UP Board Class 6 Science Chapter 8 जन्तु की संरचना व कार्य Solution
BASIC SHIKSHA SOLUTION ● UPBOARD CLASS 6 SCIENCE SOLUTION
📖 पाठ का संक्षिप्त परिचय:
UP Board Class 6 Science Chapter 8 जन्तु की संरचना व कार्य एक अत्यंत महत्वपूर्ण
अध्याय है जिसमें जन्तुओं की बाह्य संरचना, विभिन्न अंगों के कार्य, ज्ञानेन्द्रियाँ,
मानव तथा अन्य जन्तुओं के कंकाल तन्त्र (संधियाँ, उपास्थि) एवं जन्तुओं में गति का
विस्तार से वर्णन है। इस पोस्ट में UP Board Class 6 Science Chapter 8 Solution
के अंतर्गत सभी प्रश्नों के उत्तर सरल, विस्तृत एवं परीक्षा-उपयोगी भाषा में प्रस्तुत किए गए हैं।
UP Board Class 6 Science Chapter 8 Solution:
इस पाठ में पाचन तन्त्र, श्वसन तन्त्र, हृदय, वृक्क, तन्त्रिका तन्त्र, पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ,
कंकाल तन्त्र (अस्थि, संधि, उपास्थि) एवं विभिन्न जन्तुओं में गमन — सभी विषयों का
परीक्षा उपयोगी समाधान यहाँ दिया गया है।
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Basic Shiksha Solution ● बहुविकल्पीय प्रश्न
(क) भोजन का पाचन होता है —
(i) आहारनाल में
(ii) फेफड़े में
(iii) हृदय में
(iv) वृक्क में
✅ उत्तर: (i) आहारनाल में
💡 व्याख्या: भोजन का पाचन आहारनाल (Alimentary Canal) में होता है। आहारनाल में मुखगुहा, ग्रसनी, ग्रासनाल, आमाशय, छोटी आँत, बड़ी आँत, मलाशय तथा गुदा आते हैं। पाचन की शुरुआत मुखगुहा से होती है जहाँ लार भोजन के मण्ड (Starch) को पचाना शुरू करती है, और अंत में छोटी आँत में पचा हुआ भोजन रक्त में अवशोषित होता है। फेफड़े श्वसन के, हृदय रक्त-परिसंचरण के और वृक्क उत्सर्जन के अंग हैं — ये पाचन में भाग नहीं लेते।
📌 पाचन तन्त्र का क्रम: मुख → मुखगुहा → ग्रासनाल → आमाशय → छोटी आँत → बड़ी आँत → मलाशय → गुदा।
(ख) मानव के मस्तिष्क में कितने भाग होते हैं —
(i) दो
(ii) तीन
(iii) चार
(iv) पाँच
✅ उत्तर: (ii) तीन
💡 व्याख्या: मानव मस्तिष्क के मुख्यतः तीन भाग होते हैं — (1) प्रमस्तिष्क (Cerebrum) — सोचने-समझने, स्मृति और स्वैच्छिक क्रियाओं का केन्द्र। (2) अनुमस्तिष्क (Cerebellum) — शरीर का सन्तुलन बनाए रखता है। (3) मेडुला (Medulla Oblongata) — हृदय-स्पन्दन, श्वसन जैसी अनैच्छिक क्रियाओं को नियन्त्रित करता है। ये तीनों मिलकर तन्त्रिका तन्त्र का सर्वोच्च नियन्त्रण केन्द्र बनाते हैं।
📌 मस्तिष्क के तीन भाग: प्रमस्तिष्क (सोचना) + अनुमस्तिष्क (सन्तुलन) + मेडुला (श्वसन/हृदय)।
(ग) श्रवणेन्द्रिय है —
(i) नाक
(ii) आँख
(iii) जीभ
(iv) कान
✅ उत्तर: (iv) कान
💡 व्याख्या: कान को श्रवणेन्द्रिय (Organ of Hearing) कहते हैं क्योंकि इसका मुख्य कार्य ध्वनि सुनना है। इसके साथ ही कान शरीर का सन्तुलन बनाए रखने में भी सहायक होता है। पाँचों ज्ञानेन्द्रियों के नाम इस प्रकार हैं — कान (श्रवणेन्द्रिय), आँख (दृश्येन्द्रिय), नाक (घ्राणेन्द्रिय), जीभ (स्वादेन्द्रिय) और त्वचा (स्पर्शेन्द्रिय)।
