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UP Board Class 8 Hindi Chapter 8 धानों का गीत Solution | प्रश्न उत्तर

UP Board Class 8 Hindi Chapter 8 धानों का गीत Solution

|| प्रश्न उत्तर | व्याख्या | शब्दार्थ ||

UP Board Class 8 Hindi Chapter 8 “धानों का गीत” एक भावपूर्ण लोकगीत है जिसमें किसान के जीवन और धान की फसल के महत्व को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इस अध्याय में कवि केदारनाथ सिंह ने प्रकृति और किसान के अटूट संबंध को दर्शाया है। इस पोस्ट में आपको कवि परिचय, सप्रसंग व्याख्या, शब्दार्थ, प्रश्न उत्तर और व्याकरण खण्ड सरल एवं परीक्षा उपयोगी रूप में प्राप्त होगा।

UP Board Class 8 Hindi Chapter 8 धानों का गीत Solution:
यहाँ आपको “धानों का गीत” पाठ का कवि परिचय, पद्यांश व्याख्या, शब्दार्थ, अभ्यास प्रश्न उत्तर और व्याकरण एक ही स्थान पर सरल भाषा में मिलेगा।
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कवि परिचय : केदारनाथ सिंह

  • जन्म: नवम्बर सन् 1934 ई० (बलिया जनपद के चकिया गाँव में)
  • कार्यक्षेत्र: कई स्थानों पर अध्यापन कार्य किया। अन्त में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), दिल्ली में प्रोफेसर एवं अध्यक्ष रहे।
  • प्रमुख रचनाएँ: 'अभी बिल्कुल अभी', 'यहाँ से देखो', 'जमीन पक गयी है', 'अकाल में सारस', 'बाघ' आदि।
  • सम्मान: सन् 2013 में इन्हें साहित्य के सर्वोच्च 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
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सन्दर्भ (Context):

प्रस्तुत लोकगीत हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'धानों का गीत' नामक पाठ से अवतरित है। इसके रचयिता आधुनिक बोध एवं प्रगतिशीलता के सशक्त कवि केदारनाथ सिंह जी हैं।

प्रसंग (Theme):

इस गीत में कवि ने ग्रामीण परिवेश का सजीव चित्रण करते हुए एक किसान के स्वर में बादलों का स्वागत किया है। किसान के लिए धान की फसल केवल अन्न नहीं, अपितु उसके प्राणों (जीवन) के समान है।

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पद्यांशों की सप्रसंग विस्तृत व्याख्या
पद्यांश (1 और 2)
धान उगेंगे कि प्रान उगेंगे
उगेंगे हमारे खेत में,
आना जी बादल जरूर !
चन्दा को बाँधेंगे कच्ची कलगियों
सूरज को सूखी रेत में,
आना जी बादल जरूर !
भावार्थ (Explanation):

कवि कृषक (किसान) के माध्यम से बादलों को आमंत्रित करते हुए कहते हैं कि हे बादलों! तुम बरसने के लिए अवश्य आना। तुम्हारे बरसने से ही हमारे खेतों में धान की फसल उगेगी, जो हमारे प्राणों (जीवन) के समान है। अर्थात्, धान के उगने से ही हमारे प्राण बचेंगे।

जब खेतों में धान की कच्ची बालियाँ (कलगियाँ) लहलहाएँगी, तो उन पर पड़ने वाली चाँदनी ऐसी प्रतीत होगी मानो उन्होंने चन्द्रमा को बाँध लिया हो। इसी प्रकार, नदियों के किनारे की सूखी रेत सूर्य के प्रकाश को अपने भीतर समेट लेगी। इसलिए हे बादलों! तुम हमारे गाँव में अवश्य आना।

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पद्यांश (3 और 4)
आगे पुकारेगी सूनी डगरिया
पीछे झुके वन-बेंत,
संझा पुकारेंगी गीली अँखड़ियाँ
भोर हुए धन-खेत,
आना जी बादल जरूर,
धान कँपेंगे कि प्रान कँपेंगे
कँपेंगे हमारे खेत में,
आना जी बादल जरूर !
भावार्थ (Explanation):

किसान बादलों से प्रार्थना करते हुए कहता है कि जल के अभाव में गाँव की पगडंडियाँ (रास्ते) सूनी हैं, वे तुम्हें पुकार रही हैं। पीछे वन में खड़े हुए बेंत के वृक्ष झुककर तुम्हारा स्वागत कर रहे हैं। संध्या (शाम) के समय नमी से भरी गीली आँखें तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही हैं और प्रातःकाल (भोर) होते ही धान के खेत तुम्हें पुकारने लगते हैं। अतः हे बादलों! तुम अवश्य आना।

