को आसान भाषा, चित्र और उदाहरणों के साथ समझाया जाएगा, जो NCERT/UP बोर्ड पाठ्यक्रम पर आधारित होंगे। अभ्यास सामग्री: स्कूल की परीक्षाओं और अवधारणाओं को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर और अभ्यास पत्र यहाँ उपलब्ध होंगे। शिक्षकों के लिए संसाधन: बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़ी उपयोगी शिक्षण सामग्री और अपडेट भी समय-समय पर साझा की जाएगी। मेरा उद्देश्य है कि आप सभी को गुणवत्तापूर्ण और सरल शिक्षा सामग्री एक ही जगह पर मिल सके। जुड़े रहें! आप अपनी किसी भी शंका या सुझाव को नीचे कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं। मुझे आपकी मदद करके खुशी होगी। आपका शुभचिंतक, बेसिक शिक्षा सॉल्यूशन

UP BOARD CLASS 9 SCIENCE CHAPTER 1 SOLUTION

UP Board / NCERT Class 9 Science | अध्याय 1 — हमारे आस-पास के पदार्थ

📘 अध्याय 1 — हमारे आस-पास के पदार्थ

|| NCERT | कक्षा 9 | विज्ञान | सम्पूर्ण अभ्यास एवं पाठ्य प्रश्न हल ||
📖 पाठ परिचय: इस अध्याय में हम जानेंगे कि पदार्थ क्या है, उसके कण कैसे होते हैं, पदार्थ की तीन अवस्थाएँ (ठोस, द्रव, गैस), तापमान व दाब से अवस्था परिवर्तन, वाष्पीकरण तथा वाष्पीकरण के कारण शीतलता का विज्ञान। साथ ही ऊर्ध्वपातन, गलनांक, क्वथनांक, गुप्त ऊष्मा जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाएँ भी सीखेंगे।
Basic Shiksha Solution ● पाठ के मध्य प्रश्न (In-text Questions)
🔵 पाठ-मध्य प्रश्न — खंड 1.1 के बाद (पृ. 4)
🔹 प्रश्न 1: निम्नलिखित में से कौन-से पदार्थ हैं — कुर्सी, वायु, स्नेह, गंध, घृणा, बादाम, विचार, शीत, शीतल पेय, इत्र की सुगंध। उत्तर:

पदार्थ : वह सब कुछ जिसमें द्रव्यमान होता है और जो स्थान (आयतन) घेरता है, पदार्थ कहलाता है।

✅ पदार्थ: कुर्सी, वायु, बादाम, शीतल पेय, इत्र की सुगंध
💡 व्याख्या:
  • कुर्सी — ठोस पदार्थ है, द्रव्यमान और आयतन दोनों हैं।
  • वायु — गैसीय पदार्थ है, द्रव्यमान है और स्थान घेरती है।
  • बादाम — ठोस पदार्थ है।
  • शीतल पेय — द्रव पदार्थ है।
  • इत्र की सुगंध — सुगंध के कण वायु में मिले गैसीय पदार्थ हैं।
📌 याद रखें: स्नेह, घृणा, विचार, शीत — ये भाव या अनुभव हैं। इनका कोई द्रव्यमान नहीं होता, न ये स्थान घेरते हैं। अतः ये पदार्थ नहीं हैं।
🔹 प्रश्न 2: निम्नलिखित प्रेक्षण के कारण बताएँ — गर्मा-गर्म खाने की गंध कई मीटर दूर से ही आपके पास पहुँच जाती है, लेकिन ठंडे खाने की महक लेने के लिए आपको उसके पास जाना पड़ता है। उत्तर:
📘 कारण: पदार्थ के कण निरंतर गतिशील होते हैं। तापमान बढ़ने पर कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है और वे अधिक तेजी से गति करते हैं।
💡 विस्तृत व्याख्या: गर्म खाने के कण उच्च गतिज ऊर्जा के कारण वायु में बहुत तेजी से विसरित होते हैं और दूर तक पहुँच जाते हैं। ठंडे खाने के कणों की गतिज ऊर्जा कम होती है, इसलिए उनका विसरण धीमा होता है — सुगंध पास जाने पर ही मिलती है।
📌 नियम: ताप ↑ → कणों की गति ↑ → विसरण की दर ↑।
🔹 प्रश्न 3: स्विमिंग पूल में गोताखोर पानी काट पाता है। इससे पदार्थ का कौन-सा गुण प्रेक्षित होता है? उत्तर:
✅ द्रव के कणों के बीच अन्तर-आणविक आकर्षण बल मध्यम होता है — इसीलिए जल में तरलता (fluidity) होती है।
💡 व्याख्या: जल (द्रव) के अणुओं के बीच अन्तर-आणविक आकर्षण बल मध्यम होता है। इस कारण जल के अणुओं की परतें एक-दूसरे पर से आसानी से फिसल सकती हैं। जब गोताखोर पानी में कूदता है, तो वह जल को हटाता (displace) करता है — जल के अणु फिसलकर रास्ता दे देते हैं। यही तरलता (fluidity) का गुण है।