📌 पाँचों ज्ञानेन्द्रियाँ एवं उनका कार्य: कान = सुनना | आँख = देखना | नाक = गंध | जीभ = स्वाद | त्वचा = स्पर्श।
(घ) द्विलिंगी जन्तु है —
(i) अमीबा
(ii) केंचुआ
(iii) मेढ़क
(iv) कुत्ता
✅ उत्तर: (ii) केंचुआ
💡 व्याख्या: केंचुआ एक द्विलिंगी (Hermaphrodite/Bisexual) जन्तु है — इसमें नर एवं मादा दोनों जनन अंग एक ही जन्तु में पाए जाते हैं। मेढ़क, कुत्ता एकलिंगी जन्तु हैं (नर और मादा अलग-अलग होते हैं)। अमीबा एककोशकीय है जिसमें अलग से जनन अंग नहीं होते — यह विखण्डन (Binary Fission) द्वारा जनन करता है।
📌 द्विलिंगी जन्तु के उदाहरण: केंचुआ, जोंक, घोंघा, तारामीन — इन सबमें नर व मादा दोनों जनन अंग एक साथ होते हैं।
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Basic Shiksha Solution ● रिक्त स्थान पूर्ति
(क) मनुष्य में कुल 206 हड्डियाँ होती हैं।
💡 व्याख्या: वयस्क मनुष्य के शरीर में कुल 206 अस्थियाँ (Bones) होती हैं जबकि नवजात शिशु में 213 अस्थियाँ होती हैं। बड़े होने पर कुछ अस्थियाँ आपस में जुड़ जाती हैं जिससे संख्या घटकर 206 रह जाती है। ये सभी अस्थियाँ मिलकर शरीर को निश्चित आकार, सुदृढ़ता और सुरक्षा प्रदान करती हैं।
(ख) मनुष्य के हृदय में कुल चार कक्ष होते हैं।
💡 व्याख्या: मनुष्य के हृदय में चार कक्ष (Chambers) होते हैं — बायाँ अलिन्द (Left Atrium), बायाँ निलय (Left Ventricle), दायाँ अलिन्द (Right Atrium) और दायाँ निलय (Right Ventricle)। अलिन्द और निलय एक पट (Septum) द्वारा अलग किए जाते हैं। हृदय बिना रुके जीवन भर शरीर को रुधिर पम्प करता रहता है।
(ग) वयस्क मनुष्य के रीढ़ में कुल 26 हड्डियाँ (कशेरुकाएँ) होती हैं।
💡 व्याख्या: वयस्क मनुष्य की रीढ़ की हड्डी (मेरुदण्ड) में कुल 26 कशेरुकाएँ (Vertebrae) होती हैं जबकि शिशु में 33 होती हैं। ये हड्डियाँ रीढ़-रज्जु की सुरक्षा करती हैं तथा शरीर को सीधा खड़े रहने में सहायता करती हैं। इनको ग्रीवा, वक्षीय, काटि, सेक्रम और अनुत्रिक भागों में विभाजित किया जाता है।
(घ) उपास्थि अस्थि की अपेक्षा लचीली होती है।
💡 व्याख्या: उपास्थि (Cartilage) अस्थि से मुलायम और लचीली होती है। इसे आसानी से मोड़ा जा सकता है। उदाहरण के लिए — कान और नाक की बाहरी संरचना उपास्थि से बनी होती है जिसे हम अनुभव करके मोड़ सकते हैं। अस्थियों (Bones) में भी संधि-स्थानों (Joints) पर उपास्थि पाई जाती है जो घर्षण कम करती है।
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Basic Shiksha Solution ● सही जोड़े बनाइए
| स्तम्भ (क) | स्तम्भ (ख) | ✅ उत्तर |
| क. मेढ़क | अ. श्रवण | ब. पादजाल |
| ख. त्वचा | ब. पादजाल | द. स्पर्श |
| ग. कान | स. उड़ना | अ. श्रवण |
| घ. वृक्क | द. स्पर्श | य. मूत्र |
| ङ. पंख | य. मूत्र | स. उड़ना |
💡 सारांश एवं व्याख्या: मेढ़क के पिछले पैरों में पादजाल (Webbed Feet) होता है जो जल में तैरने में सहायता करता है। त्वचा स्पर्शेन्द्रिय है — ठण्डे-गर्म, कठोर-मुलायम का अनुभव इसी से होता है। कान श्रवणेन्द्रिय है जो ध्वनि ग्रहण करता है। वृक्क रक्त को छानकर यूरिया अलग करता है और उसे मूत्र के रूप में बाहर निकालता है। पंख पक्षियों के अग्रपादों का रूपान्तरण हैं जो उड़ने में सहायता करते हैं।
