इकाई 3 — पदार्थों का पृथक्करण
UP Board Class 6 | विज्ञान | सम्पूर्ण हिन्दी समाधान
BASIC SHIKSHA SOLUTION ● UP BOARD CLASS 6 SCIENCE SOLUTION
📖 पाठ परिचय: इस इकाई में हम जानते हैं कि मिश्रण क्या होता है और उसे उसके अवयवों से कैसे अलग किया जाता है। शुद्ध पदार्थ, तत्व एवं यौगिक का परिचय, समांगी और विषमांगी मिश्रण का अंतर तथा पृथक्करण की विभिन्न विधियाँ — फटकना, ओसाना, चालना, ऊर्ध्वपातन, तलछटीकरण, छानना, अपकेन्द्रण, वाष्पन, आसवन, क्रिस्टलीकरण, पृथकारी कीप एवं क्रोमैटोग्राफी — इस इकाई के प्रमुख विषय हैं।
प्रश्न 1 (क): शुद्ध पदार्थ वे पदार्थ हैं —
(i) जो खाने में शुद्ध हैं।
(ii) जहाँ छानकर और वाष्पित कर पृथक किया जा सके।
(iii) जिसमें सभी अणु समान प्रकृति के हैं।
(iv) जो विभिन्न तत्वों के मिश्रण हैं।
✅ सही उत्तर: (iii) जिसमें सभी अणु समान प्रकृति के हैं।
व्याख्या: शुद्ध पदार्थ की पहचान यह है कि उसमें केवल एक ही प्रकार के अणु होते हैं। जैसे — सोना, चाँदी, नमक और शक्कर। शक्कर के सभी कण एक समान होते हैं — यही शुद्धता का लक्षण है। विकल्प (i) खाद्य शुद्धता की बात करता है जो वैज्ञानिक परिभाषा नहीं है। विकल्प (iv) बिल्कुल विपरीत है — मिश्रण में विभिन्न तत्व होते हैं, वह शुद्ध पदार्थ नहीं होता।
📌 याद रखें: शुद्ध पदार्थ = एक ही प्रकार के कण = तत्व या यौगिक। मिश्रण = दो या अधिक पदार्थ = अशुद्ध पदार्थ।
प्रश्न 1 (ख): वायु है —
(i) शुद्ध पदार्थ
(ii) समांगी मिश्रण
(iii) विषमांगी मिश्रण
(iv) ऑक्सीजन और नाइट्रोजन का यौगिक
✅ सही उत्तर: (ii) समांगी मिश्रण
व्याख्या: वायु में ऑक्सीजन (21%), नाइट्रोजन (78%), कार्बन डाइऑक्साइड (0.03%) एवं जलवाष्प मिले होते हैं। इन गैसों को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता और ये सभी ओर समान रूप से वितरित रहती हैं — इसीलिए यह समांगी मिश्रण है। विकल्प (iv) गलत है क्योंकि यौगिक में तत्व एक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से जुड़ते हैं — वायु में ये गैसें किसी भी अनुपात में मिली हो सकती हैं और रासायनिक रूप से नहीं जुड़ी हैं।
📌 याद रखें: वायु = समांगी मिश्रण। जल एवं बालू = विषमांगी मिश्रण। जल (H₂O) = यौगिक।
प्रश्न 1 (ग): बालू और लोहे की छीलन को पृथक किया जाता है —
(i) बीन कर
(ii) चुम्बकीय पृथक्करण द्वारा
(iii) फटक कर
(iv) चाल कर
✅ सही उत्तर: (ii) चुम्बकीय पृथक्करण द्वारा
व्याख्या: लोहे की छीलन एक चुम्बकीय पदार्थ है जबकि बालू अचुम्बकीय है। जब चुम्बक को इस मिश्रण के पास लाया जाता है तो लोहे की छीलन चुम्बक से चिपक जाती है और बालू वहीं रह जाती है। इस प्रकार दोनों आसानी से अलग हो जाते हैं। बीनना तब प्रयोग होता है जब आकार-रंग भिन्न हो। चालना तब होता है जब कण आकार में अंतर हो।
