UP Board Class 7 Hindi Chapter 1 जागो जीवन के प्रभात | कक्षा 7 हिंदी पाठ 1 सम्पूर्ण समाधान
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पाठ 1: जागो जीवन के प्रभात
Class 7 Hindi Chapter 1 “जागो जीवन के प्रभात” UP Board के विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणादायक और अत्यंत महत्वपूर्ण कविता है। इस पाठ में जागरण, आशा, कर्म और नवजीवन का संदेश दिया गया है। इस ब्लॉग पोस्ट में आपको पद्यांशों की सरल व्याख्या, शब्दार्थ, भावार्थ, अभ्यास प्रश्नोत्तर तथा व्याकरण पूरी तरह परीक्षा उपयोगी रूप में मिलेंगे।
- सभी पद्यांशों की सरल व्याख्या
- शब्दार्थ व भावार्थ
- अभ्यास प्रश्नोत्तर
- परीक्षा उपयोगी व्याकरण
- UP Board के अनुसार सम्पूर्ण समाधान
कवि परिचय : जयशंकर प्रसाद
|
वसुधा पर ओस बने बिखरे
हिमकन आँसू जो क्षोभ-भरे
उषा बटोरती अरुण गात।
अब जागो जीवन के प्रभात !
प्रभात = सवेरा/जागरण, वसुधा = पृथ्वी, हिमकन = ओस की बूंदें (यहाँ दुःख के प्रतीक), क्षोभ = दुःख/पीड़ा, अरुण गात = लाल शरीर (सूर्य की लाल किरणें)।
भावार्थ (Explanation):कवि देशवासियों को जगाते हुए कहते हैं कि हे नवजीवन के प्रभात! अब जागो। पृथ्वी पर दुःख और पीड़ा रूपी ओस की बूंदें (हिमकन) जो आँसुओं की तरह बिखरी हुई थीं, अब उन्हें सूर्य की लाल किरणों वाली ऊषा (सुबह) बटोर रही है।
विशेष अर्थ: कवि का आशय यह है कि पराधीनता (गुलामी) के कारण जो दुःख और निराशा फैली थी, अब आजादी की नई सुबह (उषा) उसे समाप्त कर रही है। इसलिए हे भारतवासियों! अब अज्ञान की नींद से जागो और कर्म करो।
मुँद रही किरण दल में हैं अब
चल रहा सुखद यह मलय-वात
अब जागो जीवन के प्रभात !
तम-नयनों = अंधकार रूपी नेत्र, ताराएँ = पुतलियाँ/तारे, किरण दल = सूर्य की किरणों का समूह, मलय-वात = शीतल, मंद और सुगंधित हवा।
भावार्थ (Explanation):कवि कहते हैं कि रात के अंधकार रूपी आँखों की तरह चमकने वाले तारे अब सूर्य की किरणों के समूह में छिपते जा रहे हैं। अर्थात अंधकार मिट रहा है और प्रकाश फैल रहा है। प्रातःकाल की शीतल, मंद और सुगंधित हवा (मलय-वात) बहने लगी है। हे जीवन के प्रभात! अब जाग जाओ।
विशेष अर्थ: अज्ञान और निराशा का अंधकार मिट रहा है और ज्ञान व सुख की हवा बहने लगी है। यह समय नई आशाओं के साथ जागने का है।
कलरव से उठ कर भेंटो तो,
अरुणांचल में चल रही बात
अब जागो जीवन के प्रभात !
रजनी = रात, लाज = अंधकार/लज्जा, कलरव = पक्षियों का चहचहाना, अरुणांचल = पूर्व दिशा।
भावार्थ (Explanation):कवि आह्वान करते हैं कि अब रात की बची-खुची लज्जा (अंधकार) को समेट लो और प्रातःकाल पक्षियों के चहचहाने (कलरव) के रूप में जो नया जीवन गान हो रहा है, उसका स्वागत करो (भेंटो)। पूर्व दिशा (अरुणांचल) में जागृति की चर्चा होने लगी है। इसलिए हे नवजीवन के प्रभात! अब तुम भी जागो।
विशेष अर्थ: रात बीत गई है, निष्क्रियता छोड़ो और पक्षियों की तरह कर्मठ बनकर नए दिन का स्वागत करो।
- निराशा और दुःख का अंधकार फैला हुआ था।
- भारतीयों पर अत्याचार हो रहे थे, जिससे वे 'क्षोभ' (दुःख) से भरे थे।
- लोगों में आजादी पाने की तड़प थी, जिसे कवि ने 'नई सुबह' के रूप में जगाने का प्रयास किया है।
- (क) सूर्योदय के लिए।
- (ख) जीवन में नयी आशा का संचार करने के लिए। (✓)
- (ग) मलय-वात का आनन्द लेने के लिए।
(क) चल रहा सुखद यह मलय-वात।
भाव: प्रातःकाल होते ही शीतल, मंद और सुगंधित हवा (मलय-वात) बहने लगी है, जो जीवन में सुख और शांति का संदेश ला रही है。
(ख) कलरव से उठकर भेंटो तो।
भाव: पक्षियों के चहचहाने (कलरव) की आवाज के साथ तुम भी अपनी नींद त्यागकर जागो और कर्मठता से नये दिन का स्वागत करो।
- (क) अन्धकार (✓) (यहाँ शर्म/लाज का अर्थ अंधकार के मिटने से है)
- (ख) शर्म
- (ग) दुःख
- (घ) आलस्य
| शब्द | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| वात | हवा / वायु | सुबह-सुबह ठंडी वात बह रही है। |
| बात | कथन / चर्चा | हमे बड़ों की बात माननी चाहिए। |
- हिम + अंचल = हिमांचल
- उत्तर + अंचल = उत्तरांचल
- पूर्व + अंचल = पूर्वांचल
- सोन + अंचल = सोनांचल
- कोयला + अंचल = कोयलांचल
- नीला + अंचल = नीलांचल
प्रसिद्ध नारा
"जय जवान जय किसान"
(यह नारा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने दिया था।)
Q. जागो जीवन के प्रभात किस कक्षा का पाठ है?
Ans. यह UP Board Class 7 Hindi का पहला पाठ है।
Q. यह कविता किस संदेश पर आधारित है?
Ans. यह कविता जागरण, आशा, कर्म और नवजीवन का प्रेरणादायक संदेश देती है।
Q. क्या यह समाधान परीक्षा के लिए पर्याप्त है?
Ans. हाँ, यह समाधान UP Board syllabus के अनुसार पूरी तरह परीक्षा उपयोगी है।
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