इसके विपरीत, ठोस (जैसे लोहे की दीवार) में अन्तर-आणविक आकर्षण बल अत्यधिक होता है — अणु अपनी नियत स्थिति से हट नहीं सकते, इसलिए ठोस नहीं "कटता"।
📌 तुलना:
ठोस → अत्यधिक आकर्षण बल → अणु नहीं फिसलते → दृढ़, काटा नहीं जा सकता
द्रव → मध्यम आकर्षण बल → अणु फिसल सकते हैं → तरल, काटा जा सकता है
गैस → नगण्य आकर्षण बल → अणु स्वतंत्र रूप से विचरण → सबसे आसानी से काटा जा सकता है
🔹 प्रश्न 4: पदार्थ के कणों की क्या विशेषताएँ होती हैं? उत्तर:

पदार्थ के कणों की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएँ हैं —

  • 1
    कण अत्यन्त सूक्ष्म होते हैं: इतने छोटे कि हम कल्पना भी नहीं कर सकते। पोटैशियम परमैंगनेट के केवल एक क्रिस्टल से 1000 L पानी रंगीन हो जाता है।
  • 2
    कणों के बीच रिक्त स्थान होता है: इसी कारण एक पदार्थ के कण दूसरे पदार्थ के कणों के रिक्त स्थानों में समाविष्ट हो जाते हैं।
  • 3
    कण निरंतर गतिशील होते हैं: कणों में हमेशा गतिज ऊर्जा होती है। ताप बढ़ने पर यह ऊर्जा और बढ़ जाती है।
  • 4
    कण एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं: कणों के बीच एक आकर्षण बल कार्य करता है। यह बल प्रत्येक पदार्थ में अलग-अलग होता है।
🔵 पाठ-मध्य प्रश्न — खंड 1.3 के बाद (पृ. 6)
🔹 प्रश्न 1: किसी तत्व के द्रव्यमान प्रति इकाई आयतन को घनत्व कहते हैं। बढ़ते हुए घनत्व के क्रम में निम्नलिखित को व्यवस्थित करें — वायु, चिमनी का धुआँ, शहद, जल, चाॅक, रुई और लोहा। उत्तर:
✅ वायु < चिमनी का धुआँ < रुई < जल < शहद < चाॅक < लोहा
💡 व्याख्या: गैसों का घनत्व सबसे कम होता है (वायु और धुआँ)। द्रवों में जल का घनत्व शहद से कम होता है। ठोसों में रुई (जिसमें वायु भरी है) का घनत्व कम, चाॅक मध्यम और लोहे का सर्वाधिक घनत्व होता है।
📌 सामान्य नियम: गैस का घनत्व < द्रव का घनत्व < ठोस का घनत्व।
🔹 प्रश्न 2: (a) पदार्थ की विभिन्न अवस्थाओं के गुणों में होने वाले अंतर को सारणीबद्ध कीजिए। (b) निम्नलिखित पर टिप्पणी कीजिए — दृढ़ता, संपीड्यता, तरलता, बर्तन में गैस का भरना, आकार, गतिज ऊर्जा एवं घनत्व। उत्तर:
गुणठोस (Solid)द्रव (Liquid)गैस (Gas)
दृढ़ताअत्यधिक दृढ़ — बाह्य बल से आकार नहीं बदलतादृढ़ नहीं — बर्तन का आकार लेता हैबिल्कुल दृढ़ नहीं
संपीड्यतानगण्य (नहीं)बहुत कमअत्यधिक (LPG, CNG)
तरलतानहीं बह सकताबह सकता हैअत्यंत आसानी से बहता है
बर्तन में गैस भरनालागू नहींलागू नहींपूरे बर्तन को भर देती है
आकारनिश्चितअनिश्चित (बर्तन का आकार)अनिश्चित
आयतननिश्चितनिश्चितअनिश्चित
गतिज ऊर्जान्यूनतममध्यमअधिकतम
घनत्वअधिकतममध्यमन्यूनतम
अन्तर-आणविक बलसबसे अधिकमध्यमनगण्य
अन्तरावकाशन्यूनतममध्यमअधिकतम
उदाहरणबर्फ, लोहा, लकड़ीपानी, दूध, तेलऑक्सीजन, भाप, CO₂
📌 सारांश — 3 मुख्य अवधारणाएँ:
(1) ठोस → कण नियत स्थान पर, अधिकतम बल, न्यूनतम गति
(2) द्रव → कण फिसल सकते हैं, मध्यम बल, मध्यम गति
(3) गैस → कण अनियमित रूप से विचरण, नगण्य बल, अधिकतम गति
🔹 प्रश्न 3: कारण बताएँ — (a) गैस पूरी तरह उस बर्तन को भर देती है जिसमें इसे रखते हैं। (b) गैस बर्तन की दीवारों पर दबाव डालती है। (c) लकड़ी की मेज ठोस कहलाती है। (d) हवा में हम आसानी से अपना हाथ चला सकते हैं, लेकिन एक ठोस लकड़ी के टुकड़े में हाथ चलाने के लिए हमें कराटे में दक्ष होना पड़ेगा। उत्तर:
  • a
    (a) गैस पूरे बर्तन को भर लेती है: गैस के कणों के बीच अन्तर-आणविक आकर्षण बल नगण्य होता है और उनमें अत्यधिक गतिज ऊर्जा होती है। इस कारण कण अनियमित रूप से सभी दिशाओं में स्वतंत्र रूप से गति करते हैं और बर्तन के हर कोने तक फैल जाते हैं।
  • b
