BASIC SHIKSHA SOLUTION में आपका स्वागत है

नमस्ते प्यारे बच्चों और सम्मानित शिक्षकों! 'बेसिक शिक्षा सॉल्यूशन' परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।  यह वेबसाइट विशेष रूप से  कक्षा 1 से 8तक के सभी छात्रों और शिक्षकों के लिए तैयार की  है। यहाँ आपको क्या मिलेगा: व्यापक कवरेज: कक्षा 1 से 8 तक के सभी मुख्य विषयों (जैसे गणित, विज्ञान, हिंदी, सामाजिक विज्ञान, आदि) के सरल नोट्स और शिक्षण सामग्री मिलेगी। विषयों को आसान बनाना: जटिल विषयों को आसान भाषा, चित्र और उदाहरणों के साथ समझाया जाएगा, जो NCERT/UP बोर्ड पाठ्यक्रम पर आधारित होंगे। अभ्यास सामग्री: स्कूल की परीक्षाओं और अवधारणाओं को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर और अभ्यास पत्र यहाँ उपलब्ध होंगे। शिक्षकों के लिए संसाधन: बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़ी उपयोगी शिक्षण सामग्री और अपडेट भी समय-समय पर साझा की जाएगी। मेरा उद्देश्य है कि आप सभी को गुणवत्तापूर्ण और सरल शिक्षा सामग्री एक ही जगह पर मिल सके। जुड़े रहें! आप अपनी किसी भी शंका या सुझाव को नीचे कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं। मुझे आपकी मदद करके खुशी होगी। आपका शुभचिंतक, बेसिक शिक्षा सॉल्यूशन

U[ BOARD CLASS 8 SANSKRIT Lesson 6 - षष्ठः पाठः - किं तर्तुं जानाति भवान् | कक्षा 8 संस्कृत पाठ 6 – किं तर्तुं जानाति भवान् | हिन्दी अनुवाद, प्रश्न-उत्तर (UP Board)

यह पोस्ट कक्षा 8 संस्कृत – पाठ 6 “किं तर्तुं जानाति भवान्” का संपूर्ण, सरल एवं परीक्षा उपयोगी समाधान प्रस्तुत करती है। यह सामग्री UP Board / SCERT के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार की गई है, जिससे छात्र बिना किसी कठिनाई के पाठ को समझ सकें।

इस पाठ में प्राध्यापक और नाविक के संवाद के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि केवल पुस्तकीय ज्ञान ही पर्याप्त नहीं, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान का जीवन में अत्यंत महत्व होता है। कथा रोचक है और नैतिक शिक्षा से भरपूर है।

इस पोस्ट में पाठ का शुद्ध संस्कृत पाठ, सरल हिन्दी अनुवाद, एकपदेन उत्तर, कथन-कर्ता, शब्द निर्माण, द्विभाषी अनुवाद, स्मरणीय वाक्य तथा शिक्षण-संकेत तालिकाओं एवं आकर्षक प्रारूप में दिए गए हैं। यह सामग्री परीक्षा तैयारी, पुनरावृत्ति, होमवर्क और शिक्षकों के अध्यापन के लिए अत्यंत उपयोगी है।