📌 याद रखें: चुम्बकीय पृथक्करण = जब एक अवयव लोहा/निकल/कोबाल्ट हो। बड़े कारखानों में रद्दी मिश्रण से लोहा इसी विधि से अलग किया जाता है।
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(क) .................... विधि दूध से क्रीम को पृथक करने में उपयोग की जाती है।
✅ उत्तर: अपकेन्द्रण
व्याख्या: दूध में चिकनाई (क्रीम) के हल्के कण निलंबित होते हैं। दूध को मथनी द्वारा तीव्र गति से घुमाने पर भारी कण तली की ओर और हल्के कण (मक्खन/क्रीम) ऊपर आ जाते हैं — इसे अपकेन्द्रण (Centrifugation) कहते हैं।
📌 अतिरिक्त जानकारी: अस्पतालों में रक्त की जाँच के लिए भी अपकेन्द्रण मशीन (centrifuge) का प्रयोग होता है — इससे रक्त के विभिन्न घटक अलग किए जाते हैं।
(ख) कपूर और साधारण नमक का मिश्रण ............... विधि से पृथक किए जाते हैं।
✅ उत्तर: ऊर्ध्वपातन
व्याख्या: कपूर गर्म करने पर बिना द्रवित हुए सीधे वाष्प में बदल जाता है — यह गुण ऊर्ध्वपातन (Sublimation) कहलाता है। नमक में यह गुण नहीं होता इसीलिए गर्म करने पर केवल कपूर वाष्प बनकर अलग हो जाता है और नमक नीचे बचा रहता है।
📌 याद रखें: ऊर्ध्वपातन करने वाले पदार्थ — कपूर, नैफ्थेलीन, आयोडीन, नौसादर। इन्हें इसी विधि द्वारा मिश्रण से पृथक किया जाता है।
(ग) ................. के छीलन को किसी मिश्रण से चुम्बक द्वारा पृथक किया जाता है।
✅ उत्तर: लोहे
व्याख्या: लोहा एक चुम्बकीय पदार्थ है। चुम्बक लोहे की छीलन को आकर्षित करता है इसलिए इसे मिश्रण से आसानी से चुम्बकीय पृथक्करण विधि द्वारा अलग किया जाता है। लकड़ी का बुरादा या बालू चुम्बक से नहीं चिपकते।
(घ) नमक और पानी के मिश्रण से नमक .................. विधि द्वारा पृथक किया जाता है।
✅ उत्तर: वाष्पन
व्याख्या: नमक जल में घुलनशील है इसीलिए छानकर अलग नहीं किया जा सकता। जब नमक के घोल को गर्म किया जाता है तो जल वाष्प बनकर उड़ जाता है और ठोस नमक बर्तन में शेष रह जाता है। इस प्रक्रिया को वाष्पन (Evaporation) कहते हैं। इसी विधि से समुद्र के जल से नमक प्राप्त किया जाता है।
📌 याद रखें: समुद्र से नमक = वाष्पन विधि। गंदे पानी से शुद्ध पानी = आसवन विधि।
(ङ) आसवन विधि द्वारा .................. से शुद्ध .................. प्राप्त किया जाता है।
✅ उत्तर: भाप से शुद्ध जल
व्याख्या: आसवन (Distillation) वाष्पीकरण और संघनन दोनों का संयोजन है। पानी को गर्म करने पर भाप (वाष्प) बनती है, जब यह भाप ठंडी प्लेट के सम्पर्क में आती है तो संघनित होकर शुद्ध जल की बूँदें बन जाती हैं। इस प्रकार किसी विलयन से शुद्ध द्रव प्राप्त किया जाता है।
📌 अतिरिक्त जानकारी: वर्षा जल का बनना भी प्राकृतिक आसवन का उदाहरण है — समुद्र का पानी वाष्प बनकर उड़ता है और ऊपर ठंडा होकर वर्षा के रूप में शुद्ध जल बनकर गिरता है।
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(क) नदियों के जल के तलछटीकरण और छानने के बाद पीने का पानी प्राप्त होता है।
