इकाई 14 — ध्वनि
UP Board Class 7 | विज्ञान | सम्पूर्ण समाधान
BASIC SHIKSHA SOLUTION ● UP BOARD CLASS 7 SCIENCE SOLUTION
📖 पाठ परिचय: इस इकाई में हम ध्वनि की उत्पत्ति, कम्पन और तरंगें, ध्वनि के प्रकार, ध्वनि का संचरण, ध्वनि का परावर्तन (प्रतिध्वनि और गूँज) तथा शोर के हानिकारक प्रभाव और नियंत्रण का अध्ययन करते हैं। ध्वनि हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है — चाहे वह चिड़ियों का चहचहाना हो या वाहनों का हार्न।
📖 पाठ परिचय: इस अध्याय में हम ध्वनि (Sound) की मूल अवधारणाओं को समझते हैं। इसमें ध्वनि की उत्पत्ति (कंपन), ध्वनि तरंगें, आवृत्ति, आयाम, तारत्व, बलता, ध्वनि का संचरण तथा ध्वनि का परावर्तन (प्रतिध्वनि और गूँज) शामिल हैं।
साथ ही ध्वनि के प्रकार (अवश्रव्य, श्रव्य, पराश्रव्य), ध्वनि प्रदूषण के कारण और उसके निवारण के उपाय भी इस इकाई में विस्तार से बताए गए हैं।
यह अध्याय विद्यार्थियों को ध्वनि के वैज्ञानिक सिद्धांतों को दैनिक जीवन से जोड़कर समझने में सहायता करता है।
📌 Quick Answer:
UP Board Class 7 Science इकाई 14 — ध्वनि में ध्वनि की उत्पत्ति (कंपन), ध्वनि के गुण (आवृत्ति, आयाम, तारत्व, बलता), ध्वनि के प्रकार (अवश्रव्य, श्रव्य, पराश्रव्य), ध्वनि का संचरण और परावर्तन (प्रतिध्वनि व गूँज) का अध्ययन किया जाता है।
इसमें ध्वनि प्रदूषण के कारण, प्रभाव और नियंत्रण के उपाय भी शामिल हैं, जिससे विद्यार्थी ध्वनि के वैज्ञानिक और व्यावहारिक महत्व को समझते हैं।
प्रश्न 1 (क): निम्नलिखित में किस ध्वनि का तारत्व अधिकतम है —
(अ) शेर की दहाड़
(ब) नदी का कलकल
(स) मेघ गर्जन
(द) मच्छर की भनभनाहट
✅ सही उत्तर: (द) मच्छर की भनभनाहट
व्याख्या: तारत्व (Pitch) ध्वनि की आवृत्ति पर निर्भर करता है — जितनी अधिक आवृत्ति, उतना अधिक तारत्व और उतनी ही पतली (तीखी) आवाज। मच्छर के पंख बहुत तेज़ी से कंपन करते हैं जिससे उसकी भनभनाहट की आवृत्ति सबसे अधिक होती है — इसलिए उसका तारत्व सर्वाधिक है। शेर की दहाड़, मेघ गर्जन और नदी का कलकल — ये सभी अपेक्षाकृत कम आवृत्ति की ध्वनियाँ हैं जो मोटी (गहरी) होती हैं। यह ठीक वैसे ही है जैसे पतली डोरी मोटी डोरी से अधिक तेज़ कंपन करती है।
प्रश्न 1 (ख): SI पद्धति में आवृत्ति का मात्रक है —
(अ) सेकण्ड
(ब) हर्ट्ज
(स) किलोग्राम
(द) मीटर
✅ सही उत्तर: (ब) हर्ट्ज
व्याख्या: आवृत्ति (Frequency) का SI मात्रक हर्ट्ज (Hz) है, जिसका नाम जर्मन वैज्ञानिक हाइनरिख हर्ट्ज के नाम पर रखा गया है। 1 हर्ट्ज का अर्थ है — प्रति सेकण्ड 1 कंपन। जब कोई वस्तु 1 सेकण्ड में 256 बार कंपन करती है तो उसकी आवृत्ति 256 Hz होती है। सेकण्ड समय का, किलोग्राम द्रव्यमान का और मीटर लम्बाई का मात्रक है।
प्रश्न 1 (ग): 20 हर्ट्ज आवृत्ति से कम आवृत्ति की उत्पन्न ध्वनि कहलाती है —
(अ) श्रव्य
(ब) कर्कश
(स) अवश्रव्य
(द) पराश्रव्य
✅ सही उत्तर: (स) अवश्रव्य
