UP Board Class 6 Hindi Chapter 1 चिर महान | Chir Mahan Class 6 Hindi Solution
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पाठ 1: चिर महान
कवि परिचय : सुमित्रानंदन पंत
🔴 जन्म: सन् 1900 ई० (कौसानी, अल्मोड़ा)
🔴 उपनाम: प्रकृति के सुकुमार कवि
🔴 प्रमुख रचनाएँ: वीणा, ग्रन्थि, पल्लव, गुंजन, चिदम्बरा
🔴 सम्मान: 'पद्म-भूषण' और 'ज्ञानपीठ पुरस्कार'
सौन्दर्यपूर्ण औ सत्य-प्राण
मैं उसका प्रेमी बनूँ, नाथ!
जो हो मानव के हित समान !
कवि ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहते हैं कि हे प्रभु! इस संसार में जो सदैव महान रहने वाला है, जो सौंदर्य से परिपूर्ण है और जिसके हृदय में सत्य का वास है; मैं उसका प्रेमी बनूँ। हे नाथ! मैं उसका साथ दूँ जो समान रूप से संपूर्ण मानवता का भला करने वाला हो।
छूटे भय, संशय, अन्धभक्ति,
मैं वह प्रकाश बन सकूँ, नाथ!
मिल जायें जिसमें अखिल व्यक्ति,
कवि कहते हैं कि हे ईश्वर! मुझे ऐसी शक्ति प्रदान करो जिससे मेरे मन का डर, संदेह और बिना विचारे किसी पर विश्वास करने का स्वभाव दूर हो जाए। हे प्रभु! मैं वह ज्ञान रूपी प्रकाश बन सकूँ जिसमें संपूर्ण प्राणी एक समान रूप से मिल जाएँ, अर्थात आपसी भेदभाव समाप्त हो जाए।
करने मानव का परित्राण,
ला सकूँ विश्व में एक बार
फिर से नवजीवन का विहान !
हे प्रभु! आपसे अमरता का वरदान पाकर मैं मनुष्य की रक्षा कर सकूँ। मैं संसार में एक बार फिर से नए जीवन का सवेरा ला सकूँ, अर्थात मैं प्राणियों को सुखी और समृद्ध बना सकूँ।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| जगजीवन | संसार के लोगों का जीवन |
| चिर महान | सदैव महान रहने वाला |
| सत्यप्राण | जिसका हृदय सत्य से भरा हो |
| अन्धभक्ति | बिना सोचे-समझे निष्ठा (विश्वास) |
| अखिल | सम्पूर्ण / सारा |
| परित्राण | पूर्ण रक्षा |
| विहान | प्रातःकाल / भोर / सवेरा |
| अच्छे गुण वाले शब्द (Positive) | दुर्गुण वाले शब्द (Negative) |
|---|---|
| सत्य-प्राण | भय (डर) |
| सौन्दर्यपूर्ण | संशय (संदेह) |
| प्रकाश (ज्ञान) | अन्धभक्ति |
| मानव-हित | - |
| प्रेम | - |
(क) "जगजीवन में जो चिर महान, सौन्दर्यपूर्ण औ सत्य-प्राण।"
भाव: कवि कहते हैं कि संसार में जो हमेशा महान रहने वाला है, जो सुंदरता से भरा है और जिसके भीतर केवल सत्य है, मैं उसी को अपना आदर्श मानूँ।
(ख) "जिससे जीवन में मिले शक्ति, छूटे भय, संशय, अन्धभक्ति।"
भाव: कवि ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि मुझे ऐसी शक्ति मिले जिससे मेरे मन का डर और शक दूर हो जाए, और मैं बिना सोचे-समझे किसी बात पर भरोसा (अंधविश्वास) न करूँ।
| पंक्ति 'क' | सही मिलान 'ख' |
|---|---|
| मैं उसका प्रेमी बनूँ, नाथ! | जो हो मानव के हित समान |
| मैं वह प्रकाश बन सकूँ, नाथ! | मिल जायें जिसमें अखिल व्यक्ति |
| ला सकूँ विश्व में एक बार | फिर से नवजीवन का विहान |
परिभाषा: जो शब्दांश (शब्द का हिस्सा) किसी मूल शब्द के पहले जुड़कर उसका अर्थ बदल देते हैं या उसमें कोई विशेषता ला देते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं।
यहाँ 'चिर' एक उपसर्ग है, जिसका अर्थ है 'सदैव' या 'लंबे समय तक'। यह 'महान' शब्द के आगे जुड़कर 'चिर महान' (हमेशा महान रहने वाला) बन गया है।
- 🔸 चिर + नवीन = चिरनवीन (हमेशा नया रहने वाला)
- 🔸 चिर + काल = चिरकाल (लंबे समय तक)
- 🔸 चिर + आयु = चिरायु (लंबी उम्र वाला)
• विशेषण (Adjective): वे शब्द जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, दोष, रंग, आकार, संख्या आदि) बताते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं।
• विशेष्य (Noun): वाक्य में जिस संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता बताई जाती है, उसे विशेष्य कहते हैं।
उदाहरण 1: "काला घोड़ा"
- ✔️ काला: यहाँ 'काला' शब्द रंग (विशेषता) बता रहा है, इसलिए यह विशेषण है।
- ✔️ घोड़ा: यहाँ 'घोड़े' की बात हो रही है (जिसकी विशेषता बताई जा रही है), इसलिए यह विशेष्य है।
उदाहरण 2: "मीठा आम"
- ✔️ मीठा: स्वाद बता रहा है = विशेषण
- ✔️ आम: फल का नाम है = विशेष्य
परिभाषा: वे शब्द जो क्रिया (Action/काम) की विशेषता बताते हैं कि काम कैसे, कब, कहाँ या कितना हुआ है, उन्हें क्रिया-विशेषण कहते हैं। (ध्यान दें: विशेषण संज्ञा की विशेषता बताता है, जबकि क्रिया-विशेषण 'काम' की विशेषता बताता है)।
वाक्य: "काला घोड़ा तेज दौड़ा।"
इस वाक्य में तीन बातें समझने वाली हैं:
| काला | यह घोड़े की विशेषता है (विशेषण)। |
| दौड़ा | यह एक काम है (क्रिया)। |
| तेज | यह बता रहा है कि घोड़ा 'कैसे' दौड़ा। चूँकि यह 'दौड़ने' (क्रिया) की विशेषता बता रहा है, इसलिए यह क्रिया-विशेषण है। |
एक अन्य उदाहरण: "कछुआ धीरे-धीरे चलता है।"
- ✔️ यहाँ 'चलता है' क्रिया है।
- ✔️ 'धीरे-धीरे' यह बता रहा है कि काम कैसे हो रहा है, अतः यह क्रिया-विशेषण है।
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