UP Board Class 8 Hindi Chapter 2 काकी Question Answer | सारांश | शब्दार्थ
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पाठ 2: काकी
UP Board Class 8 Hindi Chapter 2 “काकी” प्रसिद्ध साहित्यकार सियारामशरण गुप्त द्वारा रचित एक अत्यंत मार्मिक कहानी है। इस पाठ में एक बालक के अपनी माता के प्रति अगाध प्रेम, मासूमियत और भावनात्मक लगाव का हृदयस्पर्शी चित्रण किया गया है। इस पोस्ट में आपको कहानी का सारांश, शब्दार्थ, अभ्यास प्रश्नोत्तर तथा व्याकरण खण्ड सरल और परीक्षा उपयोगी भाषा में प्राप्त होगा। यदि आप Class 8 Hindi Chapter 2 Kaki Solution खोज रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए पूर्ण मार्गदर्शक है।
लेखक परिचय : सियारामशरण गुप्त
- जन्म: 4 सितम्बर सन् 1895 ई० (चिरगाँव, झाँसी)
- विशेषता: इनके साहित्य में नारी की सहनशीलता, आदर्श और सरलता के दर्शन होते हैं।
- प्रमुख रचनाएँ: 'मौर्य विजय', 'दूर्वादल', 'आत्मोत्सर्ग', 'गोद', 'नारी'।
- निधन: 29 मार्च सन् 1963 ई०
प्रस्तुत मार्मिक कहानी हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'काकी' नामक पाठ से ली गई है। इसके रचयिता प्रसिद्ध साहित्यकार सियारामशरण गुप्त जी हैं।
प्रसंग (Theme):इस कहानी में एक अबोध (मासूम) बालक का अपनी मृत माता के प्रति अगाध प्रेम और माता के वियोग की पीड़ा का अत्यंत हृदयस्पर्शी चित्रण किया गया है।
कहानी की शुरुआत में बालक श्यामू सुबह उठता है तो देखता है कि घर में अत्यधिक रुदन और विलाप हो रहा है। उसकी माता (काकी) भूमि पर सोई हुई हैं और उनके ऊपर कपड़ा ओढ़ाया गया है। जब लोग काकी को श्मशान ले जाने लगते हैं, तो श्यामू बालसुलभ अज्ञानतावश उपद्रव करता है और कहता है कि "काकी सो रही हैं, इन्हें कहाँ ले जा रहे हो?" गुरुजनों ने उसे सांत्वना दी कि काकी मामा के घर गई हैं, परंतु शीघ्र ही उसे यह भान हो गया कि काकी आसमान में 'राम' के पास चली गई हैं।
काकी के वियोग में श्यामू अक्सर शून्य मन से आसमान की ओर देखा करता था। एक दिन आसमान में पतंग उड़ती देख उसके मन में यह विचार आया कि वह पतंग आसमान में भेजकर अपनी काकी को नीचे बुला लेगा। उसने अपने पिता (विश्वेश्वर) से पतंग माँगी, परन्तु वे माता के वियोग के कारण उदास थे। तब अपनी तीव्र उत्कंठा के कारण श्यामू ने पिता के कोट से एक चवन्नी निकाल ली और अपने साथी 'भोला' से गुप्त रूप से पतंग मँगवा ली।
भोला समझदार था; उसने श्यामू को समझाया कि पतंग की डोर पतली है, यदि यह टूट गई तो काकी गिर सकती हैं, इसलिए एक मोटी रस्सी की आवश्यकता होगी। रुपयों के अभाव में श्यामू ने पुनः अपने पिता के कोट से एक रुपया निकाला और भोला को दो अच्छी रस्सियाँ लाने को कहा। उसने यह भी तय किया कि वह पतंग पर 'काकी' लिखवा लेगा ताकि पतंग सीधा उन्हीं को मिले।
