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UP Board Class 8 Sanskrit Chapter 2 Solution – मातृदेवो भव सम्पूर्ण समाधान | UP Board

Class 8 Sanskrit Chapter 2 Solution
प्रिय विद्यार्थियों एवं शिक्षकों! 🙏

इस पोस्ट में UP Board Class 8 Sanskrit Chapter 2 – मातृदेवो भव का सरल, स्पष्ट एवं परीक्षा-उपयोगी सम्पूर्ण समाधान प्रस्तुत किया गया है। इसमें पाठ का भावार्थ, हिंदी अनुवाद, श्लोक की व्याख्या, एकपदेन उत्तर, पूर्णवाक्य उत्तर तथा अभ्यास प्रश्न शामिल हैं।

🔗 Chapter Link: Class 8 Sanskrit Chapter 2 – मातृदेवो भव (Complete Solution)

यह अध्याय माता-पिता के सम्मान और नैतिक मूल्यों को समझाने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण पाठ है, जो परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है।

द्वितीयः पाठः - मातृदेवो भव

|| माता देवता के समान है (Treat Mother as God) ||
BASIC SHIKSHA SOLUTION • UP BOARD CLASS 8 SANSKRIT SOLUTION
प्यारे बच्चों! इस पाठ में हम सतीश और मुकुल की कहानी के माध्यम से जानेंगे कि माता-पिता की सेवा करना हमारा परम कर्तव्य है। साथ ही हम 'बड़ों के सम्मान' का महत्व बताने वाले एक सुंदर श्लोक को भी समझेंगे।
अनुच्छेद 1 : सतीश का व्यवहार
मुकुलः एकः बालकः अस्ति। तस्य एकं मित्रम् अस्ति। तस्य नाम सतीशः अस्ति। एकदा सतीशस्य जननी ज्वरेण पीड़िता अभवत्। सा अवदत - भो सतीश! गच्छ, वैद्यम् आनय। सतीशोऽवदत् - अयम् मे क्रीडनस्य कालः। मम मित्राणि आगच्छन्ति। अहम् क्रीडनार्थम् गच्छामि। इति उक्त्वा सः बहिः अगच्छत्।
हिंदी अनुवाद:
मुकुल एक बालक (लड़का) है। उसका एक मित्र है। उसका नाम सतीश है। एक बार सतीश की माता बुखार से पीड़ित हो गईं (बीमार पड़ गईं)।
उन्होंने (सतीश से) कहा - "हे सतीश! जाओ, वैद्य (डॉक्टर) को ले आओ।"
सतीश बोला - "यह मेरे खेलने का समय है। मेरे मित्र आ रहे हैं। मैं खेलने के लिए जा रहा हूँ।" ऐसा कहकर वह बाहर चला गया।
BASIC SHIKSHA SOLUTION • UP BOARD CLASS 8 SANSKRIT SOLUTION
अनुच्छेद 2 : मुकुल का आगमन
तस्मिन् एव काले सतीशस्य मित्रम् मुकुलः तत्र प्राप्तः। सः सतीशस्य जननीं ज्वरेण पीडिताम् अपश्यत्। सः ताम् अपृच्छत् -"कुत्र सतीशः गतः "इति। सा अवदत् - मित्रैः सह क्रीडितुम् गतः। मुकुलः दुखितो अभवत्। सः बहिः अगच्छत्। सः सतीशम् क्रीड़ाक्षेत्रात् गृहम् आनयत्।
हिंदी अनुवाद:
उसी समय सतीश का मित्र मुकुल वहां पहुंचा। उसने सतीश की माता को बुखार से पीड़ित देखा। उसने उनसे पूछा - "सतीश कहाँ गया है?"
वह बोलीं - "मित्रों के साथ खेलने गया है।"
मुकुल (यह सुनकर) दुखी हुआ। वह बाहर गया। वह सतीश को खेल के मैदान से घर ले आया।
अनुच्छेद 3 : कर्तव्य का ज्ञान (उपदेश)
अवदत् च - हे मित्र! एषा तव जननी ज्वरपीडिता अस्ति। त्वया अस्याः सेवा कर्तव्या। किम् त्वं न जानासि तैतिरीयोपनिषद् उपदिशति - 'मातृ देवो भव' इति। अन्यदपि उक्तम् -
अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्॥
हिंदी अनुवाद:
और (मुकुल ने) कहा - "हे मित्र! यह तुम्हारी माता बुखार से पीड़ित हैं। तुम्हें इनकी सेवा करनी चाहिए। क्या तुम नहीं जानते कि तैत्तिरीयोपनिषद् उपदेश देती है - 'माता देवता के समान होती है'।"