✅ सत्य
व्याख्या: नदी के जल में मिट्टी और अन्य ठोस कण होते हैं। पहले तलछटीकरण से भारी कण नीचे बैठ जाते हैं, फिर छानने से सूक्ष्म अशुद्धियाँ दूर होती हैं। इसके बाद रासायनिक उपचार (क्लोरीनीकरण) से जल पीने योग्य बनता है।
(ख) चावल के कण महीन छेद वाली चलनी से छान कर पृथक कर लिए जाते हैं।
✅ सत्य
व्याख्या: चालना (Sieving) विधि में भिन्न-भिन्न आकार के घटकों को पृथक किया जाता है। महीन चलनी से छोटे कण नीचे निकल जाते हैं और बड़े कण ऊपर रह जाते हैं। चावल के कण कंकड़-पत्थर से छोटे होते हैं, इसीलिए यह वाक्य सत्य है।
📌 याद रखें: चालना = आकार के आधार पर पृथक्करण। आटे की चलनी, बालू की जाली — दोनों इसी सिद्धांत पर काम करते हैं।
(ग) समुद्र जल को वाष्पित करके नमक प्राप्त किया जाता है।
✅ सत्य
व्याख्या: समुद्र के जल में नमक घुला रहता है। जब समुद्री जल को बड़े-बड़े खुले क्षेत्रों में फैलाकर धूप में रखा जाता है तो वाष्पन विधि से जल वाष्प बनकर उड़ जाता है और नमक पीछे बचा रहता है। यही नमक उद्योग की मूल प्रक्रिया है।
(घ) शुद्ध पदार्थ समांगी पदार्थ हैं जिसमें केवल एक प्रकार के ही अणु होते हैं।
✅ सत्य
व्याख्या: शुद्ध पदार्थ में केवल एक ही प्रकार के अणु होते हैं और वे सभी एक समान होते हैं — इसीलिए यह समांगी भी होता है। जैसे नमक के सभी कण एक समान हैं। शुद्ध पदार्थ चाहे तत्व हो या यौगिक, दोनों समांगी होते हैं।
(ङ) चीनी का शर्बत विषमांगी मिश्रण है।
❌ असत्य
व्याख्या: चीनी का शर्बत समांगी मिश्रण है, विषमांगी नहीं। क्योंकि शर्बत में चीनी और पानी पूरी तरह मिले होते हैं और चीनी को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। विषमांगी मिश्रण वह होता है जिसमें अवयव अलग-अलग दिखाई देते हैं जैसे बालू और पानी।
📌 याद रखें: समांगी = अलग-अलग न दिखे (शर्बत, वायु, नमक का पानी)। विषमांगी = अलग-अलग दिखे (बालू+पानी, दूध, खिचड़ी)।
(च) क्रोमैटोग्राफी विधि द्वारा रंग का विभेदन करते हैं।
✅ सत्य
व्याख्या: क्रोमैटोग्राफी (Chromatography) विधि में किसी मिश्रित रंग के अलग-अलग घटकों को पृथक किया जाता है। स्याही में एक नीला रंग दिखाई देता है परंतु चॉक पर क्रोमैटोग्राफी करने पर कई रंगों की पट्टियाँ दिखती हैं क्योंकि वह नीला रंग कई रंगों से मिलकर बना था।
📌 अतिरिक्त जानकारी: क्रोमैटोग्राफी का प्रयोग खाद्य रंगों की जाँच, दवाओं की शुद्धता परखने और रक्त-मूत्र परीक्षण में भी किया जाता है।
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(क) दूसरे अवयव से भारी हो।
✅ उत्तर: तलछटीकरण और निथारना (Sedimentation and Decantation)
व्याख्या: जब मिश्रण का एक घटक दूसरे से भारी हो तो वह तलछटीकरण की प्रक्रिया में नीचे बैठ जाता है। फिर हल्का द्रव ऊपर रहता है जिसे निथारकर (Decantation) अलग कर लिया जाता है। उदाहरण — बालू और पानी का मिश्रण।
