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UP Board Class 6 Science Chapter 6 – जीव जगत | सम्पूर्ण समाधान | कक्षा 6 विज्ञान

UP Board Class 6 Science | पाठ 6 — जीव जगत Solution | Basic Shiksha Solution

UP Board Class 6 Science Chapter 6 जीव जगत Solution

BASIC SHIKSHA SOLUTION ● UPBOARD CLASS 6 SCIENCE SOLUTION
📖 पाठ का संक्षिप्त परिचय:

UP Board Class 6 Science Chapter 6 जीव जगत एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है जिसमें सजीवों के लक्षण, सजीव एवं निर्जीव में अन्तर, कोशिका एवं सूक्ष्मजीवों का सामान्य परिचय, सजीवों का वर्गीकरण तथा पौधों के विभिन्न भागों की संरचना एवं कार्य का विस्तार से वर्णन किया गया है। इस पोस्ट में UP Board Class 6 Science Chapter 6 Solution के अंतर्गत बहुविकल्पीय प्रश्न, सही-गलत, रिक्त स्थान, मिलान तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में दिए गए हैं।

UP Board Class 6 Science Chapter 6 जीव जगत Solution:
यहाँ "जीव जगत" पाठ के सभी प्रश्न-उत्तर, सजीव-निर्जीव में अन्तर, जन्तु एवं पौधों का वर्गीकरण, जड़-तना-पत्ती-पुष्प के कार्य तथा अंगों के रूपान्तरण सरल एवं परीक्षा उपयोगी रूप में दिए गए हैं।
BASIC SHIKSHA SOLUTION ● UPBOARD CLASS 6 SCIENCE SOLUTION
Basic Shiksha Solution ● बहुविकल्पीय प्रश्न
🎯 प्रश्न 1 — सही विकल्प छाँटकर अपनी अभ्यास पुस्तिका में लिखिए
(क) एक कोशकीय जीव है —
(i) मनुष्य
(ii) केंचुआ
(iii) यूग्लीना
(iv) छिपकली
उत्तर: (iii) यूग्लीना
💡 व्याख्या: यूग्लीना एक एककोशकीय (Unicellular) जीव है जो नम जलीय वातावरण में पाया जाता है। इसे नंगी आँखों से नहीं देखा जा सकता, इसलिए इसे सूक्ष्मदर्शी से देखते हैं। मनुष्य, केंचुआ और छिपकली सभी बहुकोशकीय (Multicellular) जीव हैं — इनका शरीर अनेक कोशिकाओं से मिलकर बना होता है।
📌 एककोशकीय जीव याद रखें: अमीबा, पैरामीशियम, यूग्लीना, जीवाणु, यीस्ट। ये सभी सूक्ष्मदर्शी से दिखाई देते हैं।
(ख) मेरुदण्ड पायी जाती है —
(i) केंचुआ में
(ii) जोंक में
(iii) तिलचट्टा में
(iv) मछली में
उत्तर: (iv) मछली में
💡 व्याख्या: मछली एक कशेरुकी (Vertebrate) जन्तु है — इसके शरीर में रीढ़ की हड्डी (मेरुदण्ड) पायी जाती है। केंचुआ, जोंक और तिलचट्टा अकशेरुकी (Invertebrate) जन्तु हैं — इनमें रीढ़ की हड्डी नहीं होती।
📌 कशेरुकी जन्तु: मछली, मेढक, साँप, पक्षी, गाय, मनुष्य। अकशेरुकी: केंचुआ, मकड़ी, कीड़े-मकोड़े, घोंघा।
(ग) अपुष्पी पौधे हैं —
(i) आम
(ii) फर्न
(iii) जामुन
(iv) केला
उत्तर: (ii) फर्न
💡 व्याख्या: फर्न एक अपुष्पी पौधा है — इस पर कभी पुष्प (फूल) नहीं लगते, इसलिए फल भी नहीं बनते। इनमें वंश वृद्धि बीजाणुओं (Spores) द्वारा होती है। आम, जामुन और केला पुष्पी पौधे हैं — इन पर पुष्प और फल लगते हैं। अपुष्पी पौधों में कवक, शैवाल, मॉस और फर्न प्रमुख हैं।
📌 अपुष्पी पौधे याद रखें: कवक (Fungi), शैवाल (Algae), मॉस (Moss), फर्न (Fern)। इन पर फूल कभी नहीं लगते।
(घ) मूलरोम किसमें पाया जाता है ?
(i) तना में
(ii) पत्ती में
(iii) जड़ में
(iv) पुष्प में
उत्तर: (iii) जड़ में
💡 व्याख्या: मूलरोम (Root Hair) जड़ की सतह पर उपस्थित अत्यंत महीन बाल जैसी संरचनाएँ हैं। ये मिट्टी से जल एवं खनिज लवण का अवशोषण करने में सहायता करती हैं। मूलरोम जड़ की सतह क्षेत्र को बढ़ाते हैं जिससे अवशोषण अधिक कुशलता से होता है।
📌 याद रखें: मूलरोम → जड़ में → जल एवं खनिज लवण अवशोषण का कार्य।
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Basic Shiksha Solution ● सही / गलत
