BASIC SHIKSHA SOLUTION में आपका स्वागत है

नमस्ते प्यारे बच्चों और सम्मानित शिक्षकों! 'बेसिक शिक्षा सॉल्यूशन' परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।  यह वेबसाइट विशेष रूप से  कक्षा 1 से 8तक के सभी छात्रों और शिक्षकों के लिए तैयार की  है। यहाँ आपको क्या मिलेगा: व्यापक कवरेज: कक्षा 1 से 8 तक के सभी मुख्य विषयों (जैसे गणित, विज्ञान, हिंदी, सामाजिक विज्ञान, आदि) के सरल नोट्स और शिक्षण सामग्री मिलेगी। विषयों को आसान बनाना: जटिल विषयों को आसान भाषा, चित्र और उदाहरणों के साथ समझाया जाएगा, जो NCERT/UP बोर्ड पाठ्यक्रम पर आधारित होंगे। अभ्यास सामग्री: स्कूल की परीक्षाओं और अवधारणाओं को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर और अभ्यास पत्र यहाँ उपलब्ध होंगे। शिक्षकों के लिए संसाधन: बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़ी उपयोगी शिक्षण सामग्री और अपडेट भी समय-समय पर साझा की जाएगी। मेरा उद्देश्य है कि आप सभी को गुणवत्तापूर्ण और सरल शिक्षा सामग्री एक ही जगह पर मिल सके। जुड़े रहें! आप अपनी किसी भी शंका या सुझाव को नीचे कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं। मुझे आपकी मदद करके खुशी होगी। आपका शुभचिंतक, बेसिक शिक्षा सॉल्यूशन

UP Board Class 7 Hindi Chapter 7 बाललीला | कक्षा 7 हिंदी पाठ 7 सम्पूर्ण समाधान

पाठ 7: बाललीला

|| UP BOARD CLASS 7 HINDI SOLUTION ||

UP Board Class 7 Hindi Chapter 7 बाललीला एक अत्यंत ही मनोहारी और भक्तिपूर्ण पाठ है। इसमें भक्तिकाल के दो महान कवियों— सूरदास और गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित पदों का संकलन है। इन पदों में भगवान श्रीकृष्ण और प्रभु श्रीराम की बाल-लीलाओं (बचपन की शरारतों) का अत्यंत सजीव और मनमोहक चित्रण किया गया है।

इस पोस्ट में Class 7 Hindi Chapter 7 Solution के अंतर्गत सभी पदों की सप्रसंग व्याख्या, भावार्थ, शब्दार्थ, अभ्यास प्रश्नोत्तर और भाषा की बात (व्याकरण) को अत्यंत सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। यह सामग्री UP Board Class 7 परीक्षा 2026 के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

📌 इस पोस्ट में क्या मिलेगा? (Featured Snippet)
  • कवि सूरदास व तुलसीदास का जीवन परिचय
  • सभी पदों की सप्रसंग व्याख्या व सरल भावार्थ
  • कठिन शब्दों के अर्थ (Word Meanings)
  • पाठ के सभी अभ्यास प्रश्न-उत्तर
  • व्याकरण (तत्सम शब्द, भाववाचक संज्ञा, उपसर्ग)
  • परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण FAQs
BASIC SHIKSHA SOLUTION ● UPBOARD CLASS 7 HINDI SOLUTION

कवि परिचय

1. महाकवि सूरदास

  • जन्म: सन् 1478 ई० (रुनकता ग्राम)
  • विशेषता: वात्सल्य रस के सम्राट एवं कृष्ण भक्ति शाखा के प्रमुख कवि।
  • रचनाएँ: सूरसागर, सूर सारावली, साहित्य लहरी।

