UP Board Class 8 Hindi Chapter 1 वीणा वादिनी वर दे | कक्षा 8 हिंदी पाठ 1 सम्पूर्ण समाधान
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पाठ 1: वीणा वादिनी वर दे
Class 8 Hindi Chapter 1 “वीणा वादिनी वर दे” UP Board की एक महत्वपूर्ण कविता है, जिसे महाप्राण कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' ने रचा है। इस वंदना गीत में कवि माँ सरस्वती से राष्ट्र में नवचेतना, ज्ञान और स्वतंत्रता का प्रकाश फैलाने की प्रार्थना करते हैं। इस पोस्ट में आपको पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या, शब्दार्थ, भावार्थ, अभ्यास प्रश्नोत्तर तथा व्याकरण खण्ड परीक्षा उपयोगी रूप में मिलेगा। यदि आप UP Board Class 8 Hindi Chapter 1 Solution या Veena Vadini Var De Explanation in Hindi खोज रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए पूर्ण मार्गदर्शक है।
कवि परिचय : सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
- कवि: महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
- विशेषता: छायावादी युग के प्रमुख स्तम्भ तथा उत्कृष्ट रचनाकार।
- सम्पादन: इन्होने 'मतवाला', 'सुधा' और 'समन्वय' आदि श्रेष्ठ पत्रिकाओं का सम्पादन किया।
प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'वीणा वादिनी वर दे' नामक पाठ से अवतरित है। इसके रचयिता छायावाद के प्रसिद्ध कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' जी हैं。
प्रसंग (Theme):इस वन्दना गीत में कवि ने विद्या की देवी माँ सरस्वती से प्रार्थना की है कि वे भारतवासियों के मन से अज्ञानता का अन्धकार दूर कर दें और सम्पूर्ण राष्ट्र में नवचेतना व ज्ञान का प्रकाश फैला दें।
प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मन्त्र नव
भारत में भर दे !
कवि विद्या की देवी माँ सरस्वती से प्रार्थना करते हुए कहते हैं कि हे वीणावादिनी (वीणा बजाने वाली माँ सरस्वती)! आप हमें वरदान दीजिए। आप भारतवर्ष के प्रत्येक नागरिक के हृदय में स्वतंत्रता की प्रिय ध्वनि (रव) और अमरता प्रदान करने वाला नवीन कल्याणकारी मंत्र भर दीजिए। अर्थात्, समस्त भारतवासी स्वतंत्र होकर नवीन उत्साह के साथ अपना जीवन यापन करें।
बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर,
कलुष-भेद तम-हर, प्रकाश भर
जगमग जग कर दे !
हे माता! आप भारतवासियों के अज्ञान से भरे हुए हृदयों (अंध-उर) के सभी अज्ञान रुपी बंधनों को काट दीजिए और उनके हृदयों में ज्ञान का प्रकाशवान झरना (ज्योतिर्मय निर्झर) बहा दीजिए। हमारे मन में जितने भी पाप, मलिनता (कलुष) और अज्ञान का अंधकार (तम) व्याप्त है, उसे दूर कर दीजिए। हमारे हृदयों को ज्ञान के दिव्य प्रकाश से जगमगा दीजिए, जिससे सम्पूर्ण संसार ज्ञान के प्रकाश से प्रकाशित हो उठे।
नवल कंठ, नव जलद - मन्द्ररव,
नव नभ के नव विहग-वृन्द को
नव-पर, नव-स्वर दे !
