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Class 7 Hindi Chapter 6 Shap Mukti Solution | शाप-मुक्ति प्रश्न उत्तर – UP Board

पाठ 6: शाप - मुक्ति

|| UP BOARD CLASS 7 HINDI SOLUTION ||

Class 7 Hindi Chapter 6 “शाप-मुक्ति” UP Board के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण पाठ है। इस पोस्ट में आपको शाप-मुक्ति पाठ के सम्पूर्ण प्रश्न-उत्तर, भावार्थ, शब्दार्थ, सारांश, व्याकरण तथा अभ्यास प्रश्न सरल और परीक्षा-उपयोगी भाषा में मिलेंगे। यदि आप Class 7 Hindi Shap Mukti Solution खोज रहे हैं, तो Basic Shiksha Solution पर दिया गया यह लेख आपकी पढ़ाई के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।

BASIC SHIKSHA SOLUTION ● UPBOARD CLASS 7 HINDI SOLUTION

लेखक परिचय : रमेश उपाध्याय

  • जन्म: 1 मार्च 1942 ई० (बधारी गाँव, जिला एटा, उत्तर प्रदेश)
  • कार्यक्षेत्र: 'साप्ताहिक हिन्दुस्तान' तथा 'नवनीत' में उपसम्पादक रहे। दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षण कार्य।
  • प्रमुख रचनाएँ: 'शेष इतिहास', 'नदी के साथ', 'बदलाव से पहले' (उपन्यास) तथा 'पेपरवेट' (नाटक)।
सन्दर्भ (Context):

प्रस्तुत हृदयस्पर्शी कहानी हमारी पाठ्यपुस्तक 'मंजरी' के 'शाप - मुक्ति' नामक पाठ से ली गई है। इसके लेखक प्रसिद्ध कथाकार रमेश उपाध्याय जी हैं।

प्रसंग (Theme):

इस कहानी में लेखक ने यह दर्शाया है कि कैसे बचपन की नासमझी में किए गए किसी क्रूर अपराध का बोध होने पर व्यक्ति का हृदय परिवर्तन हो सकता है, और वह उस पाप का प्रायश्चित करने के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन मानव सेवा में समर्पित कर सकता है।

BASIC SHIKSHA SOLUTION ● STORY SUMMARY
कहानी का विस्तृत एवं भावात्मक सारांश
1. डा. प्रभात से भेंट और पुरानी पहचान

कहानी की शुरुआत में लेखक अपनी लगभग दृष्टिहीन हो चुकी बूढ़ी दादी का इलाज कराने दिल्ली के एक प्रसिद्ध नेत्र-चिकित्सक (Eye Doctor) डॉ. प्रभात के पास जाता है। बातों-बातों में पता चलता है कि डॉ. प्रभात और लेखक दोनों इलाहाबाद के रहने वाले हैं। डॉ. प्रभात असल में लेखक का बचपन का मित्र 'मंटू' निकलता है। इतने वर्षों बाद मिलकर दोनों बहुत खुश होते हैं, लेकिन जैसे ही दादी को पता चलता है कि वह मंटू है, डॉ. प्रभात के चेहरे की हँसी अचानक गायब हो जाती है।

2. बचपन की वह क्रूर घटना (पाप)

अस्पताल से बाहर आकर दादी लेखक को याद दिलाती हैं कि यह वही 'मंटुआ' है जिसने बचपन में एक कुतिया के तीन मासूम पिल्लों की आँखें फोड़ दी थीं। बचपन में मंटू ने खेल-खेल में यह देखने के लिए कि क्या सचमुच 'आक' (मदार) का दूध आँखों को अंधा कर देता है, उन पिल्लों की आँखों में वह विषैला दूध डाल दिया था। इसके कारण वे पिल्ले अंधे हो गए। दादी ने क्रोधित होकर मंटू को शाप दिया था कि "तेरी आँखें भी किसी दिन इसी तरह फूटेंगी!" दादी उसी पाप के कारण डॉ. प्रभात से इलाज कराने से इनकार कर देती हैं।

3. डॉ. प्रभात का प्रायश्चित और क्षमा-याचना

जब दादी इलाज के लिए तैयार नहीं होतीं, तो डॉ. प्रभात स्वयं लेखक के घर आते हैं। वे दादी के पैरों के पास बैठकर बताते हैं कि वे उस बचपन के पाप और दादी के शाप को आज तक नहीं भूले हैं। उसी ग्लानि के प्रायश्चित स्वरूप उन्होंने निश्चय किया कि वे नेत्र-चिकित्सक ही बनेंगे। वे कहते हैं, "मेरी आँखें तो शाप के कारण कभी न कभी फूटेंगी ही, पर उससे पहले मैं बहुत-सी आँखों को रोशनी दे जाऊँगा।"