📌 याद रखें: भारी + अघुलनशील = तलछटीकरण+निथारना। जैसे — नदी के जल में मिट्टी नीचे बैठ जाना।
(ख) दूसरे अवयव से बड़ा हो।
✅ उत्तर: चालना (Sieving)
व्याख्या: जब एक अवयव का आकार दूसरे से बड़ा हो तो चालना विधि उपयुक्त है। चलनी में उचित आकार के छिद्र रखे जाते हैं — महीन कण नीचे निकल जाते हैं और बड़े कण ऊपर रह जाते हैं। उदाहरण — आटे से चोकर, बालू से कंकड़।
(ग) दूसरे अवयव से आकृति एवं रंग में भिन्न हो।
✅ उत्तर: बीनना (Hand Picking)
व्याख्या: जब अशुद्धि का रंग या आकृति मुख्य पदार्थ से अलग हो तो उसे हाथ से बीन कर पृथक किया जाता है। जैसे — चावल या दाल में से कंकड़-पत्थर बीनना, जो रंग और आकार दोनों में अलग दिखते हैं।
📌 याद रखें: बीनना = जब अशुद्धि की मात्रा कम हो और वह रंग/आकार में भिन्न हो।
(घ) एक पानी में घुलनशील, दूसरा अघुलनशील हो।
✅ उत्तर: छानना (Filtration)
व्याख्या: जब मिश्रण में एक घटक जल में घुलनशील और दूसरा अघुलनशील हो तो छानना विधि अपनाते हैं। छानना-पत्र (Filter Paper) के सूक्ष्म छिद्रों से घुला हुआ पदार्थ द्रव के साथ बाहर निकल जाता है और अघुलनशील ठोस पत्र पर रुक जाता है। उदाहरण — चाय छानना, रस छानना।
(ङ) एक अवयव तैरता हो, दूसरा अवयव डूब गया हो।
✅ उत्तर: निथारना / पृथकारी कीप (Decantation / Separating Funnel)
व्याख्या: जब दो द्रव अमिश्रणीय (आपस में नहीं मिलते) हों और एक दूसरे के ऊपर तैरता हो — जैसे तेल और पानी — तो पृथकारी कीप का उपयोग करते हैं। भारी द्रव (पानी) नीचे की ओर निकाल लिया जाता है और हल्का द्रव (तेल) कीप में बचा रहता है।
📌 याद रखें: दो अमिश्रणीय द्रव = पृथकारी कीप। जैसे — मिट्टी का तेल और पानी, क्रूड ऑयल और पानी।
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उत्तर:
चीनी के शर्बत में लकड़ी के कोयले के टुकड़े मिले हैं — यह एक ऐसा मिश्रण है जिसमें एक घटक (चीनी) जल में घुलनशील और दूसरा (कोयला) अघुलनशील है। इसलिए यहाँ छानना (Filtration) विधि सबसे उपयुक्त है।
🔬 पृथक्करण की विधि — चरण-दर-चरण
चरण 1: एक छानना-पत्र (Filter Paper) लें और उसे तिकोनी आकृति में मोड़कर एक फनल में लगाएँ।
चरण 2: फनल के नीचे एक साफ बीकर रखें।
चरण 3: चीनी के शर्बत को धीरे-धीरे फनल में डालें।
प्रेक्षण: लकड़ी के कोयले के टुकड़े छानना-पत्र पर रुक जाएँगे क्योंकि वे अघुलनशील ठोस हैं। चीनी का मीठा पानी छानना-पत्र के सूक्ष्म छिद्रों से निकलकर नीचे बीकर में इकट्ठा हो जाएगा।
निष्कर्ष: इस प्रकार लकड़ी के कोयले के टुकड़े शर्बत से अलग हो जाएँगे।
वैज्ञानिक आधार: छानना विधि उन मिश्रणों के लिए उपयुक्त है जहाँ एक घटक द्रव में अघुलनशील हो। छिद्र का चयन मिश्रण के कणों के आकार के अनुसार किया जाता है। याद रखें: घुलनशील + अघुलनशील = छानना विधि।
प्रश्न 6 (क): शुद्ध और अशुद्ध पदार्थ में क्या अंतर है?
