UP Board Class 7 Hindi Chapter 2 राजधर्म | कक्षा 7 हिंदी पाठ 2 सम्पूर्ण समाधान
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पाठ 2: राजधर्म
UP Board Class 7 Hindi Chapter 2 राजधर्म एक प्रसिद्ध जातक कथा पर आधारित अत्यंत शिक्षाप्रद पाठ है, जो राजा और प्रजा के बीच धर्म, न्याय तथा नैतिक आचरण के गहरे संबंध को स्पष्ट करता है। यह कथा भगवान बुद्ध के पूर्व जन्म (बोधिसत्व) से जुड़ी हुई मानी जाती है, जिसमें आदर्श शासन और कर्तव्य पालन का सुंदर चित्रण किया गया है।
इस पोस्ट में Class 7 Hindi Chapter 2 Solution के अंतर्गत पाठ का विस्तृत एवं भावात्मक सारांश, कठिन शब्दों के अर्थ, अभ्यास प्रश्नोत्तर, विचार और कल्पना, तथा भाषा की बात (व्याकरण) को सरल, स्पष्ट और परीक्षा-उपयोगी रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह अध्ययन सामग्री UP Board Class 7 परीक्षा 2026 की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
- राजधर्म पाठ का विस्तृत और सरल सारांश
- महत्वपूर्ण शब्दार्थ (Word Meaning)
- विचार और कल्पना के उत्तर
- कहानी से जुड़े सभी प्रश्न-उत्तर
- भाषा की बात – वाक्य, विशेषण और विलोम शब्द
- परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
प्रस्तावना: प्रस्तुत पाठ 'राजधर्म' एक प्रसिद्ध जातक कथा है। यह महात्मा बुद्ध के पूर्व जन्म (बोधिसत्व) से संबंधित है। इस कहानी में बताया गया है कि राजा के आचरण (व्यवहार) का प्रभाव उसकी प्रजा और सम्पूर्ण पर्यावरण पर पड़ता है。
1. राजा ब्रह्मदत्त की खोजप्राचीन काल में ब्रह्मदत्त नाम का एक विवेकशील राजा था। वह हमेशा न्याय और सत्य का पालन करता था। वह ऐसे व्यक्ति की तलाश में था जो उसे उसके 'दोष' (कमियाँ) बता सके। महल और नगर में सभी उसकी केवल प्रशंसा करते थे। इसलिए राजा अपना भेष बदलकर पूरे राज्य में घूमा, परन्तु वहाँ भी उसे अपने गुण ही सुनने को मिले।
2. बोधिसत्व के आश्रम में पहुँचनादोष ढूँढ़ते-ढूँढ़ते राजा घने जंगलों को पार कर हिमालय प्रदेश में बोधिसत्व के आश्रम पहुँचा। बोधिसत्व ने राजा का स्वागत किया और उसे खाने के लिए जंगल के पके हुए गोदे (फल) दिए। राजा को वे गोदे शक्कर के समान बहुत मीठे और स्वादिष्ट लगे।
3. फलों के मीठे होने का रहस्यराजा के पूछने पर बोधिसत्व ने बताया कि यहाँ का राजा निश्चय ही धर्म और न्यायपूर्वक राज करता है, इसी कारण ये फल इतने मीठे हैं। यदि राजा अन्यायी और अधर्मी हो जाए, तो जंगल के फल-फूल कड़वे और स्वादहीन हो जाते हैं और सारा राष्ट्र शक्तिहीन हो जाता है। राजा यह सुनकर बिना अपना परिचय दिए वापस राजधानी लौट आया।
4. राजा की परीक्षा और बोधिसत्व का उपदेशराजा ने बोधिसत्व की बात को परखने के लिए जानबूझकर अधर्म और अन्याय से शासन करना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद वह फिर आश्रम गया और गोदे खाए। इस बार गोदे बहुत कड़वे थे। बोधिसत्व ने समझाया कि गायों के नदी पार करते समय यदि नेता बैल टेढ़ा जाता है, तो सारी गायें रास्ता भटक जाती हैं। उसी प्रकार यदि राज्य का नेता (राजा) कुमार्ग पर चलता है, तो सारी प्रजा भ्रष्ट हो जाती है और राज्य दुःख पाता है।