    (b) गैस दीवारों पर दबाव डालती है: गैस के कण अनियमित और अत्यंत तीव्र गति से चलते हैं। ये कण बर्तन की दीवारों से टकराते हैं। प्रति इकाई क्षेत्रफल पर ये टक्करें मिलकर गैस का दबाव बनाती हैं।
  • c
    (c) लकड़ी की मेज ठोस है: लकड़ी का आकार और आयतन निश्चित होता है। बाह्य बल लगाने पर भी इसका आकार नहीं बदलता (टूट सकती है पर आकार नहीं बदलता)। इसके कणों के बीच आकर्षण बल अत्यधिक और अन्तरावकाश न्यूनतम होता है।
  • d
    (d) हवा में हाथ आसानी से चलता है: हवा (गैस) के कणों के बीच अन्तरावकाश बहुत अधिक होता है और बल नगण्य होता है, इसलिए हाथ आसानी से घुस जाता है। लकड़ी (ठोस) में कण अत्यंत पास-पास और दृढ़ता से बंधे होते हैं — उन्हें तोड़ने के लिए अत्यधिक बल चाहिए।
🔹 प्रश्न 4: सामान्यतः ठोस पदार्थों की अपेक्षा द्रवों का घनत्व कम होता है। लेकिन आपने बर्फ के टुकड़े को जल में तैरते हुए देखा होगा। पता लगाइए, ऐसा क्यों होता है? उत्तर:
📘 विशेष कारण: बर्फ (ठोस जल) का घनत्व तरल जल से कम होता है — इसीलिए बर्फ पानी पर तैरती है।
💡 विस्तृत व्याख्या: जल की एक असाधारण विशेषता है। जब जल जमकर बर्फ बनता है, तो इसके अणु एक विशेष षट्भुजीय (hexagonal) संरचना में व्यवस्थित हो जाते हैं जिसमें अन्य ठोसों की तुलना में अधिक रिक्त स्थान होता है। इस कारण बर्फ का घनत्व (≈ 0.917 g/cm³) तरल जल के घनत्व (1 g/cm³) से कम हो जाता है। इसीलिए बर्फ पानी में तैरती है।
📌 महत्व: यही कारण है कि सर्दियों में झीलें ऊपर से जमती हैं, नीचे से नहीं। नीचे का जल तरल रहता है जिससे जलीय जीव जीवित रह सकते हैं।
🔵 पाठ-मध्य प्रश्न — खंड 1.4.1 के बाद (पृ. 9)
🔹 प्रश्न 1: निम्नलिखित तापमान को सेल्सियस में बदलें: (a) 300 K   (b) 573 K उत्तर:
🌡️ सूत्र: सेल्सियस (°C) = केल्विन (K) − 273
  • a
    (a) 300 K → °C
    = 300 − 273 = 27 °C
  • b
    (b) 573 K → °C
    = 573 − 273 = 300 °C
📌 सूत्र याद रखें: K से °C → घटाओ 273 | °C से K → जोड़ो 273
अर्थात्: K = °C + 273    तथा    °C = K − 273
🔹 प्रश्न 2: निम्नलिखित तापमान पर जल की भौतिक अवस्था क्या होगी? (a) 250 °C   (b) 100 °C उत्तर:
  • a
    (a) 250 °C पर: जल का क्वथनांक 100 °C है। 250 °C इससे बहुत अधिक है। अतः इस तापमान पर जल गैस (भाप/जलवाष्प) अवस्था में होगा।
  • b
    (b) 100 °C पर: यह जल का सामान्य दाब (1 atm) पर क्वथनांक है। इस बिंदु पर जल द्रव तथा गैस दोनों अवस्थाओं में एक साथ पाया जाता है (उबलता हुआ जल)।
📌 जल के महत्वपूर्ण तापमान: गलनांक = 0 °C (273 K) | क्वथनांक = 100 °C (373 K)
0 °C से नीचे → बर्फ (ठोस) | 0 °C से 100 °C के बीच → जल (द्रव) | 100 °C से ऊपर → भाप (गैस)
🔹 प्रश्न 3: किसी भी पदार्थ की अवस्था परिवर्तन के दौरान तापमान स्थिर क्यों रहता है? उत्तर:
📘 कारण — गुप्त ऊष्मा (Latent Heat): अवस्था परिवर्तन के दौरान दी जाने वाली ऊष्मा तापमान बढ़ाने में उपयोग नहीं होती।
💡 विस्तृत व्याख्या: अवस्था परिवर्तन के दौरान (जैसे बर्फ का पिघलना), दी गई ऊष्मा कणों के बीच के आकर्षण बल को तोड़ने में उपयोग होती है। जब तक पूरी बर्फ पानी में नहीं बदल जाती, तब तक तापमान 0 °C पर स्थिर रहता है। इस छिपी ऊष्मा को गुप्त ऊष्मा (Latent Heat) कहते हैं। गुप्त का अर्थ है — छिपी हुई।
📌 परिभाषा: संगलन की गुप्त ऊष्मा: 1 kg ठोस को उसके गलनांक पर द्रव में बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मा।  |  वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा: 1 kg द्रव को उसके क्वथनांक पर गैस में बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मा।
🔹 प्रश्न 4: वायुमंडलीय गैसों को द्रव में परिवर्तन करने के लिए कोई विधि सुझाइए। उत्तर:

वायुमंडलीय गैसों को द्रव में बदलने के लिए दो विधियाँ उपयोग की जाती हैं —

  • 1
    दाब बढ़ाकर: गैस पर उच्च दाब डालने से कणों के बीच की दूरी कम हो जाती है और आकर्षण बल बढ़ जाता है, जिससे गैस द्रव में परिवर्तित हो जाती है। इसी विधि से LPG सिलिंडर में गैस को द्रव रूप में रखते हैं।
  • 2
    तापमान घटाकर: तापमान कम करने पर कणों की गतिज ऊर्जा घट जाती है। जब कण पर्याप्त धीमे हो जाते हैं, तो आकर्षण बल उन्हें पास ला सकता है और गैस द्रव में बदल जाती है।
💡 वास्तविक उपयोग: ऑक्सीजन, नाइट्रोजन जैसी गैसों को पहले उच्च दाब पर संपीडित करते हैं, फिर उन्हें ठंडा करके द्रव रूप में बदलते हैं (द्रव नाइट्रोजन, द्रव ऑक्सीजन)।
🔵 पाठ-मध्य प्रश्न — खंड 1.5 के बाद (पृ. 11)
🔹 प्रश्न 1: गर्म, शुष्क दिन में कूलर अधिक ठंडा क्यों करता है? उत्तर:
📘 कारण: वाष्पीकरण की दर बढ़ने से शीतलता अधिक होती है।
💡 व्याख्या: कूलर में पानी-भीगी घास (पैड) पर हवा गुजरती है। गर्म दिन में तापमान अधिक होने से पानी तेजी से वाष्पीकृत होता है। शुष्क (कम आर्द्रता) दिन में वायु में जलवाष्प पहले से कम होती है, इसलिए और अधिक वाष्पीकरण हो सकता है। वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा के रूप में आसपास से ऊष्मा ली जाती है — इससे हवा ठंडी हो जाती है।
📌 सूत्र: ताप ↑ + आर्द्रता ↓ → वाष्पीकरण ↑ → शीतलता ↑
🔹 प्रश्न 2: गर्मियों में घड़े का जल ठंडा क्यों होता है? उत्तर:
💡 व्याख्या: मिट्टी के घड़े में असंख्य सूक्ष्म छिद्र होते हैं। घड़े के अन्दर का जल इन छिद्रों से रिसकर बाहरी सतह पर आता रहता है। बाहरी सतह पर जल का वाष्पीकरण होता रहता है। वाष्पीकरण के लिए आवश्यक गुप्त ऊष्मा घड़े के जल से ली जाती है — जिससे जल का तापमान कम हो जाता है और घड़े का पानी ठंडा रहता है।
📌 सिद्धान्त: वाष्पीकरण के दौरान आसपास से ऊष्मा अवशोषित होती है → शीतलता उत्पन्न होती है।
🔹 प्रश्न 3: एसीटोन / पेट्रोल या इत्र डालने पर हमारी हथेली ठंडी क्यों हो जाती है? उत्तर:
💡 व्याख्या: एसीटोन, पेट्रोल और इत्र अत्यंत वाष्पशील (volatile) पदार्थ हैं — ये बहुत कम क्वथनांक पर उबलते हैं। हथेली पर डालते ही ये तेजी से वाष्पीकृत होने लगते हैं। वाष्पीकरण के लिए आवश्यक ऊष्मा (वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा) ये हमारी हथेली और आसपास की त्वचा से लेते हैं — इससे हथेली ठंडी महसूस होती है।
🔹 प्रश्न 4: कप की अपेक्षा प्लेट से हम गर्म दूध या चाय जल्दी क्यों पी लेते हैं? उत्तर:
💡 व्याख्या: प्लेट का सतही क्षेत्रफल (surface area) कप की तुलना में बहुत अधिक होता है। वाष्पीकरण एक सतही प्रक्रिया है और सतही क्षेत्र बढ़ने पर वाष्पीकरण की दर बढ़ जाती है। प्लेट में दूध अधिक तेजी से वाष्पीकृत होता है — इससे दूध जल्दी ठंडा हो जाता है और हम जल्दी पी सकते हैं।
📌 नियम: सतही क्षेत्र ↑ → वाष्पीकरण ↑ → ठंडा होने की गति ↑
🔹 प्रश्न 5: गर्मियों में हमें किस तरह के कपड़े पहनने चाहिए? उत्तर:
✅ गर्मियों में सूती (cotton) कपड़े पहनने चाहिए।
💡 वैज्ञानिक कारण: गर्मियों में हमें अधिक पसीना आता है। सूती कपड़े पसीने को अच्छी तरह सोख लेते हैं और उसे वायुमंडल में आसानी से वाष्पीकृत होने देते हैं। वाष्पीकरण के दौरान शरीर से ऊष्मा ली जाती है जिससे शरीर ठंडा रहता है। सिंथेटिक कपड़े पसीना नहीं सोखते, इसलिए उनमें गर्मी लगती है।
Basic Shiksha Solution ● अभ्यास प्रश्न (Exercise)
📝 अभ्यास प्रश्न 1 — निम्नलिखित तापमानों को सेल्सियस इकाई में परिवर्तित करें: (a) 300 K   (b) 573 K
उत्तर:
🌡️ सूत्र: °C = K − 273
  • a
    (a) 300 K = ?
    °C = 300 − 273 = 27 °C
  • b
    (b) 573 K = ?
    °C = 573 − 273 = 300 °C
°C = K − 273     K = °C + 273
📌 SI इकाई: तापमान की SI इकाई केल्विन (K) है। वैज्ञानिक गणनाओं में हमेशा K का उपयोग होता है।
📝 अभ्यास प्रश्न 2 — निम्नलिखित तापमानों को केल्विन इकाई में परिवर्तित करें: (a) 25 °C   (b) 373 °C
उत्तर:
🌡️ सूत्र: K = °C + 273
  • a
    (a) 25 °C = ?
    K = 25 + 273 = 298 K
  • b
    (b) 373 °C = ?
    K = 373 + 273 = 646 K
📝 अभ्यास प्रश्न 3 — निम्नलिखित अवलोकनों हेतु कारण लिखें: (a) नैफ्थलीन को रखा रहने देने पर यह कुछ भी ठोस पदार्थ छोड़े बिना अदृश्य हो जाती है। (b) हमें इत्र की गंध बहुत दूर बैठे हुए भी पहुँच जाती है।
उत्तर: (a) नैफ्थलीन बिना ठोस पदार्थ छोड़े अदृश्य हो जाती है —
✅ कारण: नैफ्थलीन ऊर्ध्वपातन (Sublimation) की प्रक्रिया प्रदर्शित करती है।
💡 व्याख्या: ऊर्ध्वपातन (Sublimation) वह प्रक्रिया है जिसमें कोई ठोस पदार्थ द्रव अवस्था में आए बिना सीधे गैस (वाष्प) में परिवर्तित हो जाता है। नैफ्थलीन एक ऐसा ही पदार्थ है — इसके कण वायुमंडलीय दाब पर ठोस अवस्था से सीधे वायु में मिल जाते हैं। इसीलिए कोई ठोस अवशेष नहीं बचता।
📌 अन्य उदाहरण: कपूर, अमोनियम क्लोराइड (नौसादर), शुष्क बर्फ (ठोस CO₂), आयोडीन — ये सभी ऊर्ध्वपातन प्रदर्शित करते हैं। कपड़ों में रखी नैफ्थलीन की गोलियाँ धीरे-धीरे अदृश्य हो जाती हैं।

