UP Board Class 6 Hindi Chapter 3 Solution – आप भले तो जग भला | Basic Shiksha Solution
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✔️ पाठ का विस्तृत सारांश
✔️ कठिन शब्दों के सरल अर्थ
✔️ सभी प्रश्न-उत्तर (Exam Oriented)
✔️ मुहावरे, वाक्य भेद व व्याकरण
✔️ UP Board के अनुसार सम्पूर्ण समाधान
पाठ 3: आप भले तो जग भला
प्रस्तावना: प्रस्तुत पाठ "आप भले तो जग भला" श्री श्रीमन्नारायण द्वारा लिखित एक प्रेरणादायक निबंध है। इसमें लेखक ने बताया है कि यदि हमारा व्यवहार दूसरों के प्रति अच्छा होगा, तो दुनिया भी हमारे साथ अच्छा व्यवहार करेगी।
लेखक ने कहानी की शुरुआत एक काँच के महल से की है। एक बार एक कुत्ता काँच के महल में घुस गया। वहां हजारों दर्पणों में अपनी ही परछाई देखकर उसे लगा कि हजारों कुत्ते उसे मारने आ रहे हैं। वह भौंका और उन पर झपटा, तो उसे लगा कि वे भी उस पर झपट रहे हैं। अंत में वह डर और थकान से बेहोश हो गया।
कुछ देर बाद वहां एक दूसरा कुत्ता आया। उसने अपनी परछाई देखी और प्यार से दुम हिलाई। उसे हजारों कुत्ते दुम हिलाते दिखे। वह खुश होकर बाहर निकला।
सीख: दुनिया काँच के महल जैसी है। इसमें हमारे ही स्वभाव की छाया पड़ती है।
लेखक के एक मित्र हैं जो हमेशा नाराज और परेशान रहते हैं। वे हमेशा दूसरों में कमियाँ (नुक्ताचीनी) ढूँढते रहते हैं। उनका मानना है कि दुनिया बुरी है, लेकिन वे यह नहीं समझते कि वे खुद दूसरों की ओर भौंकते हैं, इसलिए दुनिया भी उनसे नाराज रहती है। वे दूसरों की आँखों का तिनका तो देखते हैं, पर अपनी आँख का शहतीर (बड़ा दोष) नहीं देखते।
अमेरिका के मशहूर नेता अब्राहम लिंकन से जब उनकी सफलता का रहस्य पूछा गया, तो उन्होंने कहा— "मैं दूसरों की अनावश्यक नुक्ताचीनी (आलोचना) कर उनका दिल नहीं दुखाता।" यह बात सिद्ध करती है कि प्रेम और सहानुभूति से ही लोगों को जीता जा सकता है, आलोचना से नहीं।
एक बार लेखक के मित्र ने एक सज्जन को उनकी गलती पर बहुत डाँटा। वे सज्जन दुखी और क्रोधित होकर चले गए। अगले दिन लेखक ने उन सज्जन से प्यार से बात की और कहा कि गलती तो किसी से भी हो सकती है। इस पर उन सज्जन की आँखों में आँसू आ गए और उन्होंने अपनी गलती मान ली।
निष्कर्ष: "शहद की एक बूँद ज्यादा मक्खियों को आकर्षित करती है, बजाय एक सेर जहर के।"
बापू (महात्मा गांधी) प्रेम और सहानुभूति की मूर्ति थे। जब क्रांतिकारी सरदार पृथ्वीसिंह ने हिंसा छोड़कर बापू के आश्रम में शरण ली, तो बापू ने उन्हें अपनाया। बापू ने कहा कि उनका आश्रम एक प्रयोगशाला है जहाँ वे अलग-अलग स्वभाव के लोगों को अपनी 'अहिंसा' रूपी सीमेंट से जोड़कर रखते हैं।
लेखक परिचय : श्रीमन्नारायण
• जन्म: सन् 1912 ई० (इटावा, उत्तर प्रदेश)
• शिक्षा: कोलकाता और प्रयाग विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की।
• कार्यक्षेत्र: आप गांधीवादी विचारक थे। भारत सरकार के योजना आयोग के सदस्य और गुजरात के राज्यपाल भी रहे।
• प्रमुख रचनाएँ: 'रोटी का राग' और 'मानव'।
• निधन: सन् 1978 ई०।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| प्रतिध्वनि | किसी वस्तु से टकराकर वापस आयी आवाज (Echo) |
| गश खाना | बेहोश होना / मूर्च्छित होना |
| मिसाल | उदाहरण / नमूना |
| ऐब | दोष / बुराई / खोट |
| नुक्ताचीनी | दोष निकालना / आलोचना करना |
| शहतीर | छत के नीचे लगने वाली मोटी लकड़ी (कड़ी) |
| अमल | व्यवहार / पालन करना |
| आगबबूला होना | बहुत क्रोधित होना |
- स्वामी विवेकानंद: "उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।"
- कबीर दास: "बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।"