✅ प्रश्न 2 — निम्नलिखित कथन को पढ़कर उनके सामने सही (√) तथा गलत (✗) का चिह्न लगाइए
(क) पौधों को भोजन की आवश्यकता होती है।
उत्तर: सही (√)
💡 व्याख्या: पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं — इसीलिए इन्हें स्वपोषी (Autotroph) कहते हैं। ये वायुमण्डल से CO₂ तथा मिट्टी से जल लेकर सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं। इस भोजन को पौधे जड़, तना, पत्ती, फूल, फल आदि में संग्रहित करते हैं।
📌 याद रखें: पौधे भोजन बनाते हैं → स्वपोषी। जन्तु भोजन खाते हैं → परपोषी।
(ख) जन्तुओं में वृद्धि जीवन पर्यन्त होती है।
उत्तर: गलत (✗)
💡 व्याख्या: जन्तुओं में वृद्धि एक निश्चित आयु तक होती है, जीवन पर्यन्त नहीं। एक निश्चित आयु के बाद जन्तु बढ़ना बंद कर देते हैं। इसके विपरीत पेड़-पौधों में वृद्धि जीवन-पर्यन्त होती रहती है।
📌 सुधार: सही कथन — "पेड़-पौधों में वृद्धि जीवन पर्यन्त होती है, जबकि जन्तुओं में वृद्धि एक निश्चित आयु तक होती है।"
(ग) अमीबा बहुकोशकीय जीव है।
उत्तर: गलत (✗)
💡 व्याख्या: अमीबा एककोशकीय (Unicellular) जीव है — इसका सम्पूर्ण शरीर केवल एक ही कोशिका से बना होता है। इसे नंगी आँखों से नहीं देखा जा सकता। यह नम जलीय वातावरण में पाया जाता है।
📌 सुधार: सही कथन — "अमीबा एककोशकीय जीव है।"
(घ) पैरामीशियम एक सूक्ष्म जीव है।
उत्तर: सही (√)
💡 व्याख्या: पैरामीशियम एक एककोशकीय सूक्ष्मजीव है। इसे नंगी आँखों से नहीं देखा जा सकता — देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी (Microscope) की आवश्यकता होती है। यह प्रोटोजोआ वर्ग का जीव है।
(ङ) रन्ध्र गैसों के आदान-प्रदान में सहायक होते हैं।
उत्तर: सही (√)
💡 व्याख्या: रन्ध्र (Stomata) पत्तियों की निचली सतह पर उपस्थित सूक्ष्म छिद्र होते हैं। इनके द्वारा पत्तियाँ श्वसन, वाष्पोत्सर्जन तथा प्रकाश-संश्लेषण जैसे महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। गैसों (O₂ और CO₂) का आदान-प्रदान इन्हीं रन्ध्रों से होता है।
📌 रन्ध्र के कार्य: (1) गैसों का आदान-प्रदान (2) वाष्पोत्सर्जन (3) प्रकाश-संश्लेषण में सहायता।
(च) गेहूँ तथा धान बहुवर्षीय पौधे हैं।
उत्तर: गलत (✗)
💡 व्याख्या: गेहूँ तथा धान एकवर्षीय (Annual) पौधे हैं — ये एक वर्ष के कुछ महीनों में ही अपना जीवन चक्र पूरा करके सूख जाते हैं। बहुवर्षीय पौधे कई वर्षों तक जीवित रहते हैं, जैसे — आम, कटहल, बरगद।
📌 सुधार: गेहूँ तथा धान एकवर्षीय पौधे हैं, बहुवर्षीय नहीं।
(छ) खरगोश अकशेरुकी है।
उत्तर: गलत (✗)
💡 व्याख्या: खरगोश एक कशेरुकी (Vertebrate) स्तनधारी जन्तु है — इसके शरीर में रीढ़ की हड्डी (मेरुदण्ड) पायी जाती है। यह बच्चे देने वाला (जरायुज) जन्तु है।
📌 सुधार: खरगोश कशेरुकी है, अकशेरुकी नहीं।
(ज) सूक्ष्म जीव हमें नंगी आँखों से नहीं दिखाई देते हैं।
उत्तर: सही (√)
💡 व्याख्या: सूक्ष्मजीव (Microorganisms) आकार में अत्यंत छोटे होते हैं, इसलिए इन्हें नंगी आँखों से नहीं देखा जा सकता। इन्हें देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी (Microscope) की आवश्यकता होती है। उदाहरण — अमीबा, पैरामीशियम, यूग्लीना, यीस्ट, जीवाणु।
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Basic Shiksha Solution ● रिक्त स्थान पूर्ति
✍️ प्रश्न 3 — रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) भोजन से हमें कार्य करने के लिए ऊर्जा मिलती है।
💡 व्याख्या: शरीर को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा भोजन से प्राप्त होती है। श्वसन क्रिया में ऑक्सीजन द्वारा भोजन का ऑक्सीकरण होता है जिससे ऊर्जा, जल और CO₂ बनती है।