5. राजा का संकल्पबोधिसत्व की बात सुनकर राजा ने अपना असली परिचय दिया। उसने संकल्प लिया कि वह अब इन फलों को कभी कड़वा नहीं होने देगा और सदैव न्यायपूर्वक शासन करेगा। राजा के न्यायपूर्ण आचरण से राज्य फिर से धन-धान्य और सुख से भर गया।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| विवेकशील | विचारवान / समझदार |
| अन्तःपुर | रनिवास (महल का भीतरी भाग) |
| दुर्गम | जहाँ पहुँचना कठिन हो |
| सुरम्य | रमणीक / सुन्दर |
| भन्ते | बौद्ध धर्म में मान्य पालि भाषा का आदर सूचक शब्द |
| ओज | कान्ति / तेज / शक्ति |
| जिज्ञासा | जानने की इच्छा |
| अनुसरण | पीछे चलना / नकल करना |
| संकल्प | दृढ़ निश्चय |
- वह न्यायप्रिय और ईमानदार होना चाहिए।
- प्रजा/जनता के सुख-दुख को समझने वाला होना चाहिए।
- स्वार्थी न होकर परोपकारी होना चाहिए।
- उसे अपनी कमियों और आलोचनाओं को सकारात्मक रूप में स्वीकार करना चाहिए।
- प्रजा का शोषण हुआ होगा और भ्रष्टाचार बढ़ा होगा।
- गरीबों को न्याय नहीं मिला होगा।
- चोरी, डकैती और अपराधों में वृद्धि हुई होगी।
- राज्य में भुखमरी, अशांति और भय का माहौल बन गया होगा।
- एक बीज वाले फल: आम, जामुन, लीची, बेर, आड़ू।
- अनेक बीज वाले फल: पपीता, अमरूद, तरबूज, सेब, संतरा।
| वाक्य | मुख्य वाक्य (Main Clause) | अधीन वाक्य (Subordinate Clause) |
|---|---|---|
| (क) वह ऐसे व्यक्ति को ढूँढ़ता था, जो उसके दोषों को बता सके। | वह ऐसे व्यक्ति को ढूँढ़ता था | जो उसके दोषों को बता सके। |
| (ख) अधर्म और अन्याय से राज करूँगा और देखूँगा कि बोधिसत्त्व की बात में कितनी सच्चाई है। | अधर्म और अन्याय से राज करूँगा और देखूँगा | कि बोधिसत्त्व की बात में कितनी सच्चाई है। |
नियम: मूल शब्द में 'तर' लगाने से उत्तरावस्था और 'तम' लगाने से उत्तमावस्था बनती है।
| मूलावस्था (Positive) | उत्तरावस्था (Comparative) | उत्तमावस्था (Superlative) |
|---|---|---|
| गुरु | गुरुतर | गुरुतम |
| अधिक | अधिकतर | अधिकतम |
| उच्च | उच्चतर | उच्चतम |
| न्यून | न्यूनतर | न्यूनतम |
| सरल | सरलतर | सरलतम |
| शब्द | विलोम | शब्द | विलोम |
|---|---|---|---|
| अधार्मिक | धार्मिक | सुगम | दुर्गम |
| रहित | सहित | गुण | अवगुण |
| सरस | नीरस | स्थूल | सूक्ष्म |
| विषाद | हर्ष | - | - |
प्रबन्ध ➔ धनवान ➔ नदी ➔ दीन ➔ नमक ➔ कमल ➔ लड़का ➔ कागज ➔ जल
🌟 महत्वपूर्ण तथ्य
- व्यास सम्मान: यह सम्मान साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 'के. के. बिड़ला फाउण्डेशन' द्वारा दिया जाता है।
- धर्म चक्र प्रवर्तन: महात्मा गौतम बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ (वाराणसी) में दिया था। बौद्ध धर्म के इतिहास में इस महत्वपूर्ण घटना को 'धर्म चक्र प्रवर्तन' कहा जाता है।
Q. 'राजधर्म' कहानी किस ग्रंथ से ली गई है?
Ans. यह कहानी प्रसिद्ध 'जातक कथाओं' से ली गई है।
Q. बोधिसत्व कौन थे?
Ans. बोधिसत्व भगवान बुद्ध के पूर्व जन्म के रूप थे।
Q. यह कहानी हमें क्या सीख देती है?
Ans. यह कहानी सिखाती है कि नेतृत्व (लीडर) के आचरण का सीधा प्रभाव पूरी व्यवस्था (प्रजा/समाज) पर पड़ता है।
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