जब श्यामू और भोला अँधेरे कक्ष में पतंग पर रस्सी बाँध रहे थे, तभी क्रोधित विश्वेश्वर वहाँ आ गए। डाँट पड़ने पर भोला ने रहस्य खोल दिया। क्रोध में विश्वेश्वर ने श्यामू पर प्रहार किया और पतंग फाड़ दी। परंतु जब उन्होंने फटी हुई पतंग पर 'काकी' लिखा हुआ देखा और उन्हें श्यामू के मातृ-प्रेम का सत्य ज्ञात हुआ, तो वे स्तब्ध (हतबुद्धि) होकर वहीं खड़े रह गए।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| कुहराम | रोना-पीटना / अत्यधिक विलाप |
| भूमि-शयन | जमीन (पृथ्वी) पर सोना |
| करुण | दीन / दयनीय |
| उपद्रव | उत्पात / शोर-शराबा |
| अग्नि-संस्कार | मृत्यु के पश्चात् शरीर को अग्नि में जलाना (दाह संस्कार) |
| उत्कंठित | उत्सुक / अधीर |
| प्रफुल्ल | प्रसन्न / खिला हुआ |
| उग्र रूप | प्रचंड रूप / अत्यधिक क्रोधित |
| मुखबिर | भेद देने वाला / रहस्य बताने वाला |
| हतबुद्धि | स्तब्ध / जिसकी बुद्धि काम न करे / घबराया हुआ |
| समूह 'क' | सही मिलान (समूह 'ख') |
|---|---|
| श्यामू के पिता | विश्वेश्वर |
| श्यामू का साथी | भोला |
| श्यामू के भैया | जवाहिर |
| श्यामू के साथी की बहन | जीजी |
| श्यामू की माँ | काकी |
| श्यामू के साथी की माँ | सुखिया |
| संज्ञा शब्द (Noun) | भेद (Type) |
|---|---|
| जगह | जातिवाचक संज्ञा |
| खूँटी | जातिवाचक संज्ञा |
| विश्वेश्वर | व्यक्तिवाचक संज्ञा |
| कोट | जातिवाचक संज्ञा |
- (क) जिस पर विश्वास न किया जा सके — अविश्वासी
- (ख) जिसका स्वर्गवास हो गया हो — स्वर्गीय / दिवंगत
- (ग) जो अपने मन को एकाग्र रखता हो — एकाग्रचित्त
- (घ) वह स्थान जहाँ शव जलाये जाते हों — श्मशान
- कुहराम मचना: (अत्यधिक रोना-पीटना / विलाप करना)
वाक्य प्रयोग: भयंकर दुर्घटना का समाचार सुनते ही पूरे गाँव में कुहराम मच गया। - हृदय का खिलना: (अत्यधिक प्रसन्न होना)
वाक्य प्रयोग: परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने का समाचार सुनकर मेरा हृदय खिल उठा। - चिन्ता का मारा होना: (बहुत अधिक सोच-विचार में पड़ना)
वाक्य प्रयोग: व्यापार में अत्यधिक घाटा होने के कारण वह सदैव चिन्ता का मारा रहता है। - रहस्य खोलना: (भेद बता देना)
वाक्य प्रयोग: पुलिस की थोड़ी सी ही कड़ाई देखकर अपराधी ने सारा रहस्य खोल दिया। - हतबुद्धि होना: (कुछ समझ में न आना / स्तब्ध रह जाना)
वाक्य प्रयोग: अचानक मार्ग में भयानक शेर को सामने देखकर शिकारी हतबुद्धि रह गया।
| संज्ञा (Noun) | प्रत्यय (Suffix) | विशेषण (Adjective) |
|---|---|---|
| बुद्धि | + मान | बुद्धिमान |
| चौकी | + दार | चौकीदार |
| उपद्रव | + ई | उपद्रवी |
| करुण | + इक | कारुणिक |
| बल | + वान | बलवान |
| प्रान्त | + ईय | प्रान्तीय |
| उत्कंठा | + इत | उत्कंठित |
🌟 अनमोल विचार
- "मातृत्व महान गौरव का पद है, संसार की सबसे बड़ी साधना, तपस्या, त्याग और महान विजय है।" — मुंशी प्रेमचन्द
- "जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी" (अर्थात माता और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान हैं।) — वाल्मीकि रामायण
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