(b) इत्र की गंध बहुत दूर बैठे हुए भी पहुँच जाती है —
✅ कारण: पदार्थ के कणों में विसरण (Diffusion) का गुण होता है।
💡 व्याख्या: विसरण (Diffusion) दो भिन्न-भिन्न पदार्थों के कणों का स्वतः मिलना है। इत्र (वाष्पशील तरल) के कण वायु में मिल जाते हैं और गतिज ऊर्जा के कारण अत्यंत तीव्र गति से सभी दिशाओं में फैल जाते हैं। गैस के कणों के बीच अन्तरावकाश बहुत अधिक होता है और आकर्षण बल नगण्य होता है — इसलिए ये कण दूर तक पहुँच जाते हैं।
📌 ताप का प्रभाव: गर्म दिन में इत्र की गंध और दूर तक फैलती है, क्योंकि ताप ↑ → गतिज ऊर्जा ↑ → विसरण की दर ↑।
📝 अभ्यास प्रश्न 4 — निम्नलिखित पदार्थों को उनके कणों के बीच बढ़ते हुए आकर्षण के अनुसार व्यवस्थित करें: (a) जल (b) चीनी (c) ऑक्सीजन
उत्तर:
✅ बढ़ते आकर्षण बल का क्रम: ऑक्सीजन < जल < चीनी
💡 व्याख्या:
  • ऑक्सीजन (O₂) — गैस है। गैस के कणों के बीच आकर्षण बल सबसे कम (नगण्य) होता है।
  • जल (H₂O) — द्रव है। द्रव के कणों के बीच आकर्षण बल मध्यम होता है।
  • चीनी (C₁₂H₂₂O₁₁) — ठोस है। ठोस के कणों के बीच आकर्षण बल सबसे अधिक होता है।
📌 नियम: गैस → न्यूनतम आकर्षण बल | द्रव → मध्यम | ठोस → अधिकतम आकर्षण बल
📝 अभ्यास प्रश्न 5 — निम्नलिखित तापमानों पर जल की भौतिक अवस्था क्या है: (a) 25 °C   (b) 0 °C   (c) 100 °C
उत्तर:
तापमानजल की अवस्थास्पष्टीकरण
25 °Cद्रव (Liquid)यह तापमान 0 °C और 100 °C के बीच है। जल सामान्य कमरे के तापमान पर द्रव होता है।
0 °Cठोस + द्रव दोनों (गलनांक)0 °C जल का गलनांक है। इस बिंदु पर बर्फ (ठोस) और जल (द्रव) दोनों अवस्थाएँ एक साथ उपस्थित होती हैं।
100 °Cद्रव + गैस दोनों (क्वथनांक)100 °C जल का क्वथनांक है। इस बिंदु पर जल (द्रव) और भाप (गैस) दोनों अवस्थाएँ एक साथ होती हैं।
📌 ध्यान दें: 0 °C और 100 °C अवस्था परिवर्तन के तापमान हैं जहाँ दो अवस्थाएँ एक साथ होती हैं।
📝 अभ्यास प्रश्न 6 — पुष्टि हेतु कारण दें: (a) जल कमरे के ताप पर द्रव है। (b) लोहे की अलमारी कमरे के ताप पर ठोस है।
उत्तर: (a) जल कमरे के ताप (25 °C) पर द्रव है —
💡 व्याख्या: जल का गलनांक 0 °C (273 K) और क्वथनांक 100 °C (373 K) है। कमरे का तापमान लगभग 25 °C होता है जो 0 °C से अधिक और 100 °C से कम है। अतः इस तापमान पर जल द्रव अवस्था में रहता है। जल के कणों के बीच आकर्षण बल मध्यम होता है, जो उन्हें एक निश्चित आयतन में रखता है पर आकार देने में असमर्थ है।