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Basic Shiksha Solution ● सही / गलत
(क) मछलियों में चलन पंख द्वारा होता है।
✅ उत्तर: सही (✓)
💡 व्याख्या: मछली जल में चलने (तैरने) के लिए पखनों / पंखों (Fins) का उपयोग करती है। ये चपटे पखने जल में धकेलने की शक्ति उत्पन्न करते हैं और दिशा-नियन्त्रण तथा सन्तुलन बनाए रखने में भी सहायक होते हैं। मछली का धारा-रेखित शरीर और पखने मिलकर उसे जल में कुशलतापूर्वक तैरने योग्य बनाते हैं।
(ख) मनुष्य का हृदय बराबर स्पन्दन करता है।
✅ उत्तर: सही (✓)
💡 व्याख्या: मनुष्य का हृदय बिना रुके, जीवन भर एक निश्चित लय में धड़कता रहता है। एक वयस्क का हृदय एक मिनट में लगभग 72 बार धड़कता है। हृदय की यह अनवरत धड़कन ही शरीर के सभी अंगों को रुधिर पहुँचाती है। यदि हृदय एक क्षण के लिए भी रुक जाए तो जीवन समाप्त हो सकता है।
📊 रोचक तथ्य: 1 वर्ष से कम आयु के शिशुओं में हृदय की धड़कन 100 बार/मिनट होती है। आयु बढ़ने के साथ धड़कन धीमी होती जाती है। तापमान, क्रोध, डर और मानसिक चिन्ता से हृदय की धड़कन बढ़ जाती है।
(ग) पुरुषों में एक जोड़ी वृषण पाए जाते हैं।
✅ उत्तर: सही (✓)
💡 व्याख्या: पुरुष (नर) मनुष्य में मुख्य जनन अंग वृषण (Testes) होते हैं जो एक जोड़ी (दो) की संख्या में पाए जाते हैं। इसी प्रकार मादा (स्त्री) में मुख्य जनन अंग अण्डाशय (Ovaries) होते हैं। कुत्ता, बिल्ली, मनुष्य आदि एकलिंगी जन्तु हैं जिनमें नर और मादा जनन अंग अलग-अलग व्यक्तियों में होते हैं।
(घ) मनुष्य में भोजन का पाचन मुख से ही प्रारम्भ हो जाता है।
✅ उत्तर: सही (✓)
💡 व्याख्या: यह पूर्णतः सत्य है। मुखगुहा में उपस्थित लार (Saliva) में एक पाचक एन्जाइम टायलिन (Ptyalin / Salivary Amylase) होता है जो भोजन में उपस्थित मण्ड (Starch) को माल्टोज़ शर्करा में बदलना शुरू कर देता है। इसलिए पाचन की शुरुआत मुख से ही होती है, न कि आमाशय से। दाँत भोजन को चबाकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बदलते हैं जिससे पाचन और आसान हो जाता है।
📌 महत्वपूर्ण: मण्ड का पाचन — मुखगुहा (लार एन्जाइम से) | प्रोटीन का पाचन — आमाशय में (पेप्सिन से) | वसा का पाचन — छोटी आँत में (पित्त रस से)।
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Basic Shiksha Solution ● दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
उत्तर:
मनुष्य का श्वसन तन्त्र (Respiratory System) निम्नलिखित अंगों से मिलकर बना होता है —
🫁 मनुष्य के श्वसन तन्त्र का नामांकित चित्र (रेखाचित्र)
नासिका (Nose)
│
नासामार्ग
│
ग्रसनी (Pharynx)
│
कण्ठ / Larynx
│
श्वासनली (Trachea)
┌────┴────┐
बाईं श्वास- दाईं श्वास-
नलिका नलिका
(Left (Right
Bronchus) Bronchus)
│ │
बायाँ दायाँ
फेफड़ा फेफड़ा
(Left (Right
Lung) Lung)
📌 श्वसन तन्त्र के अंग एवं उनके कार्य
- ➤