Class 8 Sanskrit Chapter 6 Solution

षष्ठः पाठः - किं तर्तुं जानाति भवान्

|| क्या आप तैरना जानते हैं? ||
नमस्ते प्रिय विद्यार्थियों! 🙏
इस पाठ में एक 'प्राध्यापक' (Professor) और 'नाविक' (Boatman) के बीच की रोचक बातचीत है। इस कथा के माध्यम से ज्ञान के अहंकार और व्यावहारिक बुद्धि के महत्व को दर्शाया गया है। अध्यापक अपने सैद्धांतिक ज्ञान पर गर्व करता है, परंतु जब संकट की घड़ी आती है तो नाविक का व्यावहारिक ज्ञान ही काम आता है। यह पाठ हमें सिखाता है कि सच्चा ज्ञान वही है जो व्यावहारिक जीवन में उपयोगी हो। केवल पुस्तकीय ज्ञान से काम नहीं चलता, जीवन में व्यावहारिक कुशलता भी आवश्यक है।
BASIC SHIKSHA SOLUTION • UP BOARD CLASS 8 SANSKRIT SOLUTION
1. प्राध्यापक और नाविक का संवाद
विश्वविद्यालयस्य कश्चित् प्राध्यापकः विहर्तुं नावम् आरूढः। नावा जलविहारं कर्तुं तस्य प्रथमोऽयमवसरः आसीत्। बालसूर्यस्य किरणानां जलक्रीडाम्, वीचीनां नर्तनम्, अम्भसाम् अपारराशिम्, अरित्रमाध्यमेन नौकायाः अग्रेसारणम् इत्यादि दृश्यं दृष्ट्वा सः नाविकम् एवम् अपृच्छत्-
प्राध्यापकः - भो नाविक! किं भवता कदापि गणितं पठितम्?
नाविकः - न पठितम्।
हिंदी अनुवाद: विश्वविद्यालय के कोई प्राध्यापक (प्रोफेसर) घूमने के लिए नाव पर चढ़े। नाव से जलविहार करने का उनका यह पहला अवसर था। उगते हुए सूर्य की किरणों की जलक्रीड़ा, लहरों का नाचना, जल की अपार राशि और पतवार के माध्यम से नौका का आगे बढ़ना आदि दृश्य देखकर उन्होंने नाविक से इस प्रकार पूछा-
प्राध्यापक: हे नाविक! क्या तुमने कभी गणित पढ़ा है?
नाविक: नहीं पढ़ा।
BASIC SHIKSHA SOLUTION • UP BOARD CLASS 8 SANSKRIT SOLUTION
2. जीवन का व्यर्थ होना
प्राध्यापकः - किं गणितं पठितुं विद्यालयं न गतवान्। नूनं भवतः जीवनस्य चतुर्थांशः व्यर्थतां गतः। भवता रसायनशास्त्रं भौतिकशास्त्रं वा पठितं स्यात्।
नाविकः - ईदृशं मे भाग्यं कुतः? यदहं भौतिकशास्त्रं रसायनशास्त्रं वा पठेयम्।
प्राध्यापकः - नूनं त्वया अर्धांशः जीवनस्य व्यर्थतां नीतः। वद वद त्वया आंग्लभाषा तु पठिता स्यादेव?
नाविकः - (ग्लानिम् अनुभवन्) महाशय! नाहं मात्रा पित्रा वा विद्यालयं प्रेषितः। कुतः पठेयम्?
हिंदी अनुवाद: प्राध्यापक: क्या गणित पढ़ने के लिए विद्यालय नहीं गए? निश्चय ही तुम्हारे जीवन का चौथाई भाग (1/4) व्यर्थ चला गया। तुमने रसायनशास्त्र या भौतिकशास्त्र तो पढ़ा होगा?
नाविक: मेरा ऐसा भाग्य कहाँ? कि मैं भौतिकशास्त्र या रसायनशास्त्र पढ़ूँ।
प्राध्यापक: निश्चय ही तुमने जीवन का आधा भाग (1/2) व्यर्थ कर दिया। बोलो-बोलो, तुमने अंग्रेजी भाषा तो पढ़ी ही होगी?
नाविक: (ग्लानि का अनुभव करते हुए) महाशय! न मुझे माता ने और न पिता ने विद्यालय भेजा। कहाँ से पढ़ता?
BASIC SHIKSHA SOLUTION • UP BOARD CLASS 8 SANSKRIT SOLUTION
3. नदी में तूफ़ान
प्राध्यापकः - तर्हि तव जीवनस्य त्रयो भागाः अपार्था जाताः। अत्रान्तरे नदे जलावर्तनं समायातम्। लहरीणां वेगेन तदा नौः अकम्पत। पश्यतोः एव तयोः नौका जलेन पूरिता जाता। नाविकः प्राध्यापकं सम्भ्रमेण अपृच्छत् - महाशय! किं भवान् तर्तुं जानाति?
हिंदी अनुवाद: प्राध्यापक: तो तुम्हारे जीवन के तीन भाग (3/4) व्यर्थ हो गए। इसी बीच नदी में भँवर (तूफ़ान) आ गया। लहरों के वेग से तब नाव डगमगाने लगी। देखते ही देखते उनकी नाव पानी से भर गई। नाविक ने प्राध्यापक से घबराहट के साथ पूछा - महाशय! क्या आप तैरना जानते हैं?
BASIC SHIKSHA SOLUTION • UP BOARD CLASS 8 SANSKRIT SOLUTION
4. व्यावहारिक ज्ञान का महत्व
प्राध्यापकः नौकां जलपूरितां दृष्ट्वा भीतोऽवदत् - अहं तर्तुं न जानामि।