(b) लोहे की अलमारी कमरे के ताप पर ठोस है —
💡 व्याख्या: लोहे का गलनांक 1535 °C है जो कमरे के तापमान (25 °C) से बहुत अधिक है। इतने कम तापमान पर लोहे के कणों के बीच आकर्षण बल इतना शक्तिशाली होता है कि कण अपनी नियत स्थिति से हट नहीं सकते। अतः लोहा ठोस अवस्था में रहता है — इसका निश्चित आकार और आयतन होता है।
📝 अभ्यास प्रश्न 7 — 273 K पर बर्फ को ठंडा करने पर तथा जल को इसी तापमान पर ठंडा करने पर शीतलता का प्रभाव अधिक क्यों होता है?
उत्तर:
✅ कारण: बर्फ में संगलन की गुप्त ऊष्मा होती है।
💡 विस्तृत व्याख्या: 273 K (0 °C) पर दोनों — बर्फ और जल — एक ही तापमान पर हैं। परन्तु —
  • बर्फ (0 °C): जब बर्फ पिघलती है, तो वह आसपास से संगलन की गुप्त ऊष्मा (Latent heat of fusion = 334 J/g) अवशोषित करती है। यह ऊष्मा वातावरण या पेय से ली जाती है — जिससे अत्यधिक शीतलता उत्पन्न होती है।
  • जल (0 °C): 0 °C का ठंडा पानी केवल तापमान के अंतर के कारण शीतलता देता है — इसमें गुप्त ऊष्मा का अतिरिक्त प्रभाव नहीं होता।
बर्फ (0°C) → जल के लिए ऊष्मा = संवेदनशील ऊष्मा + 334 J/g (गुप्त)
📌 व्यावहारिक उपयोग: इसीलिए ठंडे पानी की अपेक्षा बर्फ-पानी पेय को अधिक ठंडा रखता है।
📝 अभ्यास प्रश्न 8 — उबलते हुए जल अथवा भाप में से जलने की तीव्रता किसमें अधिक महसूस होती है?
उत्तर:
✅ भाप (Steam) से जलने की तीव्रता अधिक होती है।
💡 वैज्ञानिक कारण:
  • 100 °C के जल: त्वचा को केवल 100 °C के तापमान पर जल की ऊष्मा मिलती है।
  • 100 °C की भाप: भाप में 100 °C की ऊष्मा के साथ-साथ वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा (2260 J/g) भी होती है। जब भाप त्वचा पर संघनित होती है (वापस पानी बनती है), तो यह अतिरिक्त 2260 J/g ऊष्मा भी त्वचा पर मुक्त होती है।
भाप से ऊष्मा = 100 °C की ऊष्मा + 2260 J/g (वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा)
📌 इसीलिए: भाप से जलना उबलते पानी से जलने से अधिक गंभीर होता है, हालांकि दोनों का तापमान समान (100 °C) होता है।
📝 अभ्यास प्रश्न 9 — निम्नलिखित चित्र के लिए A, B, C, D, E तथा F की अवस्था परिवर्तन को नामांकित करें
उत्तर:

चित्र में ठोस → द्रव → गैस तथा वापस आने के विभिन्न मार्ग दिखाए गए हैं। ऊष्मा बढ़ने/दाब घटने पर ऊपरी मार्ग, ऊष्मा घटने/दाब बढ़ने पर निचला मार्ग।

चिह्नअवस्था परिवर्तन का नामदिशाविवरण
Aसंगलन / गलना (Fusion / Melting)ठोस → द्रवऊष्मा देने पर ठोस द्रव में बदलता है। जैसे — बर्फ का पानी बनना।
Bवाष्पीकरण (Vaporisation)द्रव → गैसऊष्मा देने पर द्रव गैस में बदलता है। जैसे — पानी का भाप बनना।
Cसंघनन (Condensation)गैस → द्रवठंडा करने / दाब बढ़ाने पर गैस द्रव में बदलती है।
Dजमना / हिमीभवन (Solidification / Freezing)द्रव → ठोसठंडा करने पर द्रव ठोस बनता है। जैसे — पानी का बर्फ बनना।
Eऊर्ध्वपातन (Sublimation)ठोस → गैस (सीधे)ठोस बिना द्रव बने सीधे गैस में बदलता है। जैसे — कपूर, नैफ्थलीन।
Fऊर्ध्वपातन / निक्षेपण (Deposition)गैस → ठोस (सीधे)गैस बिना द्रव बने सीधे ठोस में बदलती है। जैसे — बर्फ का सीधे जलवाष्प से बनना।
📘 पूरा चक्र:
ऊष्मा में वृद्धि / दाब में कमी → ठोस (A)→ द्रव (B)→ गैस
ऊष्मा में कमी / दाब में वृद्धि → गैस (C)→ द्रव (D)→ ठोस
सीधे: ठोस (E)→ गैस (ऊर्ध्वपातन) | गैस (F)→ ठोस (निक्षेपण)
📌 महत्वपूर्ण: E और F दोनों ऊर्ध्वपातन से सम्बंधित हैं। E = ठोस से गैस, F = गैस से ठोस।
Basic Shiksha Solution ● अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
❓ महत्वपूर्ण FAQ — परीक्षा के दृष्टिकोण से
🔸 प्रश्न: पदार्थ (Matter) की परिभाषा क्या है?
✅ उत्तर: वह सब कुछ जिसका द्रव्यमान होता है और जो स्थान (आयतन) घेरता है, पदार्थ कहलाता है।
💡 सरल उदाहरण: वायु, जल, लकड़ी, लोहा — सभी पदार्थ हैं। प्रेम, घृणा, सपने — पदार्थ नहीं हैं।