और भी कहा गया है (श्लोक का अर्थ):
मातृदेवो भव’ हमें सिखाता है कि माता को देवता के समान सम्मान देना चाहिए, क्योंकि वह जीवन की प्रथम गुरु और रक्षक है। दूसरी पंक्ति ‘अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः’ यह बताती है कि जो व्यक्ति बड़ों का सम्मान करता है और उनकी सेवा करता है, वह समाज में आदर प्राप्त करता है। ‘चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्’ से यह स्पष्ट होता है कि माता-पिता और बड़ों की सेवा से व्यक्ति की आयु, विद्या, यश और शक्ति में वृद्धि होती है। यह श्लोक बच्चों को यह सिखाता है कि माता-पिता के प्रति कर्तव्य और सम्मान जीवन को सार्थक बनाते हैं। यह सरल और प्रेरणादायक श्लोक बच्चों में नैतिकता और माता-पिता के प्रति श्रद्धा की भावना को जागृत करता है। "जो व्यक्ति नित्य (प्रतिदिन) बड़ों का सम्मान करता है और बूढ़ों (बुजुर्गों) की सेवा करता है, उसकी चार चीजें बढ़ती हैं - आयु, विद्या, यश और बल।"
BASIC SHIKSHA SOLUTION • UP BOARD CLASS 8 SANSKRIT SOLUTION
अनुच्छेद 4 : सतीश का परिवर्तन
"अधुना सत्वरं गच्छ, चिकित्सकम् च आनय" इति श्रुत्वा सतीशः वैद्यम् आनयत्। तस्य जननी प्रमुदिताऽभवत्।
हिंदी अनुवाद:
(मुकुल ने कहा) "अब जल्दी जाओ और डॉक्टर को लाओ।" यह सुनकर सतीश (गया और) वैद्य को ले आया। (इससे) उसकी माता बहुत प्रसन्न हुईं।
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2. एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दें)
प्रश्न (Question) उत्तर (Answer)
(क) सतीशस्य जननी केन पीडिता आसीत्?
(सतीश की माँ किससे पीड़ित थीं?)
ज्वरेण
(बुखार से)
(ख) मुकुलः कस्य मित्रम् अस्ति?
(मुकुल किसका मित्र है?)
सतीशस्य
(सतीश का)
(ग) कः दुःखितोऽभवत्?
(कौन दुखी हुआ?)
मुकुलः
(घ) कः वैद्यम् आनयत्?
(वैद्य को कौन लाया?)
सतीशः
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3. कः/का, उक्तवान्/उक्तवती (किसने कहा?)
कथन (Statement) किसने कहा (Who Said)
(क) भोः सतीश ! गच्छ वैद्यम् आनय। माता
(ख) अहं क्रीडनार्थं गच्छामि। सतीशः
(ग) मित्रैः सह क्रीडितुं गतः। माता
(घ) हे मित्र ! एषा तव जननी ज्वरपीडिता अस्ति। मुकुलः
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4. पूर्णवाक्येन उत्तरत (पूरे वाक्य में उत्तर दें)
(क) मुकुलः सतीशस्य मातरम् किम् अपृच्छत्?
(मुकुल ने सतीश की माता से क्या पूछा?)
उत्तर: मुकुलः सतीशस्य मातरम् अपृच्छत् -"कुत्र सतीशः गतः?" इति।
(मुकुल ने पूछा- "सतीश कहाँ गया है?")
(ख) सतीशः किम् उक्त्वा बहिः अगच्छत्?
(सतीश क्या कहकर बाहर गया?)