नाविकः अवोचत् - यदि तर्तुं न जानाति, तदा भवतः सर्वं जीवनं वृथा जातम्। अहं तु बाहुभ्यां नदं तीत्र्वा पारं प्रयामि। किन्तु यदि भवान् अन्यथा न मन्यते, अहं भवन्तं स्वपृष्ठमारोप्य पारगन्तुमिच्छामि।
हिंदी अनुवाद: प्राध्यापक: नाव को पानी से भरी देखकर डरे हुए बोले - मैं तैरना नहीं जानता।
नाविक: बोला - यदि तैरना नहीं जानते, तो आपका सारा जीवन (100%) व्यर्थ हो गया। मैं तो भुजाओं से नदी तैरकर पार जाता हूँ। किन्तु यदि आप बुरा न मानें, तो मैं आपको अपनी पीठ पर बैठाकर पार ले जाना चाहता हूँ।
BASIC SHIKSHA SOLUTION • UP BOARD CLASS 8 SANSKRIT SOLUTION
1. उच्चारणं कुरुत पुस्तकायां च लिखत-
(क) आरूढः - आ-रू-ढः (ख) जलावर्तनम् - ज-ला-व-र्त-न-म् (ग) चतुर्थांशः - च-तु-र्थां-शः (घ) व्यर्थताम् - व्य-र्थ-ताम् (ङ) तीर्त्वा - ती-र्त्वा (च) अरत्रयुग्मेन - अ-र-त्र-यु-ग्मे-न
BASIC SHIKSHA SOLUTION • UP BOARD CLASS 8 SANSKRIT SOLUTION
2. एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दें)
प्रश्न (Question) उत्तर (Answer)
(क) कः विहर्तुं नावम् आरूढः?
(घूमने के लिए नाव पर कौन चढ़ा?)
प्राध्यापकः
(ख) नौकायाः अग्रेसारणं केन माध्यमेन भवति?
(नौका का आगे बढ़ना किसके माध्यम से होता है?)
अरित्रमाध्यमेन
(पतवार से)
(ग) कः ग्लानिम् अन्वभवत्?
(ग्लानि का अनुभव किसने किया?)
नाविकः
(घ) जलेन पूरिता का जाता?
(जल से कौन भर गई?)
नौका
BASIC SHIKSHA SOLUTION • UP BOARD CLASS 8 SANSKRIT SOLUTION
3. कः कथयति इति लिखत (किसने कहा?)
कथन (Statement) वक्ता (Speaker)
(क) भवता कदापि गणितं पठितम्?
(क्या आपने कभी गणित पढ़ा है?)
प्राध्यापकः
(ख) ईदृशं मे भाग्यं कुतः?
(मेरा ऐसा भाग्य कहाँ?)
नाविकः
(ग) त्वया अर्धांशः जीवनस्य व्यर्थतां नीतः।
(तुमने जीवन का आधा भाग व्यर्थ कर दिया।)
प्राध्यापकः
(घ) अहं तर्तुं न जानामि।
(मैं तैरना नहीं जानता।)
प्राध्यापकः
(ङ) यदि तर्तुं न जानाति, तदा भवतः सर्वं जीवनं वृथा जातम्।
(यदि तैरना नहीं जानते, तो आपका सारा जीवन व्यर्थ है।)
नाविकः
BASIC SHIKSHA SOLUTION • UP BOARD CLASS 8 SANSKRIT SOLUTION
4. & 5. पदरचनां कुरुत (शब्द निर्माण)
धातु + प्रत्यय पद (Word) अर्थ (Meaning)
चल् + तुमुन्चलितुम्चलने के लिए
हस् + तुमुन्हसितुम्हँसने के लिए
क्रीड् + तुमुन्क्रीडितुम्खेलने के लिए
पठ् + तुमुन्पठितुम्पढ़ने के लिए
नी + त्वानीत्वाले जाकर
गम् + त्वागत्वाजाकर
लिख् + त्वालिखित्वालिखकर
BASIC SHIKSHA SOLUTION • UP BOARD CLASS 8 SANSKRIT SOLUTION
6. हिन्दीभाषायाम् अनुवादं कुरुत
(क) किं त्वया संस्कृत-भाषा पठिता?
अनुवाद: क्या तुमने संस्कृत भाषा पढ़ी है?
(ख) जीवनस्य त्रयो भागाः अपार्थाः।
अनुवाद: जीवन के तीन भाग व्यर्थ हो गए।
(ग) प्राध्यापकः नावम् आरूढः।
अनुवाद: प्राध्यापक नाव पर चढ़ा।
(घ) भवान् खलु जलमध्ये विहरतु।
अनुवाद: आप निश्चय ही जल के बीच में विहार (घूमें) करें।
BASIC SHIKSHA SOLUTION • UP BOARD CLASS 8 SANSKRIT SOLUTION
7. संस्कृतभाषायाम् अनुवादं कुरुत
(क) वह पढ़ने के लिए आता है।
अनुवाद: सः पठितुम् आगच्छति।
(ख) क्या तुम सब तैरना जानते हो?
अनुवाद: किं यूयं तर्तुं जानीथ?
(ग) क्या तुम प्रतिदिन खेलते हो?
अनुवाद: किं त्वं प्रतिदिनं क्रीडसि?
(घ) हम दोनों घूमने के लिए नदी के किनारे जाते हैं।
अनुवाद: आवां भ्रमितुं (विहर्तुं) नदीतटं गच्छावः।
BASIC SHIKSHA SOLUTION • UP BOARD CLASS 8 SANSKRIT SOLUTION
शिक्षण-सङ्केतः (Teaching Hint):
1. पाठस्य कथानकं छात्रैः लघुसमूहेषु समयं निश्चितं कृत्वा लेखयत।
(पाठ की कहानी को छात्रों द्वारा छोटे समूहों में समय निश्चित करके लिखवाएं।)