(ख) सभी जन्तु तथा पौधे श्वसन क्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड गैस बाहर निकालते हैं।
💡 व्याख्या: श्वसन प्रक्रिया में सभी सजीव ऑक्सीजन (O₂) ग्रहण करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस बाहर निकालते हैं। यह प्रक्रिया पौधों और जन्तुओं दोनों में होती है।

(ग) कछुए का जीवनकाल लगभग 120-150 वर्ष होता है।
💡 व्याख्या: कछुआ बहुत लम्बी आयु वाला जन्तु है। इसका जीवनकाल लगभग 120-150 वर्ष तक होता है। सभी जन्तुओं एवं पौधों का निश्चित जीवनकाल होता है।
📊 कुछ जीवों का जीवनकाल: गिलहरी = 25-30 वर्ष | घोड़ा = 30-40 वर्ष | हाथी = 70-90 वर्ष | मनुष्य = 60-70 वर्ष | कछुआ = 120-150 वर्ष | बरगद = 100-200 वर्ष | सिकोया = 3000-4000 वर्ष।

(घ) लाजवन्ती का पौधा स्पर्श के प्रति संवेदनशील है।
💡 व्याख्या: लाजवन्ती (छुई मुई) का पौधा स्पर्श करते ही अपनी पत्तियाँ बंद कर लेता है। यह उद्दीपन (स्पर्श) के प्रति संवेदनशीलता का उदाहरण है। सभी सजीव उद्दीपन के प्रति संवेदनशील होते हैं।

(ङ) अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की क्रिया को उत्सर्जन कहते हैं।
💡 व्याख्या: जैव-क्रियाओं के फलस्वरूप शरीर में अपशिष्ट (Waste) पदार्थ बनते हैं। इन अनावश्यक एवं हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की क्रिया को उत्सर्जन (Excretion) कहते हैं। मल-मूत्र, पसीना और CO₂ जन्तुओं के उत्सर्जी पदार्थ हैं।

