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UP Board Class 7 Sanskrit Chapter 3 - अभिलाषः | कक्षा 7 संस्कृत पाठ 3 अभिलाषः – संपूर्ण समाधान |

UP Board Class 7 Sanskrit Chapter 3 Solution - Basic Shiksha Solution
★ Basic Shiksha Solution ★

तृतीयः पाठः : अभिलाषः

(कक्षा 7 संस्कृत पीयूषम् - हिंदी अनुवाद एवं भावार्थ)

Up Board Class 7 Sanskrit Solution
दयामय! देव! दीनेषु दयाद्रष्टि: सदा देया।
प्रतिज्ञा दीनरक्षायै दयालो! जातु नो हेया॥

हिंदी अनुवाद: हे दयामय देव! दीन-दुखियों पर सदा दयादृष्टि बनाए रखें । हे दयालु! दीनों की रक्षा के लिए जो आपकी प्रतिज्ञा (प्रण) है, उसे कभी नहीं छोडें ।

भावार्थ: हे ईश्वर! आप करुणा के सागर हैं। हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि गरीबों और असहायों पर आपकी कृपा-दृष्टि हमेशा बनी रहे। आप दीनों के रक्षक हैं, इसलिए अपनी उस 'दीन-रक्षा' की प्रतिज्ञा को कभी न त्यागें। अर्थात, सदा हम असहायों की रक्षा करें।
मनुष्या मानवाः भूत्वा इदानीं दानवाः जाताः।
तदेषा मूढता देशाद् द्रुतं दूरे त्वया नेया॥

हिंदी अनुवाद: मनुष्य, मानव होकर भी अब दानव (राक्षस) हो गए हैं। इसलिए (हे ईश्वर!), यह अज्ञानता (मूर्खता) देश से शीघ्र ही आपके द्वारा दूर कर दी जानी चाहिए।

भावार्थ: आज के समय में मनुष्य अपनी इंसानियत खोकर राक्षसों जैसा व्यवहार कर रहा है। चारों ओर हिंसा और स्वार्थ का बोलबाला है। हे प्रभु! इस अज्ञानता और क्रूरता को हमारे देश से दूर करें, ताकि मनुष्य फिर से 'सच्चा इंसान' बन सके और समाज में प्रेम और भाईचारा स्थापित हो। हे प्रभु! इस अज्ञानता को आप ही दूर कर सकते हैं। प्रार्थना है कि आप हमारे देश से इस कुबुद्धि को शीघ्र दूर करें ताकि मानवता पुनः स्थापित हो सके।
त्वदुपदेशामृतं त्यक्त्वा विपन्नो हन्त लोकोऽयम्।
तदुद्धाराय चैतेषां प्रभो! गीता पुनर्गेया॥

हिंदी अनुवाद: हाय (खेद है)! आपके उपदेश रूपी अमृत को त्यागकर यह संसार दुखी (विपत्तिग्रस्त) हो गया है। अतः इनके उद्धार के लिए, हे प्रभु! गीता पुनः गाई जानी चाहिए (गीता का ज्ञान फिर से दिया जाना चाहिए)।

भावार्थ: हे भगवन्! आज का संसार आपके दिखाए गए धर्म के मार्ग से भटक गया है। लोग 'श्रीमद्भगवद्गीता' के अमृत समान ज्ञान को भूलकर दुखों के सागर में डूब रहे हैं। अब समय आ गया है कि इस संसार के कल्याण के लिए गीता का ज्ञान फिर से घर-घर में गूंजे, ताकि भटके हुए लोगों को सही राह मिल सके।
किमधिकं ब्रूमहे भगवन्! विनीतप्रार्थनैकेयम्।
यदेते बालकाः स्वीयाः प्रभो नो विस्मृति नेयाः॥

हिंदी अनुवाद: हे भगवन्! हम और अधिक क्या कहें? बस यह एक ही विनम्र प्रार्थना है कि हे प्रभु! अपने इन बालकों को आप विस्मृति में न ले जाएं (अर्थात हमें न भुलाएं)।

भावार्थ: परमपिता परमेश्वर! हम अबोध बालक आपकी महिमा का बखान शब्दों में नहीं कर सकते। हमारी बस इतनी सी विनती है कि हम चाहे सुख में हों या दुख में, हमारा मन हमेशा आपके चरणों में लगा रहे। हम आपको कभी न भूलें, क्योंकि हम आपकी ही संतान हैं। अपना आशीर्वाद हम पर सदा बनाए रखना।
Basic Shiksha Solution | Word Meaning

शब्दार्थ (Word Meanings)