2. कर्मवाच्ये कर्मणः लिङ्गानुसारं कृदन्त-क्रियापदानां लिङ्गस्य परिवर्तनं बोधयत।
(कर्मवाच्य में कर्म के लिंग के अनुसार कृदन्त क्रियापदों के लिंग परिवर्तन का ज्ञान कराएं।)
BASIC SHIKSHA SOLUTION
स्मरणीयम् : (याद रखें - सुरक्षा नियम)
गच्छति शकटे मा आरोहेः।
चलती गाड़ी में मत चढ़ो।
चलतः शकटात् मा अवरोहेः।
चलती गाड़ी से मत उतरो।
दुष्टैः पुरुषैः सह मा गच्छेः।
दुष्ट लोगों के साथ मत जाओ।
कृत्वा कर्म झटिति आगच्छेः।
काम करके जल्दी आ जाओ।

सहसा विदधीत न क्रियाम् !

अर्थ: अचानक (बिना सोचे-समझे) कोई कार्य नहीं करना चाहिए।

भाव यह है कि किसी भी काम को करने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार कर लेना चाहिए, जल्दबाजी में किया गया कार्य नुकसानदेह हो सकता है।


📘 कक्षा 8 संस्कृत – अन्य महत्वपूर्ण पाठ

BASIC SHIKSHA SOLUTION • UP BOARD CLASS 8 SANSKRIT SOLUTION
© 2026 Basic Shiksha Solution | विद्या ददाति विनयं

Comments

Popular posts from this blog

UP Board Enrollment Form Tool 2026-27 | छात्र नवीन नामांकन फॉर्म PDF Generator

Primary Master Time Table Generator 2026-27 | Class 1-5 Time Table Tool UP Board

UP Board General Enrollment Form Tool 2026-27 (कुल छात्र संख्या विवरण) – Online Fill & Print PDF

UP Board Master Time Table Generator Tool 2026 | Editable School Time Table PDF Download

UP Basic Shiksha Parishad Admission Form 2026-27 Online Fill | Download Blank PDF | Class 1 to 8 Form

जनगणना 2027 प्रगणक के कर्तव्य | Census Enumerator Duties Hindi | HLO Guide

UP Basic Shiksha Holiday List 2026 Generator | School Name Wise Holiday List Print (Hindi)

eHRMS Leave Application Generator 2026 | मानव संपदा अवकाश प्रार्थना पत्र PDF डाउनलोड

Class 6 Hindi Chapter 2 Solution | अपना स्थान स्वयं बनाइए

MDM Monthly Calculator (School Wise) | Mid Day Meal Calculation Tool