UP Board Class 8 Hindi Chapter 3 सच्ची वीरता Solution | कक्षा 8 हिंदी पाठ 3 प्रश्न उत्तर
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पाठ 3: सच्ची वीरता
Class 8 Hindi Chapter 3 “सच्ची वीरता” UP Board के नवीनतम पाठ्यक्रम पर आधारित एक महत्वपूर्ण पाठ है। इस पोस्ट में आपको सारांश, शब्दार्थ, पद्यांश/गद्यांश की सरल व्याख्या, अभ्यास प्रश्नोत्तर तथा परीक्षा उपयोगी व्याकरण सरल और स्पष्ट भाषा में उपलब्ध कराया गया है। यदि आप UP Board Class 8 Hindi Chapter 3 Solution या सच्ची वीरता प्रश्न उत्तर खोज रहे हैं, तो Basic Shiksha Solution पर दिया गया यह लेख आपकी परीक्षा तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी है।
यहाँ आपको पाठ “सच्ची वीरता” का सारांश, शब्दार्थ, पद्यांश/गद्यांश व्याख्या, अभ्यास प्रश्नोत्तर तथा परीक्षा उपयोगी व्याकरण सरल भाषा में मिलेगा।
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लेखक परिचय : सरदार पूर्ण सिंह
- जन्म: 17 फरवरी सन् 1881 ई० (एक सिख परिवार में)
- विशेषता: ये पेशे से अध्यापक थे। विचार और भावात्मकता इनके निबन्धों की मुख्य विशेषताएँ हैं।
- प्रमुख रचनाएँ: 'मजदूरी और प्रेम', 'सच्ची वीरता', 'आचरण की सभ्यता'।
- निधन: सन् 1931 ई०
प्रस्तुत प्रेरणादायक निबंध हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'सच्ची वीरता' नामक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता प्रसिद्ध निबंधकार सरदार पूर्ण सिंह जी हैं।
प्रसंग (Theme):इस पाठ में सच्चे वीर पुरुषों के धैर्य, साहस, और स्वाभिमान जैसे गुणों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया है कि सच्चा वीर व्यक्ति किसी से डरता नहीं है और हमेशा सत्य (सच्चाई) का साथ देता है।
लेखक बताते हैं कि सच्चे वीर पुरुष हमेशा धीर, गंभीर और स्वतंत्र (आजाद) विचारों वाले होते हैं। उनके मन की गहराई समुद्र की तरह विशाल और आकाश की तरह स्थिर होती है। जब वे गरजते हैं, तो सदियों तक उनकी दहाड़ सुनाई देती है। वे दिखावे के लिए काम नहीं करते।
- गुलाम और सम्राट: एक बार एक स्वतंत्र विचारों वाले दास (गुलाम) ने एक सम्राट से कहा कि तुम मुझे केवल फाँसी पर चढ़ा सकते हो, लेकिन मेरे मन को नहीं झुका सकते। मैं मृत्यु के समय भी तुम्हारा अपमान कर सकता हूँ।
- मंसूर का अद्वैत भाव: मंसूर नामक संत ने ईश्वर प्रेम में डूबकर कहा, "अहं ब्रह्मास्मि" (मैं ही ब्रह्म हूँ)। दुनिया ने उन्हें पत्थर मारे, सूली पर चढ़ाया, लेकिन वे अपने सत्य मार्ग से पीछे नहीं हटे।
- रणजीत सिंह और नेपोलियन: महाराजा रणजीत सिंह के जोश से सेना ने भयंकर लहरों वाली अटक नदी पार कर ली। इसी प्रकार वीर नेपोलियन के कहने पर कि "आल्प्स है ही नहीं", उनकी सेना ने असंभव माने जाने वाले पहाड़ को भी पार कर लिया।
लेखक के अनुसार, वीरों को बनाने के कारखाने नहीं होते। वे तो देवदार के वृक्षों की भाँति स्वयं पैदा होते हैं और बिना किसी सहारे के अपनी ताकत से संसार में महान कार्य करते हैं। जो लोग दिखावा करते हैं वे गरजने वाले बादलों के समान होते हैं, जबकि सच्चे वीर बरसने वाले बादलों के समान बिना आवाज़ किए महान कार्य कर जाते हैं。
