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CLASS 6 SCIENCE | LESSON 4 - CHANGES IN OUR AREAs

UP Board Class 6 Science Chapter 4 Solution in Hindi | पास-पड़ोस में होने वाले परिवर्तन | Basic Shiksha Solution
इकाई 4 — पास-पड़ोस में होने वाले परिवर्तन
UP Board Class 6 | विज्ञान | सम्पूर्ण हिन्दी समाधान
BASIC SHIKSHA SOLUTION ● UP BOARD CLASS 6 SCIENCE SOLUTION
📖 पाठ परिचय: हमारे चारों ओर अनेक प्रकार के परिवर्तन होते रहते हैं। कुछ स्वतः होते हैं और कुछ मानव द्वारा किये जाते हैं। इस इकाई में हम परिवर्तन के आठ प्रकारों का अध्ययन करते हैं — मंद एवं तीव्र, अनुकूल एवं प्रतिकूल, नियमित एवं अनियमित, उत्क्रमणीय एवं अनुत्क्रमणीय, भौतिक एवं रासायनिक, प्राकृतिक एवं कृत्रिम, नियंत्रित एवं अनियंत्रित तथा जटिल परिवर्तन। इसके साथ आपसी प्रतिक्रियाएँ और परिवर्तन के लिये ऊर्जा की आवश्यकता भी समझेंगे।
📝 प्रश्न 1 — सही विकल्प छाँटकर अपनी अभ्यास पुस्तिका में लिखिए
प्रश्न 1 (क): भौतिक परिवर्तन में —
(i) पदार्थ के अणुओं में परिवर्तन होता है।
(ii) पदार्थ के अणुओं में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
(iii) नया पदार्थ बन जाता है।
(iv) कोई पदार्थ नहीं बनता है।
✅ सही उत्तर: (ii) पदार्थ के अणुओं में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
व्याख्या: भौतिक परिवर्तन में पदार्थ का केवल रूप, रंग, आकार या अवस्था बदलती है — उसके अणुओं की प्रकृति और संरचना वही रहती है। इसीलिए कोई नया पदार्थ नहीं बनता और अधिकांश भौतिक परिवर्तनों को उत्क्रमित (पलटा) भी किया जा सकता है। विकल्प (i) और (iii) रासायनिक परिवर्तन का लक्षण हैं। जैसे — मोम का पिघलना, बर्फ का पानी बनना, काँच का टूटना — ये सभी भौतिक परिवर्तन हैं।
📌 याद रखें: भौतिक परिवर्तन = रूप बदले, अणु न बदलें, नया पदार्थ न बने।
रासायनिक परिवर्तन = नया पदार्थ बने, अणु बदलें।
प्रश्न 1 (ख): निम्नलिखित में से कौन सा उत्क्रमणीय परिवर्तन है —
(i) दूध का फट जाना
(ii) मोम का पिघलना
(iii) मोमबत्ती का जलना
(iv) सब्जी का पकना
✅ सही उत्तर: (ii) मोम का पिघलना
व्याख्या: उत्क्रमणीय (यावर्तित) परिवर्तन वह है जिसमें परिस्थिति बदलने पर पदार्थ अपनी पूर्व अवस्था में वापस आ सके। मोम को गर्म करने पर पिघलता है, और ठंडा करने पर पुनः ठोस बन जाता है — इसलिए यह उत्क्रमणीय है। अन्य विकल्पों का विश्लेषण — दूध का फटना, मोमबत्ती का जलना और सब्जी का पकना — ये तीनों अनुत्क्रमणीय परिवर्तन हैं क्योंकि इनमें एक बार परिवर्तन होने के बाद पदार्थ अपनी पूर्व अवस्था में नहीं लौट सकता।
📌 याद रखें: उत्क्रमणीय = पलटा जा सकता है (मोम पिघलना, गुब्बारा फुलाना)।
अनुत्क्रमणीय = नहीं पलटा जा सकता (दूध से दही, लकड़ी का जलना)।
प्रश्न 1 (ग): ज्वालामुखी का फूटना —
(i) मंद परिवर्तन है
(ii) अनुकूल परिवर्तन है
(iii) उत्क्रमणीय परिवर्तन है
(iv) अनियमित परिवर्तन है
✅ सही उत्तर: (iv) अनियमित परिवर्तन है
व्याख्या: ज्वालामुखी का फूटना कोई निश्चित समय पर नहीं होता — यह कभी भी हो सकता है। इसीलिए यह अनियमित परिवर्तन है। अन्य विकल्प गलत क्यों — ज्वालामुखी का फूटना अचानक और बहुत तेज़ी से होता है इसलिए मंद नहीं है। यह विनाशकारी है इसलिए अनुकूल नहीं है। और एक बार फूटने के बाद उसे पलटा नहीं जा सकता इसलिए उत्क्रमणीय भी नहीं है।
📌 अतिरिक्त जानकारी: अन्य अनियमित परिवर्तन — वर्षा, आँधी, तूफान, बाढ़, सूखा, भूकम्प, सुनामी।