उत्तर: "अयं मे क्रीडनस्य कालः, मम मित्राणि आगच्छन्ति" इति उक्त्वा सः बहिः अगच्छत्।
("यह मेरे खेलने का समय है, मेरे मित्र आ रहे हैं" यह कहकर वह बाहर गया।)
(ग) उपनिषद् किम् उपदिशति?
(उपनिषद क्या उपदेश देती है?)
उत्तर: उपनिषद् उपदिशति - "मातृ देवो भव" इति।
(उपनिषद कहती है - माता देवता के समान है।)
(घ) सः सतीशं कुतः आनयत्?
(वह सतीश को कहाँ से लाया?)
उत्तर: सः सतीशं क्रीडाक्षेत्रात् आनयत्।
(वह सतीश को खेल के मैदान से लाया।)
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5. प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत (प्रश्नों के उत्तर लिखें)
(क) सतीशस्य जननी कदा प्रमुदिता अभवत्?
(सतीश की माँ कब प्रसन्न हुईं?)
उत्तर: यदा सतीशः वैद्यम् आनयत् तदा तस्य जननी प्रमुदिता अभवत्।
(जब सतीश वैद्य को लाया तब उसकी माँ प्रसन्न हुईं।)
(ख) आयुर्विद्या यशोबलं कस्य वर्धन्ते?
(आयु, विद्या, यश और बल किसका बढ़ता है?)
उत्तर: अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः च आयुर्विद्या यशोबलं वर्धन्ते।
(जो बड़ों का सम्मान करता है और बुजुर्गों की सेवा करता है।)
(ग) किं श्रुत्वा सतीशः वैद्यम् आनयत्?
(क्या सुनकर सतीश वैद्य को लाया?)
उत्तर: मुकुलस्य उपदेशं श्रुत्वा सतीशः वैद्यम् आनयत्।
(मुकुल का उपदेश/बात सुनकर सतीश वैद्य को लाया।)
(घ) सतीशः कुत्र आगच्छत्?
उत्तर: सतीशः क्रीडाक्षेत्रात् आगच्छत्।
(हिंदी व्याख्या: सतीश खेल के मैदान से आया।)
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6. वाक्य रचनां कुरुत (वाक्य बनायें)
शब्द (Word) वाक्य प्रयोग (Sentence)
ज्वरेण महेशः ज्वरेण पीडितः अस्ति।
मित्राणि मम मित्राणि आगच्छन्ति।
ताम् सः ताम् अपृच्छत्।
क्रीडाक्षेत्रात् सः क्रीडाक्षेत्रात् गृहम् आगच्छत्।
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7. विचिन्त्य लिखत (सोचकर लिखें)
प्रश्न: यदि भवतः सहपाठी रुग्णः स्यात् तदा भवान् किं करिष्यति?
(यदि आपका सहपाठी बीमार हो जाए तो आप क्या करेंगे?)
उत्तर: यदि मम सहपाठी रुग्णः भविष्यति तदा अहम् तस्य सेवां करिष्यामि, तस्य औषधस्य प्रबन्धं करिष्यामि और तस्य माता-पितरौ सूचयिष्यामि।
(मैं उसकी सेवा करूँगा, दवा का प्रबंध करूँगा और उसके माता-पिता को सूचित करूँगा।)
UP BOARD CLASS 8 SANSKRIT
बन्धुबान्धवानां नामानि (रिश्तों के नाम)
संस्कृत नाम हिंदी अर्थ संस्कृत नाम हिंदी अर्थ
पितामहःदादा पितामहीदादी
मातामहःनाना जनकः/पितापिता
जननी/मातामाता मातुलःमामा
पितृव्यःचाचा पितृव्याचाची
अग्रजःबड़ा भाई अनुजःछोटा भाई
भगिनीबहन पुत्रः/तनयःबेटा
पितृस्वसाबुआ ननान्दाननद
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