(च) पादप में मूलरोम की सहायता से जल एवं खनिज लवण का अवशोषण करते हैं।
💡 व्याख्या: मूलरोम (Root Hair) जड़ की सतह पर उपस्थित महीन धागे जैसी संरचनाएँ हैं जो मिट्टी से जल और खनिज लवण अवशोषित करती हैं। ये जड़ का सतह क्षेत्र बढ़ाकर अवशोषण को अधिक प्रभावी बनाती हैं।
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Basic Shiksha Solution ● मिलान कीजिए
🔗 प्रश्न 4 — स्तम्भ 'क' का स्तम्भ 'ख' से मिलान कीजिए
स्तम्भ (क) स्तम्भ (ख) ✅ उत्तर
क. मेढक अ. अण्डा देने वाले जन्तु ब. उभयचर
ख. स्तम्भ कन्द ब. उभयचर द. आलू
ग. अण्डयुज स. कुम्भी रूप अ. अण्डा देने वाले जन्तु
घ. शलजम द. आलू स. कुम्भी रूप
ङ. जनन य. हानिकारक पदार्थ का शरीर से बाहर निकलना ल. अण्डे / बच्चे देना
च. उत्सर्जन र. धमाके को सुनकर चौंक जाना य. हानिकारक पदार्थ का शरीर से बाहर निकलना
छ. संवेदनशीलता ल. अण्डे / बच्चे देना र. धमाके को सुनकर चौंक जाना
💡 मिलान का सारांश: मेढक → उभयचर (जल और थल दोनों पर रहता है) | स्तम्भ कन्द → आलू (भूमिगत तने का रूपान्तरण) | अण्डयुज → अण्डा देने वाले जन्तु | शलजम → कुम्भी रूप (घड़े जैसी जड़) | जनन → अण्डे/बच्चे देना | उत्सर्जन → हानिकारक पदार्थ बाहर निकालना | संवेदनशीलता → उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया (धमाका सुनकर चौंकना)।
📌 मेढक उभयचर क्यों? पानी में रहने पर त्वचा द्वारा तथा जमीन पर रहने पर फेफड़ों द्वारा श्वसन करता है — इसीलिए उभयचर।
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Basic Shiksha Solution ● दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
📝 प्रश्न 5 — मक्का, प्याज, सरसों तथा बैंगन में पायी जाने वाली जड़ के नाम लिखिए।
उत्तर:
पौधा जड़ का प्रकार विशेषता
मक्का अपस्थानिक जड़ (Adventitious Root) एक ही स्थान से अनेक शाखाएँ — गुच्छे के रूप में।
प्याज अपस्थानिक जड़ (Adventitious Root) एक ही स्थान से गुच्छे में निकलती हैं।
सरसों मूसला जड़ (Tap Root) एक मोटी मुख्य जड़, जिससे पतली शाखाएँ निकलती हैं।
बैंगन मूसला जड़ (Tap Root) एक मोटी प्राथमिक जड़ से शाखाएँ।
💡 व्याख्या: जड़ें मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं — (1) मूसला जड़ — एक मोटी प्राथमिक जड़ जिससे अनेक पतली शाखाएँ निकलती हैं। उदाहरण: सरसों, बैंगन, चना, मटर, आम। (2) अपस्थानिक जड़ — एक ही स्थान से अनेक समान शाखाएँ गुच्छे के रूप में निकलती हैं। उदाहरण: मक्का, प्याज, गेहूँ, घास।
📌 परीक्षा ट्रिक: दलहनी व द्विबीजपत्री पौधों में मूसला जड़ | घास, अनाज, एकबीजपत्री पौधों में अपस्थानिक जड़।
📝 प्रश्न 6 — मूसला जड़ तन्त्र का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
मूसला जड़ तन्त्र का नामांकित चित्र
                    ─── तना ───
                         │
              ┌──────────┴──────────┐
              │    प्राथमिक जड़      │
              │         │           │
         ┌────┴───┐  ┌──┴────┐  ┌──┴────┐
         │द्वितीयक│  │द्वितीयक│  │द्वितीयक│
         │  जड़   │  │  जड़   │  │  जड़   │
         └────────┘  └───────┘  └───────┘
              │           │          │
           तृतीयक       तृतीयक    तृतीयक
            जड़            जड़        जड़
        