2. गोस्वामी तुलसीदास

  • जन्म: 1511 ई० (सोरों, कासगंज)
  • विशेषता: राम भक्ति शाखा के श्रेष्ठ कवि।
  • रचनाएँ: रामचरितमानस (महाकाव्य), विनय पत्रिका, कवितावली।
BASIC SHIKSHA SOLUTION ● EXPLANATION
भाग 1: सूरदास के पद (सप्रसंग व्याख्या)
सन्दर्भ (Context):

प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'बाललीला' नामक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता वात्सल्य रस के सम्राट, कृष्ण भक्त कवि सूरदास जी हैं।

प्रसंग (Theme):

प्रथम पद में बालकृष्ण अपनी माता यशोदा से बड़े भाई बलराम (दाऊ) की शिकायत कर रहे हैं। दूसरे पद में माता यशोदा द्वारा बालकृष्ण को पालने में सुलाने का अत्यंत मनोहारी वर्णन किया गया है।

पहला पद (सूरदास)
मैया मोहिं दाऊ बहुत खिझायौ।
मोसों कहत मोल कौ लीन्हौं, तू जसुमति कब जायौ।
कहा करौं यहि रिसि के मारे, खेलन हौं नहिं जात।
पुनि-पुनि कहत कौन है माता, को है तेरो तात।
गोरे नन्द, जसोदा गोरी, तू कत स्यामल गात।
चुटकी दै दै ग्वाल नचावत, हँसत सबै मुसकात।
तू मोहीं कौ मारन सीखी, दाउहिं कबहुँ न खीझै।
मोहन-मुख रिस की ये बातें, जसुमति सुनि-सुनि रीझै।
सुनहु कान्ह बलभद्र चबाई, जनमत ही कौ धूत।
'सूर' स्याम मोहि गोधन की सौं, हौं माता तू पूत।
भावार्थ (Explanation):

बालकृष्ण अत्यंत भोलेपन से अपनी माता यशोदा से कहते हैं— "हे मैया! बड़े भाई दाऊ (बलराम) मुझे बहुत चिढ़ाते हैं। वे मुझसे कहते हैं कि तुझे तो खरीद कर (मोल) लाया गया है, यशोदा मैया ने तुझे जन्म कब दिया? इसी क्रोध के कारण मैं उनके साथ खेलने नहीं जाता। वे बार-बार मुझसे पूछते हैं कि बता तेरी माता कौन है और तेरे पिता कौन हैं? नन्द बाबा तो गोरे हैं, माता यशोदा भी गोरी हैं, फिर तेरा शरीर साँवला (श्याम गात) क्यों है? उनकी यह बात सुनकर सभी ग्वाल-बाल चुटकी बजा-बजाकर मुझे नचाते हैं और हँसते हैं। हे मैया! तुमने केवल मुझे ही मारना सीखा है, दाऊ पर तुम कभी क्रोध नहीं करतीं।"

सूरदास जी कहते हैं कि अपने कान्हा के मुख से क्रोध भरी ये मीठी बातें सुनकर माता यशोदा मन ही मन अत्यंत प्रसन्न (रीझै) हो रही हैं। वे कान्हा को समझाते हुए कहती हैं— "हे कृष्ण! सुनो, बलराम तो जन्म से ही चुगलखोर (चबाई) और चालाक है। मैं गायों की सौगंध खाकर कहती हूँ कि मैं ही तुम्हारी माता हूँ और तुम ही मेरे पुत्र हो।"

दूसरा पद (सूरदास)
जसोदा हरि पालनैं झुलावै |
हलरावै, दुलराइ, मल्हावै, जोई सोइ कछु गावै |
मेरे लाल कौं आउ निंदरिया, काहें न आनि सुवावै |
तू काहैं नहिं बेगिहिं आवै, तोकौ कान्ह बुलावै |
कबहुँ पलक हरि मूँदि लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै |
सोवत जानि मौन कै रहि, करि करि सैन बतावै |
इहि अंतर अकुलाइ उठे हरि, जसुमति मधुरैं गावै |
जो सुख सूर अमर - मुनि दुरलभ, सो नंद भामिनी पावै |
भावार्थ (Explanation):