व्याख्या: ध्वनि को आवृत्ति के आधार पर तीन भागों में बाँटा जाता है। अवश्रव्य ध्वनि (Infrasonic) वह होती है जिसकी आवृत्ति 20 Hz से कम हो — इसे मनुष्य नहीं सुन सकता, लेकिन हाथी और कबूतर जैसे जीव सुन सकते हैं। श्रव्य ध्वनि (Audible) की आवृत्ति 20 से 20,000 Hz होती है जिसे मनुष्य सुन सकता है। पराश्रव्य (Ultrasonic) की आवृत्ति 20,000 Hz से अधिक होती है — चमगादड़, कुत्ता और डॉल्फिन इसे सुनते हैं।
प्रश्न 1 (घ): ढोलक में ध्वनि उत्पन्न होती है —
(अ) रगड़ने से
(ब) खींचने से
(स) फूँक मारने से
(द) आघात से
✅ सही उत्तर: (द) आघात से
व्याख्या: ढोलक, तबला और मृदंग जैसे अवनद्ध वाद्य यंत्रों में चमड़े की झिल्ली पर हाथ या छड़ी से आघात (थपकी मारने) से ध्वनि उत्पन्न होती है। इसके विपरीत सितार-गिटार में तार खींचने से, बाँसुरी-शहनाई में फूँक मारने से और वायलिन में रगड़ने से ध्वनि निकलती है। ध्वनि उत्पन्न करने की चार विधियाँ याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 1 (ङ): ध्वनि की चाल सबसे अधिक होती है —
(अ) ठोस में
(ब) गैस में
(स) द्रव में
(द) निर्वात में
✅ सही उत्तर: (अ) ठोस में
व्याख्या: ध्वनि की चाल माध्यम में अणुओं की निकटता पर निर्भर करती है। ठोस पदार्थों में अणु सबसे पास-पास होते हैं इसलिए ध्वनि सबसे तेज़ चलती है। द्रव में ध्वनि की चाल मध्यम होती है और गैस (वायु) में सबसे कम — वायु में ध्वनि की चाल लगभग 332 मीटर/सेकण्ड है। निर्वात में ध्वनि का संचरण होता ही नहीं क्योंकि वहाँ माध्यम (कण) ही नहीं है। इसीलिए अंतरिक्ष में बिल्कुल शांति रहती है।
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प्रश्न 2: स्तम्भ (क) का स्तम्भ (ख) से सही मिलान कीजिए।
उत्तर:
| स्तम्भ (क) | स्तम्भ (ख) — विकल्प | ✅ सही मिलान |
| क. सुस्वर ध्वनि | अ. फूँक मारकर उत्पन्न करते हैं | द. हारमोनियम, ढोलक से उत्पन्न ध्वनि |
| ख. श्रव्य ध्वनि | ब. भूकंप से उत्पन्न ध्वनि | स. मनुष्य द्वारा सुनी जा सकने वाली ध्वनि |
| ग. अवश्रव्य ध्वनि | स. मनुष्य द्वारा सुनी जा सकने वाली ध्वनि | ब. भूकंप से उत्पन्न ध्वनि |
| घ. बाँसुरी से ध्वनि | द. हारमोनियम, ढोलक से उत्पन्न ध्वनि | अ. फूँक मारकर उत्पन्न करते हैं |
📘 व्याख्या: सुस्वर ध्वनि नियमित कंपन से उत्पन्न होती है — हारमोनियम और ढोलक इसके उदाहरण हैं। श्रव्य ध्वनि वह है जिसे मनुष्य के कान सुन सकें (20–20,000 Hz)। अवश्रव्य ध्वनि 20 Hz से कम होती है — भूकंप की तरंगें इसी श्रेणी में आती हैं। बाँसुरी में फूँक मारकर ध्वनि उत्पन्न की जाती है।
(क) ध्वनि का वेग प्रकाश के वेग से अधिक होता है।
व्याख्या: यह कथन गलत है। ध्वनि की चाल वायु में लगभग 332 मीटर/सेकण्ड है, जबकि प्रकाश की चाल 3 × 10⁸ मीटर/सेकण्ड (लगभग 30 करोड़ मीटर प्रति सेकण्ड) है। यानी प्रकाश ध्वनि से लगभग 9 लाख गुना तेज़ है! इसीलिए आसमान में बिजली की चमक पहले दिखती है और गड़गड़ाहट बाद में सुनाई देती है।