नासिका (Nose): वायु को अन्दर खींचती है, बाल व श्लेष्मा धूल-कणों को रोकते हैं और वायु को गर्म करते हैं।
- ➤
कण्ठ / लैरिंक्स (Larynx): यहाँ ध्वनि उत्पन्न होती है — इसीलिए इसे ध्वनि-यन्त्र भी कहते हैं।
- ➤
श्वासनली (Trachea): वायु को फेफड़ों तक ले जाने का मार्ग। इसमें C आकार के उपास्थि के छल्ले होते हैं जो इसे खुला रखते हैं।
- ➤
श्वास-नलिकाएँ (Bronchi): श्वासनली दो शाखाओं में बँट जाती है — एक बाएँ और एक दाएँ फेफड़े में जाती है।
- ➤
फेफड़े (Lungs): छाती में स्थित स्पंजी अंग। यहाँ O₂ रक्त में जाती है और CO₂ रक्त से बाहर निकलती है — यही श्वसन का मूल उद्देश्य है।
💡 श्वसन की प्रक्रिया: ऑक्सीजनयुक्त वायु को अन्दर खींचना = अन्तःश्वसन (Inhalation)। कार्बन डाइऑक्साइडयुक्त वायु को बाहर निकालना = उच्छ्वसन (Exhalation)। यह क्रिया जीवन-पर्यन्त अनवरत चलती रहती है।
उत्तर:
जहाँ दो या दो से अधिक अस्थियाँ आपस में मिलती हैं, उस स्थान को संधि (Joint) कहते हैं। संधियाँ कंकाल को गति एवं लचीलापन प्रदान करती हैं। मनुष्य में पाई जाने वाली चार प्रमुख संधियाँ इस प्रकार हैं —
| संधि का नाम | स्थान | गति का प्रकार |
| कन्दुक-खल्लिका संधि (Ball & Socket Joint) | कंधा और कूल्हा | चारों दिशाओं में घूमने की स्वतन्त्रता (Rotational) |
| हिंज संधि (Hinge Joint) | घुटना और कोहनी | केवल एक दिशा में मुड़ना (Flexion/Extension) |
| धुराग्र संधि (Pivot Joint) | गर्दन (खोपड़ी और मेरुदण्ड के बीच) | घुमाने की गति (Rotation) |
| अचल संधि (Fixed/Immovable Joint) | खोपड़ी की अस्थियाँ | कोई गति नहीं — केवल सुरक्षा |
💡 व्याख्या: हिंज संधि (Hinge Joint) दरवाजे के कब्जे की तरह काम करती है — यह केवल एक दिशा में मुड़ सकती है, इसीलिए कोहनी और घुटने सिर्फ एक ओर मुड़ते हैं। कन्दुक-खल्लिका संधि गोल सिरे के कारण सभी दिशाओं में घूम सकती है — जैसे कंधे का जोड़।
📌 परीक्षा उपयोगी: अचल संधि = खोपड़ी | हिंज संधि = घुटना, कोहनी | कन्दुक-खल्लिका = कंधा, कूल्हा | धुराग्र = गर्दन।
उत्तर:
कंकाल तन्त्र के दो मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं —
- ➤
शरीर को निश्चित आकृति एवं आकार प्रदान करना: यदि शरीर में कंकाल का ढाँचा न हो तो शरीर सिकुड़कर माँस के एक पिण्ड (गोले) के समान हो जाता। कंकाल ही शरीर को सीधा खड़े रहने योग्य बनाता है और उसे एक सुनिश्चित आकार देता है।
- ➤
शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को सुरक्षा प्रदान करना: खोपड़ी की अस्थियाँ मस्तिष्क की सुरक्षा करती हैं। पसलियाँ एवं उरोस्थि हृदय और फेफड़ों की सुरक्षा करती हैं। रीढ़ की हड्डियाँ रीढ़-रज्जु की सुरक्षा करती हैं।
📋 कंकाल के अन्य कार्य भी हैं: शरीर को सुदृढ़ बनाना, चलन में सहायता करना, पेशियों को जुड़ने का आधार प्रदान करना।
उत्तर:
संधि (Joint) की परिभाषा: हमारे कंकाल तन्त्र में हड्डियाँ एक-दूसरे से विभिन्न प्रकार से आपस में जुड़ी होती हैं। इन जोड़ों को संधि कहते हैं। दूसरे शब्दों में, जहाँ दो या दो से अधिक अस्थियाँ आपस में मिलती हैं, उस स्थान को संधि कहते हैं।