नियमित परिवर्तन — दिन-रात का होना, ऋतु परिवर्तन।
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📝 प्रश्न 2 — रिक्त स्थान की पूर्ति अपनी अभ्यास पुस्तिका में कीजिए
(क) गिलास का टूटना ................... परिवर्तन है।
✅ उत्तर: भौतिक
व्याख्या: गिलास के टूटने पर उसका आकार बदल जाता है परन्तु काँच के अणुओं की प्रकृति वही रहती है — कोई नया पदार्थ नहीं बनता। इसीलिए यह भौतिक परिवर्तन है। नोट — यद्यपि टूटा हुआ गिलास जोड़ा नहीं जा सकता, परन्तु काँच को पिघलाकर पुनः नया रूप दिया जा सकता है — इस दृष्टि से यह उत्क्रमणीय माना जाता है।
(ख) भौतिक परिवर्तन में वस्तु के ................... गुण बदल जाते हैं।
✅ उत्तर: भौतिक
व्याख्या: भौतिक परिवर्तन में पदार्थ के भौतिक गुण — जैसे आकार, रंग, अवस्था, रूप — बदलते हैं। रासायनिक गुण अर्थात् अणुओं की संरचना नहीं बदलती। उदाहरण — पानी का बर्फ बनना — भौतिक गुण (अवस्था) बदला, रासायनिक सूत्र H₂O वही रहा।
(ग) जो परिवर्तन अपनी इच्छा से करते हैं उसे ................... परिवर्तन कहते हैं।
✅ उत्तर: नियंत्रित (कृत्रिम)
व्याख्या: जिन परिवर्तनों पर हमारा नियंत्रण होता है — जिन्हें हम अपनी इच्छा से शुरू या बंद कर सकते हैं — वे नियंत्रित परिवर्तन कहलाते हैं। जैसे — बिजली का पंखा चलाना/बंद करना, लालटेन की रोशनी कम-ज्यादा करना।
(घ) घड़ी के पेंडुलम का दोलन ................... परिवर्तन है।
✅ उत्तर: नियमित (उत्क्रमणीय भी)
व्याख्या: घड़ी का पेंडुलम एक निश्चित समय-अंतराल पर बार-बार दाएँ-बाएँ झूलता रहता है — इसलिए यह नियमित परिवर्तन है। साथ ही यह उत्क्रमणीय भी है क्योंकि पेंडुलम बार-बार अपनी पूर्व अवस्था में लौटता रहता है। अतिरिक्त जानकारी — पेंडुलम की गति यांत्रिक ऊर्जा का उदाहरण है।
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📝 प्रश्न 3 — सही कथन पर (✓) तथा गलत पर (✗) लगाएँ
(क) फल को चाकू से काटने पर चाकू तथा फल के बीच पारस्परिक क्रिया होती है।
✅ सत्य (✓)
व्याख्या: चाकू से फल काटते समय दोनों के बीच पारस्परिक क्रिया-प्रतिक्रिया होती है। चाकू फल को काटता है (फल में परिवर्तन) और फल का कठोर भाग चाकू की धार को भी प्रभावित करता है। याद रखें — पारस्परिक क्रिया में दोनों पदार्थ एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।
(ख) प्रत्येक परिवर्तन के पीछे कोई न कोई कारण अवश्य होता है।
✅ सत्य (✓)
व्याख्या: विज्ञान का एक मूलभूत सिद्धान्त है — कोई भी परिवर्तन बिना कारण नहीं होता। चाहे वह ऊष्मा हो, प्रकाश हो, दाब हो, रासायनिक पदार्थ हो या यांत्रिक बल — हर परिवर्तन का एक निश्चित कारण होता है। उदाहरण — लोहे में जंग लगने का कारण = ऑक्सीजन और नमी। दूध का दही बनने का कारण = जीवाणु (बैक्टीरिया)।
(ग) चावल का पकना भौतिक परिवर्तन है।
❌ असत्य (✗)
व्याख्या: चावल पकने पर उसमें नये रासायनिक यौगिक बनते हैं — स्टार्च का जिलेटिनीकरण होता है और पोषक तत्वों की संरचना बदलती है। इसलिए यह रासायनिक परिवर्तन है, भौतिक नहीं। पहचान का नियम — जब भी पकाने की प्रक्रिया हो, ताप से नया पदार्थ बने और पुरानी अवस्था में न लौटा जा सके — वह रासायनिक परिवर्तन है।
📌 याद रखें: चावल का कच्चा होना → पकाना → पका चावल। पका चावल पुनः कच्चा नहीं बनाया जा सकता = अनुत्क्रमणीय + रासायनिक परिवर्तन।
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📝 प्रश्न 4 — निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
प्रश्न 4 (क): परिवर्तन कितने प्रकार के होते हैं? उत्तर:

परिवर्तन के मुख्य रूप से आठ प्रकार होते हैं —

1. मंद एवं तीव्र परिवर्तन
जब किसी परिवर्तन के सम्पन्न होने में अधिक समय लगता है तो उसे मंद परिवर्तन कहते हैं। उदाहरण — लोहे में जंग लगना, बच्चों का बढ़ना, नाखून का बढ़ना, दूध से दही बनना।

जब किसी परिवर्तन के सम्पन्न होने में कम समय लगता है तो उसे तीव्र परिवर्तन कहते हैं। उदाहरण — माचिस का जलना, फूले गुब्बारे का फूटना, जल में नील घोलने पर रंग बदलना।
2. अनुकूल एवं प्रतिकूल परिवर्तन
उपयोगी तथा लाभदायक परिवर्तन अनुकूल परिवर्तन कहलाते हैं। उदाहरण — खाना पकाना, आम का पकना, दूध से दही बनना।

अनुपयोगी तथा हानिकारक परिवर्तन प्रतिकूल परिवर्तन कहलाते हैं। उदाहरण — रोटी में फफूँद लगना, दूध का फटना, लोहे में जंग लगना।
3. नियमित एवं अनियमित परिवर्तन
निश्चित समय पर लगातार होते रहने वाले परिवर्तन नियमित परिवर्तन कहलाते हैं। उदाहरण — ऋतु परिवर्तन, दिन-रात होना, ज्वार-भाटा।

वे परिवर्तन जिनका समय निश्चित न हो अनियमित परिवर्तन कहलाते हैं। उदाहरण — वर्षा, आँधी, तूफान, बाढ़, भूकम्प, ज्वालामुखी।
4. उत्क्रमणीय (यावर्तित) एवं अनुत्क्रमणीय (अयावर्तित) परिवर्तन
ऐसे परिवर्तन जिनमें परिस्थितियाँ उलट देने पर पदार्थ अपनी पूर्व अवस्था में आ जाता है — उत्क्रमणीय परिवर्तन कहलाते हैं। उदाहरण — मोम का पिघलना, गुब्बारे का फुलाना-पिचकाना, रबर बैंड खींचना।

ऐसे परिवर्तन जिनमें पदार्थ पुनः पूर्व अवस्था में नहीं आ सकता — अनुत्क्रमणीय परिवर्तन कहलाते हैं। उदाहरण — दूध से दही बनना, मोमबत्ती जलाना, रोटी सेंकना।
5. भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन
ऐसा परिवर्तन जिसमें पदार्थ का रूप बदले परन्तु कोई नया पदार्थ न बने — भौतिक परिवर्तन कहलाता है। उदाहरण — मोम का पिघलना, काँच का टूटना, बर्फ का पानी बनना।