उत्तर:
| गुण | शुद्ध पदार्थ | अशुद्ध पदार्थ (मिश्रण) |
| कणों का प्रकार | केवल एक ही प्रकार के कण | दो या अधिक प्रकार के कण |
| संघटन | संघटन निश्चित होता है | संघटन निश्चित नहीं होता |
| अवयवों के गुण | अपनी विशेषताएँ एवं गुण | अवयवों के गुण बने रहते हैं |
| प्रकृति | समांग (एक जैसा) होता है | समांग या विषमांग हो सकता है |
| उदाहरण | नमक, शक्कर, सोना, जल | शर्बत, वायु, मिट्टी, दूध |
📌 याद रखें: शुद्ध पदार्थ = तत्व या यौगिक। मिश्रण = दो या अधिक शुद्ध पदार्थ किसी भी अनुपात में मिले हों।
प्रश्न 6 (ख): समांगी और विषमांगी मिश्रण किसे कहते हैं?
उत्तर:
1. समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture)
ऐसे मिश्रण जिनमें दो या दो से अधिक अवयव उपस्थित रहते हैं किन्तु उन्हें अलग-अलग नहीं देखा जा सकता तथा सभी अवयव समान रूप से वितरित होते हैं, समांगी मिश्रण कहलाते हैं। उदाहरण — चीनी का शर्बत, वायु, नमक का पानी।
2. विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture)
ऐसे ठोस अथवा द्रव पदार्थों के मिश्रण, जिनमें उनके अवयवी पदार्थों को सामान्यतः अलग-अलग देखा जा सकता है तथा सभी घटक समान रूप से वितरित नहीं होते, विषमांगी मिश्रण कहलाते हैं। उदाहरण — बालू और लोहे की छीलन, जल और तेल, मिट्टी और पानी।
याद रखने की तरकीब: "सम" = समान = दिखाई न दे। "विषम" = अलग = दिखाई दे।
प्रश्न 6 (ग): दो शुद्ध पदार्थों के नाम बताइये।
उत्तर:
दो शुद्ध पदार्थ — (1) सोना (Gold) (2) जल (Water — H₂O)
व्याख्या: सोना (Gold) एक तत्व है — इसके सभी परमाणु एक ही प्रकार के होते हैं। जल (H₂O) एक यौगिक है — इसमें हाइड्रोजन के दो और ऑक्सीजन का एक परमाणु एक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से जुड़े होते हैं। दोनों शुद्ध पदार्थ के उदाहरण हैं।
📌 अतिरिक्त उदाहरण: अन्य शुद्ध पदार्थ — चाँदी, लोहा, ताँबा (तत्व); नमक (NaCl), शक्कर (C₁₂H₂₂O₁₁) (यौगिक)।
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उत्तर:
क्रोमैटोग्राफी विधि रंगों और मिश्रित पदार्थों के अवयवों को पृथक करने की एक अत्यंत उपयोगी एवं सूक्ष्म विधि है। इसके विविध उपयोग निम्नलिखित हैं —
1. खाद्य पदार्थों में रंगों की जाँच
खाद्य पदार्थों में मिलाए जाने वाले कृत्रिम रंगों की पहचान क्रोमैटोग्राफी से की जाती है। यह पता लगाया जा सकता है कि कोई हानिकारक रंग तो नहीं मिलाया गया।
2. दवाओं की शुद्धता जाँचने में
किसी दवा में उपस्थित विभिन्न रासायनिक घटकों को पृथक करने और उनकी शुद्धता परखने में क्रोमैटोग्राफी का व्यापक उपयोग होता है।
3. रक्त एवं मूत्र परीक्षण में
