UP Board Class 8 Hindi Chapter 4 पेड़ों के संग बढ़ना सीखो Solution | कक्षा 8 हिंदी पाठ 4 प्रश्न उत्तर
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पाठ 4: पेड़ों के संग बढ़ना सीखो
Class 8 Hindi Chapter 4 “पेड़ों के संग बढ़ना सीखो” UP Board के नवीनतम पाठ्यक्रम पर आधारित एक महत्वपूर्ण कविता है। इस पोस्ट में आपको सारांश, पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या, शब्दार्थ, अभ्यास प्रश्नोत्तर तथा परीक्षा उपयोगी व्याकरण सरल भाषा में मिलेगा। यदि आप UP Board Class 8 Hindi Chapter 4 Solution या पेड़ों के संग बढ़ना सीखो प्रश्न उत्तर खोज रहे हैं, तो Basic Shiksha Solution पर दिया गया यह लेख आपकी तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी है।
यहाँ आपको कविता का सारांश, पद्यांश व्याख्या, शब्दार्थ, अभ्यास प्रश्नोत्तर और व्याकरण एक ही स्थान पर मिलेगा।
कवि परिचय : सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
- जन्म: 15 सितम्बर सन् 1927 ई० (बस्ती, उत्तर प्रदेश)
- विशेषता: ये नयी कविता के श्रेष्ठ कवियों में से एक हैं। इनके काव्य में प्रगतिशील चेतना की प्रधानता है।
- प्रमुख रचनाएँ: 'कुआनो नदी', 'गर्म हवाएँ', 'खूँटियों पर टँगे लोग', 'काठ की घंटियाँ', 'बाँस का पुल'।
- निधन: 23 सितम्बर सन् 1983 ई०
प्रस्तुत कविता हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'पेड़ों के संग बढ़ना सीखो' नामक पाठ से अवतरित है। इसके रचयिता प्रसिद्ध कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी हैं।
प्रसंग (Theme):इस कविता में कवि ने पर्यावरण संरक्षण (प्रकृति की रक्षा) की प्रेरणा दी है। कवि ने स्पष्ट किया है कि यदि हम पेड़ों को नष्ट करेंगे, तो सम्पूर्ण मानव सभ्यता और प्राणियों का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।
उस धरती में बाग-बगीचा, जो हो सके लगाऊँ,
खिलें फूल-फल, चिड़ियाँ बोलें, प्यारी खुशबू डोले
ताज़ी हवा जलाशय में अपना हर अंग भिगो ले।
हो सकता है पास तुम्हारे, अपनी कुछ धरती हो
फूल-फल लदे अपने उपवन हों, अपनी परती हो,
हो सकता है छोटी-सी क्यारी हो, महक रही हो
छोटी-सी खेती हो, जो फ़सलों से दहक रही हो।
कवि कहते हैं कि मेरे मन में बहुत दिनों से यह विचार था कि मेरे पास अपनी थोड़ी सी भूमि (धरती) हो। उस भूखंड पर मैं एक सुंदर बाग-बगीचा लगाऊँ, जिसमें सुगंधित फूल और मीठे फल खिलें। उस उपवन में पक्षी चहचहाएँ और स्वच्छ वायु पास के तालाब (जलाशय) के जल से स्पर्श होकर वातावरण को शीतल बनाए।
कवि आगे पाठकों से कहते हैं कि संभव है कि आप लोगों के पास अपनी कुछ भूमि हो, जिसमें आपके अपने फलों और फूलों से लदे हुए उपवन (बगीचे) हों। हो सकता है कि आपके पास कोई छोटी सी सुगंधित क्यारी हो या फिर फसलों से लहलहाता हुआ कोई छोटा सा खेत हो।
हो सकता है कहीं सहन में पक्षी झूम रहे हों,
तो विनती है यही, कभी मत उस दुनिया को खोना
पेड़ों को मत कटने देना, मत चिड़ियों को रोना।
एक-एक पत्ती पर हम सबके सपने सोते हैं