उदाहरण के लिए — अपने हाथ को कोहनी से मोड़ें तो यह केवल एक दिशा में मुड़ता है — यह हिंज संधि का उदाहरण है। हाथ को विपरीत दिशा में नहीं मोड़ा जा सकता क्योंकि संधि की बनावट उस दिशा की अनुमति नहीं देती।
💡 संधि का महत्व: यदि शरीर में संधियाँ न हों तो शरीर बिल्कुल अकड़ा हुआ होता और किसी भी अंग को हिलाना सम्भव न होता। संधियाँ ही शरीर को लचीला बनाती हैं और गति को सम्भव बनाती हैं।
📌 संधियों के प्रकार: चल संधि (Movable Joint) = कंधा, घुटना, कोहनी, कूल्हा। अचल संधि (Fixed Joint) = खोपड़ी की अस्थियाँ। अर्धचल संधि (Slightly Movable) = कशेरुकाओं के बीच।
उत्तर:
❤️ मनुष्य के हृदय का नामांकित चित्र
महाधमनी (Aorta)
│
┌────────┴────────┐
│ दायाँ अलिन्द │ बायाँ अलिन्द │
│ (Right Atrium) │ (Left Atrium) │
│─────────────────│─────────────────│
│ दायाँ निलय │ बायाँ निलय │
│ (Right Ventricle│ (Left Ventricle)│
└─────────────────┴─────────────────┘
│
प्राश्च महाधमनी
(Pulmonary Artery)
│
फेफड़े
📌 हृदय की संरचना एवं कार्य
- ➤
मनुष्य का हृदय लाल रंग का, मुट्ठी के आकार का और शरीर के वक्ष भाग में बाईं ओर झुकाव लिए स्थित होता है।
- ➤
हृदय में कुल चार कक्ष होते हैं — बायाँ एवं दायाँ अलिन्द (Atria) तथा बायाँ एवं दायाँ निलय (Ventricles)।
- ➤
दायाँ भाग — अशुद्ध रक्त (CO₂ युक्त) को फेफड़ों में शुद्धि के लिए भेजता है।
- ➤
बायाँ भाग — फेफड़ों से शुद्ध रक्त (O₂ युक्त) प्राप्त करके पूरे शरीर में पम्प करता है।
- ➤
हृदय का मुख्य कार्य — बिना थके जीवन भर शरीर के विभिन्न भागों को रुधिर पम्प करना।
📊 रोचक तथ्य: एक वयस्क का हृदय 1 मिनट में 72 बार धड़कता है। एक दिन में लगभग 1,00,000 बार। जीवन भर में लगभग 2.5 अरब बार।
उत्तर:
मनुष्य में पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ (Five Sense Organs) पाई जाती हैं। ये विशेष अंग हैं जो बाहरी वातावरण से सूचनाएँ ग्रहण करके मस्तिष्क को भेजते हैं। इनका विवरण इस प्रकार है —
| ज्ञानेन्द्रिय | वैज्ञानिक नाम | कार्य |
| कान |
श्रवणेन्द्रिय |
ध्वनि सुनना तथा शरीर का सन्तुलन बनाए रखना। मनुष्य के कान के तीन भाग हैं — बाह्य, मध्य और आन्तरिक कर्ण। |
| आँख |
दृश्येन्द्रिय |
देखने का कार्य — वस्तु का आकार, रंग, प्रकाश, अन्धकार का अनुभव। आँख में पारदर्शी उत्तल लेंस होता है। |
| नाक |
घ्राणेन्द्रिय |
गंध का अनुभव करना — सुगन्ध तथा दुर्गन्ध को पहचानना। कुत्ते और चींटी की घ्राण शक्ति सर्वाधिक होती है। |
| जीभ |
स्वादेन्द्रिय |
मीठे, कड़वे, खट्टे, नमकीन, कसैले स्वाद का अनुभव। जीभ पर स्वाद-कलिकाएँ (Taste Buds) होती हैं। बोलने व लार मिलाने में भी सहायक। |
| त्वचा |
स्पर्शेन्द्रिय |
ठण्डे-गर्म, कठोर-मुलायम, चिकने-खुरदरे का अनुभव। नेत्रहीन व्यक्ति ब्रेल पद्धति से त्वचा द्वारा अक्षर पहचानते हैं। |
💡 महत्वपूर्ण बात: ये सभी ज्ञानेन्द्रियाँ तन्त्रिकाओं द्वारा मस्तिष्क से जुड़ी होती हैं। ज्ञानेन्द्रिय उद्दीपन ग्रहण करती है → तन्त्रिका उसे मस्तिष्क तक पहुँचाती है → मस्तिष्क विश्लेषण करके अनुक्रिया का आदेश देता है।