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| तिरस्कार | अपमान / अनादर |
| शेखी | हेकड़ी / झूठा दिखावा या शान |
| कलाम | वाणी / शब्द / वार्तालाप |
| सत्त्वगुण | सादगी और सच्चाई से युक्त |
| शिकस्त | पराजय / हार |
| अभिव्यक्ति | प्रकट होना / विचारों को सामने लाना |
| अन्तः प्रेरणा | अपने मन की भीतरी प्रेरणा |
| अरण्य | जंगल / वन |
| बुजदिली | कायरता / डरपोकपन |
- (क) 'अनलहक' (अहं ब्रह्मास्मि)। — मंसूर
- (ख) मैं तुमको अभी जान से मार डालूँगा। — बादशाह
- (ग) अटक के पार जाओ। — महाराजा रणजीत सिंह
- (घ) आल्प्स है ही नहीं। — नेपोलियन
- डर से अधमरा होना: (बहुत अधिक भयभीत होना)
वाक्य: अचानक सामने भयानक शेर को देखकर शिकारी डर से अधमरा हो गया। - छाती ठोंककर आगे बढ़ना: (साहस का दिखावा करना)
वाक्य: कायर लोग केवल छाती ठोंककर आगे बढ़ते हैं, पर संकट आने पर भाग खड़े होते हैं। - रास्ता साफ होना: (बाधा या रुकावट का दूर हो जाना)
वाक्य: कड़ी मेहनत के बाद अब सफलता का रास्ता साफ हो गया है। - रंग चढ़ना: (किसी का गहरा प्रभाव पड़ना)
वाक्य: सत्संगति में रहने से धीरे-धीरे सब पर अच्छाई का रंग चढ़ जाता है। - दिल को बाँध देना: (प्रेम और प्रभाव से किसी को अपना बना लेना)
वाक्य: सच्चे वीर अपने प्रेम और त्याग से जनता के दिल को बाँध देते हैं।
| उर्दू शब्द | शुद्ध हिंदी समानार्थी |
|---|---|
| आज़ाद | स्वतंत्र / स्वाधीन |
| गुलाम | दास / सेवक |
| बादशाह | सम्राट / राजा |
| कैदी | बंदी |
| फौज | सेना |
| दरिया | नदी / सरिता |
| कुदरत | प्रकृति |
'त्व' एक भाववाचक प्रत्यय है। जब यह किसी शब्द के अंत में जुड़ता है, तो वह उस शब्द को एक 'विशेष भाव या गुण' (Abstract Noun) में बदल देता है। इससे शब्द की गरिमा और गहराई बढ़ जाती है。
| मूल शब्द | प्रत्यय | नया शब्द (भाववाचक संज्ञा) |
|---|---|---|
| महत् | + त्व | महत्त्व (महान होने का भाव) |
| प्रभु | + त्व | प्रभुत्व (स्वामी होने का भाव) |
| तत् | + त्व | तत्त्व (मूल सार) |
| वीर | + त्व | वीरत्व (वीरता का भाव) |
'अ' और 'अन्' नकारात्मक (निषेधवाचक) उपसर्ग हैं। जब ये किसी शब्द के शुरुआत (प्रारंभ) में जुड़ते हैं, तो वे शब्द के अर्थ को बिल्कुल उल्टा (विलोम) कर देते हैं。
| मूल शब्द | उपसर्ग | विलोम शब्द (Antonym) |
|---|---|---|
| उपस्थित (उ-स्वर) | अन् + उपस्थित | अनुपस्थित |
| स्थायी (स्-व्यंजन) | अ + स्थायी | अस्थायी |
| साधारण (स्-व्यंजन) | अ + साधारण | असाधारण |
| समान (स्-व्यंजन) | अ + समान | असमान |
| उदार (उ-स्वर) | अन् + उदार | अनुदार |
जब दो या दो से अधिक व्यंजन लगातार (बिना किसी स्वर के) एक साथ आते हैं, तो उन्हें 'व्यंजनगुच्छ' कहा जाता है।
- सत्त्व (त् + त् + व्)
- केन्द्र (न् + द् + र्)
अन्य अध्याय देखें – Class 8 Hindi
- 👉 UP Board Class 8 Hindi All Chapters Solution
- 👉 Class 8 Hindi Notes
- 👉 UP Board Class 8 Science Solution
- 👉 UP Board Class 8 Sanskrit Solution
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