माता यशोदा बालकृष्ण को पालने में झुला रही हैं। वे पालने को हिलाती हैं, अपने लला को प्यार से पुचकारती हैं और जो मन में आता है, वही मधुर गीत गाने लगती हैं। वे नींद का आह्वान करते हुए गाती हैं— "अरी निंदिया! तू आकर मेरे लाल को सुलाती क्यों नहीं? तू शीघ्र (जल्दी) क्यों नहीं आती, देख तुझे मेरा कान्हा बुला रहा है।"

पालने में झूलते हुए बालकृष्ण कभी अपनी पलकें मूँद लेते हैं और कभी अपने होंठ (अधर) फड़काने लगते हैं। उन्हें सोता हुआ जानकर माता यशोदा मौन (चुप) हो जाती हैं और अन्य गोपियों को भी इशारे से चुप रहने को कहती हैं। इसी बीच कृष्ण अकुलाकर (चौंककर) फिर से जाग जाते हैं और माता यशोदा पुनः मधुर स्वर में गाने लगती हैं। सूरदास जी कहते हैं कि बाल-क्रीड़ा का जो अलौकिक सुख देवताओं और मुनियों के लिए भी प्राप्त करना कठिन (दुर्लभ) है, वही सुख आज नंद की पत्नी (यशोदा) बड़ी सहजता से प्राप्त कर रही हैं।

भाग 2: तुलसीदास के पद (सप्रसंग व्याख्या)
सन्दर्भ (Context):

प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'बाललीला' नामक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता रामभक्त शाखा के महान कवि गोस्वामी तुलसीदास जी हैं।

प्रसंग (Theme):

इन पदों में श्री राम और उनके भाइयों के अत्यंत मनोहारी बाल-सौंदर्य और उनकी बाल-सुलभ क्रीड़ाओं (हठ और खेलों) का बड़ा ही सुंदर वर्णन किया गया है।

तीसरा पद (तुलसीदास)
तन की दुति स्याम सरोरूह, लोचन कंज की मंजुलताई हरें।
अति सुन्दर सोहत धूरि भरे, छवि भूरि अनंग की दूरि धरै।।
दमकैं दतियाँ दुति दामिनि ज्यौं, किलकें कल बाल विनोद करें।
अवधेस के बालक चारि सदा, तुलसी मन-मन्दिर में बिहरें।।
भावार्थ (Explanation):

श्री राम के शरीर की चमक नीले कमल (सरोरुह) के समान अत्यंत आकर्षक है। उनके सुंदर नेत्र खिले हुए कमल (कंज) की सुंदरता को भी हरने वाले हैं। आँगन में खेलते हुए धूल से सने हुए उनके शरीर की शोभा इतनी अधिक है कि वह कामदेव (अनंग) की सुंदरता को भी लज्जित कर देती है।

जब वे प्रसन्न होकर किलकारी मारते हैं, तो उनके छोटे-छोटे दाँत बिजली (दामिनी) की चमक के समान दमकने लगते हैं। तुलसीदास जी ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि अयोध्यापति राजा दशरथ के ये चारों सुंदर बालक (राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न) सदैव मेरे मन रूपी मंदिर में विहार (निवास) करते रहें।

चौथा पद (तुलसीदास)
कबहूँ ससि माँगत आरि करें, कबहूँ प्रतिबिंब निहारि डरें।
कबहूँ करताल बजाइ कै नाचत, मातु सवै मन मोद भरै।।
कबहूँ रिसिआइ कहैं हठि कै, पुनि लेत सोई जोहि लागि अरें।
अवधेस के बालक चारि सदा तुलसी मन-मन्दिर में बिहरें।।
भावार्थ (Explanation):