📌 सरल याद करने का तरीका: क-आ-ना-जी-त्व → कान, आँख, नाक, जीभ, त्वचा।
उत्तर:
🍽️ मनुष्य के पाचन तन्त्र का नामांकित चित्र
मुख / मुखगुहा (Mouth / Buccal Cavity)
— यहाँ लार से मण्ड का पाचन शुरू
│
ग्रसनी (Pharynx)
│
ग्रासनाल / भोजन नली
(Oesophagus)
— भोजन को आमाशय तक ले जाती है
│
आमाशय (Stomach)
— HCl तथा पेप्सिन से पाचन
│
┌──────────┴──────────┐
यकृत अग्नाशय
(Liver) (Pancreas)
— पित्त रस का — अग्नाशयी रस
निर्माण का स्राव
│
छोटी आँत (Small Intestine)
— पाचन का अन्तिम चरण
— पचे भोजन का अवशोषण
│
बड़ी आँत (Large Intestine)
— जल का अवशोषण
│
मलाशय (Rectum)
│
गुदा (Anus)
— अपशिष्ट बाहर
📌 पाचन तन्त्र के प्रमुख अंगों का संक्षिप्त परिचय
- ➤
मुखगुहा: यहाँ दाँत भोजन चबाते हैं और लार का एन्जाइम मण्ड को पचाना शुरू करता है।
- ➤
आमाशय: पाचक रस (HCl + पेप्सिन) प्रोटीन का पाचन करते हैं। भोजन को अर्ध-तरल (Chyme) में बदला जाता है।
- ➤
यकृत (Liver): शरीर की सबसे बड़ी ग्रन्थि। चॉकलेट/गहरे भूरे रंग की। पित्त रस बनाती है जो वसा के पाचन में सहायक है।
- ➤
अग्नाशय (Pancreas): हल्के गुलाबी रंग की ग्रन्थि। अग्नाशयी रस का स्राव करती है जो प्रोटीन, वसा और मण्ड तीनों को पचाती है।
- ➤
छोटी आँत: सबसे लम्बा भाग (~6-7 मीटर)। यहाँ पाचन पूर्ण होता है और पचा हुआ भोजन रक्त में अवशोषित होता है।
💡 पाचन तन्त्र का मूल उद्देश्य: अघुलनशील भोजन (प्रोटीन, मण्ड, वसा) को घुलनशील सरल पदार्थों में बदलना ताकि वे रक्त में अवशोषित होकर कोशिकाओं तक पहुँच सकें और ऊर्जा दे सकें।
BASIC SHIKSHA SOLUTION ● UPBOARD CLASS 6 SCIENCE SOLUTION
BASIC SHIKSHA SOLUTION ● UPBOARD CLASS 6 SCIENCE SOLUTION
प्रश्न: मनुष्य के शरीर में कितनी हड्डियाँ होती हैं?
उत्तर: वयस्क मनुष्य में 206 अस्थियाँ तथा नवजात शिशु में 213 अस्थियाँ होती हैं।
प्रश्न: पाचन की शुरुआत कहाँ से होती है?
उत्तर: पाचन की शुरुआत मुखगुहा से होती है जहाँ लार में उपस्थित टायलिन एन्जाइम मण्ड को पचाना शुरू करता है।
प्रश्न: मानव हृदय में कितने कक्ष होते हैं?
उत्तर: मानव हृदय में चार कक्ष होते हैं — बायाँ अलिन्द, बायाँ निलय, दायाँ अलिन्द और दायाँ निलय।
प्रश्न: UP Board Class 6 Science Chapter 8 Solution कहाँ मिलेगा?
उत्तर: Basic Shiksha Solution पर इस अध्याय का सम्पूर्ण समाधान उपलब्ध है।
निष्कर्ष:
इस प्रकार UP Board Class 6 Science Chapter 8 जन्तु की संरचना व कार्य Solution में हमने
पाचन तन्त्र, श्वसन तन्त्र, हृदय की संरचना, वृक्क, तन्त्रिका तन्त्र, पाँचों ज्ञानेन्द्रियाँ,
कंकाल तन्त्र (अक्षीय एवं अनुबन्धीय), संधियाँ, उपास्थि और जन्तुओं में गमन के अंग
सभी को विस्तार से समझा। यह अध्याय जीव विज्ञान की नींव का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
BASIC SHIKSHA SOLUTION ● UPBOARD CLASS 6 SCIENCE SOLUTION
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