चिकित्सा के क्षेत्र में रक्त और मूत्र में उपस्थित विभिन्न घटकों — जैसे प्रोटीन, शर्करा, हार्मोन — की जाँच में क्रोमैटोग्राफी प्रयुक्त होती है।
4. पर्यावरण प्रदूषण जाँच में
वायु, जल और मिट्टी में उपस्थित प्रदूषकों की पहचान एवं मात्रा निर्धारण के लिए यह विधि बहुत उपयोगी है।
5. स्याही एवं रंजक परीक्षण में
स्याही में मिले विभिन्न रंगों को पृथक करने में। जैसे — पुस्तक में दी गई क्रियाकलाप 7 में नीली स्याही का विभेदन।
📌 अतिरिक्त जानकारी: क्रोमैटोग्राफी शब्द ग्रीक भाषा के "chroma" (रंग) और "graphein" (लिखना) से बना है। इसे सर्वप्रथम 1900 में रूसी वैज्ञानिक मिखाइल त्स्वेट ने पौधों के रंग (क्लोरोफिल) अलग करने में प्रयोग किया था।
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📊 पृथक्करण विधियों का सारांश:
| विधि | मिश्रण का प्रकार | आधार | उदाहरण |
| फटकना/ओसाना | ठोस + ठोस | भार में अंतर | गेहूँ से भूसा |
| थ्रेशिंग | ठोस + ठोस | पौधे से अनाज अलग | धान, अरहर |
| बीनना | ठोस + ठोस | आकृति/रंग/आकार | दाल-चावल से कंकड़ |
| चालना | ठोस + ठोस | कण का आकार | आटे से चोकर, बालू से पत्थर |
| ऊर्ध्वपातन | ठोस + ठोस | ऊर्ध्वपातन गुण | कपूर+नमक, नैफ्थेलीन |
| चुम्बकीय पृथक्करण | ठोस + ठोस | चुम्बकीय गुण | लोहे की छीलन+बालू |
| तलछटीकरण+निथारना | अघुलनशील ठोस + द्रव | घनत्व | बालू+पानी |
| छानना | अघुलनशील ठोस + द्रव | कण का आकार | चाय छानना, रस छानना |
| अपकेन्द्रण | द्रव + द्रव / हल्के कण | घनत्व | दूध से मक्खन |
| वाष्पन | घुलनशील ठोस + द्रव | वाष्पशीलता | नमक+पानी |
| आसवन | द्रव + घुलनशील पदार्थ | वाष्पन+संघनन | समुद्र जल से शुद्ध जल |
| क्रिस्टलीकरण | घुलनशील ठोस + द्रव | विलेयता में अंतर | फिटकरी के क्रिस्टल |
| पृथकारी कीप | अमिश्रणीय द्रव + द्रव | घनत्व में अंतर | तेल+पानी |
| क्रोमैटोग्राफी | मिश्रित रंग | अवशोषण | स्याही के रंग |
📊 तत्व, यौगिक और मिश्रण में अंतर:
| गुण | तत्व | यौगिक | मिश्रण |
| परमाणु | एक ही प्रकार के | दो या अधिक प्रकार के | — |
| संघटन | निश्चित | निश्चित | अनिश्चित |
| घटकों के गुण | सभी कणों में समान | अवयवी तत्वों से भिन्न | अवयवों के गुण बने रहते हैं |
| उदाहरण | लोहा, सोना, ऑक्सीजन | जल (H₂O), नमक (NaCl) | वायु, शर्बत, दूध |
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Q1. मिश्रण की परिभाषा क्या है?
मिश्रण वे पदार्थ हैं, जिनमें दो या दो से अधिक पदार्थ किसी भी अनुपात में मिले होते हैं। मिश्रण में मिश्रित अवयवों के सभी गुण पाए जाते हैं और उन्हें पृथक्करण की उचित विधि द्वारा अलग किया जा सकता है।
Q2. तत्व और यौगिक में मुख्य अंतर क्या है?