(ख) उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि का तारत्व अधिक होता है।
व्याख्या: यह कथन सही है। तारत्व और आवृत्ति में सीधा सम्बन्ध है — जितनी अधिक आवृत्ति, उतना अधिक तारत्व। उच्च आवृत्ति की ध्वनि पतली (तीखी/Shrill) होती है जैसे मच्छर की भनभनाहट या बाँसुरी के ऊँचे सुर। निम्न आवृत्ति की ध्वनि मोटी (गहरी/Grave) होती है जैसे ढोल की आवाज।
(ग) एक हर्ट्ज का अर्थ एक कंपन प्रति सेकण्ड है।
व्याख्या: यह कथन सही है। 1 हर्ट्ज (1 Hz) = प्रति सेकण्ड 1 कंपन। यह आवृत्ति का SI मात्रक है। यदि कोई वस्तु एक सेकण्ड में 50 बार कंपन करे तो उसकी आवृत्ति 50 Hz होगी। आवृत्ति का सूत्र है: आवृत्ति = कुल कंपन संख्या ÷ समय।
(घ) वीणा में कर्कश ध्वनि उत्पन्न होती है।
व्याख्या: यह कथन गलत है। वीणा एक तंत्री वाद्य यंत्र है जिससे सुस्वर (मधुर/Musical) ध्वनि उत्पन्न होती है, कर्कश नहीं। सुस्वर ध्वनि नियमित और आवर्त कंपनों से उत्पन्न होती है जो कान को मधुर लगती है। कर्कश (शोर) ध्वनि अनियमित कंपनों से होती है जैसे वाहनों का हार्न, पटाखे आदि।
(ङ) ताप बदलने से ध्वनि की चाल बदल जाती है।
व्याख्या: यह कथन सही है। तापमान बढ़ने पर वायु के अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है जिससे वे तेज़ी से कंपन करते हैं और ध्वनि की चाल बढ़ जाती है। वायु में 0°C पर ध्वनि की चाल लगभग 332 m/s होती है। प्रत्येक 1°C तापमान वृद्धि पर ध्वनि की चाल लगभग 0.6 m/s बढ़ जाती है।
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(क) कंपन करती हुई वस्तु का अधिकतम विस्थापन ................... कहलाता है।
✅ उत्तर: आयाम (Amplitude)
व्याख्या: आयाम (Amplitude) किसी कंपन करती वस्तु का उसकी माध्य स्थिति (Rest Position) से अधिकतम विस्थापन है। आयाम जितना अधिक होगा, ध्वनि की बलता (Loudness) उतनी ही अधिक होगी। जब हम ज़ोर से चिल्लाते हैं तो हमारी आवाज़ का आयाम अधिक होता है, और धीरे बोलने पर कम।
(ख) ध्वनि संचरण के लिए ................... की आवश्यकता होती है।
✅ उत्तर: माध्यम (Medium)
व्याख्या: ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है जिसे चलने के लिए माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है। निर्वात में माध्यम नहीं होता इसलिए वहाँ ध्वनि का संचरण नहीं होता। इसीलिए चन्द्रमा पर या अंतरिक्ष में पूर्ण शांति होती है — चाहे वहाँ कितना भी विस्फोट हो।
(ग) कंपन करने वाली वस्तु द्वारा एक कंपन में लगे समय को उसका ........... कहते हैं।
✅ उत्तर: आवर्तकाल (Time Period)
व्याख्या: आवर्तकाल (Time Period) वह समय है जो एक पूर्ण कंपन पूरा करने में लगता है। इसे 'T' से दर्शाते हैं और इसका मात्रक सेकण्ड (s) है। आवर्तकाल और आवृत्ति परस्पर व्युत्क्रमानुपाती होते हैं: T = 1/f। यानी यदि आवृत्ति अधिक है तो आवर्तकाल कम होगा।