4. दादी का हृदय परिवर्तन और शाप-मुक्ति

डॉ. प्रभात के इन पश्चाताप से भरे वचनों में इतना दर्द और सच्चाई थी कि दादी का कठोर हृदय पिघल गया। वे भाव-विह्वल हो उठीं और उन्होंने मंटू को पास बुलाकर हृदय से लगा लिया। उन्होंने आशीर्वाद दिया, "जीते रहो मेरे लाल! तुम्हारी आँखों की ज्योति हमेशा बनी रहे।" इस प्रकार सच्चे प्रायश्चित ने डॉ. प्रभात को दादी के शाप से मुक्त कर दिया।

BASIC SHIKSHA SOLUTION ● WORD MEANINGS
1. शब्दार्थ (Word Meanings)
शब्द अर्थ
नेत्र-चिकित्सकआँख का डाक्टर
लुप्तगायब
स्मृतियाद
सहसाएकाएक / अचानक
आकमदार (एक जंगली पौधा)
विस्मयकारीआश्चर्य उत्पन्न करने वाला
कुकृत्यबुरा कार्य / पाप
जिज्ञासाजानने की इच्छा
मासूमभोला / अबोध
बालसखाबचपन का मित्र
BASIC SHIKSHA SOLUTION ● QUESTION & ANSWERS
2. कुछ करने को (Activity)
प्रश्न 4: दिए गए अनुच्छेद (पिल्लों के साथ मंटू का व्यवहार) को ध्यान से पढ़िए और अपने सहपाठियों से पूछने के लिए चार प्रश्न बनाइए। उत्तर (निर्मित 4 प्रश्न):
  • कुतिया ने अपने तीन पिल्ले कहाँ दिए थे?
  • मंटू ने पिल्लों की आँखों में कौन सा दूध डाला था?
  • मंटू ने वह क्रूर प्रयोग क्यों किया था?
  • जब लेखक ने मंटू को देखा, तो बाकी के दो पिल्ले क्या कर रहे थे?
3. विचार और कल्पना
प्रश्न 1: प्रायः कुछ लोग आपसे किसी बात के लिए मना करते होंगे- "ऐसा नहीं, ऐसे करो" - याद कीजिए और लिखिए कि ऐसा आपको कब-कब और क्यों कहा गया। उत्तर:

घर के बड़े-बुजुर्ग हमें अक्सर सही राह दिखाने के लिए टोकते हैं। जैसे:

  • जब मैं झुककर पढ़ता हूँ, तो माँ कहती हैं— "ऐसे नहीं, सीधे बैठकर पढ़ो।"
  • जब मैं जानवरों को तंग करता हूँ, तो दादी कहती हैं— "इन्हें मत सताओ, पाप लगता है।"
  • ऐसा वे इसलिए कहते हैं ताकि हम अनुशासित रहें और हममें अच्छे संस्कार विकसित हों।
प्रश्न 2: जब उस पिल्ले की आँखें चली गयी होंगी तो उसे क्या-क्या कठिनाइयाँ हुई होंगी। उत्तर:
  • उसे अपनी माँ को ढूँढ़ने और दूध पीने में बहुत परेशानी हुई होगी।
  • वह हर जगह ठोकर खाकर गिरता होगा।
  • अंधेपन के कारण उसे हमेशा डर और असुरक्षा महसूस होती होगी।
प्रश्न 3: माफी माँगना आसान होता है या माफ करना? अपने विचार लिखिए। उत्तर:

मेरे विचार से माफ करना अधिक कठिन होता है। माफी माँगने के लिए इंसान को केवल अपना अहंकार छोड़ना पड़ता है, लेकिन जिसने चोट सही है, उसके लिए पुरानी कड़वी यादों को भुलाकर दिल से किसी को माफ करना बहुत बड़े और उदार हृदय का काम होता है।

BASIC SHIKSHA SOLUTION ● TEXTBOOK EXERCISE
4. कहानी से (अभ्यास प्रश्नोत्तर)
प्रश्न 1: डा. प्रभात का चेहरा किस दुःखदायी स्मृति से काला-सा हो गया? उत्तर:

जब दादी ने बताया कि वे इलाहाबाद की रहने वाली हैं और डॉ. प्रभात को पहचानते हुए वकील के बेटे 'मंटू' का ज़िक्र किया, तो डॉ. प्रभात को बचपन में पिल्लों की आँखें फोड़ने वाले अपने घोर पाप और दादी के द्वारा दिए गए शाप की दुःखदायी स्मृति याद आ गई। इसी कारण आत्मग्लानि से उनका चेहरा काला-सा पड़ गया।

प्रश्न 2: मंटू ने बचपन में क्या पाप किया था और उस पाप का प्रायश्चित उसने किस प्रकार किया? उत्तर:

मंटू ने बचपन में खेल-खेल में एक कुतिया के तीन मासूम पिल्लों की आँखों में आक (मदार) का विषैला दूध डालकर उन्हें अंधा कर देने का पाप किया था।
इस पाप का प्रायश्चित करने के लिए उसने अपना सम्पूर्ण जीवन मानव-सेवा में लगा दिया और एक सफल नेत्र-चिकित्सक बनकर हजारों लोगों को आँखों की रोशनी लौटाई।

प्रश्न 3: "पर मैं तो आँखों का डाक्टर हूँ दादी अम्मा! बुढ़ापे का इलाज मेरे पास कहाँ ?" डा. प्रभात ने यह जवाब दादी के किस बात के उत्तर में दिया था? उत्तर:

जब डॉ. प्रभात ने दादी से उनकी तकलीफ पूछी, तो दादी ने सहज भाव से कहा था, "कोई तकलीफ नहीं बेटा! बस बुढ़ापे की मारी हूँ। बुढ़ापे में नज़र कमज़ोर हो ही जाती है।" दादी की इसी बात के उत्तर में डॉ. प्रभात ने हँसते हुए उक्त वाक्य कहा था。

प्रश्न 4: दादी डा. प्रभात से अपनी आँखों का इलाज क्यों नहीं करवाना चाहती थीं, फिर वह इलाज के लिए कैसे तैयार हुईं? उत्तर:

दादी जान चुकी थीं कि डॉ. प्रभात वही 'मंटुआ' है जिसने बचपन में निर्दयी होकर पिल्लों की आँखें फोड़ी थीं, इसलिए वे उस क्रूर व्यक्ति से अपना इलाज नहीं करवाना चाहती थीं।
परन्तु, जब डॉ. प्रभात घर आकर दादी के चरणों में बैठे और रोते हुए बताया कि उन्होंने उस पाप का प्रायश्चित करने के लिए ही नेत्र-चिकित्सक बनने का फैसला किया है, तो उनकी सच्चाई देखकर दादी का हृदय पिघल गया और वे इलाज के लिए तैयार हो गईं।

BASIC SHIKSHA SOLUTION ● GRAMMAR
5. भाषा की बात (व्याकरण)
प्रश्न 1: निम्नलिखित शब्दों के विलोम लिखिए-
शब्दविलोम (Antonym)
नयीपुरानी
ठंडगर्मी
पापपुण्य
बूढ़ाजवान / बच्चा
प्रश्न 2: निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ लिखकर अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
  • टस से मस न होना: (अपनी बात पर अड़े रहना)
    वाक्य प्रयोग: परिवार वालों ने दादी को बहुत समझाया, लेकिन वे अपनी जिद से टस से मस न हुईं।
  • हृदय से लगाना: (प्यार से गले लगाना)
    वाक्य प्रयोग: मंटू का सच्चा प्रायश्चित देखकर दादी ने उसे हृदय से लगा लिया।
  • मुस्कान लुप्त होना: (उदास या गंभीर हो जाना)
    वाक्य प्रयोग: जैसे ही डाक्टर को अपनी पुरानी गलती याद आई, उनके चेहरे की मुस्कान लुप्त हो गई।
प्रश्न 3: नीचे लिखे शब्दों में 'पन' प्रत्यय लगाकर भाववाचक संज्ञा बनाइए-
मूल शब्दप्रत्ययभाववाचक संज्ञा
लड़का+ पनलड़कपन
अपना+ पनअपनापन
अनाड़ी+ पनअनाड़ीपन
रूखा+ पनरूखापन
प्रश्न 4: निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित पदों के कारक बताइए-
  • (क) मैं तो आँखों का डाक्टर हूँ।
    कारक: सम्बन्ध कारक ('का/के/की')।
  • (ख) मैं तुम्हारी दवाई लिख रहा हूँ।
    कारक: सम्बन्ध कारक (तुम्हारी) / दवाई (कर्म कारक)।
  • (ग) दूध पिल्ले की आँखों में डाल रहा था।
    कारक: पिल्ले की = सम्बन्ध कारक, आँखों में = अधिकरण कारक।
  • (घ) सब लोगों ने मंटू को बुरा-भला कहा।
    कारक: सब लोगों ने = कर्ता कारक, मंटू को = कर्म कारक।
❓ Frequently Asked Questions (FAQs)

Q. शाप-मुक्ति पाठ के लेखक कौन हैं?

Ans. शाप-मुक्ति पाठ के लेखक श्री रमेश उपाध्याय जी हैं।

Q. शाप-मुक्ति पाठ का मुख्य संदेश क्या है?

Ans. यह पाठ हमें जीवों के प्रति दया, अपनी गलती का पश्चाताप और मानव-सेवा का महान संदेश देता है।

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