- सुभाष चंद्र बोस: "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा।"
| लोकोक्ति | भाव / अर्थ |
|---|---|
| अधजल गगरी छलकत जाय | कम ज्ञानी व्यक्ति अधिक दिखावा करता है। |
| नाच न जाने आँगन टेढ़ा | काम न आने पर बहाने बनाना। |
| जैसा देश वैसा भेष | जगह के अनुसार व्यवहार करना। |
| दूर के ढोल सुहावने | दूर से चीजें अच्छी लगती हैं। |
| कर भला तो हो भला | दूसरों का अच्छा करने पर अपना भी अच्छा होता है। |
कारण: यह उदाहरण बहुत ही सरल और रोचक तरीके से समझाता है कि दुनिया एक आईने की तरह है। जैसा हमारा व्यवहार (भौंकना या दुम हिलाना) होगा, वैसा ही हमें वापस मिलेगा।
(क) दुनिया काँच के महल जैसी है, अपने स्वभाव की छाया ही उस पर पड़ती है।
भाव: जिस प्रकार आईने में हमें अपना ही चेहरा दिखता है, उसी प्रकार समाज में हमें वही व्यवहार मिलता है जो हम दूसरों के साथ करते हैं।
(ख) अगर आप हँसेंगे तो दुनिया भी आपका साथ देगी।
भाव: सुख और खुशी में सभी साथी बन जाते हैं। खुशमिजाज व्यक्ति को सभी पसंद करते हैं।
(ग) शहद की एक बूँद ज्यादा मक्खियों को आकर्षित करती है, बजाय एक सेर जहर के।
भाव: प्रेम और मीठी बोली से अनेक लोगों को अपना बनाया जा सकता है, जबकि क्रोध और कटु वचन से लोग दूर भागते हैं।
(घ) लोग दूसरों की आँखों का तिनका तो देखते हैं पर अपनी आँख के शहतीर को नहीं देखते।
भाव: लोग दूसरों की छोटी-छोटी कमियाँ (तिनका) तो तुरंत पकड़ लेते हैं, लेकिन उन्हें अपनी बड़ी-बड़ी बुराइयाँ (शहतीर) भी दिखाई नहीं देतीं।
(क) लोग आपसे प्रेम और नम्रता का बर्ताव करेंगे, जब आप-
- 1. हमेशा लोगों के ऐबों की ओर देखेंगे।
- 2. लोगों को अपना शत्रु समझेंगे।
- 3. लोगों की ओर गुस्से से दौड़ेंगे।
- 4. लोगों के दोष न देखकर उनके गुणों की ओर ध्यान देंगे। (✓)
(ख) बापू के किस गुण के कारण लोग उनकी ओर आकृष्ट होते थे-
- 1. आलोचना
- 2. अनुशासन
- 3. कठोरता
- 4. प्रेम और सहानुभूति (✓)
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| टूट पड़ना | तेजी से झपटना / हमला करना | मिठाई देखते ही बच्चे उस पर टूट पड़े। |
| दुम हिलाना | खुशामद करना / प्यार दिखाना | मालिक को देखते ही कुत्ता दुम हिलाने लगा। |
| नुक्ताचीनी करना | दोष निकालना | रमेश की आदत है हर बात में नुक्ताचीनी करना। |
| आगबबूला होना | बहुत क्रोधित होना | झूठ पकड़े जाने पर वह आगबबूला हो गया। |
| दिमाग चढ़ना | घमंड होना | लॉटरी लगने के बाद से उसके दिमाग चढ़ गए हैं। |
- एक विशाल काँच के महल में एक भटका हुआ कुत्ता घुस गया।
- मैं दूसरों का दृष्टिकोण समझने की कोशिश करता हूँ।
- अंग्रेजी में एक कहावत है कि अगर आप हँसेंगे तो दुनिया भी आपका साथ देगी।
- जब मैं अपने एक मित्र को परेशान देखता हूँ, तब इसी किस्से का स्मरण हो जाता है।
- वह प्रसन्नता से उछला-कूदा और फिर पूँछ हिलाता बाहर चला गया।
- लोग दूसरों की आँखों का तिनका देखते हैं पर अपनी आँख का शहतीर नहीं देखते।
नियम: जिन शब्दों के अंत में ता, पन, पा, हट, वट, त्व, आस आदि जुड़े हों, वे अक्सर भाववाचक संज्ञा होते हैं।
उत्तर (पाठ से चुने गए शब्द):- नम्रता (ता)
- सफलता (ता)
- कटुता (ता)
- मूर्खता (ता)
- प्रसन्नता (ता)
- सहानुभूति
- मित्रता (ता)
- सजावट (वट)
भाषा (Language)
परिभाषा: 'भाषा' शब्द संस्कृत की 'भाष्' धातु से बना है।
अर्थ: इसका अर्थ है- बोलना या कहना।
अतः हम अपने विचारों को दूसरों तक पहुँचाने के लिए जिस माध्यम का प्रयोग करते हैं (बोलकर या लिखकर), उसे भाषा कहते हैं।
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