(घ) ध्वनि की चाल .................... में न्यूनतम होती है।
✅ उत्तर: गैस (वायु) में
व्याख्या: ध्वनि की चाल ठोस > द्रव > गैस के क्रम में घटती है। गैस में अणु सबसे दूर-दूर होते हैं और उनके बीच आकर्षण बल सबसे कम होता है, इसलिए ध्वनि की चाल गैस में न्यूनतम होती है। वायु में ध्वनि की चाल लगभग 332 m/s है जबकि इस्पात (ठोस) में यह लगभग 5100 m/s होती है।
(ङ) किसी माध्यम में नियत ताप पर ध्वनि की चाल ................ होती है।
✅ उत्तर: नियत (स्थिर)
व्याख्या: किसी निश्चित माध्यम में और नियत ताप पर ध्वनि की चाल स्थिर (Constant) रहती है — वह ध्वनि के आयाम, आवृत्ति या तीव्रता पर निर्भर नहीं करती। हाँ, यदि ताप बदल जाए तो चाल बदल जाती है, लेकिन एक ही ताप पर यह निश्चित रहती है।
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प्रश्न 5 (क): प्रतिध्वनि को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
जब हम किसी पहाड़ी के पास, किसी बड़े हॉल में या ऊँचे भवन के सामने जोर से बोलते हैं तो हमें अपनी ही आवाज़ कुछ समय बाद दोबारा सुनाई देती है — इस घटना को प्रतिध्वनि (Echo) कहते हैं।
प्रतिध्वनि का कारण: यह ध्वनि के परावर्तन के कारण होती है। ध्वनि किसी दूर स्थित परावर्तक तल (पहाड़, दीवार, भवन) से टकराकर वापस लौटती है और हमें पुनः सुनाई देती है। प्रतिध्वनि सुनने के लिए ध्वनि स्रोत और परावर्तक तल के बीच की दूरी कम से कम 16.6 मीटर होनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि मनुष्य का कान दो ध्वनियों को तभी अलग-अलग सुन सकता है जब उनके बीच कम से कम 1/10 सेकण्ड का अंतर हो।
प्रतिध्वनि के उपयोग: जल में डूबी वस्तुओं की गहराई मापने में (SONAR तकनीक), चमगादड़ द्वारा अवरोध से बचने में, कीट द्वारा भोजन की खोज में, समुद्र में पनडुब्बी की स्थिति ज्ञात करने में और मछलियों के झुण्ड की स्थिति ज्ञात करने में।
प्रश्न 5 (ख): तारत्व की परिभाषा लिखिए। मोटी तथा पतली ध्वनि के कारण का अन्तर कीजिए।
उत्तर:
तारत्व (Pitch) ध्वनि का वह गुण है जिसके द्वारा हम मोटी (भारी/Grave) और पतली (तीखी/Shrill) ध्वनि में अन्तर कर सकते हैं। उच्च तारत्व वाली ध्वनि की आवृत्ति उच्च होती है और निम्न तारत्व वाली ध्वनि की आवृत्ति निम्न होती है।
🎵 मोटी और पतली ध्वनि में अन्तर
| आधार | मोटी (Grave) ध्वनि | पतली (Shrill) ध्वनि |
| आवृत्ति | कम (निम्न) आवृत्ति | अधिक (उच्च) आवृत्ति |
| तारत्व | निम्न तारत्व | उच्च तारत्व |
| उदाहरण | कुत्ते का भौंकना, ढोल | बिल्ली की आवाज़, मच्छर |
| कारण | कंपन धीमी गति से होता है | कंपन तेज़ गति से होता है |
सरल उदाहरण: जब हम किसी गिटार की मोटी तार को छेड़ते हैं तो वह धीमी आवृत्ति से कंपन करती है और मोटी आवाज़ निकलती है। पतली तार को छेड़ने पर वह तेज़ आवृत्ति से कंपन करती है और पतली (तीखी) आवाज़ निकलती है।