🔸 प्रश्न: विसरण (Diffusion) और ऊर्ध्वपातन (Sublimation) में क्या अंतर है?
आधारविसरण (Diffusion)ऊर्ध्वपातन (Sublimation)
परिभाषादो पदार्थों के कणों का स्वतः मिलनाठोस का सीधे गैस में बदलना
अवस्थागैस, द्रव, ठोस — सभी में संभवकेवल ठोस → गैस
उदाहरणइत्र की सुगंध फैलना, चाय रंगीन होनाकपूर, नैफ्थलीन, आयोडीन

🔸 प्रश्न: वाष्पीकरण और क्वथन में क्या अंतर है?
आधारवाष्पीकरणक्वथन
तापमानकिसी भी तापमान पर (क्वथनांक से कम पर भी)केवल क्वथनांक पर
स्थानकेवल सतह सेपूरे द्रव से (बुलबुले बनते हैं)
दरधीमीतेज
उदाहरणगीले कपड़े सूखनाचाय उबलना

🔸 प्रश्न: बोस-आइंस्टाइन कंडनसेट (BEC) क्या है?
📘 उत्तर: यह पदार्थ की पाँचवीं अवस्था है। 1920 में भारतीय वैज्ञानिक सत्येंद्रनाथ बोस ने गणनाएँ कीं और उनके आधार पर अल्बर्ट आइंस्टाइन ने इस अवस्था की भविष्यवाणी की। BEC अत्यंत कम घनत्व वाली गैस को बहुत कम तापमान (परम शून्य के निकट) पर ठंडा करने से बनता है। इसमें सभी कण एक ही ऊर्जा अवस्था में आ जाते हैं। 2001 में इस खोज के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया।
📌 पाँच अवस्थाएँ: ठोस | द्रव | गैस | प्लाज्मा | बोस-आइंस्टाइन कंडनसेट

📌 निष्कर्ष (Conclusion)

पदार्थ हमारे चारों ओर हर रूप में विद्यमान है। पदार्थ के कण अत्यन्त सूक्ष्म होते हैं, उनके बीच रिक्त स्थान होता है, वे निरंतर गतिशील रहते हैं और एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। तापमान और दाब बदलकर हम पदार्थ की अवस्था बदल सकते हैं। वाष्पीकरण एक सतही प्रक्रिया है जो शीतलता उत्पन्न करती है — यही कारण है कि पसीना आने पर हमें ठंडक मिलती है, कूलर ठंडी हवा देता है और घड़े का पानी ठंडा रहता है। ये सभी परिघटनाएँ हमारे दैनिक जीवन में विज्ञान की उपस्थिति का प्रमाण हैं।

📚 कक्षा 9 विज्ञान — अन्य अध्याय
अध्याय 2 — क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं?
अध्याय 3 — परमाणु एवं अणु
अध्याय 4 — परमाणु की संरचना
अध्याय 5 — जीवन की मौलिक इकाई
अध्याय 6 — ऊतक
अध्याय 8 — गति
अध्याय 9 — बल तथा गति के नियम
अध्याय 10 — गुरुत्वाकर्षण
अध्याय 11 — कार्य तथा ऊर्जा
अध्याय 12 — ध्वनि

Comments

Popular posts from this blog

UP Board Enrollment Form Tool 2026-27 | छात्र नवीन नामांकन फॉर्म PDF Generator

Primary Master Time Table Generator 2026-27 | Class 1-5 Time Table Tool UP Board

UP Board General Enrollment Form Tool 2026-27 (कुल छात्र संख्या विवरण) – Online Fill & Print PDF

UP Board Master Time Table Generator Tool 2026 | Editable School Time Table PDF Download

UP Basic Shiksha Parishad Admission Form 2026-27 Online Fill | Download Blank PDF | Class 1 to 8 Form

जनगणना 2027 प्रगणक के कर्तव्य | Census Enumerator Duties Hindi | HLO Guide

UP Basic Shiksha Holiday List 2026 Generator | School Name Wise Holiday List Print (Hindi)

eHRMS Leave Application Generator 2026 | मानव संपदा अवकाश प्रार्थना पत्र PDF डाउनलोड

Class 6 Hindi Chapter 2 Solution | अपना स्थान स्वयं बनाइए

MDM Monthly Calculator (School Wise) | Mid Day Meal Calculation Tool