UP Board Class 7 Hindi Chapter 4 बहता पानी निर्मला | कक्षा 7 हिंदी सम्पूर्ण समाधान
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पाठ 4: बहता पानी निर्मला
UP Board Class 7 Hindi Chapter 4 बहता पानी निर्मला एक रोचक और शिक्षाप्रद यात्रा-वृत्तांत है, जिसके लेखक प्रसिद्ध साहित्यकार सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय' हैं। इस पाठ में लेखक ने असम राज्य की यात्रा के दौरान आई प्राकृतिक आपदाओं, बाढ़ और कठिन परिस्थितियों का सजीव एवं वास्तविक वर्णन किया है।
इस पोस्ट में Class 7 Hindi Chapter 4 Solution के अंतर्गत लेखक परिचय, पाठ का विस्तृत सारांश, शब्दार्थ, विचार और कल्पना, अभ्यास प्रश्नोत्तर तथा भाषा की बात (व्याकरण) को सरल, स्पष्ट और परीक्षा-उपयोगी भाषा में प्रस्तुत किया गया है। यह सामग्री UP Board Class 7 परीक्षा 2026 की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- लेखक अज्ञेय का परिचय
- पाठ का विस्तृत और सरल सारांश
- कठिन शब्दों के आसान अर्थ
- सभी अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
- विचार और कल्पना आधारित प्रश्न
- भाषा की बात (व्याकरण) – परीक्षा उपयोगी
लेखक परिचय : अज्ञेय
- पूरा नाम: सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय'
- जन्म: 7 मार्च सन् 1911 ई० (कुशीनगर जनपद)
- विशेषता: हिन्दी साहित्य में प्रयोगवाद के जनक के रूप में प्रसिद्ध।
- प्रमुख रचनाएँ: 'बावरा अहेरी', 'आँगन के पार द्वार', 'कितनी नावों में कितनी बार', 'शेखरः एक जीवनी'।
- निधन: 4 अप्रैल सन् 1987 ई०
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'बहता पानी निर्मला' नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक प्रसिद्ध साहित्यकार एवं घुमक्कड़ स्वभाव के धनी सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय' जी हैं।
प्रसंग (Theme):इस यात्रा-वृत्तांत में लेखक ने अपनी एक रोमांचक और कठिनाइयों से भरी यात्रा का वर्णन किया है। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि कैसे एक छोटी-सी लापरवाही (जैसे एक मामूली नट/ढिबरी) इंसान को बहुत बड़ी मुसीबत में डाल सकती है।
लेखक को बचपन से ही नक्शे (Maps) देखने और यात्रा करने का बहुत शौक था। उनका मानना था कि नक्शों के सहारे हम घर बैठे पूरी दुनिया की सैर कर सकते हैं। लेखक के अनुसार यात्रा करने के दो तरीके होते हैं:
- पहला तरीका (व्यवस्थित): सब कुछ पहले से सोच-विचार कर, टिकट और होटल बुक करके यात्रा पर जाना।
- दूसरा तरीका (अव्यवस्थित): योजना किसी और जगह की बनाना और अचानक कपड़े पैक करके किसी बिल्कुल अनजान और अलग जगह (जैसे बर्फ से ढके श्रीनगर) निकल जाना। लेखक को यही दूसरा, अनिश्चितताओं से भरा तरीका पसंद था।
एक बार लेखक असम में शिवसागर से अठारह मील दूर 'सोनारी' नामक गाँव में ठहरा हुआ था। बरसात के दिन थे। वह एक दिन सुबह शिवसागर गया ताकि अपना दाँत साफ करने का ब्रश (Brush) ले सके और अपनी मोटर गाड़ी (कार) की एक मामूली सी ढिबरी (नट) ठीक करवा सके, जिससे थोड़ा-थोड़ा तेल टपकता था। इन छोटे कामों और खाना खाने के चक्कर में उसे तीन घंटे की देरी हो गई।