बालक राम कभी आसमान में चमकते हुए चंद्रमा (ससि) को खिलौना समझकर माँगने की हठ (आरि) करते हैं, तो कभी जल में अपनी ही परछाई (प्रतिबिंब) देखकर डर जाते हैं। कभी अपने हाथों से तालियाँ (करताल) बजा-बजाकर नाचने लगते हैं, जिसे देखकर माताएँ मन ही मन अत्यंत आनंदित (मोद) होती हैं।

कभी वे क्रोधित होकर हठ कर बैठते हैं और अंततः वही वस्तु लेकर मानते हैं, जिसके लिए वे अड़ जाते हैं। तुलसीदास जी कहते हैं कि बाल हठ करने वाले राजा दशरथ के ये चारों बालक सदैव मेरे हृदय रूपी मंदिर में निवास करें।

BASIC SHIKSHA SOLUTION ● WORD MEANINGS
1. शब्दार्थ (Word Meanings)
शब्द अर्थ शब्द अर्थ
खिझायौंचिढ़ानाजायौजन्म दिया
तातपिताचबाईचुगली करने वाला
हलरावैहाथ में लेकर हिलानामल्हावैपुचकारना
बेगिहिंशीघ्र / जल्दीफरकावैफड़फड़ाना
भामिनीपत्नीगातशरीर
रिस / खीझैक्रोध करनारीझैअत्यन्त प्रसन्न होना
सरोरुह / कंजकमल (Lotus)मंजुलताईसुन्दरता
अनंगकामदेवदामिनीबिजली
बिहरैविहार करनाससिचन्द्रमा
करतालताली बजानाआरिजिद / हठ
BASIC SHIKSHA SOLUTION ● QUESTION & ANSWERS
2. कुछ करने को (Activity)
प्रश्न 1: बचपन में आपने भी माँ या दादी से कई लोरियाँ सुनी होगी। याद करके एक लोरी लिखिए। उत्तर:

"चंदा मामा दूर के, पुए पकाएं बूर के।
आप खाएं थाली में, मुन्ने को दें प्याली में।
प्याली गई टूट, मुन्ना गया रूठ।
नई प्याली लाएंगे, मुन्ने को मनाएंगे।"

प्रश्न 2: नीचे बच्चों के बढ़ने की कुछ अवस्थाएँ दी गयी हैं, उन्हें क्रम से लगाइये- सही क्रम (Correct Order):
  • 1. पालने में लेटना
  • 2. घुटनों के बल चलना
  • 3. चारपाई/ चौकी पकड़ कर चलना
  • 4. गिरते पड़ते चलना
  • 5. दौड़ कर चलना
  • 6. स्कूल जाना
3. विचार और कल्पना
प्रश्न 1: अपने छोटे भाई बहन या छोटे बच्चों के क्रियाकलापों को देखकर आपके हृदय में जो भावों के चित्र उभरते हैं उन्हें अपने शब्दों में लिखिए। उत्तर:

छोटे बच्चों की तोतली बोली, उनकी छोटी-छोटी हठ, और बिना बात के खिलखिलाकर हँसना देखकर मन में अत्यंत आनंद और वात्सल्य (प्रेम) का भाव उत्पन्न होता है। ऐसा लगता है मानो ईश्वर साक्षात् बाल रूप में हमारे सामने हों।

प्रश्न 2: तुलसीदास ने राम का रूप वर्णन करते हुए उनके किन अंगों की उपमा कमल से दी है और क्यों? उत्तर:

तुलसीदास जी ने श्री राम के शरीर (तन) की उपमा नीले कमल से और उनके नेत्रों (लोचन) की उपमा खिले हुए लाल कमल से दी है। कमल अत्यंत कोमल और पवित्र होता है, इसलिए प्रभु की अलौकिक सुंदरता को दर्शाने के लिए कमल की उपमा दी गई है।

प्रश्न 3: बालक राम चन्द्रमा को देखकर उसे खिलौना समझकर पाने का हठ करते हैं। चन्द्रमा को देखकर आपके मन में क्या विचार आता है? लिखिए। उत्तर:

चंद्रमा को देखकर मन में शीतलता और शांति का विचार आता है। रात के अंधेरे में चमकता हुआ चंद्रमा ऐसा प्रतीत होता है मानो आसमान रूपी चादर पर एक सुंदर और चमकीला मोती रखा हो।

BASIC SHIKSHA SOLUTION ● TEXTBOOK EXERCISE
4. कविता से (अभ्यास प्रश्नोत्तर)
प्रश्न 1: यशोदा बालक श्रीकृष्ण को किस प्रकार सुला रही हैं? उत्तर:

माता यशोदा बालक श्रीकृष्ण को पालने में झुलाकर, पुचकार कर और मधुर स्वर में मीठे-मीठे गीत (लोरी) गाकर सुला रही हैं।

प्रश्न 2: वह कौन सा सुख है जो देवताओं को भी दुर्लभ है? उत्तर:

भगवान श्रीकृष्ण की बाल-क्रीड़ाओं को देखना और उन्हें वात्सल्य भाव से पालने में झुलाने का जो सुख माता यशोदा को मिल रहा है, वही सुख देवताओं और मुनियों के लिए भी दुर्लभ है।

प्रश्न 3: दाऊ क्या कहकर श्रीकृष्ण को चिढ़ाते हैं और यशोदा उन्हें क्या कहकर समझाती हैं? उत्तर:

दाऊ श्रीकृष्ण को यह कहकर चिढ़ाते हैं कि "तू यशोदा माता का सगा पुत्र नहीं है, बल्कि तुझे खरीदकर लाया गया है।"
यशोदा माता कान्हा को समझाती हैं कि "बलराम जन्म से ही चुगलखोर है। मैं गायों की सौगंध खाकर कहती हूँ कि मैं ही तेरी माता हूँ और तू ही मेरा पुत्र है।"

प्रश्न 4: माँ यशोदा श्रीकृष्ण के मुख से कौन-कौन सी बातें सुनकर प्रसन्न हो रही हैं? उत्तर:

माँ यशोदा श्रीकृष्ण के मुख से बलराम (दाऊ) की शिकायतें और उनकी क्रोध (गुस्से) से भरी तोतली बातें सुनकर मन ही मन अत्यंत प्रसन्न हो रही हैं।

प्रश्न 5: निम्नलिखित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए:- (क) कबहुँ पलक हरि मूँदि लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै।

आशय: नींद आने के कारण बालकृष्ण कभी अपनी पलकें मूँद लेते हैं और सोते हुए स्वप्न में कभी-कभी अपने होंठ फड़काने लगते हैं।

(ख) सूर श्याम मोहि गोधन की सौं, हौं माता तू पूत।

आशय: माता यशोदा कृष्ण का संशय दूर करने के लिए गायों की कसम खाकर कहती हैं कि "हे कान्हा! मुझे गोधन की सौगंध है, मैं ही तेरी माता हूँ और तू ही मेरा पुत्र है।"

(ग) अवधेस के बालक चारि सदा तुलसी मन मन्दिर में बिहरें।

आशय: कवि तुलसीदास जी ईश्वर से विनती करते हैं कि अयोध्या के राजा दशरथ के चारों पुत्र बाल रूप में सदैव मेरे हृदय रूपी मंदिर में निवास करें।

(घ) कबहूँ रिसिआइ कहें हठि कै, पुनि लेत सोई जेहि लागि अरें।

आशय: बालक राम कभी-कभी क्रोधित होकर हठ (जिद) कर बैठते हैं और फिर जिस वस्तु के लिए वे अड़ जाते हैं, उसे प्राप्त करके ही मानते हैं।