प्रश्न 5 (ग): ध्वनि प्रदूषण के कारण तथा उनके निवारण लिखिए।
उत्तर:
वातावरण में अत्यधिक या अवांछित ध्वनियों को शोर प्रदूषण (ध्वनि प्रदूषण / Noise Pollution) कहते हैं। यह आधुनिक जीवन की एक गम्भीर समस्या है।
🔊 ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख कारण
वाहनों (ट्रक, बस, मोटरसाइकिल) के हार्न और इंजन की ध्वनियाँ ध्वनि प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण हैं। कारखानों और औद्योगिक इकाइयों में मशीनों की तीव्र ध्वनि भी इसमें योगदान करती है। इसके अलावा लाउडस्पीकर का तेज़ बजना, पटाखे फोड़ना, हवाई जहाज़ की आवाज़ और निर्माण कार्य (Construction) भी ध्वनि प्रदूषण फैलाते हैं।
🏥 हानिकारक प्रभाव
लगातार तेज़ शोर में रहने से सुनने की शक्ति प्रभावित होती है और अंततः बहरापन हो सकता है। शोर प्रदूषण से अनिद्रा, अतिरिक्त तनाव और चिंता जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। शोरयुक्त वातावरण में रहने वाले लोग असामान्य सामाजिक व्यवहार करने लगते हैं। बच्चों में एकाग्रता की कमी और पढ़ाई में बाधा भी शोर प्रदूषण का परिणाम है।
✅ निवारण के उपाय
वाहनों का अच्छी तरह रख-रखाव करना चाहिए और कम तीव्रता वाले प्रेस नुमा ध्वनि विस्तारक (Sound Dampers) का उपयोग करना चाहिए। लाउडस्पीकर का उपयोग नियंत्रित करना चाहिए — विशेषकर रात्रि और प्रातःकाल में। कारखानों में ध्वनि अवशोषक सामग्री (Noise Absorbing Material) जैसे थर्माकोल, काग (Cork) और कपड़े का उपयोग करना चाहिए। सड़कों के किनारे घने वृक्ष लगाने चाहिए — ये ध्वनि को अवशोषित करते हैं। व्यस्त सड़कों के किनारे आवासीय क्षेत्र नहीं होने चाहिए।
प्रश्न 5 (घ): स्पष्ट कीजिए कि वर्षाकाल में बादल की बिजली की चमक पहले क्यों दिखाई देती है व गड़गड़ाहट बाद में क्यों सुनाई देती है।
उत्तर:
यह एक बहुत रोचक और वैज्ञानिक प्रश्न है। इसका उत्तर प्रकाश और ध्वनि की चालों में भारी अन्तर में छिपा है।
कारण: बादलों में बिजली चमकने के समय एक साथ दोनों घटनाएँ होती हैं — प्रकाश (चमक) और ध्वनि (गड़गड़ाहट) एक ही समय उत्पन्न होते हैं। परन्तु प्रकाश की चाल लगभग 3 × 10⁸ मीटर/सेकण्ड (3 करोड़ मीटर/सेकण्ड) है, जबकि ध्वनि की चाल वायु में केवल लगभग 332 मीटर/सेकण्ड है। इस प्रकार प्रकाश, ध्वनि की तुलना में लगभग 9 लाख गुना तेज़ है। इसीलिए बिजली का प्रकाश हमारी आँखों तक लगभग तुरन्त (नगण्य समय में) पहुँच जाता है, जबकि उसी बिजली की ध्वनि (गड़गड़ाहट) कई सेकण्ड बाद हम तक पहुँचती है।
📌 व्यावहारिक उपयोग: यदि बिजली चमकने और गड़गड़ाहट सुनाई देने के बीच जितने सेकण्ड का अन्तर हो, उसे 332 से गुणा करने पर बिजली की दूरी मीटर में निकाली जा सकती है।
प्रश्न 5 (ङ): स्पष्ट कीजिए कि ध्वनि किस प्रकार उत्पन्न होती है।
उत्तर:
ध्वनि कम्पन के कारण उत्पन्न होती है — यह ध्वनि विज्ञान का मूल सिद्धांत है।