ऐसा परिवर्तन जिसमें एक या एक से अधिक नया पदार्थ बने — रासायनिक परिवर्तन कहलाता है। उदाहरण — लकड़ी का जलना, दूध से दही बनना, लोहे में जंग लगना।
6. प्राकृतिक एवं कृत्रिम परिवर्तन
प्रकृति में स्वतः होने वाले परिवर्तन प्राकृतिक परिवर्तन हैं। उदाहरण — वर्षा, दिन-रात, ऋतु परिवर्तन, ज्वालामुखी।

मनुष्य द्वारा किये जाने वाले परिवर्तन कृत्रिम परिवर्तन हैं। उदाहरण — मेज-कुर्सी बनाना, दूध से घी बनाना, घर बनाना।
7. नियंत्रित एवं अनियंत्रित परिवर्तन
जिन परिवर्तनों पर हमारा नियंत्रण रहता है — नियंत्रित परिवर्तनउदाहरण — पंखे की गति बदलना, लालटेन की रोशनी कम-ज्यादा करना।

जिन पर हमारा नियंत्रण न हो — अनियंत्रित परिवर्तनउदाहरण — चन्द्रमा की कलाओं में परिवर्तन, बादल का आना, आँधी-तूफान।
8. जटिल परिवर्तन
धीमी गति से अनेक क्रियाओं और प्रतिक्रियाओं के फलस्वरूप होने वाले परिवर्तन जटिल परिवर्तन कहलाते हैं। उदाहरण — कोयले का निर्माण (करोड़ों वर्षों में), पेट्रोलियम का निर्माण, शरीर में पाचन-श्वसन-उत्सर्जन।
प्रश्न 4 (ख): भौतिक तथा रासायनिक परिवर्तन के अंतर को उदाहरण सहित लिखिए। उत्तर:
गुणभौतिक परिवर्तनरासायनिक परिवर्तन
नया पदार्थनया पदार्थ नहीं बनताएक या अधिक नये पदार्थ बनते हैं
अणुओं में परिवर्तनअणुओं की प्रकृति वही रहती हैअणुओं की संरचना बदल जाती है
उत्क्रमणीयतासामान्यतः उत्क्रमणीय होता हैसामान्यतः अनुत्क्रमणीय होता है
ऊर्जाअपेक्षाकृत कम ऊर्जाअधिक ऊर्जा का अवशोषण या उत्सर्जन
उदाहरणमोम का पिघलना, बर्फ का पानी बनना, काँच टूटनालकड़ी जलना, दूध से दही, लोहे में जंग
📌 याद रखें: भौतिक = रूप बदले। रासायनिक = प्रकृति बदले।
पहचानने की आसान विधि — यदि नया पदार्थ बन गया तो रासायनिक, नहीं बना तो भौतिक।
प्रश्न 4 (ग): ऊष्मा अवशोषित होने वाले दो परिवर्तन लिखिये। उत्तर:
ऊष्मा अवशोषित होने वाले दो परिवर्तन — (1) बर्फ का पिघलना   (2) एल्कोहल का वाष्पीकरण
1. बर्फ का पिघलना
बर्फ को पिघलाने के लिए उसे आस-पास के वातावरण से ऊष्मा ऊर्जा अवशोषित करनी पड़ती है। इसीलिए बर्फ को हाथ में लेने पर हाथ ठंडा लगता है — बर्फ हमारे हाथ से ऊष्मा लेकर पिघलती है।
2. हथेली पर एल्कोहल का वाष्पीकरण
जब थोड़ा-सा एल्कोहल हथेली पर रखा जाता है तो यह शरीर की ऊष्मीय ऊर्जा अवशोषित करके वाष्पित हो जाता है। इसीलिए हथेली ठंडी लगने लगती है। अन्य उदाहरण — पसीने का वाष्पीकरण (इसीलिए पसीना आने पर ठंडक महसूस होती है)।
📌 याद रखें: ऊष्मा अवशोषित = पदार्थ ठंडा करता है = ऊष्माशोषी (endothermic) परिवर्तन।
ऊष्मा उत्सर्जित = पदार्थ गर्म करता है = ऊष्माक्षेपी (exothermic) परिवर्तन। जैसे — मोमबत्ती जलना, लोहे में जंग।
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📋 बोनस: क्रियाकलाप 1 — परिवर्तनों का वर्गीकरण (तालिका 4.1)