BASIC SHIKSHA SOLUTION ● GRAMMAR
5. भाषा की बात (व्याकरण)
प्रश्न 1: पद में आये निम्नलिखित शब्दों का तत्सम् (संस्कृत के शुद्ध) रूप लिखिए।
तद्भव (कविता के शब्द)तत्सम (शुद्ध रूप)
कान्हकृष्ण
स्यामश्याम
दुरलभदुर्लभ
दुतिद्युति (चमक)
अवधेसअवधेश
ससिशशि (चन्द्रमा)
प्रश्न 2: 'मंजुल' शब्द में 'ता' प्रत्यय लगाकर भाववाचक संज्ञा 'मंजुलता' बना है। इसी प्रकार कुछ विशेषण शब्दों को खोज कर उन्हें भाववाचक संज्ञा में बदलिए।
भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun):

गुण, भाव, दशा या अवस्था का बोध कराने वाले शब्द भाववाचक संज्ञा कहलाते हैं।

विशेषण (Adjective)प्रत्ययभाववाचक संज्ञा
सुन्दर+ तासुन्दरता
मधुर+ तामधुरता
कोमल+ ताकोमलता
चंचल+ ताचंचलता
महान+ तामहानता
प्रश्न 3: 'बिम्ब' शब्द में 'प्रति' उपसर्ग लगाकर 'प्रतिबिम्ब' शब्द बना है। इसी प्रकार 'प्रति' उपसर्ग लगाकर नये शब्द बनाइए।
उपसर्ग (Prefix):

जो शब्दांश किसी मूल शब्द के आरम्भ (शुरुआत) में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं, वे उपसर्ग कहलाते हैं।

  • प्रति + दिन = प्रतिदिन
  • प्रति + ध्वनि = प्रतिध्वनि
  • प्रति + कार = प्रतिकार
  • प्रति + एक = प्रत्येक
  • प्रति + रूप = प्रतिरूप
❓ Frequently Asked Questions (FAQs)

Q. बाललीला पाठ के रचयिता कौन हैं?

Ans. इस पाठ में दो महान कवियों के पद संकलित हैं— पहले दो पद महाकवि सूरदास जी के हैं और अंतिम दो पद गोस्वामी तुलसीदास जी के हैं।

Q. सूरदास के पदों में किसका वर्णन है?

Ans. सूरदास जी के पदों में भगवान श्रीकृष्ण की बाल-क्रीड़ाओं और माता यशोदा के वात्सल्य प्रेम का अत्यंत मनोहारी वर्णन किया गया है।

Q. तुलसीदास जी ने राम के किन अंगों की उपमा कमल से दी है?

Ans. तुलसीदास जी ने प्रभु श्रीराम के श्यामल शरीर और उनके सुंदर नेत्रों की उपमा 'कमल' से दी है।

🔗 Related Hindi Study Material
© 2026 Basic Shiksha Solution | Designed for Students

Comments

Popular posts from this blog

UP Board Enrollment Form Tool 2026-27 | छात्र नवीन नामांकन फॉर्म PDF Generator

Primary Master Time Table Generator 2026-27 | Class 1-5 Time Table Tool UP Board

UP Board General Enrollment Form Tool 2026-27 (कुल छात्र संख्या विवरण) – Online Fill & Print PDF

UP Board Master Time Table Generator Tool 2026 | Editable School Time Table PDF Download

UP Basic Shiksha Parishad Admission Form 2026-27 Online Fill | Download Blank PDF | Class 1 to 8 Form

जनगणना 2027 प्रगणक के कर्तव्य | Census Enumerator Duties Hindi | HLO Guide

UP Basic Shiksha Holiday List 2026 Generator | School Name Wise Holiday List Print (Hindi)

eHRMS Leave Application Generator 2026 | मानव संपदा अवकाश प्रार्थना पत्र PDF डाउनलोड

Class 6 Hindi Chapter 2 Solution | अपना स्थान स्वयं बनाइए

MDM Monthly Calculator (School Wise) | Mid Day Meal Calculation Tool