संस्कृत शब्द हिंदी अर्थ
दयाद्रष्टि:कृपापूर्ण भाव
देयादेनी चाहिए
जातुकदाचित् (कभी)
हेयाछोड़ना चाहिए
मूढताअज्ञानता / मूर्खता
नेयाले जानी चाहिए
पुनर्गेयाफिर से गानी चाहिए
Up Board Class 7 Sanskrit Solution
1. उच्चारणं कुरुत पुस्तिकायां च लिखत
(नोट: छात्र इन कठिन शब्दों का स्वयं उच्चारण करें और लिखें: दीनरक्षायै, त्यक्त्वा, लोकोऽयम्, पुनर्गेया, तस्योद्धाराय)
Basic Shiksha Solution | Exercise

एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दें)

प्रश्न उत्तर
(क) दीनेषु का देया? दयाद्रष्टि:
(ख) कस्याः प्रतिज्ञा न हेया? दीनरक्षाया
(ग) मूढता कस्मात् दूरे नेया? देशात्
(घ) मानवानाम् उद्धाराय पुनः का गेया? गीता
Up Board Class 7 Sanskrit Solution

पाठात् उचितपदानि चित्वा वाक्यं पूरयत (रिक्त स्थान भरें)

वाक्य (Sentence)
(क) दीनरक्षायै दयाः जातु नो हेया।
(ख) मूढता देशात् द्रुतं दूरे त्वया नेया।
(ग) तस्य उद्धाराय गीता पुनः गेया।
(घ) यदेते बालकाः स्वीया: प्रभो: नो विस्मृति नेयाः।
Basic Shiksha Solution

रेखांकितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत

साधारण वाक्य प्रश्न निर्माण
(क) दीनेषु दया द्रष्टि : सदा देया । दीनेषुकासदा देया ?
(ख) मूढता देशात् तं तं व्यया नेया। का देशात् तं तं व्यया नेया?
(ग) गीता पुनर्गेया। का पुनर्गेया?
Up Board Class 7 Sanskrit Solution

संधि-विच्छेद (उदाहरणानुसारं लिखत)

समस्त पद संधि विच्छेद
त्वदुपदेशामृतंत्वत् + उपदेश + अमृतम्
किमधिकंकिम् + अधिकम्
यदेतेयत् + एते
चैतेषांच + एतेषाम्
पुनर्गेयापुनः + गेया
💡 व्याकरण-संकेत: धातु के साथ 'यत्' प्रत्यय लगाकर "चाहिए" अर्थ व्यक्त होता है।
(जैसे: दा + यत् = देयम्, गै + यत् = गेयम्)
Basic Shiksha Solution | Translation

संस्कृत अनुवाद (Sanskrit Translation)

हिंदी वाक्य संस्कृत अनुवाद
(क) मेरी यह विनम्र प्रार्थना है।मम एष विनीतप्रार्थना अस्ति।
(ख) देश से गरीबी दूर करो।देशात् दारिद्र्यं दूरं कुरुत।
(ग) कल्याण के लिए शिक्षा दो।कल्याणाय शिक्षां ददातु।
(घ) स्वास्थ्य के लिए व्यसन दूर करो।आरोग्याय व्यसनं दूरं कुरुत।
Up Board Class 7 Sanskrit Solution

आम (हाँ) / न (नहीं)

कथन उत्तर
(क) दीनेषु दयाः देया। आम (हाँ)
(ख) दीनरक्षायै ताः हेया। न (नहीं)
(ग) सत्यं दानं धर्मवानं कुर्यात्। आम (हाँ)
(घ) सुंदरं लेखं न लिखेत्। न (नहीं)
मत्कुण-पिपीलिका-संवादः (खटमल और चींटी की बातचीत)
Basic Shiksha Solution

संस्कृत शिक्षण (कक्षा 6)

मत्कुण-पिपीलिका-संवादः

(खटमल और चींटी की बातचीत)

1. व्याकरण भाग: 'यत्' प्रत्यय का प्रयोग

प्रिय विद्यार्थियों, पाठ को समझने से पहले हमें 'यत्' प्रत्यय को समझना आवश्यक है।

नियम: धातु (क्रिया) के साथ 'यत्' प्रत्यय जुड़ने पर उसका अर्थ 'चाहिए' या 'योग्य' हो जाता है।

उदाहरण देखें:

धातु + प्रत्यय रूप (संस्कृत) हिंदी अर्थ
दा + यत् देयम् देना चाहिए (देने योग्य)
नी + यत् नेयम् ले जाना चाहिए
हा + यत् हेयम् छोड़ देना चाहिए (त्यागने योग्य)
गै + यत् गेयम् गाना चाहिए (गाने योग्य)

2. मत्कुण-पिपीलिका-संवादः (हिंदी अनुवाद)

यह पाठ एक खटमल (मत्कुण) और चींटी (पिपीलिका) के बीच की रोचक बातचीत है। खटमल आलसी है, जबकि चींटी बहुत परिश्रमी है।

🪲 मत्कुणः उवाच (खटमल बोला):