जब कोई वस्तु अपनी माध्य स्थिति के इधर-उधर आगे-पीछे गति (कम्पन/Vibration) करती है, तो वह अपने आस-पास की वायु के कणों में भी इसी प्रकार की गति उत्पन्न कर देती है। ये वायु के कण आगे के कणों को कंपित करते हैं और इस प्रकार ध्वनि तरंगें आगे-आगे बढ़ती जाती हैं। जब ये तरंगें हमारे कान के पर्दे (Eardrum) से टकराती हैं तो पर्दा कम्पन करने लगता है। कान की विशेष संरचना इस कम्पन को तंत्रिकाओं द्वारा मस्तिष्क तक पहुँचाती है और हमें ध्वनि सुनाई देती है।
सरल प्रयोग से समझें: यदि आप रबर बैंड को खींचकर छोड़ें तो वह कम्पन करता है और ध्वनि उत्पन्न होती है। जैसे ही कम्पन बंद होता है, ध्वनि भी बंद हो जाती है। घण्टी बजाने के बाद उसे उँगली से दबाने पर ध्वनि तुरन्त बंद हो जाती है क्योंकि कम्पन रुक जाता है।
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प्रश्न 6 (क): तीन कंपन करती वस्तुओं A, B, C की आवृत्तियाँ क्रमशः 256 Hz, 512 Hz, 1024 Hz हैं। उनके तारत्व को घटते क्रम में लिखिए।
उत्तर:
हम जानते हैं कि तारत्व और आवृत्ति का सीधा सम्बन्ध है — जितनी अधिक आवृत्ति, उतना अधिक तारत्व।
दी गई आवृत्तियाँ हैं — A = 256 Hz, B = 512 Hz, C = 1024 Hz। चूँकि C की आवृत्ति सबसे अधिक है, इसलिए C का तारत्व सबसे अधिक होगा। B की आवृत्ति A से दोगुनी है इसलिए B का तारत्व A से अधिक होगा।
घटते क्रम में तारत्व: C (1024 Hz) > B (512 Hz) > A (256 Hz)
समझने का तरीका: संगीत में 'सा रे ग म प ध नि सा' — ऊपर जाते हुए प्रत्येक सुर की आवृत्ति बढ़ती जाती है और तारत्व भी बढ़ता जाता है। ऊपरी 'सा' (1024 Hz) की आवाज़ निचले 'सा' (256 Hz) से अधिक तीखी (पतली) होती है।
प्रश्न 6 (ख): दो व्यक्ति A तथा B एक ऊँची इमारत के सामने ध्वनि उत्पन्न करते हैं। A को एक परावर्तन के बाद और B को दस परावर्तनों के बाद ध्वनि सुनाई देती है। इसमें कौन सी ध्वनि प्रतिध्वनि तथा कौन सी गूँज होगी?
उत्तर:
A की ध्वनि → प्रतिध्वनि (Echo): A को केवल एक बार परावर्तन के बाद ध्वनि सुनाई देती है। प्रतिध्वनि में ध्वनि का परावर्तन केवल एक बार होता है — ध्वनि एक परावर्तक तल से टकराकर वापस आती है और श्रोता को एक बार स्पष्ट रूप से पुनः सुनाई देती है।
B की ध्वनि → गूँज / अनुरणन (Reverberation): B को दस बार परावर्तन के बाद ध्वनि सुनाई देती है। गूँज में ध्वनि का परावर्तन बार-बार होता है — ध्वनि एक परावर्तक तल से दूसरे पर और फिर वापस बारंबार टकराती रहती है। इससे ध्वनि का प्रभाव कान पर लम्बे समय तक बना रहता है।
याद रखें: बड़े सभागारों (Auditoriums) में गूँज नियंत्रित करने के लिए दीवारों पर ध्वनि अवशोषक सामग्री लगाई जाती है। अन्यथा एक साथ बार-बार परावर्तित ध्वनियाँ भाषण या संगीत को अस्पष्ट बना देती हैं।
प्रश्न 7: हम बाँसुरी और कोयल की कूक जैसी आवाज़ें कर्णप्रिय लगती हैं परन्तु लाउडस्पीकर की तीव्र आवाज़ कर्णप्रिय नहीं लगती है। ऐसा क्यों?