जब तुम जल बरसाओगे और हवा चलेगी, तो खेतों में लहलहाते हुए धान के पौधे काँपेंगे। उनका काँपना वास्तव में हमारे प्राणों का कंपन (जीवन की धड़कन) होगा। हमारी साँसें उन धान के पौधों से जुड़ी हैं।

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पद्यांश (5 और 6)
धूप ढरे तुलसी-वन झरेंगे
साँझ घिरे पर कनेर,
पूजा की बेला में ज्वार झरेंगे,
धान-दिये की बेर,
आना जी बादल जरूर,
धान पकेंगे कि प्रान पकेंगे
पकेंगे हमारे खेत में, आना जी बादल जरूर !
भावार्थ (Explanation):

कवि ग्रामीण प्राकृतिक सौन्दर्य का वर्णन करते हुए कहते हैं कि जब दोपहर की तीव्र धूप ढलने लगेगी, तब तुलसी के वन महक उठेंगे और संध्या के आगमन पर कनेर के पीले फूल खिल जाएँगे। जब ईश-वंदना (पूजा) का समय होगा, तब ज्वार के फूल झरेंगे और खेतों में धान के पौधे जलते हुए दीपकों (दिये) के समान सुशोभित होंगे।

अंत में किसान कहता है कि जब खेतों में धान की फसल पकेगी, तो वास्तव में वह केवल अन्न नहीं पकेगा, बल्कि हमारे प्राण (जीवन की सफलता और खुशहाली) पककर परिपक्व होंगे। इसलिए हे बादलों! हमारे जीवन को यह पूर्णता प्रदान करने के लिए तुम अवश्य आना।

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1. शब्दार्थ (Word Meanings)
शब्द अर्थ
प्रानप्राण / जीवन का आधार
कलगियोंधान की कच्ची और कोमल बालियों
अँखड़ियाँआँखें
कनेरपीले रंग का एक पुष्प (फूल)
डगरियामार्ग / पगडंडी / रास्ता
संझासंध्या / शाम का समय
भोरप्रातःकाल / सुबह
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2. विचार और कल्पना
प्रश्न 1: बादल और वर्षा कृषक-जीवन के आधार होते हैं। लहलहाते धान के खेतों को देखकर किसान प्रसन्न हो जाता है। वर्षा ऋतु के कुछ विशेष नक्षत्रों में वर्षा अधिक होने पर धान की फसल अच्छी होती है। बताइए कि किन नक्षत्रों में वर्षा अधिक होती है।
उत्तर: भारतीय पंचांग के अनुसार आर्द्रा, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हथिया (हस्त) और चित्रा नक्षत्रों में वर्षा अधिक होती है। कृषकों की मान्यता के अनुसार विशेष रूप से 'हथिया' और 'चित्रा' नक्षत्र की वर्षा धान की फसल के लिए अमृत के समान (अत्यंत लाभदायक) मानी जाती है।
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3. गीत से (अभ्यास प्रश्नोत्तर)
प्रश्न 1: बादल का स्वागत कौन-कौन और कब-कब कर रहे हैं ?
उत्तर: बादल का स्वागत गाँव का किसान, सूनी पगडंडियाँ (रास्ते), वन के झुके हुए वृक्ष, संध्या काल की नमी (गीली आँखें) और प्रातःकाल (भोर) के समय लहलहाते हुए धान के खेत कर रहे हैं।
प्रश्न 2: पंक्तियों के भावार्थ स्पष्ट कीजिए-
  • (क) चंदा को बाँधेंगे कच्ची कलगियों, सूरज को सूखी रेत में।
    भावार्थ: खेतों में उगी धान की कोमल बालियों पर जब उज्ज्वल चाँदनी पड़ेगी, तो ऐसा प्रतीत होगा मानो उन्होंने अपनी सुंदरता से चन्द्रमा को बाँध लिया हो, और नदी किनारे की सूखी रेत सूर्य के प्रखर प्रकाश को बाँध लेगी।
  • (ख) संझा पुकारेंगी गीली अँखड़ियाँ, भोर हुए धन-खेत।
    भावार्थ: संध्या के समय वातावरण में छाई नमी (गीली आँखें) और प्रातःकाल होते ही धान के विशाल खेत बादलों को जल बरसाने के लिए पुकारेंगे।
  • (ग) पूजा की बेला में ज्वार झरेंगे, धान-दिये की बेर।
    भावार्थ: जब संध्या के समय ईश्वर की वंदना (पूजा) का समय होगा, तब ज्वार के फूल झरेंगे और खेतों में खड़े धान के पौधे जलते हुए दीपकों (दिये) के समान पवित्र प्रतीत होंगे।
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प्रश्न 3: धान को प्रान क्यों कहा गया है ? समझाकर लिखिए।
उत्तर: धान (अन्न) ही कृषक (किसान) और सम्पूर्ण मानव जाति के जीवन का मुख्य आधार है। धान की अच्छी फसल होने से ही किसान के जीवन में खुशहाली, समृद्धि और प्राणों का संचार होता है। यदि अन्न न हो तो जीवन समाप्त हो जाएगा, इसीलिए धान को 'प्राण' के समान महत्त्वपूर्ण कहा गया है।
प्रश्न 4: 'धान उगेंगे कि प्रान उगेंगे', 'धान कँपेंगे की प्रान कँपेंगे', और 'धान पकेंगे कि प्रान पकेंगे'- इन तीनों पंक्तियों के भावार्थ की तुलना करते हुए यह स्पष्ट कीजिए कि 'उगेंगे', 'कँपेंगे' और 'पकेंगे' से क्या आशय है।
उत्तर:
  • उगेंगे: इसका आशय धान के अंकुरित होने के साथ-साथ किसान के मन में नए जीवन और नई आशाओं के जन्म से है।
  • कँपेंगे: इसका आशय धान के पौधों का हवा में लहराने के साथ-साथ किसान के जीवन के संघर्ष और प्राणों की धड़कन से है।
  • पकेंगे: इसका आशय फसल के तैयार होने के साथ-साथ किसान के जीवन की सफलता, पूर्णता और समृद्धि से है।
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4. भाषा की बात (व्याकरण खण्ड)
प्रश्न 1: जहाँ प्रकृति की वस्तुओं को मानवीय व्यवहार की तरह दिखाया जाता है, वहाँ मानवीकरण होता है, जैसे- 'संझा पुकारेगी'। इसी तरह कविता में मानवीकरण के अन्य उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
व्याकरण ज्ञान (मानवीकरण अलंकार):