मंद एवं तीव्र परिवर्तन का वर्गीकरण:
क्र.सं.परिवर्तनपरिवर्तन का नामकारण
1.दूध से दही बननामंद परिवर्तनजीवाणुओं द्वारा किण्वन में समय लगता है
2.रोटी में फफूँद लगनामंद परिवर्तनफफूँद की वृद्धि धीरे-धीरे होती है
3.बर्फ के टुकड़े का पिघलनातीव्र परिवर्तनअधिक ताप मिलने पर जल्दी पिघलती है
4.कपड़ों का सूखनामंद परिवर्तनजल का धीरे-धीरे वाष्पन होता है
5.गैस के चूल्हे में विस्फोटक का जलनातीव्र परिवर्तनदहन तुरंत होता है
6.मिट्टी के तेल में आग लगनातीव्र परिवर्तनदहन क्रिया शीघ्र होती है
7.दीपावली में पटाखे का जलनातीव्र परिवर्तनविस्फोट पलभर में होता है
📋 बोनस: सभी परिवर्तनों की सम्पूर्ण मास्टर तालिका (परीक्षोपयोगी)
परिवर्तन का प्रकारपरिभाषा (संक्षेप)उदाहरण
मंदअधिक समय में होने वालाजंग लगना, बच्चों का बढ़ना
तीव्रकम समय में होने वालामाचिस जलना, गुब्बारा फूटना
अनुकूललाभदायक परिवर्तनदही बनना, फल पकना
प्रतिकूलहानिकारक परिवर्तनदूध फटना, जंग लगना
नियमितनिश्चित समय परदिन-रात, ऋतु परिवर्तन
अनियमितअनिश्चित समय परवर्षा, भूकम्प, ज्वालामुखी
उत्क्रमणीयपूर्व अवस्था में लौट सकेमोम पिघलना, गुब्बारा
अनुत्क्रमणीयपूर्व अवस्था में न लौट सकेदही बनना, रोटी पकना
भौतिकरूप बदले, नया पदार्थ न बनेकाँच टूटना, बर्फ पिघलना
रासायनिकनया पदार्थ बनेलकड़ी जलना, लोहे में जंग
प्राकृतिकस्वतः होने वालावर्षा, दिन-रात, बादल
कृत्रिममनुष्य द्वारामेज बनाना, दही बनाना
नियंत्रितहमारे नियंत्रण मेंपंखा चलाना, रोशनी कम करना
अनियंत्रितहमारे नियंत्रण से बाहरआँधी, बादल, चन्द्रमा की कलाएँ
जटिलअनेक क्रियाओं से, लम्बे समय मेंकोयला/पेट्रोल बनना, पाचन
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❓ FAQs — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. परिवर्तन किसे कहते हैं?
वस्तु की अवस्था, आकार, रंग, स्वाद एवं गंध तथा प्रकृति में निरन्तर होने वाले बदलाव को परिवर्तन कहते हैं। परिवर्तन दो प्रकार के होते हैं — स्वतः होने वाले (जैसे फूल का मुरझाना) और मानव कृत्यक्रियाओं द्वारा (जैसे दूध से पनीर बनाना)।
Q2. दूध से दही बनना किस प्रकार का परिवर्तन है?
दूध से दही बनना — मंद, रासायनिक, अनुत्क्रमणीय, अनुकूल और कृत्रिम परिवर्तन है। यह मंद है क्योंकि कुछ घंटे लगते हैं। रासायनिक है क्योंकि दही एक नया पदार्थ है। अनुत्क्रमणीय है क्योंकि दही को वापस दूध नहीं बनाया जा सकता।
Q3. लोहे में जंग लगना कौन-सा परिवर्तन है?
लोहे में जंग लगना — मंद, रासायनिक, अनुत्क्रमणीय, प्रतिकूल और अनियंत्रित परिवर्तन है। इसमें लोहा, ऑक्सीजन और नमी की उपस्थिति में Fe₂O₃ (आयरन ऑक्साइड) नामक नया पदार्थ बनता है जो लाल-भूरे रंग का होता है।
Q4. ऊर्जा के कितने रूप परिवर्तन करते हैं?