तत्व के अणु में केवल एक ही प्रकार के परमाणु होते हैं जैसे लोहा, ताँबा, ऑक्सीजन। यौगिक के अणु दो या दो से अधिक विभिन्न प्रकार के परमाणुओं से बने होते हैं और यौगिक के गुण उसके अवयवी तत्वों से सर्वथा भिन्न होते हैं — जैसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन दोनों गैस हैं किन्तु उनसे बना जल द्रव है।
Q3. ऊर्ध्वपातन क्या है? कौन-कौन से पदार्थ ऊर्ध्वपातित होते हैं?
वह प्रक्रिया जिसमें कोई ठोस पदार्थ गर्म करने पर बिना द्रवित हुए सीधे वाष्प में बदल जाता है और ठंडा होने पर सीधे ठोस पदार्थ में बदल जाता है, ऊर्ध्वपातन कहलाती है। ऊर्ध्वपातित होने वाले पदार्थ — कपूर, नैफ्थेलीन, आयोडीन, नौसादर।
Q4. आसवन और वाष्पन में क्या अंतर है?
वाष्पन में केवल द्रव वाष्प बनकर उड़ जाता है और ठोस पदार्थ बचा रहता है — जैसे नमक प्राप्त करना। आसवन में वाष्प को ठंडा करके शुद्ध द्रव प्राप्त किया जाता है (वाष्पन + संघनन दोनों होते हैं) — जैसे शुद्ध जल प्राप्त करना। वाष्पन में द्रव का संग्रह नहीं होता, आसवन में होता है।
Q5. समुद्री जल से नमक कैसे प्राप्त करते हैं?
समुद्री जल को बड़े-बड़े खुले क्षेत्रों (साल्ट पैन) में फैलाया जाता है। धूप और हवा के कारण वाष्पन विधि से जल धीरे-धीरे वाष्प बनकर उड़ जाता है और नमक पीछे रह जाता है। यह प्राकृतिक वाष्पन की प्रक्रिया है जो गर्मियों में तेज़ होती है।
Q6. छानना और निथारना में क्या अंतर है?
निथारना में भारी ठोस नीचे बैठने के बाद ऊपर का साफ द्रव झुकाकर अलग किया जाता है — यह तब होता है जब कण बड़े हों। छानना में छानना-पत्र से सूक्ष्म अघुलनशील कणों को द्रव से अलग किया जाता है — यह तब होता है जब कण बहुत छोटे हों और निथारने से अलग न हो पाएँ।
Q7. दूध एक मिश्रण है या शुद्ध पदार्थ?
दूध एक विषमांगी मिश्रण है। इसमें जल, वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन मिले होते हैं। सूक्ष्मदर्शी से देखने पर दूध में वसा की बूँदें अलग दिखाई देती हैं। इसीलिए अपकेन्द्रण विधि से दूध में से मक्खन (क्रीम) अलग किया जा सकता है।
Q8. पृथक्करण क्यों आवश्यक है?
शुद्धता जीवन की आवश्यकता है। पृथक्करण इसलिए आवश्यक है क्योंकि हमें हानिकारक और अनुपयोगी अशुद्धियाँ दूर करनी होती हैं, उपयोगी अवयव अलग करने होते हैं और शुद्ध पदार्थ प्राप्त करने होते हैं। जैसे — पीने के पानी से मिट्टी हटाना, दवाओं की शुद्धता, खाद्य पदार्थों की सफाई।
निष्कर्ष:
इस प्रकार UP Board Class 6 Science इकाई 3 — पदार्थों का पृथक्करण के सम्पूर्ण समाधान में हमने जाना कि मिश्रण वे पदार्थ हैं जिनमें दो या अधिक पदार्थ किसी भी अनुपात में मिले होते हैं। शुद्ध पदार्थ तत्व या यौगिक होते हैं जिनमें एक ही प्रकार के कण होते हैं। मिश्रणों को उनके अवयवों की विशेषताओं — जैसे भार, आकार, चुम्बकत्व, घुलनशीलता, वाष्पशीलता — के आधार पर विभिन्न विधियों द्वारा पृथक किया जाता है। क्रोमैटोग्राफी रंगों के पृथक्करण की आधुनिक विधि है जिसका उपयोग चिकित्सा से लेकर खाद्य परीक्षण तक में होता है।
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