उत्तर:
इस प्रश्न का उत्तर सुस्वर ध्वनि और शोर के मूलभूत अंतर में निहित है।
बाँसुरी और कोयल की आवाज़ कर्णप्रिय होने का कारण: बाँसुरी और कोयल की कूक नियमित एवं आवर्त कंपनों से उत्पन्न होती है। इन कंपनों की एक निश्चित आवृत्ति और एक निश्चित पैटर्न होता है जो हमारे कान के पर्दे को एक सुखद और लयबद्ध तरीके से कंपित करता है। ऐसी ध्वनि को सुस्वर ध्वनि (Musical Sound) कहते हैं।
लाउडस्पीकर की तीव्र आवाज़ कर्णप्रिय न होने का कारण: लाउडस्पीकर से अत्यधिक तीव्रता में निकलने वाली ध्वनि अनियमित और अनावर्त कंपनों से उत्पन्न होती है। ये कंपन कान के पर्दे पर अनियमित और तीव्र दबाव डालते हैं जो असहज और कर्कश अनुभव देता है। इसे शोर (Noise) कहते हैं।
📌 सारांश: नियमित कंपन → सुस्वर → कर्णप्रिय। अनियमित/अत्यधिक कंपन → शोर → अकर्णप्रिय। ध्वनि की बलता (Loudness) भी महत्वपूर्ण है — कोई भी ध्वनि यदि अत्यधिक तीव्र हो जाए तो वह भी कर्कश लगने लगती है।
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है?
उत्तर — ध्वनि कंपन के कारण उत्पन्न होती है। जब कोई वस्तु कंपन करती है तो वह आसपास के माध्यम में तरंगें उत्पन्न करती है जिन्हें हम ध्वनि के रूप में सुनते हैं।
प्रश्न 2: ध्वनि के कितने प्रकार होते हैं?
उत्तर — ध्वनि तीन प्रकार की होती है — अवश्रव्य (20 Hz से कम), श्रव्य (20–20000 Hz) और पराश्रव्य (20000 Hz से अधिक)।
प्रश्न 3: प्रतिध्वनि क्या है?
उत्तर — ध्वनि के परावर्तन के कारण जब वही ध्वनि कुछ समय बाद दोबारा सुनाई देती है तो उसे प्रतिध्वनि कहते हैं।
प्रश्न 4: ध्वनि प्रदूषण क्या है?
उत्तर — वातावरण में अत्यधिक और अनावश्यक ध्वनि को ध्वनि प्रदूषण कहते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
प्रश्न 5: ध्वनि की चाल किस माध्यम में सबसे अधिक होती है?
उत्तर — ध्वनि की चाल ठोस में सबसे अधिक, द्रव में मध्यम और गैस में सबसे कम होती है।
निष्कर्ष:
इस प्रकार UP Board Class 7 Science इकाई 14 — ध्वनि के सम्पूर्ण समाधान में हमने ध्वनि की उत्पत्ति (कंपन), आवृत्ति, आयाम, तारत्व, बलता जैसे गुणों को समझा। ध्वनि के तीन प्रकारों (अवश्रव्य, श्रव्य, पराश्रव्य), ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता, ध्वनि परावर्तन के नियम, प्रतिध्वनि और गूँज के अंतर तथा ध्वनि प्रदूषण के कारण और निवारण — इन सभी विषयों को विस्तार से जाना। यह अध्याय भौतिक विज्ञान की नींव का हिस्सा है।
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