परिवर्तन के लिये मुख्यतः छः प्रकार की ऊर्जाएँ उत्तरदायी होती हैं — ऊष्मीय ऊर्जा (जल का वाष्पन), प्रकाश ऊर्जा (फोटोग्राफी, प्रकाश संश्लेषण), विद्युत ऊर्जा (बल्ब जलना), ध्वनि ऊर्जा (कांच चटकना), यांत्रिक ऊर्जा (साइकल चलाना) तथा चुम्बकीय ऊर्जा (आलपिन में चुम्बकीय गुण)।
Q5. कोयला और पेट्रोलियम का निर्माण जटिल परिवर्तन क्यों है?
कोयले का निर्माण लगभग 30 करोड़ वर्ष पहले भौगोलिक उथल-पुथल से दबे वनों से, और पेट्रोलियम समुद्री जीव-जन्तुओं से उच्च ताप व दाब के कारण करोड़ों वर्षों में बना है। इस प्रक्रिया में अनेक रासायनिक और भौतिक क्रियाएँ एक साथ होती हैं — इसीलिए यह जटिल परिवर्तन है।
Q6. एक ही परिवर्तन अनुकूल और प्रतिकूल दोनों कैसे हो सकता है?
यह परिस्थिति पर निर्भर करता है। उदाहरण — फसल तैयार होते समय वर्षा का होना अनुकूल है क्योंकि फसल को पानी मिलता है। लेकिन फसल पक जाने के बाद बादल बरसना प्रतिकूल है क्योंकि इससे कटी फसल खराब हो जाती है।
Q7. भौतिक परिवर्तन को पहचानने की आसान विधि क्या है?
तीन प्रश्न पूछें — (1) क्या नया पदार्थ बना? (2) क्या रंग/गंध में स्थायी बदलाव आया? (3) क्या पदार्थ वापस पूर्व अवस्था में आ सकता है? यदि पहले दोनों का उत्तर "नहीं" और तीसरे का "हाँ" हो — तो भौतिक परिवर्तन है। यदि पहले दोनों "हाँ" हों — तो रासायनिक परिवर्तन है।
Q8. आपसी प्रतिक्रिया क्या होती है?
जब दो या दो से अधिक पदार्थ एक-दूसरे के सम्पर्क में आते हैं और दोनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं — यह आपसी क्रिया-प्रतिक्रिया है। उदाहरण — चाकू से फल काटने पर चाकू फल को काटता है (फल में परिवर्तन) और फल की कठोरता से चाकू की धार भोथरी होती है (चाकू में परिवर्तन)। दोनों में बदलाव = आपसी प्रतिक्रिया।
🔎 निष्कर्ष
निष्कर्ष:

इस प्रकार UP Board Class 6 Science इकाई 4 — पास-पड़ोस में होने वाले परिवर्तन के सम्पूर्ण समाधान में हमने जाना कि परिवर्तन आठ प्रकार के होते हैं। भौतिक परिवर्तन में केवल रूप बदलता है जबकि रासायनिक परिवर्तन में नया पदार्थ बनता है। उत्क्रमणीय परिवर्तन को पलटा जा सकता है जबकि अनुत्क्रमणीय को नहीं। हर परिवर्तन के लिये किसी न किसी ऊर्जा की आवश्यकता होती है और दो पदार्थों के सम्पर्क में आने पर आपसी क्रिया-प्रतिक्रिया होती है।

BASIC SHIKSHA SOLUTION ● UP BOARD CLASS 6 SCIENCE SOLUTION
📚 अन्य अध्याय देखें — Class 6 Science
  • 👉 UP Board Class 6 Science Chapter 1 Solution
  • 👉 UP Board Class 6 Science Chapter 2 Solution
  • 👉 UP Board Class 6 Science Chapter 3 Solution
  • 👉 UP Board Class 6 Science All Chapters Solution
  • 👉 UP Board Class 7 Science Solution

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