शाखें कटने पर वे भोले शिशुओं-सा रोते हैं,
पेड़ों के संग बढ़ना सीखो, पेड़ों के संग हिलना
पेड़ों के संग-संग इतराना, पेड़ों के संग हिलना।
कवि कहते हैं कि यदि तुम्हारे पास कोई ऐसा स्थान है जहाँ चार पैरों वाले पशु (चौपाए) शांति से विचरण कर रहे हों और आँगन (सहन) में पक्षी प्रसन्नता से झूम रहे हों, तो मेरी आपसे यही विनती (प्रार्थना) है कि उस प्राकृतिक संसार को कभी नष्ट मत होने देना। कभी वृक्षों को कटने मत देना, क्योंकि वृक्षों के कटने से पक्षियों का आश्रय छिन जाएगा और वे विलाप करेंगे।
कवि समझाते हैं कि वृक्षों की एक-एक पत्ती पर हमारे जीवन के स्वप्न (साँसें) टिके हुए हैं। जब कोई पेड़ की शाखाओं को काटता है, तो वे वृक्ष भी अबोध बालकों (शिशुओं) के समान पीड़ा से रोते हैं। इसलिए हे मानव! तुम भी वृक्षों के समान पनपना (बढ़ना) और उनके साथ प्रसन्नता से लहराना सीखो।
नहीं समझते जो, वे दुष्कर्मों का फल चखते हैं,
आज सभ्यता वहशी बन, पेड़ों को काट रही है
ज़हर फेफड़ों में भर, इंसानो को बाँट रही है।
कवि का मानना है कि छोटे बालक और हरे-भरे वृक्ष ही इस संसार को आनंदित और खुशहाल रखते हैं। जो अज्ञानी लोग इस सत्य को नहीं समझते, वे अंततः अपने बुरे कर्मों (प्रकृति विनाश) का भयंकर परिणाम भुगतते हैं।
आज की आधुनिक मानव सभ्यता अत्यंत असभ्य और बर्बर (वहशी) हो गई है। वह निर्दयतापूर्वक वनों को नष्ट कर रही है। इन पेड़ों के कटने से वातावरण में विषैला धुआँ (प्रदूषण) फैल रहा है, जो मनुष्य के फेफड़ों को नष्ट कर रहा है।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| दहक | आग की लपट / यहाँ अर्थ है 'फसलों का लहलहाना' |
| सहन | आँगन |
| जलाशय | तालाब / सरोवर |
| अंग | हिस्सा / भाग |
| दुष्कर्म | बुरे कर्म / पाप |
| वहशी | असभ्य / बर्बर / जंगली |
| चौपाए | चार पैरों वाले पशु (जानवर) |
क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि कर्ता (काम करने वाला) स्वयं कार्य न करके, किसी दूसरे व्यक्ति को कार्य करने की प्रेरणा (आदेश) दे रहा है, उसे 'प्रेरणार्थक क्रिया' कहते हैं।
उदाहरण: पढ़ना (स्वयं) ➔ पढ़वाना (दूसरे से)।
| मूल क्रिया (स्वयं करना) | प्रेरणार्थक क्रिया (दूसरे से करवाना) |
|---|---|
| खेलना | खिलवाना |
| रखना | रखवाना |
| घूमना | घुमवाना |
| काटना | कटवाना |
| बनाना | बनवाना |
| लिखना | लिखवाना |
| देखना | दिखवाना |
| पिलाना | पिलवाना |
जब काव्य (कविता) में किसी एक व्यंजन वर्ण (अक्षर) की एक से अधिक बार आवृत्ति (पुनरावृत्ति) होती है, जिससे सुनने में एक संगीतात्मक लय उत्पन्न हो, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
- सपने सोते: (यहाँ 'स' वर्ण की आवृत्ति हुई है।)
- फूल-फल: (यहाँ 'फ' वर्ण की आवृत्ति हुई है।)
अन्य अध्याय देखें – Class 8 Hindi
- 👉 UP Board Class 8 Hindi All Chapters Solution
- 👉 Class 8 Hindi Notes
- 👉 UP Board Class 8 Science Solution
- 👉 UP Board Class 8 Sanskrit Solution
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