"कथय भगिनि! किं तव अभिधानम् ? कृत्वा स्वयं श्रमं भोक्तव्यम्
कुत्र तव वास-स्थानम् ? इति मे अस्ति निजं मन्तव्यम्।
कुतः सम्प्रति आगच्छसि ? अतः श्रमे सततं संलग्ना
त्वरितं कुत्र गच्छसि ? नैव कदापि गतिर्मे भग्ना ।।"

हिंदी भावार्थ:
खटमल चींटी से पूछता है - "कहो बहन! तुम्हारा नाम क्या है? तुम स्वयं मेहनत करके भोजन करती हो। तुम्हारा निवास स्थान (घर) कहाँ है? यह मेरा अपना विचार/प्रश्न है।

तुम अभी कहाँ से आ रही हो? तुम तो लगातार मेहनत में लगी रहती हो। इतनी जल्दी में तुम कहाँ जा रही हो? मैंने कभी भी तुम्हारी गति (रफ्तार) को टूटते या रुकते नहीं देखा।"
🪲 (खटमल आगे कहता है):

"अङ्गं तव अतिशय-सुकुमारम् त्वं सदैव पर-तल्पे लीनः
वहसि तथापि अहो! गुरु-भारम्। पीत्वा पर-रुधिरं खलु पीनः।
धावन्ती गच्छसि अविरामम् किन्तु इदं न उचित-कर्तव्यम्
कथय कदा कुरुषे विश्रामम् ? न इदं वेद-शास्त्र-मन्तव्यम् ।।"

हिंदी भावार्थ:
खटमल आश्चर्य और तुलना करते हुए कहता है - "तुम्हारा शरीर कितना अत्यंत कोमल है, (फिर भी) तुम भारी बोझ उठाती हो! (इधर देखो) मैं दूसरों के बिस्तरों पर पड़ा रहता हूँ और दूसरों का खून पीकर कितना मोटा-ताजा हूँ।

तुम बिना रुके दौड़ती हुई जाती हो, लेकिन इतना अधिक काम करना उचित कर्तव्य नहीं है। बताओ, तुम आराम कब करती हो? यह तो वेद-शास्त्रों के अनुसार भी सही नहीं है (कि जीव आराम ही न करे)।"
🐜 पिपीलिका उवाच (चींटी बोली):

"मम पिपीलिका इति अभिधानम् अतः श्रमं कृत्वा भोक्तव्यम्
विवरे विद्धि मदीयं स्थानम्। इति भवताऽपि मतं मन्तव्यम्।
अति दूरादिह मम आगमनम् अस्तु, जहीहि, देहि पन्थानम्
दूरे एव पुनर्मम गमनम्।। दूरे मम गन्तव्य-स्थानम् ।।"

हिंदी भावार्थ:
चींटी स्वाभिमान से उत्तर देती है - "मेरा नाम 'पिपीलिका' (चींटी) है, इसलिए मुझे मेहनत करके ही भोजन करना चाहिए (यह मेरा धर्म है)।

तुम बिलों/छेदों में मेरा घर जानो। तुम्हें भी ऐसा ही मानना चाहिए (अर्थात मेहनत करनी चाहिए)। मैं बहुत दूर से यहाँ आई हूँ। ठीक है, अब तुम हट जाओ (छोड़ो), मुझे रास्ता दो। मुझे फिर से बहुत दूर जाना है, क्योंकि मेरी मंजिल (गंतव्य स्थान) अभी दूर है।"

3. शब्दार्थ (Word Meanings)

  • मत्कुणः = खटमल (Bedbug)
  • पिपीलिका = चींटी (Ant)
  • अभिधानम् = नाम (Name)
  • विवरे = बिल में (In the hole)
  • विद्धि = जानो (Know it)
  • पर-तल्पे = दूसरे के बिस्तर पर (On other's bed)
  • जहीहि = छोड़ो / रास्ता दो (Leave/Give way)
  • पीनः = मोटा / हष्ट-पुष्ट (Fat/Healthy)
  • रुधिरं = खून (Blood)

शिक्षा (Moral)

"क्रियासिद्धिः सत्त्वे भवति महतां नोपकरणे।"

अर्थ: महान लोगों की सफलता (कार्य की सिद्धि) उनके पराक्रम और साहस (सत्त्व) में होती है, साधनों या उपकरणों में नहीं।

जैसे छोटी सी चींटी बिना किसी साधन के अपनी मेहनत से अपना लक्ष्य प्राप्त करती है, जबकि खटमल दूसरों पर निर्भर रहता है।

महत्वपूर्ण शब्दावली (Flashcards)

दीनेषु गरीबों पर
त्यक्त्वा छोड़कर
इदानीं इस समय
बालकाः बच्चे
देशात् देश से

📘 संबंधित संस्कृत अध्ययन सामग्री

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