💡 मूसला जड़ तन्त्र के भाग:
  • प्राथमिक जड़ (Primary Root) — बीज से सीधे विकसित होने वाली मोटी मुख्य जड़।
  • द्वितीयक जड़ (Secondary Root) — प्राथमिक जड़ से निकलने वाली पतली शाखाएँ।
  • तृतीयक जड़ (Tertiary Root) — द्वितीयक जड़ से निकलने वाली और भी पतली शाखाएँ।
  • मूलरोम (Root Hairs) — जड़ की सतह पर महीन बाल जैसी संरचनाएँ जो जल व खनिज अवशोषित करती हैं।
📌 मूसला जड़ वाले पौधे: चना, मटर, सरसों, बैंगन, टमाटर, आम, नीम।
📝 प्रश्न 7 — कोई तीन पौधों के नाम लिखिए जिनमें जड़, तना तथा पत्ती नहीं पायी जाती है।
उत्तर:

ऐसे पौधे जिनमें जड़, तना तथा पत्ती नहीं पायी जाती, अपुष्पी पौधे कहलाते हैं। इनके तीन उदाहरण हैं —

  • कवक (Fungi) — जैसे मशरूम, ब्रेड पर उगने वाली फफूँद। इनमें जड़, तना, पत्ती नहीं होती।
  • शैवाल (Algae) — जैसे क्लेमाइडोमोनास, स्पाइरोगाइरा। ये जलीय अपुष्पी पौधे हैं।
  • मॉस (Moss) — वर्षा ऋतु में दीवारों पर हरी मखमल के रूप में उगता है। इसमें जड़, तना, पत्ती सुस्पष्ट नहीं होती।
💡 व्याख्या: ये सभी अपुष्पी पौधे हैं जिन पर फूल नहीं लगते। इनमें वंश वृद्धि बीजाणुओं (Spores) द्वारा होती है। इनमें जड़, तना एवं पत्ती का स्पष्ट विभाजन नहीं होता।
📌 याद रखें: फर्न भी अपुष्पी पौधा है — परन्तु इसमें पत्ती जैसी संरचना (Frond) होती है।
📝 प्रश्न 8 — कोई दो बहुवर्षीय पौधों के नाम लिखिए।
उत्तर:

बहुवर्षीय पौधे (Perennial Plants) वे पौधे हैं जो कई वर्षों तक जीवित रहते हैं और इनके सम्पूर्ण जीवनकाल में फूल-फल लगते रहते हैं।