कवि माँ सरस्वती से प्रार्थना करते हैं कि हे माँ! आप हम भारतवासियों को नवीन गति, नवीन लय और नवीन ताल व छंद प्रदान करें। आप हमें नवीन कंठ (स्वर) दें जो नवीन बादलों (जलद) के समान गंभीर ध्वनि (मन्द्ररव) वाला हो। इस नए आकाश (स्वतंत्र भारत) में विचरण करने वाले नए पक्षियों के समूह (नए समाज या युवा पीढ़ी) को नवीन पंख (नव-पर) और नवीन स्वर प्रदान करें। अर्थात्, राष्ट्र का सम्पूर्ण नवनिर्माण हो और सब कुछ कल्याणकारी हो।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| रव | ध्वनि / आवाज़ |
| अमृत मन्त्र | ऐसे मन्त्र जो अमरत्व की ओर ले जायें / कल्याणकारी मन्त्र |
| अंध-उर | अज्ञानपूर्ण हृदय (अज्ञानता से भरा मन) |
| कलुष | मलिनता / पाप / बुराई |
| मन्द्ररव | बादलों जैसी गंभीर ध्वनि |
| विहग-वृन्द | पक्षियों का समूह |
मैं अपने विद्यालय के लिए माँ सरस्वती से निम्नलिखित वरदान माँगना चाहूँगा/चाहूँगी:
- सभी छात्रों को सद्बुद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का वरदान मिले।
- विद्यालय के सभी छात्र अनुशासित रहें और श्रेष्ठ ज्ञान प्राप्त करें।
- हमारा विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ संस्कार और नैतिक मूल्यों का भी महान केंद्र बने।
कविता में कवि ने माँ सरस्वती से भारत के लिए यह वरदान माँगा है कि भारतवासियों का अज्ञान रुपी अन्धकार दूर हो जाए, उनके हृदयों में नवचेतना व स्वतंत्रता का अमृत मन्त्र भर जाए और सम्पूर्ण राष्ट्र ज्ञान के प्रकाश से जगमगा उठे।
| शब्द खण्ड 'क' | सही मिलान (खण्ड 'ख') |
|---|---|
| वीणा | वादिनि |
| स्वतन्त्र | रव |
| अन्ध | उर |
| विहग | वृन्द |
| ताल | छन्द नव |
| बन्धन | स्तर |
| अमृत | मन्त्र नव |
| जलद | मन्द्र रव |
भाव: हे माँ सरस्वती! आप मनुष्यों के अज्ञान से भरे हुए हृदयों के सभी बंधनों को काटकर उन्हें मुक्त कर दें और उनके मन में ज्ञान रुपी प्रकाश का झरना प्रवाहित कर दें।
(ख) कलुष-भेद तम-हर, प्रकाश भर, जगमग जग कर दे।भाव: हे माता! हमारे हृदयों में जो भी पाप, मलिनता और अज्ञानता का अन्धकार है, उसका नाश करके हमारे मन को दिव्य प्रकाश से प्रकाशित कर दें, जिससे सम्पूर्ण संसार जगमगा उठे।
(ग) नव गति, नव लय, ताल-छन्द नव, नवल कंठ, नव जलद मन्द्ररव ।भाव: हे माँ! आप हम भारतवासियों को नया जीवन, नई गति, नई लय, नया ताल-छंद और नवीन गंभीर स्वर (कंठ) प्रदान करें ताकि इस नव-निर्माण में सम्पूर्ण राष्ट्र ऊर्जावान बने।
तुकान्त शब्द (Rhyming Words) जिनके अन्तिम अक्षर और ध्वनियाँ समान होती हैं:
- कर दे
- स्वर दे
जब किसी विसर्ग (ः) के बाद कोई स्वर या व्यंजन आता है, तो विसर्ग में जो परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग सन्धि कहते हैं।
| सन्धि विच्छेद | सन्धि युक्त शब्द |
|---|---|
| निः + मल | निर्मल |
| दुः + बल | दुर्बल |
| आशीः + वाद | आशीर्वाद |
जिस समास में दोनों पद प्रधान न होकर किसी तीसरे विशेष अर्थ (प्रायः किसी भगवान या विशेष व्यक्ति) का बोध कराते हैं, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।
| समस्त पद | समास विग्रह (Explanation) |
|---|---|
| गजानन | गज (हाथी) के समान आनन (मुख) है जिसका अर्थात् श्री गणेश |
| पीताम्बर | पीला है अम्बर (वस्त्र) जिसका अर्थात् श्री कृष्ण / विष्णु |
| चतुरानन | चार हैं आनन (मुख) जिसके अर्थात् ब्रह्मा जी |
कविता में 'नव' शब्द निम्नलिखित शब्दों के विशेषण (Adjective) के रूप में प्रयुक्त हुआ है:
- नव अमृत-मन्त्र
- नव लय
- नव ताल-छन्द
- नव जलद
- नव नभ
- नव विहग-वृन्द
- नव पर
- नव स्वर
🌟 महत्वपूर्ण तथ्य
- सरस्वती सम्मान: यह सम्मान साहित्य के क्षेत्र में के० के० बिड़ला फाउण्डेशन द्वारा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किसी भी भाषा में पिछले दस वर्षों में प्रकाशित उत्कृष्ट साहित्यिक कृति पर दिया जाता है। इसकी स्थापना सन् 1991 ई० में हुई थी।
❓ Frequently Asked Questions (FAQs)
Q. वीणा वादिनी वर दे कविता के रचयिता कौन हैं?
Ans. इस कविता के रचयिता सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' हैं।
Q. यह कविता किस कक्षा की है?
Ans. यह कविता UP Board Class 8 Hindi का पहला पाठ है।
Q. इस कविता का मुख्य संदेश क्या है?
Ans. इस कविता का मुख्य संदेश राष्ट्र में ज्ञान, नवचेतना और अज्ञानता का नाश करना है।
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