जब प्रकृति (पेड़, पौधे, बादल, हवा आदि) या निर्जीव वस्तुओं में मनुष्य की तरह भावनाओं और क्रियाओं (जैसे- हँसना, रोना, पुकारना) का आरोप किया जाता है, तो वहाँ 'मानवीकरण अलंकार' होता है।

उत्तर: कविता में मानवीकरण के अन्य उदाहरण निम्नलिखित हैं-
  • "आगे पुकारेगी सूनी डगरिया" (रास्ते का मनुष्य की तरह पुकारना)
  • "पीछे झुके वन-बेंत" (वृक्षों का मनुष्य की तरह झुककर स्वागत करना)
  • "संझा पुकारेंगी गीली अँखड़ियाँ" (शाम का आँखों के माध्यम से पुकारना)
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प्रश्न 2: कविता में अनेक तद्भव शब्दों का प्रयोग हुआ है, जैसे- 'प्रान' और 'चन्दा'। इनका तत्सम रूप क्रमशः 'प्राण' और 'चन्द्रमा' है। कविता में आये अन्य तद्भव शब्दों को छाँटिए तथा उनका तत्सम रूप लिखिए।
तद्भव (कविता में प्रयुक्त रूप) तत्सम (संस्कृत का शुद्ध रूप)
प्रानप्राण
चन्दाचन्द्रमा
सूरजसूर्य
संझासंध्या
अँखड़ियाँअक्षि (आँखें)
खेतक्षेत्र
काज (यदि पाठ में प्रयुक्त हो)कार्य
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FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: धानों का गीत पाठ किस कक्षा में है?
उत्तर: यह पाठ UP Board Class 8 Hindi में शामिल है।
प्रश्न: धानों का गीत के कवि कौन हैं?
उत्तर: इस पाठ के कवि केदारनाथ सिंह हैं।
प्रश्न: धान को ‘प्राण’ क्यों कहा गया है?
उत्तर: क्योंकि धान ही किसान और मानव जीवन का मुख्य आधार है। धान की फसल जीवन और खुशहाली का प्रतीक है।
प्रश्न: UP Board Class 8 Hindi Chapter 8 Solution कहाँ मिलेगा?
उत्तर: Basic Shiksha Solution पर इस अध्याय का सम्पूर्ण समाधान उपलब्ध है।
निष्कर्ष
उत्तर: इस प्रकार UP Board Class 8 Hindi Chapter 8 धानों का गीत Solution में हमने कवि परिचय, पद्यांश व्याख्या, शब्दार्थ, प्रश्न उत्तर एवं व्याकरण विस्तार से प्रस्तुत किया। यह समाधान विद्यार्थियों की परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है।
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Basic Shiksha Solution पर Class 2 से 8 तक के सभी विषयों के chapter-wise UP Board solutions उपलब्ध हैं।
अन्य अध्याय देखें – Class 8 Hindi
  • 👉 UP Board Class 8 Hindi All Chapters Solution
  • 👉 UP Board Class 8 Hindi Chapter 7 Solution
  • 👉 UP Board Class 8 Hindi Chapter 9 Solution
  • 👉 UP Board Class 8 Science Solution
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