जब लेखक वापस सोनारी लौटने लगा, तो उसने देखा कि भारी बारिश के कारण सड़क पर नदी का पानी फैल गया है। सड़क टूट चुकी थी और पानी का बहाव बहुत तेज था। बाढ़ के पानी से बचने के लिए साँप (Snakes) सड़क के किनारे पेड़ों पर लटक रहे थे। पानी के तेज धक्के से मोटर भी सड़क से नीचे खिसकने लगी।
मजबूरी में लेखक को गाड़ी घुमाने की जगह नहीं मिली, इसलिए उसने उल्टे गियर (Reverse Gear) में ही गाड़ी को लगभग ढाई मील तक पीछे चलाया और शिवसागर लौट आया।
शिवसागर से सोनारी जाने का एक दूसरा रास्ता चाय के बागानों से होकर जाता था, लेकिन बीच में एक नदी पड़ती थी जिसे नाव से पार करना पड़ता था। लेखक ने नाव पर मोटर लाद ली और नदी पार कर ली। लेकिन जब उस पार मोटर को नाव से नीचे उतारा जा रहा था, तो तख्ते ठीक से न लगे होने के कारण मोटर आधी पानी में और आधी किनारे पर लटक गई। लेखक बड़ी मुश्किल से ब्रेक दबाकर आधे घंटे तक उसी खतरनाक स्थिति (स्वर्गनसैनी) में बैठा रहा।
जब वे आगे बढ़े तो पता चला कि आगे का रास्ता भी बाढ़ के पानी में डूबा हुआ है। मजबूर होकर उन्हें फिर से नाव द्वारा उसी रास्ते से शिवसागर वापस लौटना पड़ा। वहाँ उन्हें 12 दिनों तक फँसकर रहना पड़ा। जब वे 12 दिन बाद सोनारी पहुँचे, तो देखा कि डाक बंगले में पानी भरने के कारण उनके कपड़े और किताबें सब गलकर नष्ट हो चुके थे। केवल ऊँचे ताक पर रखा हुआ दाँतों का ब्रश और साबुन बचा था।
लेखक को अंग्रेज़ी की वह कहावत याद आ गई कि "एक कील की वजह से राज्य खो जाता है।" यदि वे एक मामूली ब्रश और ढिबरी के लिए शिवसागर न गए होते, तो उन्हें इतनी बड़ी मुसीबत का सामना न करना पड़ता और उनका सामान नष्ट न होता।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| तृप्ति | सन्तोष / इच्छित वस्तु की प्राप्ति से मन का भरना |
| अमुक | कोई खास / फलां |
| ढिबरी | कसे जाने वाले पेंच के सिरे पर लगा छल्ला (Nut) |
| कगारा | नदी का करार / टीला (ऊँचा किनारा) |
| हठधर्मी | जिद्दी / दृढ़ संकल्पित |
| तात्कालिक | उसी समय (Instant/Immediate) |
एक बार जब हम परिवार के साथ शिमला की यात्रा पर जा रहे थे, तो रास्ते में अचानक भारी बारिश और भूस्खलन (Landslide) हो गया।
- रास्ता पूरी तरह बंद हो गया और हमें 10 घंटे तक गाड़ी में ही फंसे रहना पड़ा।
- आसपास कोई ढाबा या होटल न होने के कारण खाने-पीने की बहुत दिक्कत हुई।
- मोबाइल का नेटवर्क भी चला गया था, जिससे हम घर वालों से संपर्क नहीं कर पा रहे थे। यह अनुभव बहुत डरावना था।
ऐसी खतरनाक परिस्थिति में जहाँ मोटर आधी पानी में और आधी किनारे पर लटकी थी, लेखक के मन में निम्न भाव उत्पन्न हुए होंगे:
- घबराहट और डर: कि कहीं मोटर फिसलकर पूरी तरह नदी में न गिर जाए।
- पछतावा: कि वे एक मामूली से ब्रश और ढिबरी के लिए सोनारी से क्यों निकले।
- झुंझलाहट: कि लोग उनकी बात ठीक से समझ नहीं पा रहे थे, इसलिए उन्हें असमिया, हिंदी और बंगला मिलाकर निर्देश देने पड़ रहे थे।
लेखक ने यात्रा करने के दो प्रकार बताए हैं:
- पहला- पूरी योजना बनाकर व्यवस्थित ढंग से यात्रा करना।
- दूसरा- बिना किसी योजना के, अचानक किसी अनजान जगह पर निकल जाना।
लेखक को दूसरे प्रकार (अव्यवस्थित और रोमांचक) की यात्रा करना पसंद था।
इस पाठ के अनुसार, लेखक ने असम राज्य में शिवसागर से सोनारी गाँव तक की यात्रा की।
लेखक को यात्रा में निम्नलिखित कठिनाइयों का सामना करना पड़ा:
- रास्ते में भयंकर बाढ़ आ गई और सड़कें टूट गईं।
- गाड़ी घुमाने की जगह न होने के कारण उन्हें ढाई मील तक उल्टे गियर में गाड़ी चलानी पड़ी।
- नाव से नदी पार करते समय उनकी मोटर किनारे पर अटक गई और वे जान जोखिम में डालकर ब्रेक दबाए बैठे रहे।
- बाढ़ के कारण उन्हें 12 दिनों तक शिवसागर में फँसा रहना पड़ा और उनका सारा सामान नष्ट हो गया।
इस वाक्य से लेखक का अभिप्राय यह है कि वे शारीरिक रूप से (पैरों से) भले ही कुछ ही स्थानों पर गए हों, लेकिन नक्शों (Maps) को देखकर वे अपनी कल्पना और विचारों की उड़ान के जरिए घर बैठे ही पूरी दुनिया की सैर कर लेते हैं।
लेखक ने यह कहावत अपने उस संदर्भ में कही जब वे एक मामूली से दाँत के ब्रश और मोटर की एक छोटी सी ढिबरी (नट) को ठीक करवाने के लिए शिवसागर गए। इसी छोटे से काम के कारण उन्हें देर हुई, वे भयंकर बाढ़ में फँस गए, 12 दिन बर्बाद हुए और उनका सारा कीमती सामान व किताबें नष्ट हो गईं।
नक्शा (Map) हमें स्थानों की दिशा, उनके बीच की दूरी, रास्तों की जानकारी और उस स्थान की भौगोलिक स्थिति (जैसे नदियाँ, पहाड़ आदि) को समझने में सहायता करता है, जिससे यात्रा आसान हो जाती है।
| अंग्रेज़ी शब्द | हिंदी अर्थ |
|---|---|
| टिकट (Ticket) | प्रवेश-पत्र / अधिकार पत्र |
| होटल (Hotel) | भोजनालय / विश्राम गृह |
| सीट / बर्थ (Seat/Berth) | बैठने या सोने का स्थान |
| रिज़र्व (Reserve) | आरक्षित करना / पहले से सुरक्षित करना |
| सीज़न (Season) | मौसम / ऋतु |
| ब्रश (Brush) | दातुन / कूँची |
| मोटर (Motor) | गाड़ी / वाहन |
| गियर (Gear) | गति बदलने का यंत्र |
- अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत:
अर्थ: समय निकल जाने के बाद पछताने से कोई लाभ नहीं होता। - अधजल गगरी छलकत जाय:
अर्थ: कम ज्ञान या गुण होने पर भी बहुत अधिक दिखावा करना। - नाच न जाने आँगन टेढ़ा:
अर्थ: काम करना न आने पर दूसरों या साधनों में कमी निकालना। - काला अक्षर भैंस बराबर:
अर्थ: बिल्कुल अनपढ़ या निरक्षर होना।
जो अव्यय शब्द संज्ञा या सर्वनाम के साथ लगकर उनका सम्बन्ध वाक्य के अन्य शब्दों के साथ जोड़ते हैं, उन्हें सम्बन्ध बोधक कहा जाता है। (जैसे- के कारण, की ओर, के अनुसार, के लिए आदि)।
उचित सम्बन्ध बोधक शब्दों का प्रयोग करते हुए निम्नलिखित वाक्यों को पूरा कीजिए-
- (क) उसी के अनुसार छुट्टी लीजिए और टिकट करवाइए।
- (ख) लड़ाई के कारण राज्य से हाथ धोना पड़ता है।
- (ग) एक मामूली सी ढिबरी के लिए हम कैसी मुसीबत में पड़े।
- (घ) नदी बढ़कर सड़क के बराबर आ गई।
- (ङ) सड़क पर से हटकर किनारे की ओर जाने लगी।
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