  • आम (Mango) — यह एक बहुवर्षीय वृक्ष है जो दशकों तक जीवित रहता है और प्रत्येक वर्ष फलता है।
  • बरगद (Banyan Tree) — यह सैकड़ों वर्षों तक जीवित रहने वाला बहुवर्षीय वृक्ष है।
💡 पौधों को आयु के आधार पर वर्गीकरण:
एकवर्षीय (Annual) — जैसे गेहूँ, धान, चना, मटर (एक वर्ष में जीवन-चक्र पूरा)।
द्विवर्षीय (Biennial) — जैसे केला (दो वर्ष में जीवन-चक्र पूरा)।
बहुवर्षीय (Perennial) — जैसे आम, कटहल, गुलाब, दूबघास (कई वर्षों तक जीवित)।
📌 बहुवर्षीय पौधों के और उदाहरण: गुलाब, कटहल, नीम, दूबघास, पीपल।
📝 प्रश्न 9 — शाक, झाड़ी तथा वृक्ष के पाँच-पाँच उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
प्रकार विशेषता पाँच उदाहरण
शाक (Herb) छोटे, कोमल तने वाले पौधे। तना हरा व रसदार। धनिया, पालक, मेथी, सरसों, मक्का
झाड़ी (Shrub) मध्यम आकार, तना कठोर परन्तु पतला, शाखाएँ जमीन के पास से। गुलाब, मेहँदी, जासमीन, बेर, तुलसी
वृक्ष (Tree) बड़े, मोटे तने वाले। शाखाएँ ऊँचाई पर। कई वर्षों तक जीवित। आम, नीम, पीपल, बरगद, शीशम
💡 व्याख्या: पौधों को आकार के आधार पर तीन भागों में बाँटा गया है। शाक सबसे छोटे होते हैं और इनके तने हरे व कोमल होते हैं। झाड़ियों का तना कठोर परन्तु पतला होता है और शाखाएँ नीचे से निकलती हैं। वृक्षों का तना मोटा व लकड़ीदार होता है और शाखाएँ ऊँचाई पर होती हैं।
📝 प्रश्न 10 — शाकाहारी, माँसाहारी तथा सर्वाहारी जन्तुओं के पाँच-पाँच नाम लिखिए।
उत्तर:
प्रकार भोजन का स्रोत पाँच उदाहरण
शाकाहारी (Herbivore) केवल पेड़-पौधे, घास, पत्तियाँ, फल। गाय, भैंस, बकरी, हिरन, खरगोश
माँसाहारी (Carnivore) केवल अन्य जन्तुओं का माँस। शेर, चीता, बाघ, लोमड़ी, मगरमच्छ
सर्वाहारी (Omnivore) पेड़-पौधे एवं अन्य जन्तु — दोनों। मनुष्य, कौआ, कॉकरोच, भालू, सूअर
💡 व्याख्या: जो जन्तु अपना भोजन केवल पेड़-पौधों से प्राप्त करते हैं उन्हें शाकाहारी कहते हैं। जो जन्तु शाकाहारी जन्तुओं को खाते हैं उन्हें माँसाहारी कहते हैं। जो जन्तु दोनों स्रोतों से भोजन ग्रहण करते हैं उन्हें सर्वाहारी कहते हैं।
📌 आहार श्रृंखला: सूर्य → पौधे (उत्पादक) → शाकाहारी (प्राथमिक उपभोक्ता) → माँसाहारी (द्वितीयक उपभोक्ता)।
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❓ FAQs — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: सजीव के कितने लक्षण होते हैं?
उत्तर: सजीवों में छः मुख्य लक्षण होते हैं — पोषण, श्वसन, उत्सर्जन, वृद्धि, संवेदनशीलता और प्रजनन।

प्रश्न: कोशिका किसे कहते हैं?
उत्तर: शरीर की संरचनात्मक तथा क्रियात्मक इकाई को कोशिका कहते हैं। प्रत्येक जीवित कोशिका में सभी जैव-क्रियाएँ अनवरत होती रहती हैं।

प्रश्न: मूसला जड़ और अपस्थानिक जड़ में क्या अन्तर है?
उत्तर: मूसला जड़ में एक मोटी प्राथमिक जड़ होती है जिससे शाखाएँ निकलती हैं (जैसे सरसों)। अपस्थानिक जड़ में एक ही स्थान से अनेक समान जड़ें गुच्छे के रूप में निकलती हैं (जैसे मक्का, प्याज)।

प्रश्न: UP Board Class 6 Science Chapter 6 Solution कहाँ मिलेगा?
उत्तर: Basic Shiksha Solution वेबसाइट पर इस अध्याय का सम्पूर्ण समाधान सरल हिन्दी में उपलब्ध है।
🔎 निष्कर्ष
निष्कर्ष: इस प्रकार UP Board Class 6 Science Chapter 6 जीव जगत Solution में हमने सजीवों के लक्षण, सजीव-निर्जीव में अन्तर, कोशिका का परिचय, जन्तुओं एवं पौधों का वर्गीकरण, पौधों के भागों की संरचना एवं कार्य तथा अंगों के रूपान्तरण को विस्तार से समझा। यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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📚 अन्य अध्याय देखें — Class 6 Science
  • 👉 UP Board Class 6 Science All Chapters Solution
  • 👉 UP Board Class 6 Science Chapter 5 Solution
  • 👉 UP Board Class 6 Science Chapter 7 Solution
  • 👉 UP Board Class 6 Hindi Solution
  • 👉 UP Board Class 6 Sanskrit Solution

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